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एग्रीवोल्टाइक्स: भारत में 36 परियोजनाएं, 37.54 मेगावाट क्षमता

पीआईबी के पृष्ठभूमि पत्र के अनुसार अगस्त 2025 तक भारत में 36 एग्रीवोल्टाइक परियोजनाएं 37.54 मेगावाट क्षमता के साथ चल रही थीं और क्षमता 14,000 गीगावाट तक आंकी गई।

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एग्रीवोल्टाइक्स: भारत में 36 परियोजनाएं, 37.54 मेगावाट क्षमता

चर्चा में क्यों

पत्र सूचना कार्यालय ने 2 नवंबर 2026 को एग्रीवोल्टाइक्स पर पृष्ठभूमि पत्र जारी किया, जिसमें अगस्त 2025 तक 36 चालू परियोजनाओं और 37.54 मेगावाट क्षमता का ब्यौरा है तथा देश की क्षमता 3,000 से करीब 14,000 गीगावाट आंकी गई है।

एग्रीवोल्टाइक्स, जिसे एग्रीसोलर या दोहरे उपयोग वाला सौर भी कहा जाता है, एक ही भूमि पर फसल उगाने तथा सौर बिजली बनाने की पद्धति है। पत्र सूचना कार्यालय ने 2 नवंबर 2026 को जारी पृष्ठभूमि पत्र में बताया कि इस विचार पर भारत कहां पहुंचा है। यह पद्धति खेत को भोजन या बिजली में से एक का नहीं, बल्कि दोनों का स्रोत मानती है।

भारतीय खेती के लिए महत्व

कृषि देश की लगभग 46.1 प्रतिशत आबादी की आजीविका का आधार है और कृषि तथा सहयोगी क्षेत्र का सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) 2025-26 में 52.08 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। भूमि उपयोग सांख्यिकी 2023-24 के अनुसार देश का प्रतिवेदित क्षेत्र 306.96 मिलियन हेक्टेयर है, जिसका करीब 55 प्रतिशत कृषि भूमि है। शुद्ध बोया गया क्षेत्र 138.99 मिलियन हेक्टेयर और सकल फसली क्षेत्र 217.88 मिलियन हेक्टेयर है। इतना बड़ा भूमि आधार ही इस पद्धति को बड़े पैमाने पर आजमाने योग्य बनाता है।

प्रणाली कैसे बनती है

  • ऊंचे सौर ढांचे: पैनल इतनी ऊंचाई पर लगाए जाते हैं कि धूप और वर्षा नीचे की फसल तक पहुंचे तथा कृषि उपकरण नीचे से निकल सकें
  • आंशिक छाया: पैनल पौधों को अत्यधिक गर्मी से बचाते हैं और मिट्टी से नमी का वाष्पीकरण घटाते हैं, जो गर्म या शुष्क क्षेत्रों में उपयोगी है
  • दोहरी भूमि उत्पादकता: वही खेत फसल देता या पशुपालन में काम आता है और साथ ही खेती के कामों के लिए बिजली देता है, अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेची जा सकती है

भारत की वर्तमान स्थिति

अगस्त 2025 तक देश में 36 एग्रीवोल्टाइक परियोजनाएं चालू थीं, जिनकी स्थापित क्षमता 37.54 मेगावाट थी, और 10 पायलट परियोजनाएं विकासाधीन थीं। ये परियोजनाएं विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में फैली हैं और इनमें ऊंचे ढांचे, अंतरस्थान विन्यास तथा ट्रैकिंग प्रणालियां शामिल हैं। देश की क्षमता 3,000 गीगावाट से लेकर करीब 14,000 गीगावाट तक आंकी गई है। आय के मोर्चे पर कुछ मामलों में प्रति एकड़ वार्षिक कमाई लगभग 60,000 रुपये से बढ़कर एक लाख रुपये से अधिक हो सकती है। जीआईएस आधारित राष्ट्रीय छानबीन में पर्यावरणीय, कृषि वैज्ञानिक तथा तकनीकी मानकों के बाद 47.35 मिलियन हेक्टेयर प्रतिबंधित कृषि भूमि उपयुक्त पाई गई।

अग्रणी राज्य

महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश मिलकर अनुमानित उत्पादन क्षमता का करीब आधा हिस्सा रखते हैं, जिसकी वजह कृषि भूमि की उपलब्धता, सौर संसाधन तथा कृषि-जलवायु परिस्थितियां हैं। ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना, बिहार और पश्चिम बंगाल में मध्यम क्षमता है। फल, सब्जियां, मसाले तथा औषधीय पौधे ऐसी फसलें मानी गई हैं जो ऊपर लगे पैनलों के साथ सबसे अनुकूल बैठती हैं।

सरकारी सहयोग

पीएम कुसुमफरवरी 2019 में शुरू; कृषि पंपों के सौरीकरण तथा विकेंद्रित उत्पादन के लिए लगभग 34,422 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता
उत्कृष्टता केंद्रराष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान ने आईसीएआर के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के साथ स्थापित किया; आईएआरआई में 100 किलोवाट की प्रणाली
इंडिया एग्रीवोल्टाइक्स अलायंसभारतीय राष्ट्रीय सौर ऊर्जा महासंघ के नेतृत्व में, 2023 में शुरू, अब 40 से अधिक सदस्य
महाराष्ट्रमुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0, लगभग 35,000 एकड़ पर 16,000 मेगावाट की सौर परियोजनाएं
गुजरातकिसान सूर्योदय योजना, सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक 16 घंटे तक दिन में बिजली
कर्नाटकसूर्य रैता योजना, सौर सिंचाई पंप तथा अतिरिक्त बिजली से कमाई

महत्वपूर्ण तथ्य

अवधारणाएग्रीवोल्टाइक्स, जिसे एग्रीसोलर या दोहरे उपयोग वाला सौर भी कहते हैं: एक ही भूमि पर फसल और सौर बिजली
चालू परियोजनाएंअगस्त 2025 तक 36 परियोजनाएं, 37.54 मेगावाट स्थापित क्षमता
पायलट परियोजनाएं10 विकासाधीन
देश की क्षमता3,000 गीगावाट से करीब 14,000 गीगावाट के बीच
उपयुक्त भूमिजीआईएस आधारित छानबीन में 47.35 मिलियन हेक्टेयर प्रतिबंधित कृषि भूमि
किसान की आयप्रति एकड़ लगभग 60,000 रुपये से बढ़कर एक लाख रुपये से अधिक हो सकती है
पीएम कुसुमफरवरी 2019 में शुरू; लगभग 34,422 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता
उत्कृष्टता केंद्रराष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान और आईसीएआर-आईएआरआई; आईएआरआई में 100 किलोवाट प्रणाली
इंडिया एग्रीवोल्टाइक्स अलायंसएनएसईएफआई के नेतृत्व में, 2023 में शुरू, 40 से अधिक सदस्य
अग्रणी राज्यमहाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश
कृषि का आधारलगभग 46.1 प्रतिशत आबादी की आजीविका; क्षेत्र का जीवीए 2025-26 में 52.08 लाख करोड़ रुपये अनुमानित

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें कि एग्रीवोल्टाइक्स को एग्रीसोलर या दोहरे उपयोग वाला सौर भी कहते हैं, अगस्त 2025 तक 36 चालू परियोजनाएं और 37.54 मेगावाट क्षमता, 10 पायलट परियोजनाएं, 3,000 से 14,000 गीगावाट की क्षमता सीमा, 47.35 मिलियन हेक्टेयर उपयुक्त प्रतिबंधित कृषि भूमि, फरवरी 2019 की पीएम कुसुम योजना और उसकी लगभग 34,422 करोड़ रुपये की सहायता, एनआईएसई तथा आईसीएआर-आईएआरआई का उत्कृष्टता केंद्र और 100 किलोवाट की प्रणाली, 2023 से इंडिया एग्रीवोल्टाइक्स अलायंस, तथा महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक की राज्य योजनाएं।

अभ्यास प्रश्न

Q1.पर्यावरणमध्यम

अगस्त 2025 तक भारत में कितनी एग्रीवोल्टाइक परियोजनाएं चालू थीं और उनकी स्थापित क्षमता कितनी थी?

  1. A.26 परियोजनाएं, 27.54 मेगावाट
  2. B.36 परियोजनाएं, 37.54 मेगावाट
  3. C.46 परियोजनाएं, 47.54 मेगावाट
  4. D.36 परियोजनाएं, 137.54 मेगावाट
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 36 परियोजनाएं, 37.54 मेगावाट

अगस्त 2025 तक भारत की चालू एग्रीवोल्टाइक परियोजनाओं की यही स्थिति थी और इनके साथ 10 पायलट परियोजनाएं विकासाधीन थीं।

Q2.पर्यावरणआसान

एग्रीवोल्टाइक्स के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा दूसरा नाम प्रयोग होता है?

  1. A.तैरता सौर
  2. B.दोहरे उपयोग वाला सौर
  3. C.संकेंद्रित सौर ऊर्जा
  4. D.रूफटॉप सौर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. दोहरे उपयोग वाला सौर

एग्रीवोल्टाइक्स को एग्रीसोलर या दोहरे उपयोग वाला सौर भी कहा जाता है, और ये नाम उसी विचार की ओर संकेत करते हैं कि एक ही खेत दो काम करे — फसल उगाए और बिजली बनाए।

Q3.पर्यावरणमध्यम

कृषि में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली पीएम कुसुम योजना कब शुरू की गई थी?

  1. A.फरवरी 2019
  2. B.फरवरी 2015
  3. C.अगस्त 2020
  4. D.जनवरी 2023
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. फरवरी 2019

प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान, जिसे संक्षेप में पीएम कुसुम कहा जाता है, उसी समय शुरू हुई थी, ताकि खेती में सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़े, डीजल पर निर्भरता घटे और किसान अपनी कमाई के स्रोत बढ़ा सकें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एग्रीवोल्टाइक्स क्या है?

एक ही भूमि पर फसल उगाने और सौर बिजली बनाने की पद्धति, जिसे एग्रीसोलर या दोहरे उपयोग वाला सौर भी कहा जाता है। पैनल ऊंचे ढांचों पर लगाए जाते हैं ताकि धूप, वर्षा और कृषि उपकरण नीचे की फसल तक पहुंच सकें।

भारत में कितनी एग्रीवोल्टाइक परियोजनाएं हैं?

अगस्त 2025 तक भारत में 36 एग्रीवोल्टाइक परियोजनाएं 37.54 मेगावाट स्थापित क्षमता के साथ चालू थीं, और विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में 10 पायलट परियोजनाएं विकासाधीन थीं।

भारत की अनुमानित एग्रीवोल्टाइक क्षमता कितनी है?

अनुमान इसे 3,000 गीगावाट से करीब 14,000 गीगावाट के बीच रखते हैं। जीआईएस आधारित राष्ट्रीय छानबीन में पर्यावरणीय, कृषि वैज्ञानिक तथा तकनीकी मानकों के बाद 47.35 मिलियन हेक्टेयर प्रतिबंधित कृषि भूमि उपयुक्त पाई गई।

कृषि में सौर ऊर्जा को कौन-सी योजना सहयोग देती है?

पीएम कुसुम, जो फरवरी 2019 में शुरू हुई और जिसमें कृषि पंपों के सौरीकरण तथा विकेंद्रित उत्पादन के लिए लगभग 34,422 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता है। राज्य स्तर पर महाराष्ट्र की मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 और गुजरात की किसान सूर्योदय योजना शामिल हैं।

स्रोत

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