सीएक्यूएम दल ने फिरोजपुर और फरीदकोट में पराली प्रबंधन देखा
डॉ. टी. एस. पंवार के नेतृत्व में सीएक्यूएम दल ने पंजाब के फिरोजपुर और फरीदकोट में पराली प्रबंधन की समीक्षा की तथा हॉटस्पॉट गांवों का दौरा किया।

चर्चा में क्यों
17 अक्टूबर 2026 को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने बताया कि डॉ. टी. एस. पंवार के नेतृत्व में उच्चस्तरीय दल ने पंजाब के फिरोजपुर और फरीदकोट जिलों में पराली प्रबंधन की समीक्षा की और वहां हॉटस्पॉट गांवों का दौरा किया।
एनसीआर एवं समीपवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) का एक उच्चस्तरीय दल पंजाब के फिरोजपुर और फरीदकोट जिलों में पहुंचा, ताकि कटाई के इस मौसम में पराली जलाने से रोकने वाले उपायों की जमीनी स्थिति देखी जा सके। दल का नेतृत्व आयोग के सदस्य (तकनीकी) डॉ. टी. एस. पंवार ने किया। इससे पहले यही दल मोगा जिले का दौरा कर चुका था।
समीक्षा बैठक
फिरोजपुर में उपायुक्त कार्यालय में दोनों जिलों के उपायुक्तों और संबंधित जिला अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक हुई। दल ने जिला प्रशासन की तैयारी तथा पराली के स्थल पर और स्थल से बाहर प्रबंधन के लिए विभागों के आपसी तालमेल की समीक्षा की। फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनों की उपलब्धता और तैनाती, खेतों में निगरानी, हॉटस्पॉट क्षेत्रों पर नजर तथा प्रवर्तन कार्रवाई पर भी चर्चा हुई।
आयोग ने क्या कहा
- पराली के स्थल पर और स्थल से बाहर प्रबंधन दोनों को मजबूत किया जाए।
- सीआरएम मशीनें किसानों तक समय पर पहुंचें और उनका पूरा उपयोग हो।
- किसानों, एग्रीगेटरों, उद्योगों और अन्य हितधारकों के बीच तालमेल बढ़े।
- ड्रोन और कम लागत वाले सेंसर से तकनीक आधारित निगरानी तथा प्रवृत्ति विश्लेषण किया जाए।
- किसानों को पराली जलाने और महीन कणों से होने वाले नुकसान के बारे में साफ-साफ बताया जाए।
हॉटस्पॉट गांवों का दौरा
बैठक के बाद दल दोनों जिलों के चुने हुए हॉटस्पॉट गांवों में गया और देखा कि घोषित कदम वास्तव में अमल में आ रहे हैं या नहीं। हॉटस्पॉट गांव वे हैं जहां से बार-बार बड़ी संख्या में खेत में आग लगने की घटनाएं दर्ज होती हैं, इसलिए उन पर अधिक ध्यान दिया जाता है।
महत्व क्यों
कटाई के बाद पराली जलाना उन कारणों में है जिनसे हर शरद ऋतु में राजधानी क्षेत्र का प्रदूषण बढ़ जाता है। स्थल पर प्रबंधन का अर्थ है मशीनों से पराली को खेत की मिट्टी में ही मिला देना, जबकि स्थल से बाहर प्रबंधन में उसे उठाकर ईंधन या कच्चे माल के रूप में काम में लाया जाता है। आयोग राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास की वायु गुणवत्ता के लिए बनी वैधानिक संस्था है और पंजाब के हॉटस्पॉट जिलों के ये दौरे आग रोकने की निरंतर कवायद का हिस्सा हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| संस्था | एनसीआर एवं समीपवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) |
|---|---|
| दल का नेतृत्व | डॉ. टी. एस. पंवार, सदस्य (तकनीकी), सीएक्यूएम |
| दौरे के जिले | फिरोजपुर और फरीदकोट, पंजाब |
| पिछला दौरा | मोगा जिला, पंजाब |
| बैठक स्थल | उपायुक्त कार्यालय, फिरोजपुर |
| मशीनें | फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनें |
| निगरानी तकनीक | ड्रोन और कम लागत वाले सेंसर |
| उल्लिखित प्रदूषक | महीन कण (पीएम 2.5) |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें: संस्था (एनसीआर एवं समीपवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग), दल के प्रमुख (डॉ. टी. एस. पंवार, सदस्य तकनीकी), दौरे के जिले (फिरोजपुर और फरीदकोट, इससे पहले मोगा), मशीनें (फसल अवशेष प्रबंधन या सीआरएम), तकनीक (ड्रोन और कम लागत वाले सेंसर) तथा स्थल पर व स्थल से बाहर प्रबंधन का अंतर।
अभ्यास प्रश्न
फिरोजपुर और फरीदकोट में पराली प्रबंधन की समीक्षा करने वाले सीएक्यूएम दल का नेतृत्व किसने किया?
- A.डॉ. टी. एस. पंवार, सदस्य (तकनीकी)
- B.सीएक्यूएम के अध्यक्ष
- C.मोगा के उपायुक्त
- D.पंजाब के मुख्य सचिव
उत्तर देखें
उन्हीं की अगुवाई में उच्चस्तरीय दल पंजाब के इन दो जिलों में गया और देखा कि कटाई के मौसम में पराली जलाने से रोकने के उपाय किस तरह लागू हो रहे हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →समीक्षा में चर्चा में आई सीआरएम मशीनों का पूरा नाम क्या है?
- A.फसल चक्र प्रबंधन मशीनें
- B.फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें
- C.जलवायु जोखिम न्यूनीकरण मशीनें
- D.केंद्रीय ग्रामीण मशीनीकरण उपकरण
उत्तर देखें
ये वही मशीनें हैं जो कटाई के बाद खेत में बची पराली को संभालती हैं, और आयोग ने दोनों जिलों में इनकी उपलब्धता तथा वास्तविक तैनाती दोनों की समीक्षा की।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सीएक्यूएम की समीक्षा में पराली जलाने की निगरानी के लिए किन दो तकनीकों पर बल दिया गया?
- A.उपग्रह और भूमि रडार
- B.ड्रोन और कम लागत वाले सेंसर
- C.मौसम गुब्बारे और लिडार
- D.चल प्रयोगशालाएं और स्मॉग टावर
उत्तर देखें
समीक्षा में इनकी तैनाती पर चर्चा हुई ताकि तकनीक आधारित निगरानी हो सके और खेतों में आग की प्रवृत्तियों का विश्लेषण किया जा सके।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
फिरोजपुर और फरीदकोट गए सीएक्यूएम दल का नेतृत्व किसने किया?
आयोग के सदस्य (तकनीकी) डॉ. टी. एस. पंवार ने। इन दोनों जिलों में जाने से पहले यह दल पंजाब के मोगा जिले का दौरा कर चुका था।
पराली के स्थल पर और स्थल से बाहर प्रबंधन में क्या अंतर है?
स्थल पर प्रबंधन में पराली को खेत में ही फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों से मिट्टी में मिलाया जाता है। स्थल से बाहर प्रबंधन में उसे खेत से उठाकर अन्यत्र उपयोग में लाया जाता है, जिसके लिए एग्रीगेटरों और उद्योगों से तालमेल चाहिए।
आयोग ने निगरानी के लिए किन तकनीकों पर जोर दिया?
ड्रोन और कम लागत वाले सेंसर पर, ताकि तकनीक आधारित निगरानी और प्रवृत्ति विश्लेषण हो सके। इसके साथ खेतों में अधिकारियों की निगरानी और हॉटस्पॉट क्षेत्रों पर नजर भी रखी जाएगी।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2324755 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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