उत्तर वैदिक काल में लोहे को किस नाम से जाना जाता था?
- A.अयस
- B.कृष्ण अयस
- C.निष्क
- D.व्रीहि
सही उत्तर
B. कृष्ण अयस
व्याख्या
सही उत्तर B, कृष्ण अयस है, जिसका अर्थ है काली धातु; इसी अर्थ में श्याम अयस भी प्रयुक्त होता है। लोहा केवल उत्तर वैदिक काल में मिलता है, और उससे बने कुल्हाड़े तथा हल के फाल ने गंगा-यमुना दोआब के वन साफ करना संभव बनाया, इसीलिए इस एक शब्द का ऐतिहासिक महत्व इतना बड़ा है।
विकल्प A, अयस ऋग्वेद का सामान्य शब्द है जो धातु के लिए प्रयुक्त होता है और प्रायः तांबे या कांसे के अर्थ में लिया जाता है, लोहे के अर्थ में नहीं। विकल्प C, निष्क गले में पहनने का स्वर्ण आभूषण था जो आगे चलकर मूल्य की इकाई भी बना, परंतु वह सिक्का नहीं था और लोहे से उसका कोई संबंध नहीं। विकल्प D, व्रीहि चावल का नाम है, जो उत्तर वैदिक काल की ही देन है। परीक्षक इन चारों शब्दों को इसलिए आमने-सामने रखते हैं कि ये एक ही अध्याय से आते हैं।
पूरा लेख पढ़ें: वैदिक काल: ऋग्वेद, समाज और उत्तर वैदिक परिवर्तन
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंकिस वेद को भारतीय शास्त्रीय संगीत का मूल माना जाता है?
- A.ऋग्वेद
- B.सामवेद
- C.यजुर्वेद
- D.अथर्ववेद
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सही उत्तर: B. सामवेद
व्याख्या
सही उत्तर B, सामवेद है। इसके अधिकांश मंत्र ऋग्वेद से लिए गए हैं, परंतु उन्हें यज्ञ के समय निश्चित रागों में गाने के लिए स्वरबद्ध किया गया है, और यही स्वर भारत में संगीत के अंकन का सबसे प्राचीन प्रमाण हैं, इसीलिए सामवेद को भारतीय शास्त्रीय संगीत का मूल कहा जाता है।
विकल्प A, ऋग्वेद देवताओं की स्तुति के सूक्तों का संग्रह है जो गाए नहीं बल्कि पढ़े जाते थे, और वह 1,028 सूक्तों वाला प्राचीनतम वेद है। विकल्प C, यजुर्वेद उन सूत्रों का संग्रह है जिन्हें पुरोहित यज्ञ करते समय बोलता है और यही एकमात्र वेद है जिसका कुछ भाग गद्य में है। विकल्प D, अथर्ववेद में जादू-टोना, औषधि और लोकजीवन की सामग्री है और वह सबसे बाद में वेद माना गया। प्रश्नपत्र चारों को साथ रखते हैं, इसलिए प्रत्येक के साथ एक शब्द जोड़ लीजिए: सूक्त, गान, यज्ञ सूत्र और अभिचार।
दाशराज्ञ युद्ध किस नदी के तट पर लड़ा गया था?
- A.वितस्ता
- B.शुतुद्री
- C.परुष्णी
- D.अस्किनी
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सही उत्तर: C. परुष्णी
व्याख्या
सही उत्तर C, परुष्णी है, जिसे आज रावी कहा जाता है। ऋग्वेद के सातवें मंडल में वर्णन है कि भरत जन के राजा सुदास ने इसी नदी के तट पर दस जनों के संघ को पराजित किया, और यह पूरे ऋग्वैदिक साहित्य में दर्ज सबसे स्पष्ट राजनीतिक घटना है।
विकल्प A, वितस्ता आधुनिक झेलम है और विकल्प D, अस्किनी आधुनिक चिनाब; दोनों ऋग्वैदिक क्षेत्र में थीं परंतु इस युद्ध से इनका संबंध नहीं है। विकल्प B, शुतुद्री आधुनिक सतलज है, जो सात नदियों में तो है परंतु युद्ध स्थल नहीं। परीक्षक इस प्रश्न को इसलिए पसंद करते हैं कि इसमें घटना और नदियों के नाम दोनों जांचे जाते हैं, इसलिए ये जोड़े याद कीजिए: वितस्ता-झेलम, अस्किनी-चिनाब, परुष्णी-रावी, विपाशा-व्यास और शुतुद्री-सतलज। यह भी ध्यान रखिए कि विजयी भरत जन का नाम ही आगे चलकर देश के नाम भारत में सुरक्षित रहा, और इसी कारण यह युद्ध केवल एक स्थानीय संघर्ष नहीं माना जाता।
चार वर्णों का पहला उल्लेख करने वाला पुरुष सूक्त ऋग्वेद के किस मंडल में है?
- A.तीसरा मंडल
- B.सातवां मंडल
- C.नवां मंडल
- D.दसवां मंडल
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सही उत्तर: D. दसवां मंडल
व्याख्या
सही उत्तर D, दसवां मंडल है। पुरुष सूक्त में उस विराट पुरुष के यज्ञ का वर्णन है जिसके अंगों से ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र उत्पन्न बताए गए हैं, और यही चार वर्णों का पहला कथन है। दसवां मंडल ऋग्वेद के सबसे बाद के भागों में है, इसीलिए इतिहासकार मानते हैं कि वर्ण व्यवस्था पूर्व वैदिक काल के अंत में ही कठोर हुई।
विकल्प A, तीसरे मंडल में गायत्री मंत्र है जो सूर्य देवता सवितृ को समर्पित है। विकल्प B, सातवें मंडल में दाशराज्ञ युद्ध का वर्णन है। विकल्प C, नवां मंडल पूरी तरह सोम को समर्पित है। चूँकि प्रश्नपत्र इन चारों मंडलों को बारी-बारी पूछते हैं, इन्हें एक साथ याद रखना सबसे सुरक्षित है: तीन गायत्री, सात दाशराज्ञ, नौ सोम और दस पुरुष सूक्त।
ऋग्वेद में सर्वाधिक सूक्त किस देवता को समर्पित हैं?
- A.अग्नि
- B.इंद्र
- C.वरुण
- D.प्रजापति
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सही उत्तर: B. इंद्र
व्याख्या
सही उत्तर B, इंद्र है। वे वर्षा और युद्ध के देवता हैं, जिन्हें पुरंदर अर्थात किलों को तोड़ने वाला कहा गया, और ऋग्वेद के सर्वाधिक सूक्त उन्हीं को समर्पित हैं, जो उस समाज के अनुरूप है जिसका जीवन वर्षा और पशुओं पर टिका था।
विकल्प A, अग्नि दूसरे स्थान पर हैं और उन्हें वह दूत माना गया जो मनुष्यों की आहुति देवताओं तक पहुँचाते हैं; ऋग्वेद का पहला सूक्त उन्हीं का है, और अभ्यर्थी अक्सर इस पहले स्थान को सर्वाधिक संख्या समझ लेते हैं। विकल्प C, वरुण ऋत अर्थात विश्व की नैतिक व्यवस्था के रक्षक हैं, महत्वपूर्ण पर कम पूजे गए। विकल्प D, प्रजापति उत्तर वैदिक देवता हैं: वे ब्राह्मण ग्रंथों में ही सर्वोच्च सृष्टिकर्ता बनते हैं, तब तक इंद्र और अग्नि अपना पुराना महत्व खो चुके थे। प्रजापति का यही उत्थान स्वयं एक प्रिय प्रश्न है।
ऋग्वेद में किस नदी को नदीतमा अर्थात सबसे पवित्र नदी कहा गया है?
- A.गंगा
- B.सिंधु
- C.सरस्वती
- D.यमुना
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सही उत्तर: C. सरस्वती
व्याख्या
सही उत्तर C, सरस्वती है। ऋग्वेद उसे नदीतमा अर्थात नदियों में श्रेष्ठ कहता है और उसे नदी के साथ देवी भी मानता है। माना जाता है कि वह बाद में सूख गई, इसीलिए आगे की शताब्दियों के ग्रंथों में उसका वही महत्व नहीं रहा।
विकल्प B, सिंधु एक कठिन विकल्प है क्योंकि ऋग्वेद में सर्वाधिक बार उसी का उल्लेख हुआ है, परंतु सर्वाधिक उल्लेख और सर्वाधिक पवित्रता दो अलग बातें हैं और प्रश्नपत्र जानबूझकर दोनों को साथ रखते हैं। विकल्प A, गंगा का उल्लेख केवल एक बार दसवें मंडल में है और विकल्प D, यमुना का तीन बार; यही दुर्लभता इस बात का प्रमाण है कि पूर्व वैदिक लोग उत्तर-पश्चिम में रहते थे और पूर्व की ओर बाद में बढ़े। जोड़ा याद रखिए: सिंधु सर्वाधिक उल्लिखित, सरस्वती सर्वाधिक पूजित।