रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये पर पहुंचा: राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दिल्ली में कहा कि भारत का रक्षा निर्यात 2013-14 के 686 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये हो गया है।

चर्चा में क्यों
27 सितंबर 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में रक्षा कॉन्क्लेव को संबोधित किया, कहा कि खतरा होने पर भारत अपनी सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता की रक्षा करेगा, 2025-26 के लिए 38,424 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड रक्षा निर्यात आंकड़ा दिया और डीआरडीओ की मिसाइल तकनीकें उद्योग को सौंपने की घोषणा की।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 27 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में एक रक्षा कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कहा कि भारत किसी देश का भूभाग नहीं चाहता, लेकिन जब भी उसकी सुरक्षा या रणनीतिक स्वायत्तता पर खतरा आएगा, वह उसकी रक्षा करेगा। उन्होंने चेताया कि शांति को कमजोरी समझने की भूल नहीं होनी चाहिए, और जो देश आतंकवाद को नीति का औजार बनाता है या आतंकियों को पनाह देता है, उससे बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है। यह कहते हुए उन्होंने हाल की एससीओ बैठक में प्रधानमंत्री की टिप्पणी का उल्लेख किया।
निर्यात और रक्षा बजट
रक्षा मंत्री ने खरीदार से आपूर्तिकर्ता बनने की यात्रा के आंकड़े रखे। रक्षा निर्यात 2013-14 के 686 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये हो गया और इसकी पहुंच 100 से अधिक देशों तक है। पिछले वर्ष 30,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य पूरा करने के बाद सरकार ने अब 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये का नया लक्ष्य तय किया है। रक्षा आवंटन 2026-27 में 7.85 लाख करोड़ रुपये है, जबकि 2013-14 में यह करीब 2.53 लाख करोड़ रुपये था। पूंजीगत खरीद बजट का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा, यानी 1.39 लाख करोड़ रुपये, भारतीय उद्योग से खरीद के लिए रखा गया है, जिससे एमएसएमई आपूर्ति श्रृंखलाओं को भी बल मिलता है।
स्वदेशीकरण के आंकड़े
सशस्त्र बलों की पांच सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों में अब 509 उपकरण, हथियार प्रणालियां और प्लेटफॉर्म शामिल हैं। रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों ने अपनी छह सूचियां जारी की हैं, जिनमें 5,417 वस्तुएं हैं, जिनमें लाइन रिप्लेसेबल यूनिट, उप-प्रणालियां, कलपुर्जे और घटक आते हैं, और इनमें से करीब 3,300 का स्वदेशीकरण हो चुका है। सृजन पोर्टल के जरिये लगभग 33,000 आयातित वस्तुएं प्रतिस्थापन के लिए चिह्नित की गईं, जिनमें से करीब 15,700 की जगह स्वदेशी विकल्प आ गए, जबकि सृजन दीप ने 40,000 से अधिक निर्माताओं और विक्रेताओं का राष्ट्रीय डिजिटल डेटाबेस तैयार किया है। सभी 16 रक्षा सार्वजनिक उपक्रम अब घाटे से बाहर हैं। इस तंत्र में निजी उद्योग, स्टार्टअप, विश्वविद्यालय और 16,000 से अधिक एमएसएमई शामिल हैं। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर को करीब 70,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनमें से लगभग 10,000 करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है।
स्टार्टअप और मिसाइल पर फैसला
मार्च 2026 तक आईडेक्स और आईडेक्स-प्राइम के जरिये 676 स्टार्टअप और नवप्रवर्तक जोड़े गए तथा 551 अनुबंध हुए, जबकि अदिति कार्यक्रम उन्नत तकनीकों को सहारा दे रहा है। स्टार्टअप और एमएसएमई से 2,400 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद तथा 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाएं मंजूर हुई हैं। कॉन्क्लेव की मुख्य घोषणा यह रही कि पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की डीआरडीओ विकसित तकनीकें पात्र भारतीय कंपनियों को सौंपी जाएंगी, ताकि योग्य निजी कंपनियां उत्पादन संभाल सकें, सेनाओं को मिसाइलें समय पर मिलें और डीआरडीओ शोध पर ध्यान दे सके।
व्यापक संदेश
भारत को सभ्यतागत शक्ति बताते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि इसका उत्थान समावेशी विकास पर टिका है। उन्होंने तीन आधार गिनाए, लोकतांत्रिक और सभ्यतागत परंपरा, वसुधैव कुटुम्बकम का भाव तथा सबका साथ, सबका विकास की सोच, और सम्मान, संवाद, समृद्धि, सुरक्षा एवं संस्कृति के पांच रणनीतिक स्तंभ। ग्लोबल साउथ के संदर्भ में उन्होंने भारत को विश्व बंधु कहा और वैक्सीन मैत्री के तहत 100 से अधिक देशों को दी गई 30 करोड़ कोविड-19 टीका खुराकों तथा वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलनों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि युद्ध अब साइबर, अंतरिक्ष, इलेक्ट्रॉनिक और सूचना क्षेत्रों तक फैल गया है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, क्वांटम तकनीक और हाइपरसोनिक प्रणालियां भी जुड़ी हैं, और देश की सुरक्षा केवल सशस्त्र बलों की नहीं, हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| अवसर | रक्षा कॉन्क्लेव, नई दिल्ली, 27 सितंबर 2026 |
|---|---|
| वक्ता | रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह |
| रक्षा निर्यात 2025-26 | 38,424 करोड़ रुपये (रिकॉर्ड), 2013-14 में 686 करोड़ रुपये |
| नया निर्यात लक्ष्य | 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये |
| रक्षा आवंटन 2026-27 | 7.85 लाख करोड़ रुपये |
| घरेलू पूंजीगत खरीद | पूंजीगत खरीद बजट का लगभग 75 प्रतिशत, 1.39 लाख करोड़ रुपये |
| स्वदेशीकरण सूचियां | सशस्त्र बलों की पांच सूचियों में 509 वस्तुएं; छह डीपीएसयू सूचियों में 5,417 वस्तुएं |
| सृजन पोर्टल | करीब 33,000 वस्तुएं चिह्नित, लगभग 15,700 का स्वदेशीकरण |
| रक्षा कॉरिडोर | उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु; करीब 70,000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव, लगभग 10,000 करोड़ रुपये निवेश |
| आईडेक्स (मार्च 2026 तक) | 676 स्टार्टअप और नवप्रवर्तक जुड़े, 551 अनुबंध |
| मुख्य घोषणा | पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की डीआरडीओ तकनीकें पात्र भारतीय उद्योगों को दी जाएंगी |
परीक्षा की दृष्टि से
निर्यात के आंकड़े (2013-14 में 686 करोड़ रुपये से 2025-26 में 38,424 करोड़ रुपये), 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये का नया लक्ष्य, 2026-27 का 7.85 लाख करोड़ रुपये का रक्षा आवंटन, पांच सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों की 509 वस्तुएं, छह डीपीएसयू सूचियों की 5,417 वस्तुएं, आईडेक्स के 676 स्टार्टअप और 551 अनुबंध तथा डीआरडीओ मिसाइल तकनीक हस्तांतरण का फैसला याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात कितने मूल्य का रहा?
- A.21,083 करोड़ रुपये
- B.30,000 करोड़ रुपये
- C.38,424 करोड़ रुपये
- D.50,000 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 38,424 करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर 38,424 करोड़ रुपये है, जो 2025-26 में भारतीय रक्षा निर्यात का रिकॉर्ड आंकड़ा है और 2013-14 के 686 करोड़ रुपये से बहुत बड़ी छलांग है। आपूर्ति 100 से अधिक देशों तक गई, इसीलिए रक्षा मंत्री ने कहा कि देश आयातक से भरोसेमंद वैश्विक आपूर्तिकर्ता बन रहा है। विकल्प B यानी 30,000 करोड़ रुपये पिछले वर्ष तय और हासिल किया गया निर्यात लक्ष्य है, इसलिए यह असली आंकड़ा तो है पर 2025-26 का वास्तविक निर्यात मूल्य नहीं। विकल्प D यानी 50,000 करोड़ रुपये 2029 के लिए रखा गया नया लक्ष्य है, जो भविष्य की बात है। विकल्प A यानी 21,083 करोड़ रुपये गढ़ा हुआ आंकड़ा है। तीनों अंक एक साथ याद रखें, पूरा हुआ लक्ष्य, रिकॉर्ड मूल्य और अगला लक्ष्य।
भारत ने 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य किस वर्ष तक रखा है?
- A.2027
- B.2029
- C.2030
- D.2035
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 2029
व्याख्या
सही उत्तर 2029 है। सालाना रक्षा निर्यात का 30,000 करोड़ रुपये का पिछला लक्ष्य बीते वर्ष पूरा हो जाने के बाद सरकार ने 50,000 करोड़ रुपये का ऊंचा लक्ष्य तय किया, जिसे 2029 तक हासिल करना है। बाकी विकल्प ऐसे वर्ष हैं जो सुनने में सही लगते हैं पर उनसे कोई ऐसी प्रतिबद्धता नहीं जुड़ी। विकल्प A यानी 2027 वह वित्त वर्ष है जिसमें 7.85 लाख करोड़ रुपये का रक्षा आवंटन रखा गया है, इसलिए इसे निर्यात की समय सीमा समझ लेने की भूल आसानी से हो जाती है। विकल्प C और विकल्प D यानी 2030 और 2035 अक्सर अन्य राष्ट्रीय मिशनों से जुड़े गोल वर्ष हैं और यहां गलत हैं। यह लक्ष्य पहुंच में माना जा रहा है क्योंकि भारतीय मिसाइलों, रडार, गोला-बारूद और प्लेटफॉर्म की विदेशी मांग बढ़ रही है।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत का रक्षा आवंटन कितना है?
- A.2.53 लाख करोड़ रुपये
- B.5.94 लाख करोड़ रुपये
- C.6.81 लाख करोड़ रुपये
- D.7.85 लाख करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 7.85 लाख करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर 7.85 लाख करोड़ रुपये है, जो 2026-27 का रक्षा आवंटन है। रक्षा मंत्री ने जो तुलना रखी, वही याद रखने लायक है, क्योंकि यही आवंटन 2013-14 में करीब 2.53 लाख करोड़ रुपये था। इससे विकल्प A असली आंकड़ा तो बनता है पर गलत वर्ष का, और इसीलिए वह सबसे आकर्षक भ्रम है। विकल्प B और विकल्प C में दिए 5.94 लाख करोड़ रुपये और 6.81 लाख करोड़ रुपये गढ़े हुए अंक हैं। इस उत्तर के साथ एक और आंकड़ा जुड़ा है। पूंजीगत खरीद बजट का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा, जो 1.39 लाख करोड़ रुपये बैठता है, भारतीय रक्षा उद्योग से खरीद के लिए रखा गया है, जिससे यह खर्च विदेश जाने के बजाय घरेलू निर्माण और उससे जुड़ी एमएसएमई आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करता है।
नई दिल्ली के रक्षा कॉन्क्लेव में मिसाइल प्रणालियों के बारे में क्या घोषणा हुई?
- A.डीआरडीओ विकसित पारंपरिक मिसाइल तकनीकें उत्पादन के लिए पात्र भारतीय उद्योगों को दी जाएंगी
- B.सारा मिसाइल उत्पादन डीआरडीओ के अधीन आयुध कारखानों में ले जाया जाएगा
- C.घरेलू क्षमता बनने तक पारंपरिक मिसाइलें आयात की जाएंगी
- D.सुरक्षा कारणों से निजी कंपनियों को मिसाइल निर्माण से रोका जाएगा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. डीआरडीओ विकसित पारंपरिक मिसाइल तकनीकें उत्पादन के लिए पात्र भारतीय उद्योगों को दी जाएंगी
व्याख्या
सही उत्तर विकल्प A है। घोषणा यह थी कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की तकनीकें पात्र भारतीय उद्योगों को सौंपी जाएंगी, जिससे योग्य निजी कंपनियां उनका निर्माण कर सकें। इसका दोहरा उद्देश्य है, सशस्त्र बलों को मिसाइलें समय पर मिलें और डीआरडीओ शोध एवं विकास पर ध्यान केंद्रित कर सके, जबकि उत्पादन का भार उद्योग उठाए। विकल्प B मंशा को उलट देता है, क्योंकि इस कदम से उत्पादन सरकारी प्रतिष्ठानों में सिमटने के बजाय उद्योग की ओर जाता है। विकल्प C पूरे संबोधन की दिशा के विपरीत है, जिसका जोर आत्मनिर्भरता और आयातक से निर्यातक बनने पर था। विकल्प D घोषणा का उल्टा है, क्योंकि निजी भागीदारी बढ़ाई जा रही है, घटाई नहीं जा रही, और इस तंत्र में स्टार्टअप तथा 16,000 से अधिक एमएसएमई पहले से शामिल हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात कितना रहा?
रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये, जो 2013-14 में 686 करोड़ रुपये था, और आपूर्ति 100 से अधिक देशों तक गई। भारत ने पिछले वर्ष 30,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य पूरा किया और अब 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है।
वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा आवंटन कितना है?
7.85 लाख करोड़ रुपये, जबकि 2013-14 में यह करीब 2.53 लाख करोड़ रुपये था। पूंजीगत खरीद बजट का लगभग 75 प्रतिशत, यानी 1.39 लाख करोड़ रुपये, भारतीय रक्षा उद्योग से खरीद के लिए निर्धारित है।
रक्षा कॉन्क्लेव में मिसाइलों पर क्या फैसला घोषित हुआ?
डीआरडीओ द्वारा विकसित पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की तकनीकें पात्र भारतीय उद्योगों को हस्तांतरित की जाएंगी, जिससे योग्य निजी कंपनियां उनका निर्माण कर सकेंगी। डीआरडीओ शोध और विकास पर अधिक ध्यान देगा और उत्पादन उद्योग संभालेगा।
स्रोत
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