केंद्र का राज्यों को निर्देश: इलाज की दरें प्रमुखता से दिखाएं
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने 12 अक्टूबर 2026 को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र लिखकर 2010 के अधिनियम के तहत सेवा दरें प्रदर्शित कराने को कहा।

चर्चा में क्यों
12 अक्टूबर 2026 को दी गई जानकारी के अनुसार केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर कहा कि चिकित्सा प्रतिष्ठान अपनी सेवाओं तथा सुविधाओं के शुल्क प्रमुखता से प्रदर्शित करें।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कहा है कि वे सुनिश्चित करें कि चिकित्सा प्रतिष्ठान अपनी सेवाओं और सुविधाओं के लिए लिए जाने वाले शुल्क वहां प्रदर्शित करें जहां मरीज उन्हें वास्तव में देख सकें। 12 अक्टूबर 2026 को दी गई जानकारी के अनुसार केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर कहा है कि मौजूदा नियमों के अनुपालन की समीक्षा करें और ऐसे कदम उठाएं जिससे शुल्क की जानकारी स्पष्ट दिखे तथा आसानी से उपलब्ध हो।
कानूनी आधार
यह पत्र चिकित्सा प्रतिष्ठान (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010 तथा चिकित्सा प्रतिष्ठान (केंद्र सरकार) नियम, 2012 पर आधारित है। नियमों के अनुसार, जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में यह अधिनियम लागू है, वहां चिकित्सा प्रतिष्ठान को अपनी हर प्रकार की सेवा और उपलब्ध सुविधा के लिए ली जाने वाली दर किसी प्रमुख स्थान पर स्थानीय भाषा के साथ-साथ अंग्रेजी में भी प्रदर्शित करनी होती है, जिससे मरीजों और उनके साथ आए लोगों को लाभ मिले। जहां अधिनियम लागू नहीं है, वहां प्रतिष्ठान राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के अपने ढांचे से नियंत्रित होते हैं और उनमें से कई में भी दरें प्रदर्शित करने का प्रावधान है।
मरीजों को क्या लाभ
- मरीज और उनके परिजन इलाज शुरू होने से पहले संभावित खर्च का अनुमान लगा सकेंगे।
- वे पूरी जानकारी के साथ निर्णय ले सकेंगे और चिकित्सा खर्च की योजना बना सकेंगे।
- बिल से जुड़ी अनावश्यक उलझन और विवाद कम होंगे।
- स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होगा।
अनुपालन की जिम्मेदारी
पत्र में यह स्वीकार किया गया है कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है और नियमों को लागू करने तथा उनका पालन कराने की जिम्मेदारी संबंधित राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों की है। इसलिए स्वास्थ्य सचिव ने मुख्य सचिवों से कहा है कि वे संबंधित प्राधिकरणों के माध्यम से अनुपालन सुनिश्चित करें, प्राधिकरणों तथा चिकित्सा प्रतिष्ठानों को आवश्यक परामर्श जारी करें और यह देखें कि दरें ऐसे प्रमुख, स्पष्ट दिखने वाले और सुगम स्थानों पर लगाई जाएं जो लागू विनियमों के अनुरूप हों।
चिकित्सा पर्यटन पर जोर
पत्र में विदेश से आने वाले मरीजों के लिए मूल्य पारदर्शिता पर विशेष बल दिया गया है। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कहा गया है कि जहां लागू हो, वहां चिकित्सा अथवा आयुष वीजा पर भारत आने वाले विदेशी मरीजों को दी जाने वाली पैकेज दरें प्रमुखता से प्रदर्शित करने के लिए प्रोत्साहित करें। मंत्रालय का मानना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय मरीज पूरी जानकारी के साथ चुनाव कर सकेंगे, मूल्य और बिल से जुड़ी शिकायतें घटेंगी तथा चिकित्सा व आयुष देखभाल के भरोसेमंद गंतव्य के रूप में भारत की स्थिति मजबूत होगी। स्वास्थ्य सचिव ने इस विषय पर मुख्य सचिवों का व्यक्तिगत ध्यान चाहा है और इसे स्वास्थ्य सेवा को पारदर्शी, जवाबदेह तथा मरीज केंद्रित बनाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा बताया है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| निर्देश | केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय |
|---|---|
| पत्र लिखा | केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव |
| किसे भेजा | सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को |
| संबंधित अधिनियम | चिकित्सा प्रतिष्ठान (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010 |
| संबंधित नियम | चिकित्सा प्रतिष्ठान (केंद्र सरकार) नियम, 2012 |
| प्रदर्शन की शर्त | हर सेवा व सुविधा की दर, प्रमुख स्थान पर, स्थानीय भाषा और अंग्रेजी में |
| अनुपालन | राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के पास, क्योंकि स्वास्थ्य राज्य का विषय है |
| विदेशी मरीज | चिकित्सा या आयुष वीजा वालों की पैकेज दरें प्रदर्शित करने का आग्रह |
| जानकारी की तिथि | 12 अक्टूबर 2026 |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें: अधिनियम (चिकित्सा प्रतिष्ठान (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010) और नियम (चिकित्सा प्रतिष्ठान (केंद्र सरकार) नियम, 2012), दरें प्रमुख स्थान पर स्थानीय भाषा तथा अंग्रेजी में प्रदर्शित करने की शर्त, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव का नाम, स्वास्थ्य के राज्य का विषय होने का तथ्य और चिकित्सा तथा आयुष वीजा वाले मरीजों की पैकेज दरों का विस्तार।
अभ्यास प्रश्न
इलाज की दरें प्रदर्शित करने का यह निर्देश किस अधिनियम पर आधारित है?
- A.चिकित्सा प्रतिष्ठान (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010
- B.राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019
- C.उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019
- D.औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर चिकित्सा प्रतिष्ठान (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010 है, जिसे चिकित्सा प्रतिष्ठान (केंद्र सरकार) नियम, 2012 के साथ पढ़ा जाता है। ये दोनों मिलकर चिकित्सा प्रतिष्ठानों के लिए विनियामक ढांचा बनाते हैं और नियमों के अनुसार हर प्रकार की सेवा तथा हर सुविधा के लिए ली जाने वाली दर प्रमुख स्थान पर स्थानीय भाषा के साथ अंग्रेजी में भी प्रदर्शित करनी होती है। विकल्प B चिकित्सा शिक्षा और चिकित्सकों के पंजीकरण से जुड़ा है, अस्पताल के शुल्क प्रदर्शित करने से नहीं। विकल्प C सामान्य रूप से उपभोक्ता अधिकारों और शिकायत निवारण से संबंधित है और स्वास्थ्य सचिव का पत्र उस पर आधारित नहीं है। विकल्प D दवाओं तथा प्रसाधन सामग्री के निर्माण, बिक्री और गुणवत्ता को नियंत्रित करता है। दरें प्रदर्शित करने का दायित्व केवल 2010 के अधिनियम और उसके नियमों में है।
नियमों के अनुसार चिकित्सा प्रतिष्ठानों को अपनी सेवा दरें किन भाषाओं में प्रदर्शित करनी होती हैं?
- A.केवल अंग्रेजी में
- B.केवल हिंदी और अंग्रेजी में
- C.स्थानीय भाषा के साथ-साथ अंग्रेजी में
- D.आठवीं अनुसूची की किसी एक भाषा में
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर स्थानीय भाषा के साथ-साथ अंग्रेजी में है। नियमों के अनुसार चिकित्सा प्रतिष्ठान को अपनी दरें प्रमुख स्थान पर दोनों भाषाओं में लगानी होती हैं, जिससे मरीज और उनके साथ आए लोग शुल्क पूछे बिना पढ़ सकें। विकल्प A से वे लोग छूट जाएंगे जो अंग्रेजी नहीं पढ़ पाते, और इससे इस प्रावधान का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि शर्त स्थानीय भाषा की है, जो हिंदी होना आवश्यक नहीं और राज्य के अनुसार बदलती है। विकल्प D में दी गई कसौटी नियमों में नहीं है; नियम भाषा का चुनाव प्रतिष्ठान पर नहीं छोड़ते। दो भाषाओं की शर्त का उद्देश्य यही है कि मरीज इलाज के संभावित खर्च का अनुमान लगा सकें, खर्च की योजना बना सकें और बिल से जुड़े विवाद से बच सकें।
सामान्य मरीजों के अलावा किन मरीजों की पैकेज दरें प्रमुखता से प्रदर्शित करने का आग्रह राज्यों से किया गया है?
- A.सरकारी बीमा योजनाओं के लाभार्थी मरीज
- B.चिकित्सा और आयुष वीजा पर आने वाले विदेशी मरीज
- C.जिला अस्पतालों से भेजे गए मरीज
- D.गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती मरीज
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर चिकित्सा और आयुष वीजा पर आने वाले विदेशी मरीज हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव के पत्र में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कहा गया है कि जहां लागू हो, वहां इन वीजा पर भारत आने वाले अंतरराष्ट्रीय मरीजों को दी जाने वाली पैकेज दरें प्रमुखता से प्रदर्शित करने के लिए प्रोत्साहित करें। तर्क यह है कि स्पष्ट मूल्य जानकारी से ऐसे मरीज पूरी जानकारी के साथ चुनाव कर सकेंगे, मूल्य और बिल से जुड़ी शिकायतें घटेंगी तथा चिकित्सा व आयुष देखभाल के भरोसेमंद गंतव्य के रूप में भारत की स्थिति मजबूत होगी। विकल्प A, C और D में बताए मरीजों को भी पारदर्शी दरों से लाभ होगा, पर पैकेज दरें प्रदर्शित करने के संदर्भ में पत्र में इन वर्गों का विशेष उल्लेख नहीं है। व्यापक निर्देश यही है कि हर प्रतिष्ठान अपनी दरें वहां दिखाए जहां मरीज उन्हें आसानी से देख सकें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चिकित्सा प्रतिष्ठानों को दरें प्रदर्शित करने के लिए कौन सा कानून बाध्य करता है?
चिकित्सा प्रतिष्ठान (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010, जिसे चिकित्सा प्रतिष्ठान (केंद्र सरकार) नियम, 2012 के साथ पढ़ा जाता है। इनके तहत हर सेवा और सुविधा की दर प्रमुख स्थान पर दिखानी होती है।
दरें किन भाषाओं में प्रदर्शित करनी होती हैं?
स्थानीय भाषा के साथ-साथ अंग्रेजी में भी, जिससे मरीज और उनके साथ आए लोग उन्हें पढ़ सकें।
इस शर्त का पालन कराने की जिम्मेदारी किसकी है?
राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की, क्योंकि स्वास्थ्य राज्य का विषय है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने मुख्य सचिवों से संबंधित प्राधिकरणों के माध्यम से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है।
विदेशी मरीजों के बारे में क्या कहा गया है?
राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कहा गया है कि चिकित्सा या आयुष वीजा पर भारत आने वाले विदेशी मरीजों को दी जाने वाली पैकेज दरें प्रमुखता से प्रदर्शित करने के लिए प्रोत्साहित करें।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2322150 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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