भारतीय साधारण बीमा निगम (जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) को एक कंपनी के रूप में किस वर्ष में निगमित किया गया था?
- A.1988
- B.1972
- C.1965
- D.1981
सही उत्तर
B. 1972
व्याख्या
सही उत्तर है B, 1972। भारतीय साधारण बीमा निगम (GIC) को नवंबर 1972 में एक कंपनी के रूप में निगमित किया गया था, और यही वर्ष भारत में साधारण बीमा के राष्ट्रीयकरण का था।
संसद ने 1972 में साधारण बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम पारित किया, जिसके तहत 107 निजी बीमा कंपनियों का अधिग्रहण कर उन्हें चार कंपनियों में बाँटा गया — नेशनल इंश्योरेंस, न्यू इंडिया एश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस। GIC को इन चारों की धारक (होल्डिंग) कंपनी बनाया गया और उसने 1 जनवरी 1973 से काम शुरू किया। बाद में यह क्षेत्र निजी कंपनियों के लिए खुला, GIC को देश की राष्ट्रीय पुनर्बीमा कंपनी बना दिया गया, चारों सहायक कंपनियाँ उससे अलग कर दी गईं, और आज यह GIC Re के नाम से काम करती है।
A गलत है: 1988 तक GIC पंद्रह साल से अधिक समय से काम कर रहा था। C गलत है: 1965 में साधारण बीमा निजी हाथों में ही था, क्योंकि राष्ट्रीयकरण 1972 में हुआ। D गलत है: 1981 में GIC अपनी चार सहायक कंपनियों की धारक कंपनी के रूप में पहले से चल रहा था।
परीक्षा टिप: जीवन बीमा के लिए LIC 1956, साधारण बीमा के लिए GIC 1972 और IRDA अधिनियम 1999।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंअर्थशास्त्र में उपभोक्ता की बचत की अवधारणा किसने दी?
- A.एडम स्मिथ
- B.एल्फ्रेड मार्शल
- C.डेविड रिकार्डो
- D.जे. एम. कीन्स
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एल्फ्रेड मार्शल
व्याख्या
सही उत्तर B, एल्फ्रेड मार्शल है। अपने ग्रंथ प्रिंसिपल्स ऑफ इकोनॉमिक्स में उन्होंने उपभोक्ता की बचत को उस अंतर के रूप में परिभाषित किया जो क्रेता किसी वस्तु के लिए देने को तैयार है और जो वह वास्तव में देता है, और मांग की लोच का मानक माप भी उन्होंने ही दिया, इसीलिए दोनों अवधारणाओं से उनका नाम जुड़ा है। विकल्प A गलत है क्योंकि एडम स्मिथ को 1776 के वेल्थ ऑफ नेशंस में श्रम विभाजन, अदृश्य हाथ और परंपरागत अर्थशास्त्र की नींव के लिए याद किया जाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि डेविड रिकार्डो तुलनात्मक लाभ, लगान के सिद्धांत और ह्रासमान प्रतिफल के नियम से जुड़े हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि जे. एम. कीन्स ने 1936 का जनरल थ्योरी लिखा और वे समष्टि अर्थशास्त्र से संबंधित हैं, जिसमें प्रभावी मांग, गुणक और मंदी में सार्वजनिक व्यय का पक्ष आता है।
जिस बाज़ार में किसी वस्तु के ठीक दो विक्रेता हों, उसे क्या कहा जाता है?
- A.द्वयाधिकार
- B.एकक्रेताधिकार
- C.अल्पक्रेताधिकार
- D.एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. द्वयाधिकार
व्याख्या
सही उत्तर A, द्वयाधिकार है। द्वयाधिकार अल्पाधिकार की वह सीमांत स्थिति है जिसमें केवल दो फर्में पूरे बाज़ार को आपूर्ति करती हैं, इसलिए प्रत्येक अपनी कीमत और उत्पादन दूसरी पर सीधी दृष्टि रखकर तय करती है। विकल्प B गलत है क्योंकि एकक्रेताधिकार एक ही क्रेता वाला बाज़ार है, और उपसर्ग एक को दो समझ लेना ही इस प्रश्न की परीक्षा है। विकल्प C गलत है क्योंकि अल्पक्रेताधिकार कुछ ही क्रेताओं वाला बाज़ार है, यह भी क्रय पक्ष का। विकल्प D गलत है क्योंकि एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में विभेदित वस्तुओं के विक्रेता बड़ी संख्या में होते हैं। शब्दों का अंत याद रखें: अधिकार वाले शब्द विक्रेता गिनते हैं, जैसे एकाधिकार, द्वयाधिकार और अल्पाधिकार, तथा क्रेताधिकार वाले शब्द क्रेता गिनते हैं, जैसे एकक्रेताधिकार और अल्पक्रेताधिकार। परीक्षा में अल्पाधिकार और द्वयाधिकार का अंतर भी पूछा जाता है, जिसमें अल्पाधिकार में कुछ विक्रेता होते हैं और द्वयाधिकार में ठीक दो, परंतु दोनों में फर्में परस्पर निर्भर रहती हैं और एक की कीमत नीति दूसरी की प्रतिक्रिया पर निर्भर करती है।
निम्नलिखित में से कौन एकाधिकार बाज़ार की विशेषता है?
- A.एक ही विक्रेता और वस्तु का कोई निकट विकल्प नहीं
- B.समरूप वस्तु के बहुत अधिक विक्रेता
- C.अनेक विक्रेताओं के सामने एक ही क्रेता
- D.फर्मों का मुक्त प्रवेश और निर्गम
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. एक ही विक्रेता और वस्तु का कोई निकट विकल्प नहीं
व्याख्या
सही उत्तर A है। एकाधिकार वह बाज़ार है जिसमें एक ही विक्रेता होता है और उसकी वस्तु का कोई निकट विकल्प नहीं होता, इसलिए वह फर्म ही पूरा उद्योग है और कीमत निर्धारक होती है: वह कीमत चुनती है और मात्रा बाज़ार पर छोड़ देती है, या इसका उलटा। यह स्थिति तभी टिकती है जब प्रवेश किसी पेटेंट, लाइसेंस, आवश्यक कच्चे माल के स्वामित्व या राजकीय अनुमति से रुका हो। विकल्प B गलत है क्योंकि समरूप वस्तु के बहुत अधिक विक्रेता पूर्ण प्रतिस्पर्धा की परिभाषा है। विकल्प C गलत है क्योंकि अनेक विक्रेताओं के सामने एक ही क्रेता होना एकक्रेताधिकार है, जो एकाधिकार का दर्पण रूप है। विकल्प D गलत है क्योंकि मुक्त प्रवेश और निर्गम एकाधिकार को तुरंत समाप्त कर देगा, क्योंकि नई फर्में लाभ बांटने आ जाएंगी; यह पूर्ण प्रतिस्पर्धा तथा एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा की विशेषता है।
किसी बाज़ार में संतुलन कीमत वह कीमत है जिस पर
- A.विक्रेता को सर्वाधिक संभव लाभ मिलता है
- B.मांगी गई मात्रा आपूर्ति की गई मात्रा के बराबर होती है
- C.सरकार उच्चतम सीमा निर्धारित करती है
- D.मांग पूर्ण बेलोचदार होती है
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मांगी गई मात्रा आपूर्ति की गई मात्रा के बराबर होती है
व्याख्या
सही उत्तर B है। बाज़ार वहां साफ होता है जहां मांग और आपूर्ति वक्र एक-दूसरे को काटते हैं, अर्थात जहां क्रेता जितना खरीदना चाहते हैं वह ठीक उतना है जितना विक्रेता बेचना चाहते हैं; वहां की कीमत संतुलन कीमत और मात्रा संतुलन मात्रा कहलाती है। उस कीमत से ऊपर न बिके माल का अतिरेक विक्रेताओं को कीमत घटाने पर विवश करता है और नीचे कमी उन्हें बढ़ाने देती है, इसलिए बाज़ार उस कीमत तंत्र से स्वयं संतुलन पर लौटता है जिसे एडम स्मिथ ने अदृश्य हाथ कहा था। विकल्प A गलत है क्योंकि किसी एक विक्रेता के अधिकतम लाभ का बाज़ार के साफ होने से संबंध नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि सरकारी उच्चतम सीमा बाहर से थोपी गई प्रशासित कीमत है और वह सामान्यतः कमी उत्पन्न करती है, जैसा कीमत नियंत्रण में होता है। विकल्प D गलत है क्योंकि लोच वक्र का आकार बताती है, कटान बिंदु नहीं।
आपूर्ति का नियम कहता है कि किसी वस्तु की कीमत और आपूर्ति की गई मात्रा के बीच संबंध है
- A.विपरीत, इसलिए आपूर्ति वक्र नीचे ढालू होता है
- B.सीधा, इसलिए आपूर्ति वक्र ऊपर चढ़ता है
- C.कोई नहीं, इसलिए आपूर्ति वक्र ऊर्ध्वाधर होता है
- D.सदैव पूर्ण लोचदार
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सीधा, इसलिए आपूर्ति वक्र ऊपर चढ़ता है
व्याख्या
सही उत्तर B है। ऊंची कीमत अतिरिक्त इकाइयों की बढ़ती लागत को ढक लेती है और अधिक लाभ का वादा करती है, इसलिए विक्रेता अधिक मात्रा प्रस्तुत करते हैं और आपूर्ति वक्र बाएं से दाएं ऊपर चढ़ता है। विकल्प A गलत है क्योंकि विपरीत संबंध मांग का लक्षण है, आपूर्ति का नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि ऊर्ध्वाधर आपूर्ति वक्र का अर्थ है कि आपूर्ति बदल ही नहीं सकती, जो केवल अति अल्पकाल में निश्चित भंडार पर लागू होता है, जैसे किसी स्टेडियम की सीटें, सामान्य नियम पर नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि पूर्ण लोचदार आपूर्ति वह विशेष स्थिति है जिसमें एक ही कीमत पर कोई भी मात्रा दी जाती है और वक्र क्षैतिज रेखा होता है। यह भी देखें कि आपूर्ति को वक्र पर खिसकाने के बजाय खिसकाता क्या है: साधनों की लागत, प्रौद्योगिकी, कर और अनुदान, फर्म जो अन्य वस्तुएं बना सकती है उनकी कीमतें, तथा विक्रेताओं की संख्या।