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GK क्विजभारतीय इतिहास

भारतीय इतिहास मिश्रित क्विज: सेट 13

  • 20 प्रश्न
  • 20 मिनट
  • कठिनाई: मध्यम
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इस क्विज के बारे में

भारतीय इतिहास मिश्रित क्विज़ (सेट 13) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 11 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: वैदिक काल, विश्व इतिहास: क्रांतियां और विश्व युद्ध, बौद्ध और जैन धर्म और अन्य। इनमें से 12 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय इतिहासमध्यम

आर्यों का मूल निवास आर्कटिक प्रदेश में होने का सिद्धांत किसने प्रस्तुत किया?

  1. A.मैक्स मूलर
  2. B.दयानंद सरस्वती
  3. C.बाल गंगाधर तिलक
  4. D.ए. सी. दास
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. बाल गंगाधर तिलक

व्याख्या

सही उत्तर C, बाल गंगाधर तिलक हैं, जिन्होंने अपनी पुस्तक द आर्कटिक होम इन द वेदाज में तर्क दिया कि वैदिक सूक्तों में लंबे दिन और लंबी रात की स्मृतियाँ सुरक्षित हैं, जिसे उन्होंने आर्कटिक मूल का प्रमाण माना।

विकल्प A, मैक्स मूलर वह जर्मन विद्वान थे जिन्होंने ऋग्वेद का संपादन किया और वैदिक अध्ययन की अधिकांश शब्दावली गढ़ी; उन्होंने मूल निवास मध्य एशिया बताया। विकल्प B, दयानंद सरस्वती, आर्य समाज के संस्थापक, तिब्बत को मूल स्थान मानते थे। विकल्प D, ए. सी. दास ने ऋग्वेदिक इंडिया में कहा कि आर्य सप्त सिंधव अर्थात सात नदियों की भूमि के ही मूल निवासी थे। इस अध्याय के प्रश्न प्रायः विद्वान और क्षेत्र के मिलान के रूप में आते हैं, इसलिए चारों जोड़े साथ याद कीजिए: तिलक और आर्कटिक, मैक्स मूलर और मध्य एशिया, दयानंद सरस्वती और तिब्बत, तथा ए. सी. दास और सप्त सिंधव।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: RRB ग्रुप D · 17 Sep 2018, Shift 1आसान

सौ वर्षीय युद्ध किन दो देशों के बीच लड़ा गया था?

  1. A.इंग्लैंड और फ्रांस
  2. B.इंग्लैंड और इटली
  3. C.इंग्लैंड और जर्मनी
  4. D.जर्मनी और फ्रांस
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. इंग्लैंड और फ्रांस

व्याख्या

सही उत्तर है A, इंग्लैंड और फ्रांस। सौ वर्षीय युद्ध इंग्लैंड और फ्रांस के बीच 1337 से 1453 तक चला, अर्थात वास्तव में 116 वर्ष, जिसके बीच लंबी संधियों के दौर भी रहे। इसकी शुरुआत तब हुई जब इंग्लैंड के एडवर्ड तृतीय ने फ्रांस की राजगद्दी पर अपना दावा जताया; इसके पीछे फ्रांस में इंग्लैंड की भूमि और फ्लैंडर्स के ऊन व्यापार पर नियंत्रण का प्रश्न भी था। लंबे धनुष की मदद से इंग्लैंड ने क्रेसी, प्वातिए और एजिनकोर्ट के प्रसिद्ध आरंभिक युद्ध जीते, पर 1429 में जोन ऑफ आर्क द्वारा ऑर्लेआं की घेराबंदी तोड़ने के बाद फ्रांस ने वापसी की, और 1453 तक अंग्रेजों के पास केवल कैले बचा। B गलत है क्योंकि इंग्लैंड और इटली के बीच ऐसा कोई युद्ध नहीं हुआ। C गलत है क्योंकि इंग्लैंड और जर्मनी बीसवीं सदी के विश्व युद्धों में आमने-सामने आए, चौदहवीं सदी में नहीं। D गलत है क्योंकि जर्मनी-फ्रांस का टकराव 1870-71 का फ्रांस-प्रशा युद्ध था, जो बहुत बाद का और छोटा था। परीक्षा टिप: सौ वर्षीय युद्ध 1337 से 1453, इंग्लैंड बनाम फ्रांस, 1429 में जोन ऑफ आर्क से मोड़।

Q3.भारतीय इतिहासमध्यम

जैन धर्म के प्राचीनतम ग्रंथ अंग किस भाषा में संकलित किए गए थे?

  1. A.पालि
  2. B.संस्कृत
  3. C.अर्धमागधी प्राकृत
  4. D.अपभ्रंश
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. अर्धमागधी प्राकृत

व्याख्या

सही उत्तर C, अर्धमागधी प्राकृत है। महावीर ने मगध की जनभाषा में उपदेश दिया और उनकी शिक्षा को सुरक्षित रखने वाले बारह अंग अर्धमागधी में हैं। इन्हें अंततः गुजरात के वल्लभी में देवर्धि क्षमाश्रमण की अध्यक्षता में हुई दूसरी जैन संगीति में लिपिबद्ध किया गया।

विकल्प A, पालि बौद्ध त्रिपिटक की भाषा है, जैन ग्रंथों की नहीं, और यही इस प्रश्न का सामान्य भ्रम है। विकल्प B, संस्कृत का प्रयोग परवर्ती जैन टीकाओं तथा भद्रबाहु के कल्पसूत्र जैसी रचनाओं में हुआ, मूल अंगों में नहीं। विकल्प D, अपभ्रंश प्राकृत का परवर्ती रूप है, जिसमें मध्यकालीन जैन काव्य लिखा गया। इस जोड़ी को ऐसे याद रखें: बौद्ध धर्म के साथ पालि और जैन धर्म के साथ अर्धमागधी, दोनों कर्मकांडी संस्कृत के विरोध में चुनी गईं। यही कारण था कि दोनों धर्म सामान्य जनता तक तेजी से पहुँचे, क्योंकि उपदेश उसी भाषा में मिला जो लोग प्रतिदिन बोलते थे।

Q4.भारतीय इतिहासपूछा गया: बिहार · BPSC 70th CCE Pre, 13 Dec 2024आसान

प्राचीन बिहार में 'हर्यक वंश' की स्थापना निम्नलिखित में से किस महान शासक ने की थी?

  1. A.बिंबिसार
  2. B.बृहद्रथ
  3. C.अजातशत्रु
  4. D.उपर्युक्त में से एक से अधिक
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. बिंबिसार

व्याख्या

सही उत्तर है A, बिंबिसार। बिंबिसार ने मगध में हर्यक वंश की नींव रखी और मगध को सोलह महाजनपदों में सबसे शक्तिशाली बनाने की शुरुआत की। उनकी राजधानी राजगृह थी, जो आज नालंदा जिले का राजगीर है, और वे गौतम बुद्ध के समकालीन व प्रशंसक थे। उन्होंने विवाह-संबंधों से अपनी शक्ति बढ़ाई: कोशल की राजकुमारी से, जो दहेज में काशी लाई; वैशाली के लिच्छवियों की चेल्लना से; और मद्र की खेमा से। उन्होंने आज के भागलपुर के आसपास का अंग राज्य भी जीता, जिससे गंगा के व्यापार पर मगध का नियंत्रण हो गया। विकल्प B गलत है, क्योंकि बृहद्रथ ने मगध के पुराने वंश की स्थापना की थी, जिससे जरासंध जुड़ा था। विकल्प C गलत है, क्योंकि अजातशत्रु बिंबिसार के पुत्र और उत्तराधिकारी थे, संस्थापक नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि इस वंश की स्थापना केवल एक शासक, बिंबिसार ने की। परीक्षा टिप: हर्यक वंश का क्रम बिंबिसार, अजातशत्रु, उदयिन; उदयिन ने राजधानी पाटलिपुत्र ले जाई।

Q5.भारतीय इतिहासकठिन

उत्तर वैदिक काल में लोहे को किस नाम से जाना जाता था?

  1. A.अयस
  2. B.कृष्ण अयस
  3. C.निष्क
  4. D.व्रीहि
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. कृष्ण अयस

व्याख्या

सही उत्तर B, कृष्ण अयस है, जिसका अर्थ है काली धातु; इसी अर्थ में श्याम अयस भी प्रयुक्त होता है। लोहा केवल उत्तर वैदिक काल में मिलता है, और उससे बने कुल्हाड़े तथा हल के फाल ने गंगा-यमुना दोआब के वन साफ करना संभव बनाया, इसीलिए इस एक शब्द का ऐतिहासिक महत्व इतना बड़ा है।

विकल्प A, अयस ऋग्वेद का सामान्य शब्द है जो धातु के लिए प्रयुक्त होता है और प्रायः तांबे या कांसे के अर्थ में लिया जाता है, लोहे के अर्थ में नहीं। विकल्प C, निष्क गले में पहनने का स्वर्ण आभूषण था जो आगे चलकर मूल्य की इकाई भी बना, परंतु वह सिक्का नहीं था और लोहे से उसका कोई संबंध नहीं। विकल्प D, व्रीहि चावल का नाम है, जो उत्तर वैदिक काल की ही देन है। परीक्षक इन चारों शब्दों को इसलिए आमने-सामने रखते हैं कि ये एक ही अध्याय से आते हैं।

Q6.भारतीय इतिहासपूछा गया: RRB NTPC · 12 Jun 2022, Shift 1 (CBT 2, Level 5)मध्यम

राजकुमारी रत्नावली की प्रेमकथा पर आधारित संस्कृत नाटक 'रत्नावली' किसने लिखा माना जाता है?

  1. A.कालिदास
  2. B.हर्ष
  3. C.भवभूति
  4. D.विशाखदत्त
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. हर्ष

व्याख्या

सही उत्तर है B, हर्ष। रत्नावली उन तीन संस्कृत नाटकों में से एक है जो कन्नौज के सम्राट हर्षवर्धन (शासन 606–647 ईस्वी) के लिखे माने जाते हैं; बाकी दो हैं प्रियदर्शिका और नागानंद। रत्नावली में सिंहल की राजकुमारी रत्नावली सागरिका के वेश में रहकर वत्स के राजा उदयन का प्रेम पाती है। हर्ष लेखक होने के साथ विद्या के बड़े संरक्षक थे: बाणभट्ट उनके दरबार में रहे और हर्षचरित तथा कादंबरी लिखी, चीनी यात्री ह्वेनसांग उनसे मिलने आया, और उन्होंने कन्नौज व प्रयाग में सभाएँ कराईं। A गलत है क्योंकि गुप्त युग के कालिदास ने अभिज्ञानशाकुंतलम्, मेघदूत और रघुवंश लिखे। C गलत है क्योंकि यशोवर्मन के दरबारी भवभूति ने उत्तररामचरित और मालतीमाधव लिखे। D गलत है क्योंकि विशाखदत्त ने चाणक्य और चंद्रगुप्त मौर्य पर मुद्राराक्षस लिखा। परीक्षा टिप: हर्ष के तीन नाटक रत्नावली, प्रियदर्शिका और नागानंद; उनके जीवनीकार बाणभट्ट।

Q7.भारतीय इतिहासकठिन

राजगृह में हुई प्रथम बौद्ध संगीति की अध्यक्षता किसने की थी?

  1. A.महाकस्सप
  2. B.आनंद
  3. C.उपालि
  4. D.मोग्गलिपुत्त तिस्स
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. महाकस्सप

व्याख्या

सही उत्तर A, महाकस्सप है। बुद्ध के महापरिनिर्वाण के तुरंत बाद अजातशत्रु के शासनकाल में राजगृह में हुई प्रथम बौद्ध संगीति की अध्यक्षता महाकस्सप ने की, जिसका उद्देश्य शिक्षा के विकृत होने से पहले उसे निश्चित रूप देना था।

विकल्प B, आनंद बुद्ध के निजी सेवक थे और इस संगीति में उपस्थित भी थे, जहाँ उन्होंने वे उपदेश सुनाए जो सुत्त पिटक बने, पर वे अध्यक्ष नहीं थे। विकल्प C, उपालि ने संघ के नियम सुनाए जो विनय पिटक कहलाए; वे नाई थे और संघ में सम्मिलित हुए थे। विकल्प D, मोग्गलिपुत्त तिस्स ने अशोक के समय पाटलिपुत्र की तृतीय संगीति की अध्यक्षता की और कथावत्थु ग्रंथ की रचना का श्रेय उन्हीं को दिया जाता है। यह प्रश्न ठीक इसी भेद को जाँचता है कि किसी संगीति की अध्यक्षता किसने की और उसमें कौन सा पाठ किसने सुनाया, इसलिए चारों नाम भूमिका सहित याद रखें।

Q8.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 03 Dec 2022, Shift 1कठिन

दिल्ली के राजवंशों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा क्रम सही है?

  1. A.खिलजी वंश, लोदी वंश, सैयद वंश
  2. B.तुगलक वंश, खिलजी वंश, सैयद वंश
  3. C.प्रारंभिक तुर्क शासक, राजपूत वंश, खिलजी वंश
  4. D.राजपूत वंश, खिलजी वंश, तुगलक वंश
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. राजपूत वंश, खिलजी वंश, तुगलक वंश

व्याख्या

सही उत्तर है D, राजपूत वंश, खिलजी वंश, तुगलक वंश। यही एकमात्र विकल्प है जिसमें हर वंश अपने से पहले वाले के बाद आता है। दिल्ली के शासकों का पूरा क्रम, जैसा NCERT की तालिका में है, यह है: बारहवीं सदी की शुरुआत में राजपूत वंश यानी तोमर और चौहान; 1206 से 1290 तक प्रारंभिक तुर्क शासक, जिनकी शुरुआत कुतुबुद्दीन ऐबक से हुई; 1290 से 1320 तक खिलजी वंश; 1320 से 1414 तक तुगलक वंश; 1414 से 1451 तक सैयद वंश; और 1451 से 1526 तक लोदी वंश, जो पानीपत में इब्राहिम लोदी के साथ खत्म हुआ। A गलत है क्योंकि सैयद लोदियों से पहले आए, बाद में नहीं। B गलत है क्योंकि खिलजी तुगलकों से पहले आए। C गलत है क्योंकि दिल्ली के राजपूत शासक तुर्क शासकों से पहले थे, बाद में नहीं। परीक्षा टिप: श्रृंखला याद रखें राजपूत, तुर्क (गुलाम), खिलजी, तुगलक, सैयद, लोदी और साल 1206, 1290, 1320, 1414, 1451, 1526।

Q9.भारतीय इतिहासमध्यम

उत्तर वैदिक काल का कौन सा राजकीय यज्ञ घोड़ा छोड़कर राजा के अधिकार क्षेत्र की घोषणा करता था?

  1. A.राजसूय
  2. B.वाजपेय
  3. C.अश्वमेध
  4. D.अग्निष्टोम
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. अश्वमेध

व्याख्या

सही उत्तर C, अश्वमेध अर्थात अश्व यज्ञ है। एक घोड़ा एक वर्ष तक स्वतंत्र घूमने के लिए छोड़ा जाता था और राजा के सैनिक उसकी रक्षा करते थे; वह जिस भी क्षेत्र से बिना चुनौती के गुजर जाता, वह राजा की अधीनता स्वीकार करता माना जाता था, और अंत में बड़े समारोह के साथ उस घोड़े की बलि दी जाती थी।

विकल्प A, राजसूय वह अभिषेक यज्ञ था जो राजा के सत्ता संभालने पर होता था और जिससे उसे सर्वोच्च अधिकार प्राप्त माना जाता था। विकल्प B, वाजपेय एक रथ दौड़ थी जिसे राजा का जीतना आवश्यक था और जो उसकी प्रतिष्ठा बढ़ाती थी। विकल्प D, अग्निष्टोम एक सोम यज्ञ था, विशेष रूप से राजकीय नहीं। ये तीनों राजकीय यज्ञ ऋग्वैदिक राजन से उत्तर वैदिक राजा तक के परिवर्तन के सूचक हैं, और प्रश्नपत्र इनका उद्देश्य से मिलान कराते हैं।

Q10.भारतीय इतिहासपूछा गया: CDS · CDS (I) 2022, 10 Apr 2022मध्यम

निम्नलिखित में से कौन-सी कृति कृष्णदेवराय ने राज्य-शासन (राजनीति) पर तेलुगु में रची थी?

  1. A.आमुक्तमाल्यद
  2. B.जाम्बवती कल्याणम्
  3. C.रायवाचकमु
  4. D.सत्यवधु परिणय
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. आमुक्तमाल्यद

व्याख्या

सही उत्तर है A, आमुक्तमाल्यद। कृष्णदेवराय ने यह तेलुगु काव्य लिखा और इसके एक भाग में बताया कि राजा को कैसे शासन करना चाहिए। तुलुव वंश के कृष्णदेवराय ने 1509 से 1529 तक विजयनगर पर शासन किया; वे स्वयं कवि थे, इसलिए उन्हें 'आंध्र भोज' कहा गया। आमुक्तमाल्यद में तमिल संत कवयित्री आंडाल और भगवान विष्णु के विवाह की कथा है, पर इतिहास की किताबें इसे राजनीति संबंधी सलाह के लिए उद्धृत करती हैं: राजा धर्म को ध्यान में रखकर शासन करे, बंदरगाह सुधारे, व्यापार बढ़ाए और प्रजा का ध्यान रखे। उनके दरबार में आठ तेलुगु कवि थे, जिन्हें 'अष्टदिग्गज' कहा जाता है। B गलत है, जाम्बवती कल्याणम् उनका संस्कृत नाटक है, राजनीति पर तेलुगु ग्रंथ नहीं। C गलत है, रायवाचकमु उनके शासन का बाद में लिखा गया तेलुगु गद्य विवरण है, जिसे दूसरों ने लिखा। D गलत है, सत्यवधु परिणय भी उनकी संस्कृत कृति मानी जाती है, तेलुगु राजनीति ग्रंथ नहीं। परीक्षा टिप: कृष्णदेवराय की तेलुगु कृति आमुक्तमाल्यद; संस्कृत कृति जाम्बवती कल्याणम्।

Q11.भारतीय इतिहासमध्यम

आरंभिक बौद्ध कला में चक्र अर्थात धर्मचक्र बुद्ध के जीवन की किस घटना का प्रतीक है?

  1. A.जन्म
  2. B.गृहत्याग
  3. C.प्रथम उपदेश
  4. D.महापरिनिर्वाण
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. प्रथम उपदेश

व्याख्या

सही उत्तर C, प्रथम उपदेश है। सांची और भरहुत के आरंभिक शिल्पी बुद्ध को मानव रूप में नहीं गढ़ते थे, इसलिए उन्होंने प्रतीकों का प्रयोग किया, और चक्र सारनाथ के प्रथम उपदेश का सूचक बना, जिसे स्वयं धर्मचक्र प्रवर्तन कहा जाता है।

विकल्प A, जन्म का प्रतीक इन शिल्पों में कमल तथा हाथी या वृषभ है। विकल्प B, गृहत्याग का प्रतीक बिना सवार का घोड़ा है, जो कपिलवस्तु से बुद्ध को ले जाने वाले कंथक की स्मृति है। विकल्प D, महापरिनिर्वाण का प्रतीक स्तूप है, अर्थात अवशेषों पर बना टीला, और इसीलिए बुद्ध के निधन के बाद स्तूपों की संख्या बढ़ती है। पदचिह्न और रिक्त सिंहासन उनकी सामान्य उपस्थिति के सूचक हैं। प्रतीकों का यह समूह कला एवं संस्कृति खंड में भी उतना ही पूछा जाता है।

Q12.भारतीय इतिहासपूछा गया: CDS · CDS (I) 2022, 10 Apr 2022आसान

निम्नलिखित में से कौन कर्नाटक में वीरशैव आंदोलन के संस्थापक थे?

  1. A.बसवन्ना
  2. B.अप्पार
  3. C.संबंदर
  4. D.सुंदरर
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. बसवन्ना

व्याख्या

सही उत्तर है A, बसवन्ना। बारहवीं सदी में कर्नाटक में वीरशैव या लिंगायत आंदोलन का नेतृत्व बसवन्ना ने किया। वे कल्याण में राजा बिज्जल के दरबार में मंत्री थे। उनके अनुयायी शिव की लिंग रूप में पूजा करते हैं और आमतौर पर एक छोटा लिंग शरीर पर धारण करते हैं; उन्होंने जाति, कर्मकांड और पुनर्जन्म के सिद्धांत पर सवाल उठाए और विधवा पुनर्विवाह का समर्थन किया। बसवन्ना और अल्लम प्रभु, अक्का महादेवी जैसे संतों ने सरल कन्नड़ में छोटे-छोटे 'वचन' कहकर उपदेश दिया और अनुभव मंडप में आध्यात्मिक चर्चा की। बाकी तीनों नाम तमिल क्षेत्र के संतों के हैं। B गलत है, अप्पार शिव के भक्त तमिल नयनार संत थे, कर्नाटक के आंदोलन के नेता नहीं। C गलत है, संबंदर भी तमिल नयनार थे, जिनके भजन तेवारम में संकलित हैं। D गलत है, सुंदरर भी एक तमिल नयनार संत थे। परीक्षा टिप: वीरशैव, बसवन्ना, कन्नड़ वचन; नयनार अप्पार, संबंदर और सुंदरर, तमिल तेवारम।

Q13.भारतीय इतिहासआसान

सत्यमेव जयते वाक्य किस ग्रंथ से लिया गया है?

  1. A.मुंडक उपनिषद
  2. B.छांदोग्य उपनिषद
  3. C.ऐतरेय ब्राह्मण
  4. D.शतपथ ब्राह्मण
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. मुंडक उपनिषद

व्याख्या

सही उत्तर A, मुंडक उपनिषद है, जो अथर्ववेद से संबंधित है। इसका अर्थ है सत्य की ही विजय होती है, और इसे राष्ट्रीय आदर्श वाक्य के रूप में अपनाया गया है तथा यह भारत के राजचिह्न के नीचे देवनागरी लिपि में अंकित है।

विकल्प B, छांदोग्य उपनिषद सामवेद से जुड़ा है और उद्दालक आरुणि के अपने पुत्र श्वेतकेतु को दिए उपदेश तथा तत्त्वमसि वाक्य के लिए प्रसिद्ध है। विकल्प C, ऐतरेय ब्राह्मण ऋग्वेद से संबंधित है और सोम यज्ञ तथा राजाओं के अभिषेक का वर्णन करता है। विकल्प D, शतपथ ब्राह्मण सबसे बड़ा ब्राह्मण ग्रंथ है और यजुर्वेद से जुड़ा है। सामान्य ज्ञान के प्रश्नपत्र इसे इतिहास और राजव्यवस्था दोनों खंडों में पूछते हैं, क्योंकि यह वाक्य उसी सारनाथ के सिंह शीर्ष के नीचे लिखा है जो राजचिह्न है।

Q14.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CPO · 10 Nov 2022, Shift 2मध्यम

निम्नलिखित में से कौन-सा युद्ध सालबाई की संधि के साथ समाप्त हुआ?

  1. A.पानीपत का तीसरा युद्ध
  2. B.बक्सर का युद्ध
  3. C.प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध
  4. D.द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध

व्याख्या

सही उत्तर है C, प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध। मई 1782 में हुई सालबाई की संधि ने अंग्रेज़ी ईस्ट इंडिया कंपनी और मराठों के बीच यह युद्ध समाप्त किया। युद्ध 1775 में तब शुरू हुआ जब कंपनी ने सूरत की संधि के ज़रिए रघुनाथ राव को पेशवा बनाने का समर्थन किया। 1779 में वडगाँव में अंग्रेज़ों की हार के बाद लड़ाई चलती रही, अंत में महादजी सिंधिया की मध्यस्थता से सालबाई में शांति हुई। संधि से अंग्रेज़ों को सालसेट मिला, माधव राव नारायण को पेशवा माना गया और दोनों शक्तियों के बीच लगभग बीस साल शांति रही। A गलत है क्योंकि पानीपत का तीसरा युद्ध, 1761, मराठों और अहमद शाह अब्दाली के बीच एक ही दिन में निपट गया था, किसी संधि से नहीं। B गलत है क्योंकि बक्सर के युद्ध, 1764, के बाद 1765 में इलाहाबाद की संधि हुई थी। D गलत है क्योंकि द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध 1803 में देवगाँव और सुर्जी-अर्जनगाँव की संधियों से समाप्त हुआ। परीक्षा टिप: मराठा संधियों का क्रम याद रखें, सूरत 1775, पुरंदर 1776, वडगाँव 1779, सालबाई 1782।

Q15.भारतीय इतिहासकठिन

जैन संघ का दिगंबर और श्वेतांबर संप्रदायों में विभाजन परंपरागत रूप से किस जोड़ी से जोड़ा जाता है?

  1. A.भद्रबाहु और स्थूलभद्र
  2. B.मक्खलि गोसाल और जमालि
  3. C.देवर्धि क्षमाश्रमण और हेमचंद्र
  4. D.वसुमित्र और अश्वघोष
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. भद्रबाहु और स्थूलभद्र

व्याख्या

सही उत्तर A, भद्रबाहु और स्थूलभद्र है। मगध के लंबे अकाल में भद्रबाहु मुनियों के एक दल को लेकर कर्नाटक के श्रवणबेलगोला गए, जबकि स्थूलभद्र उत्तर में रहकर पाटलिपुत्र में संगीति बुलाते रहे। लौटने पर दक्षिण के मुनियों ने बदले हुए आचार को अस्वीकार किया और संघ नग्न रहने वाले दिगंबर तथा श्वेत वस्त्र धारण करने वाले श्वेतांबर में बँट गया।

विकल्प B में मक्खलि गोसाल आजीवक संप्रदाय के संस्थापक थे और जमालि महावीर के जामाता तथा पहले मतभेदी, पर इस विभाजन के कारण ये नहीं थे। विकल्प C में देवर्धि क्षमाश्रमण बाद की वल्लभी संगीति के अध्यक्ष थे और हेमचंद्र चालुक्य काल के जैन विद्वान। विकल्प D में दिए दोनों नाम चतुर्थ बौद्ध संगीति के हैं। परंपरा चंद्रगुप्त मौर्य को भी भद्रबाहु के साथ श्रवणबेलगोला में रखती है।

Q16.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · Prelims GS Paper I, 5 Jun 2022कठिन

भारतीय इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. डचों ने पूर्वी तट पर अपने कारखाने/गोदाम गजपति शासकों द्वारा दी गई भूमि पर स्थापित किए।

2. अल्फांसो डी अल्बुकर्क ने गोवा को बीजापुर सल्तनत से छीना।

3. अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी ने मद्रास में कारखाना विजयनगर साम्राज्य के एक प्रतिनिधि से पट्टे पर ली गई भूमि पर स्थापित किया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

  1. A.केवल 1 और 2
  2. B.केवल 2 और 3
  3. C.केवल 1 और 3
  4. D.1, 2 और 3
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. केवल 2 और 3

व्याख्या

सही उत्तर है B, केवल 2 और 3। गोवा बीजापुर से छीना गया और मद्रास की जमीन विजयनगर के एक नायक से मिली, लेकिन डचों को पूर्वी तट की जमीन गजपतियों से नहीं मिली थी। अल्बुकर्क ने 1510 में गोवा बीजापुर की आदिलशाही सल्तनत से जीता, और यह पूर्व में पुर्तगाली शक्ति का केंद्र बना। 1639 में फ्रांसिस डे ने विजयनगर शासक के अधीन स्थानीय सरदार दामरला वेंकटाद्रि नायक से मद्रास की जगह ली, जहाँ फोर्ट सेंट जॉर्ज बना। कथन 1 गलत है, क्योंकि डचों ने मसूलीपट्टनम (1605) और पुलिकट (1610) जैसे कारखाने गोलकुंडा सल्तनत तथा विजयनगर और उसके नायकों से मिले अनुदान पर बनाए, जब ओडिशा में गजपति सत्ता बहुत पहले खत्म हो चुकी थी। इसलिए कथन 1 वाले विकल्प A, C और D गलत हैं। परीक्षा टिप: गोवा 1510 बीजापुर से, मद्रास 1639 विजयनगर के नायक से, डच मसूलीपट्टनम और पुलिकट में।

Q17.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 13 April 2022, Shift 1कठिन

ऋग्वेद में एक सूक्त ऋषि विश्वामित्र और देवी रूप में पूजित दो नदियों के संवाद के रूप में है। ये नदियाँ कौन हैं?

  1. A.गंगा और यमुना
  2. B.अलकनंदा और भागीरथी
  3. C.रावी और चिनाब
  4. D.ब्यास और सतलुज
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. ब्यास और सतलुज

व्याख्या

सही उत्तर है D, ब्यास और सतलुज। ऋग्वेद के तीसरे मंडल में एक सूक्त है जिसमें ऋषि विश्वामित्र दो नदियों — विपाशा और शुतुद्री — से संवाद करते हैं और उनसे जल कम करने की प्रार्थना करते हैं, ताकि उनका दल गाड़ियों के साथ पार उतर सके। विपाशा ही ब्यास है और शुतुद्री सतलुज। सूक्त में दोनों नदियाँ देवी के रूप में हैं और अपनी ही वाणी में ऋषि को उत्तर देती हैं। ऋग्वेद में कई नदियों का इसी भाव से उल्लेख है; नदीस्तुति सूक्त उन्हें पूर्व से पश्चिम की ओर गिनाता है और सिंधु तथा सरस्वती की स्तुति सबसे अधिक है। विकल्प A गलत है, क्योंकि ऋग्वेद में गंगा का उल्लेख केवल एक बार और यमुना का तीन बार है, और वे इस संवाद में नहीं हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि अलकनंदा और भागीरथी गंगा की धाराओं के बाद के नाम हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि रावी यानी परुष्णी दाशराज्ञ युद्ध के सूक्त से जुड़ी है और चिनाब का वैदिक नाम असिक्नी है। परीक्षा टिप: वैदिक नाम याद रखें — विपाशा (ब्यास), शुतुद्री (सतलुज), परुष्णी (रावी), असिक्नी (चिनाब), वितस्ता (झेलम)।

Q18.भारतीय इतिहासपूछा गया: उत्तर प्रदेश · UPPSC PCS Pre GS-I, 14 May 2023मध्यम

1857 में बरेली, उत्तर प्रदेश में क्रांति का नेता कौन था?

  1. A.नाना साहब
  2. B.खान बहादुर खान
  3. C.हज़रत महल
  4. D.कुंवर सिंह
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. खान बहादुर खान

व्याख्या

सही उत्तर है B, खान बहादुर खान। 31 मई 1857 को बरेली में सिपाहियों के विद्रोह के बाद रुहेला सरदार हाफ़िज़ रहमत खान के पोते खान बहादुर खान ने बरेली और रुहेलखंड के बड़े हिस्से की बागडोर संभाली। वे कंपनी के अधीन जज रह चुके थे और अंग्रेज़ी पेंशन पर जी रहे थे, फिर भी उन्होंने अपनी सरकार बनाई, कई हज़ार सैनिकों की सेना खड़ी की और मुग़ल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र के नाम पर शासन किया, जिन्होंने उन्हें अपना सूबेदार माना। मई 1858 में अंग्रेज़ों ने बरेली वापस ले ली; खान बहादुर खान नेपाल भाग गए, वहाँ से अंग्रेज़ों को सौंपे गए और 1860 में बरेली में उन्हें फाँसी दी गई। विकल्प A गलत है, क्योंकि पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब ने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व किया। विकल्प C गलत है, क्योंकि बेगम हज़रत महल ने अपने बेटे बिरजिस क़द्र के नाम पर लखनऊ में संघर्ष चलाया। विकल्प D गलत है, क्योंकि कुंवर सिंह ने बिहार में आरा के पास जगदीशपुर में विद्रोह का नेतृत्व किया। परीक्षा टिप: कानपुर–नाना साहब, लखनऊ–हज़रत महल, बरेली–खान बहादुर खान, झाँसी–लक्ष्मीबाई, आरा–कुंवर सिंह।

Q19.भारतीय इतिहासपूछा गया: RRB NTPC · 13 Aug, 2025, Shift 3मध्यम

निम्नलिखित में से किस बौद्ध ग्रंथ को उसके महत्व और उपदेशों के कारण प्रायः 'बौद्ध धर्म की गीता' कहा जाता है?

  1. A.महायान सूत्र
  2. B.धम्मपद
  3. C.वंसत्थपकासिनी
  4. D.सद्धर्मपुण्डरीक सूत्र
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. धम्मपद

व्याख्या

सही उत्तर है B, धम्मपद। धम्मपद में बुद्ध के उपदेश 423 छोटी-छोटी गाथाओं में 26 वर्गों के अंतर्गत संकलित हैं, और क्योंकि यह पूरे धर्म का सार ऐसी सरल गाथाओं में रखता है जिन्हें कोई भी याद रख सके, इसे प्रायः बौद्ध धर्म की गीता कहा जाता है। यह पालि भाषा में है और सुत्त पिटक के पाँच निकायों में से एक खुद्दक निकाय का हिस्सा है। इसके अध्याय मन, क्रोध, तृष्णा, बाल और पंडित तथा निर्वाण के मार्ग जैसे विषयों पर हैं। A गलत है क्योंकि महायान सूत्र कोई एक ग्रंथ नहीं, बल्कि बाद के संस्कृत ग्रंथों का पूरा वर्ग है। C गलत है क्योंकि वंसत्थपकासिनी श्रीलंका के इतिहास ग्रंथ महावंस पर लिखी गई टीका है, उपदेश ग्रंथ नहीं। D गलत है क्योंकि सद्धर्मपुण्डरीक अर्थात लोटस सूत्र एक प्रमुख महायान ग्रंथ है और पालि त्रिपिटक से काफी बाद का है। परीक्षा टिप: त्रिपिटक = विनय पिटक, सुत्त पिटक और अभिधम्म पिटक; धम्मपद सुत्त पिटक के भीतर आता है।

Q20.भारतीय इतिहासपूछा गया: RRB ग्रुप D · 20 Sept 2018, Shift 3आसान

बौद्ध धर्म में त्रिरत्न का अर्थ क्या है?

  1. A.त्रिपिटक
  2. B.बुद्ध, धम्म (धर्म), संघ
  3. C.सत्य, अहिंसा, करुणा
  4. D.शील, समाधि, संघ
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. बुद्ध, धम्म (धर्म), संघ

व्याख्या

सही उत्तर है B, बुद्ध, धम्म (धर्म), संघ। त्रिरत्न का अर्थ वे तीन रत्न हैं जिनकी शरण बौद्ध अनुयायी लेता है। बुद्ध ज्ञान प्राप्त गुरु हैं, धम्म उनका उपदेश है जिसमें चार आर्य सत्य और अष्टांगिक मार्ग आते हैं, और संघ भिक्षुओं-भिक्षुणियों का वह समुदाय है जो इस उपदेश को आगे ले जाता है। अनुयायी इन तीनों की शरण लेने की प्रतिज्ञा दोहराकर विधिवत बौद्ध बनता है, इसीलिए त्रिरत्न को इस धर्म का प्रवेश द्वार माना जाता है। A गलत है क्योंकि त्रिपिटक पाली भाषा में लिखा बौद्ध ग्रंथ-संग्रह है, जिसमें विनय, सुत्त और अभिधम्म पिटक शामिल हैं, त्रिरत्न नहीं। C गलत है क्योंकि सत्य, अहिंसा और करुणा भारतीय चिंतन के आदर्श हैं, पर त्रिरत्न नहीं हैं। D गलत है क्योंकि बौद्ध त्रिविध साधना शील, समाधि और प्रज्ञा है, और इस विकल्प में प्रज्ञा की जगह संघ रख दिया गया है। परीक्षा टिप: बौद्ध त्रिरत्न - बुद्ध, धम्म, संघ; जैन त्रिरत्न - सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चरित्र।

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