भारतीय संविधान के 44वें संशोधन अधिनियम, 1978 के बाद निम्नलिखित में से कौन-सा मौलिक अधिकार नहीं है?
- A.संपत्ति का अधिकार
- B.समता का अधिकार
- C.शोषण के विरुद्ध अधिकार
- D.धर्म का अधिकार
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. संपत्ति का अधिकार
व्याख्या
सही उत्तर संपत्ति का अधिकार है। संविधान लागू होने के समय संपत्ति दो जगह मौलिक अधिकार के रूप में सुरक्षित थी: अनुच्छेद 19(1)(च), यानी संपत्ति अर्जित करने, रखने और बेचने की स्वतंत्रता, और अनुच्छेद 31, यानी संपत्ति से वंचित किए जाने के विरुद्ध संरक्षण। 44वें संशोधन अधिनियम, 1978 ने दोनों को हटा दिया और भाग XII में अनुच्छेद 300A जोड़ा, जो कहता है कि किसी व्यक्ति को विधि के प्राधिकार के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा। इसलिए संपत्ति अब भी सुरक्षित है, लेकिन मौलिक अधिकार के रूप में नहीं, केवल संवैधानिक या कानूनी अधिकार के रूप में।
व्यावहारिक अंतर यह है कि जिसकी संपत्ति ली जाए, वह अब अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सर्वोच्च न्यायालय नहीं जा सकता, क्योंकि वह केवल मौलिक अधिकारों के लिए है; वह अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय या सामान्य न्यायालय जा सकता है। बाकी तीन विकल्प, समता का अधिकार (अनुच्छेद 14 से 18), शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23 और 24) और धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25 से 28), आज भी मौलिक अधिकार हैं। इसी 44वें संशोधन ने अनुच्छेद 20 और 21 को आपातकाल में भी निलंबित न किए जा सकने वाला बनाया।