आईएमडी ने चक्रवात चेतावनी निर्णय समर्थन प्रणाली शुरू की
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 12 अक्टूबर 2026 को वेबजीआईएस आधारित चक्रवात चेतावनी एवं समुद्री मौसम सेवा निर्णय समर्थन प्रणाली राष्ट्र को समर्पित की।

चर्चा में क्यों
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 12 अक्टूबर 2026 को मानसून-पश्चात मौसम की अर्धवार्षिक चक्रवात-पूर्व अभ्यास बैठक में चक्रवात चेतावनी एवं समुद्री मौसम सेवा निर्णय समर्थन प्रणाली राष्ट्र को समर्पित की।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 12 अक्टूबर 2026 को चक्रवात से जुड़ी जानकारी का एक नया मंच आम लोगों को सौंप दिया। चक्रवात चेतावनी एवं समुद्री मौसम सेवा निर्णय समर्थन प्रणाली (डीएसएस) एक संवादात्मक वेबजीआईएस मंच है, जो चक्रवात का मार्ग, हवा, वर्षा और समुद्री उभार की चेतावनी एक ही स्क्रीन पर दिखाता है। यह विभाग पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन काम करता है।
किस अवसर पर शुरू हुई
यह मंच मानसून के बाद के मौसम, यानी अक्टूबर से दिसंबर तक की अवधि के लिए होने वाली अर्धवार्षिक चक्रवात-पूर्व अभ्यास बैठक में राष्ट्र को समर्पित किया गया। बैठक की अध्यक्षता आईएमडी के मौसम विज्ञान महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने की, जो विश्व मौसम विज्ञान संगठन के तीसरे उपाध्यक्ष भी हैं। मौसम विभाग यह अभ्यास 2008 से हर वर्ष दो बार करता आ रहा है।
मंच पर क्या दिखता है
- तूफान का देखा गया और पूर्वानुमानित मार्ग, उसके चारों ओर अनिश्चितता का शंकु
- तूफान की तीव्रता, हवा का वितरण और समुद्री उभार की चेतावनी
- जिलेवार वर्षा चेतावनी तथा नदी जलग्रहण क्षेत्रों के लिए वर्षा का पूर्वानुमान
- आपदा प्रबंधकों, सरकारी एजेंसियों और आम नागरिकों, सबके लिए बने नक्शे और दृश्य साधन
यह प्रणाली आईएमडी की वेबसाइट और नई दिल्ली स्थित क्षेत्रीय विशेष मौसम विज्ञान केंद्र की वेबसाइट से देखी जा सकती है। इसका उद्देश्य पूर्वानुमान और उस पर लिए जाने वाले निर्णय के बीच की दूरी घटाना है, ताकि जिला अधिकारी, मछुआरे और बंदरगाह चेतावनी को समय रहते कार्रवाई में बदल सकें।
तारीख का महत्व
यह तारीख भारतीय मौसम वैज्ञानिकों के लिए स्मृति संजोए हुए है। अति भीषण चक्रवाती तूफान फैलिन 12 अक्टूबर 2013 को तट से टकराया था और अति भीषण चक्रवाती तूफान हुदहुद 12 अक्टूबर 2014 को। दोनों तूफानों के सटीक पूर्वानुमान से भारत की पूर्व-चेतावनी क्षमता को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली और इन्हें देश की आपदा तैयारी के महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है।
कौन शामिल हुआ
| बैठक में शामिल लोग | लगभग 230 |
| ऑनलाइन जुड़े | 180 |
| प्रत्यक्ष उपस्थित | 50 |
| प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन | 30 से अधिक |
बैठक में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, गृह मंत्रालय, भारतीय नौसेना, भारतीय वायु सेना, भारतीय तटरक्षक बल, केंद्रीय जल आयोग और मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान राष्ट्रीय केंद्र के साथ-साथ तटवर्ती राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तथा मत्स्य विभाग शामिल हुए। प्रतिभागियों ने अप्रैल में हुए अभ्यास की सिफारिशों पर हुई कार्रवाई की समीक्षा की, नए मंच का सजीव प्रदर्शन देखा और उसे बेहतर बनाने के सुझाव दिए।
महत्वपूर्ण तथ्य
| प्रणाली | चक्रवात चेतावनी एवं समुद्री मौसम सेवा निर्णय समर्थन प्रणाली (डीएसएस) |
|---|---|
| स्वरूप | संवादात्मक वेबजीआईएस आधारित वेब मंच |
| राष्ट्र को समर्पित | 12 अक्टूबर 2026 |
| शुरू करने वाला विभाग | भारत मौसम विज्ञान विभाग, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय |
| अवसर | अर्धवार्षिक चक्रवात-पूर्व अभ्यास बैठक, मानसून-पश्चात मौसम (अक्टूबर-दिसंबर) 2026 |
| अध्यक्षता | डॉ. मृत्युंजय महापात्र, मौसम विज्ञान महानिदेशक, आईएमडी |
| उनका वैश्विक पद | विश्व मौसम विज्ञान संगठन के तीसरे उपाध्यक्ष |
| भागीदारी | 30 से अधिक संगठनों के लगभग 230 लोग, 180 ऑनलाइन |
| याद किए गए चक्रवात | फैलिन (12 अक्टूबर 2013) और हुदहुद (12 अक्टूबर 2014) |
परीक्षा की दृष्टि से
मंच का नाम और स्वरूप (वेबजीआईएस आधारित निर्णय समर्थन प्रणाली), विभाग और मंत्रालय (आईएमडी, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय), तारीख (12 अक्टूबर 2026), बैठक की अध्यक्षता (डॉ. मृत्युंजय महापात्र, मौसम विज्ञान महानिदेशक तथा विश्व मौसम विज्ञान संगठन के तीसरे उपाध्यक्ष), बैठक का स्वरूप (अर्धवार्षिक चक्रवात-पूर्व अभ्यास, 2008 से) और दोनों तूफान फैलिन (2013) तथा हुदहुद (2014) याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
अक्टूबर 2026 में चक्रवात चेतावनी एवं समुद्री मौसम सेवा निर्णय समर्थन प्रणाली किस संस्था ने राष्ट्र को समर्पित की?
- A.राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण
- B.भारत मौसम विज्ञान विभाग
- C.भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र
- D.मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान राष्ट्रीय केंद्र
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर भारत मौसम विज्ञान विभाग है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन काम करने वाले आईएमडी ने 12 अक्टूबर 2026 को चक्रवात चेतावनी एवं समुद्री मौसम सेवा निर्णय समर्थन प्रणाली राष्ट्र को समर्पित की। यह संवादात्मक वेबजीआईएस मंच तूफान का मार्ग और तीव्रता, अनिश्चितता का शंकु, हवा का वितरण, समुद्री उभार की चेतावनी तथा जिलेवार वर्षा चेतावनी एक ही जगह दिखाता है, और यह आईएमडी की वेबसाइट तथा नई दिल्ली के क्षेत्रीय विशेष मौसम विज्ञान केंद्र की वेबसाइट पर उपलब्ध है। विकल्प A गलत है, क्योंकि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण इस अवसर पर उपयोगकर्ता एजेंसी के रूप में शामिल हुआ था, मंच का स्वामी नहीं है। विकल्प D इसी कारण गलत है, क्योंकि मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान राष्ट्रीय केंद्र वैज्ञानिक प्रतिभागी के रूप में उपस्थित था। विकल्प C गलत है, क्योंकि इस प्रणाली के पीछे भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र का नाम नहीं है।
वर्ष 2026 के मानसून-पश्चात मौसम की चक्रवात-पूर्व अभ्यास बैठक की अध्यक्षता किसने की, जिसमें नई निर्णय समर्थन प्रणाली शुरू हुई?
- A.केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री
- B.आईएमडी के मौसम विज्ञान महानिदेशक
- C.राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष
- D.गृह मंत्रालय के सचिव
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर आईएमडी के मौसम विज्ञान महानिदेशक हैं। अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक की मानसून-पश्चात अवधि के लिए हुई अर्धवार्षिक चक्रवात-पूर्व अभ्यास बैठक की अध्यक्षता भारत मौसम विज्ञान विभाग के मौसम विज्ञान महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने की, जो विश्व मौसम विज्ञान संगठन के तीसरे उपाध्यक्ष भी हैं। विकल्प A और D गलत हैं, क्योंकि यह एक तकनीकी समीक्षा बैठक है जिसकी अध्यक्षता मौसम विभाग का प्रमुख करता है, कोई मंत्री या गृह मंत्रालय नहीं; हालांकि गृह मंत्रालय उपयोगकर्ता एजेंसी के रूप में इसमें शामिल हुआ था। विकल्प C गलत है, क्योंकि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण उन 30 से अधिक संगठनों में से एक था जो प्रतिभागी के रूप में बैठक में आए थे; अध्यक्षता आईएमडी के पास ही रही, जो देश के लिए चक्रवात चेतावनी जारी करता है और नई दिल्ली में क्षेत्रीय विशेष मौसम विज्ञान केंद्र चलाता है।
अति भीषण चक्रवाती तूफान फैलिन और हुदहुद, जो दोनों 12 अक्टूबर को भारतीय तट से टकराए थे, क्रमशः किन वर्षों में आए थे?
- A.2011 और 2012
- B.2013 और 2014
- C.2014 और 2015
- D.2012 और 2013
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर 2013 और 2014 है। अति भीषण चक्रवाती तूफान फैलिन 12 अक्टूबर 2013 को तट से टकराया था और अति भीषण चक्रवाती तूफान हुदहुद 12 अक्टूबर 2014 को। इन दोनों तूफानों को एक साथ याद किया जाता है, क्योंकि ये एक वर्ष के अंतर पर उसी तारीख को आए थे और भारत मौसम विज्ञान विभाग ने दोनों का सटीक पूर्वानुमान लगाया था। इससे देश की पूर्व-चेतावनी क्षमता को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली और इन्हें भारत की आपदा तैयारी के महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया। तारीखों के इसी संयोग के कारण नई चक्रवात चेतावनी एवं समुद्री मौसम सेवा निर्णय समर्थन प्रणाली 12 अक्टूबर को ही राष्ट्र को समर्पित की गई। विकल्प A, C और D इन तूफानों को गलत वर्षों से जोड़ते हैं और इसलिए मंच की शुरुआत की तारीख से बनने वाला वह संबंध टूट जाता है, जिससे यह तारीख भारतीय मौसम वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण बनती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चक्रवात चेतावनी एवं समुद्री मौसम सेवा निर्णय समर्थन प्रणाली क्या है?
यह भारत मौसम विज्ञान विभाग का संवादात्मक वेबजीआईएस आधारित मंच है, जो 12 अक्टूबर 2026 को राष्ट्र को समर्पित किया गया। इस पर चक्रवात का मार्ग और तीव्रता, हवा, वर्षा, समुद्री उभार तथा जिलेवार चेतावनी एक ही जगह मिलती है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक कौन हैं?
डॉ. मृत्युंजय महापात्र मौसम विज्ञान महानिदेशक हैं। उन्होंने उस चक्रवात-पूर्व अभ्यास बैठक की अध्यक्षता की जिसमें यह मंच शुरू हुआ, और वे विश्व मौसम विज्ञान संगठन के तीसरे उपाध्यक्ष भी हैं।
12 अक्टूबर की तारीख भारत के चक्रवात पूर्वानुमान में क्यों महत्वपूर्ण है?
अति भीषण चक्रवाती तूफान फैलिन 12 अक्टूबर 2013 को और हुदहुद 12 अक्टूबर 2014 को तट से टकराया था। दोनों के लिए आईएमडी की चेतावनियों को भारत की आपदा तैयारी के महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है।
चक्रवात-पूर्व अभ्यास बैठक कितनी बार होती है?
वर्ष में दो बार। आईएमडी इसे 2008 से अर्धवार्षिक रूप से आयोजित करता है, जिसमें आगामी चक्रवात मौसम की तैयारी की समीक्षा आपदा प्रबंधन और उपयोगकर्ता एजेंसियों के साथ की जाती है।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2322562 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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