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ब्लेज़ार OJ 287 के युगल ब्लैक होल पर एरीज का दशक लंबा अध्ययन

एरीज नैनीताल के समन्वय में 18 देशों के 106 वैज्ञानिकों ने ब्लेज़ार OJ 287 को दस वर्ष तक देखा और उसके ब्लैक होल का द्रव्यमान 3.89 अरब सौर द्रव्यमान आँका।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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ब्लेज़ार OJ 287 के युगल ब्लैक होल पर एरीज का दशक लंबा अध्ययन

चर्चा में क्यों

एरीज, नैनीताल के समन्वय में और डॉ. आलोक सी. गुप्ता के नेतृत्व में हुए बहुसंस्थानिक अध्ययन ने ब्लेज़ार OJ 287 को दस वर्ष तक देखा, 150 वर्ष का सबसे घना प्रकाशिक आँकड़ा तैयार किया और उसके केंद्रीय ब्लैक होल का द्रव्यमान कम से कम 3.89 अरब सौर द्रव्यमान आँका।

ब्लेज़ार OJ 287 की चमक और रंग पर दस वर्ष की निगरानी ने खगोलविदों को उसके दो ब्लैक होल तथा उनसे निकलने वाले विकिरण की स्पष्ट तस्वीर दी है। यह अध्ययन आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज), नैनीताल के वैज्ञानिकों के समन्वय में हुआ, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान है।

OJ 287 क्यों विशेष है

यह पिंड पृथ्वी से लगभग 4 अरब प्रकाश वर्ष दूर है और इसके केंद्र में दो अति विशाल ब्लैक होल हैं, जो बारह वर्ष की कक्षा में एक-दूसरे का चक्कर लगाते हैं। अति विशाल ब्लैक होल का द्रव्यमान सूर्य से लाखों से अरबों गुना तक हो सकता है। ब्लेज़ार होने के कारण OJ 287 से प्लाज़्मा की धाराएँ लगभग प्रकाश की गति से निकलती हैं और हमारी दिशा में मुड़ी होती हैं, तथा इसका उत्सर्जन रेडियो तरंगों से गामा किरणों तक तेज़ी से बदलता है।

1988 में पकड़ा गया क्रम

इस पिंड की चमक दो शिखरों वाले विशिष्ट क्रम में बढ़ती है। फिनलैंड के वैज्ञानिकों ने 1988 में यह लय पहचानी, जब उन्होंने 1880 तक पीछे जाते लगभग 100 वर्ष के प्रकाशिक अभिलेख खंगाले। तब से वेधशालाएँ बारह वर्ष के इस चक्र पर नज़र रखकर कक्षीय गति का नक्शा बनाती रही हैं।

अभियान कितना बड़ा था

एरीज के डॉ. आलोक सी. गुप्ता के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन में 18 देशों और 48 संस्थानों तथा विश्वविद्यालयों के 106 वैज्ञानिक जुड़े, जिन्होंने 2015 से 2025 के बीच लगभग दो दर्जन दूरबीनों का उपयोग किया; जो उत्सर्जन शिखर पकड़े गए वे 2015 और 2019 के बीच के हैं। परिणाम इस पिंड पर 150 वर्ष में जुटाया गया सबसे घना प्रकाशिक आँकड़ा है।

अध्ययन से क्या मिला

आँकड़ों से दोनों ब्लैक होल की आपेक्षिक स्थिति अलग-अलग समय पर तय करने, चमक, स्पेक्ट्रम और ध्रुवण के बदलाव को समझने, छोटे ब्लैक होल से आने वाले विकिरण के संकेत खोजने तथा इस युगल की प्रकृति पढ़ने में सहायता मिली। अमेरिका के स्टीवर्ड वेधशाला में 2017 के अक्टूबर और नवंबर में कम चमक की अवस्था में लिए गए आठ स्पेक्ट्रम की ऑक्सीजन उत्सर्जन रेखा की चौड़ाई से केंद्रीय ब्लैक होल का द्रव्यमान कम से कम 3.89 अरब सौर द्रव्यमान आँका गया। इस श्रृंखला के पहले के शोध पत्र डॉ. गुप्ता तथा फिनलैंड के तुर्कू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मौरी जे. वाल्टोनेन के नेतृत्व में 2017 से प्रकाशित होते रहे हैं।

महत्व

OJ 287 अब सापेक्षिक प्लाज़्मा धाराओं और बहुसंदेशवाहक खगोल विज्ञान की प्रयोगशाला है, जिसमें एक ही स्रोत से आने वाले प्रकाश, गुरुत्वीय तरंगों, न्यूट्रिनो और ब्रह्मांडीय किरणों को साथ पढ़ा जाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

अध्ययन का विषयOJ 287, दो अति विशाल ब्लैक होल वाला ब्लेज़ार
समन्वयक संस्थानआर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज), नैनीताल
मूल विभागविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग
अध्ययन का नेतृत्वडॉ. आलोक सी. गुप्ता
पृथ्वी से दूरीलगभग 4 अरब प्रकाश वर्ष
युगल की कक्षीय अवधिबारह वर्ष
दल का आकार18 देशों और 48 संस्थानों के 106 वैज्ञानिक
प्रेक्षण अवधिलगभग दो दर्जन दूरबीनें, 2015 से 2025
केंद्रीय ब्लैक होल का द्रव्यमानकम से कम 3.89 अरब सौर द्रव्यमान
क्रम की खोज1988, फिनलैंड के वैज्ञानिकों ने 1880 तक के अभिलेखों से

परीक्षा की दृष्टि से

संस्थान (एरीज, नैनीताल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन), पिंड (ब्लेज़ार OJ 287, लगभग 4 अरब प्रकाश वर्ष दूर, बारह वर्ष की कक्षा में दो अति विशाल ब्लैक होल), नेतृत्व (डॉ. आलोक सी. गुप्ता), पैमाना (106 वैज्ञानिक, 18 देश, 48 संस्थान, 2015 से 2025) और 3.89 अरब सौर द्रव्यमान का अनुमान याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

ब्लेज़ार OJ 287 पर दस वर्ष के प्रकाशिक अध्ययन का समन्वय किस भारतीय संस्थान ने किया?

  1. A.भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान, बेंगलुरु
  2. B.आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान, नैनीताल
  3. C.अंतर-विश्वविद्यालय खगोल विज्ञान केंद्र, पुणे
  4. D.भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला, अहमदाबाद
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान, नैनीताल

व्याख्या

सही उत्तर आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान, नैनीताल है। ब्लेज़ार OJ 287 पर यह बहुसंस्थानिक अभियान इसी संस्थान के वैज्ञानिकों के समन्वय में चला, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त निकाय है, और अध्ययन का नेतृत्व इसी संस्थान के डॉ. आलोक सी. गुप्ता ने किया। दल में 18 देशों तथा 48 संस्थानों और विश्वविद्यालयों के 106 वैज्ञानिक शामिल थे, जिन्होंने 2015 से 2025 के बीच लगभग दो दर्जन दूरबीनों से इस पिंड का प्रेक्षण किया। विकल्प A, C और D भारत के प्रतिष्ठित खगोल विज्ञान तथा अंतरिक्ष विज्ञान केंद्र हैं, परंतु इस विशेष अध्ययन का समन्वय उनमें से किसी ने नहीं किया; ये विकल्प इसलिए दिए गए हैं क्योंकि परीक्षार्थी इन राष्ट्रीय संस्थानों को आपस में मिला देते हैं। नैनीताल के संस्थान, उसके मूल विभाग और प्रमुख वैज्ञानिक का नाम साथ याद रखना सबसे सुरक्षित तरीका है।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

OJ 287 के केंद्र में स्थित दो अति विशाल ब्लैक होल एक-दूसरे का चक्कर कितने वर्ष में पूरा करते हैं?

  1. A.पाँच वर्ष
  2. B.आठ वर्ष
  3. C.बारह वर्ष
  4. D.बीस वर्ष
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. बारह वर्ष

व्याख्या

सही उत्तर बारह वर्ष है। OJ 287 पृथ्वी से लगभग 4 अरब प्रकाश वर्ष दूर एक दुर्लभ पिंड है, जिसमें दो अति विशाल ब्लैक होल बारह वर्ष की कक्षा में एक-दूसरे के चारों ओर घूमकर युगल प्रणाली बनाते हैं। इसी कक्षा के कारण इस ब्लेज़ार की चमक दो शिखरों वाले विशिष्ट क्रम में बढ़ती है। फिनलैंड के वैज्ञानिकों ने 1988 में यह लय पहचानी थी, जब उन्होंने 1880 तक पीछे जाते लगभग 100 वर्ष के प्रकाशिक प्रेक्षण देखे, और तब से खगोलविद हर बारह वर्ष के दोहरे उत्सर्जन चक्र पर नज़र रखकर कक्षीय गति का नक्शा बनाते रहे हैं। हाल के अभियान ने 2015 से 2019 के बीच पड़े शिखर पकड़े। विकल्प A, B और D गलत हैं क्योंकि इनमें से कोई भी इस युगल की अवधि नहीं है; जो परीक्षार्थी केवल इतना याद रखता है कि कोई दोहराव वाला चक्र है, वह अनुमान लगाकर इनमें फँस सकता है। कक्षीय अवधि और दूरी साथ याद रखें।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

अध्ययन में OJ 287 के केंद्रीय ब्लैक होल का न्यूनतम द्रव्यमान कितना आँका गया?

  1. A.3.89 लाख सौर द्रव्यमान
  2. B.3.89 अरब सौर द्रव्यमान
  3. C.18 अरब सौर द्रव्यमान
  4. D.106 लाख सौर द्रव्यमान
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 3.89 अरब सौर द्रव्यमान

व्याख्या

सही उत्तर 3.89 अरब सौर द्रव्यमान है। अमेरिका के स्टीवर्ड वेधशाला में 2017 के अक्टूबर और नवंबर में, जब पिंड की चमक कम थी, आठ प्रकाशिक स्पेक्ट्रम लिए गए; उनकी ऑक्सीजन उत्सर्जन रेखा की चौड़ाई से दल ने केंद्रीय ब्लैक होल का द्रव्यमान कम से कम इतना आँका। विकल्प A गलत है क्योंकि वह उन्हीं अंकों को हजार गुना घटा देता है; अति विशाल ब्लैक होल का द्रव्यमान सूर्य से लाखों से अरबों गुना तक हो सकता है, इसलिए इकाई पर ध्यान न देने वाला परीक्षार्थी इसमें फँसता है। विकल्प C गलत है क्योंकि अठारह इस अध्ययन में शामिल देशों की संख्या है, कोई द्रव्यमान नहीं। विकल्प D इसी कारण गलत है, क्योंकि एक सौ छह दल में शामिल वैज्ञानिकों की संख्या है। सीख यही है कि इस अध्ययन के तीन बड़े आँकड़े अलग-अलग याद रखें: दल का आकार, देशों की संख्या और द्रव्यमान का अनुमान।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

OJ 287 क्या है?

यह पृथ्वी से लगभग 4 अरब प्रकाश वर्ष दूर एक दुर्लभ ब्लेज़ार है, जिसके केंद्र में दो अति विशाल ब्लैक होल बारह वर्ष की कक्षा में घूमते हैं और जो लगभग प्रकाश की गति से हमारी दिशा में प्लाज़्मा धाराएँ छोड़ता है।

दस वर्ष के इस अध्ययन का समन्वय किस भारतीय संस्थान ने किया?

आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान, नैनीताल ने, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान है। अध्ययन का नेतृत्व डॉ. आलोक सी. गुप्ता ने किया।

OJ 287 के केंद्रीय ब्लैक होल का द्रव्यमान कितना है?

कम से कम 3.89 अरब सौर द्रव्यमान। यह आँकड़ा अमेरिका के स्टीवर्ड वेधशाला में 2017 में कम चमक की अवस्था में लिए गए आठ स्पेक्ट्रम की ऑक्सीजन उत्सर्जन रेखा की चौड़ाई से निकाला गया।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS