ताँबा प्रगलन संयंत्रों (कॉपर स्मेल्टिंग प्लांट्स) को लेकर चिंता क्यों है? 1. वे पर्यावरण में घातक मात्रा में कार्बन मोनोऑक्साइड छोड़ सकते हैं। 2. ताँबे के धातुमल (स्लैग) से कुछ भारी धातुओं का पर्यावरण में निक्षालन हो सकता है। 3. वे प्रदूषक के रूप में सल्फ़र डाइऑक्साइड छोड़ सकते हैं। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- A.केवल 1 और 2
- B.केवल 2 और 3
- C.केवल 1 और 3
- D.1, 2 और 3
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, केवल 2 और 3। ताँबा प्रगलन की चिंता सल्फ़र डाइऑक्साइड के उत्सर्जन और धातुमल से भारी धातुओं के रिसाव को लेकर है, घातक कार्बन मोनोऑक्साइड को लेकर नहीं।
अधिकांश ताँबा चाल्कोपाइराइट (CuFeS2) जैसे सल्फ़ाइड अयस्कों से मिलता है। इन अयस्कों को भूनने और गलाने पर सल्फ़र, सल्फ़र डाइऑक्साइड के रूप में निकलता है, जो पकड़ा न जाए तो अम्ल वर्षा और साँस की बीमारियाँ पैदा करता है; आम तौर पर इसे सल्फ़्यूरिक अम्ल में बदला जाता है। गलाने के बाद बचे धातुमल में आर्सेनिक, सीसा, कैडमियम, जस्ता जैसी धातुओं के अंश रहते हैं, जो खुले में फेंकने पर मिट्टी और भूजल में घुल सकते हैं। इन्हीं चिंताओं के कारण भारत में ताँबा संयंत्रों के विरुद्ध आंदोलन हुए।
A गलत है: इसमें कथन 1 शामिल है; कार्बन मोनोऑक्साइड ईंधन के अधूरे दहन से बनती है और ताँबा संयंत्रों का मुख्य प्रदूषक नहीं है।
C गलत है: इसमें कथन 1 है और कथन 2 की धातुमल वाली समस्या छूट जाती है।
D गलत है: कथन 1 मान्य चिंता नहीं है, इसलिए तीनों सही नहीं हो सकते।
परीक्षा टिप: सल्फ़ाइड अयस्क + प्रगलन = SO2; धातुमल के ढेर = भारी धातुओं का रिसाव।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंकिसी तालाब, महासागर, वन या एक्वेरियम जैसे अपने परिवेश सहित एक जैविक समुदाय को क्या कहा जाता है?
- A.बायोम (जीवोम)
- B.समुदाय
- C.अजैविक पर्यावरण
- D.पारितंत्र
उत्तर देखें
पारितंत्र जीवों का एक समुदाय और उसके साथ क्रिया करने वाला निर्जीव पर्यावरण है, और यह महासागर जितना बड़ा या एक्वेरियम जितना छोटा हो सकता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
I. भारत में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन 0.5 t CO2/प्रति व्यक्ति से कम है।
II. ईंधन दहन से CO2 उत्सर्जन के मामले में भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में दूसरे स्थान पर है।
III. भारत में बिजली और ऊष्मा उत्पादक CO2 उत्सर्जन के सबसे बड़े स्रोत हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल I और III
- B.केवल II
- C.केवल II और III
- D.I, II और III
उत्तर देखें
ईंधन दहन से CO2 उत्सर्जन में भारत एशिया-प्रशांत में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा उत्सर्जक है और बिजली व ऊष्मा उत्पादन इसका सबसे बड़ा स्रोत है, पर इसका प्रति व्यक्ति उत्सर्जन 0.5 टन से काफ़ी अधिक है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →'घरेलू अंश आवश्यकता' (डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट) शब्द कभी-कभी समाचारों में किसके संदर्भ में दिखाई देता है?
- A.हमारे देश में सौर ऊर्जा उत्पादन का विकास
- B.हमारे देश में विदेशी टी.वी. चैनलों को लाइसेंस देना
- C.हमारे खाद्य उत्पादों का अन्य देशों को निर्यात
- D.विदेशी शैक्षणिक संस्थानों को हमारे देश में अपने परिसर स्थापित करने की अनुमति
उत्तर देखें
घरेलू अंश आवश्यकता (DCR) वह नियम है जिसके अनुसार कुछ सौर परियोजनाओं में भारत में बने सौर सेल और मॉड्यूल ही लगाने होते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से किसके संदर्भ में कुछ वैज्ञानिक पक्षाभ मेघ विरलन (सिरस क्लाउड थिनिंग) तकनीक और समतापमंडल में सल्फेट वायुविलय के अंतःक्षेपण के उपयोग का सुझाव देते हैं?
- A.कुछ क्षेत्रों में कृत्रिम वर्षा कराना
- B.उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की बारंबारता और तीव्रता घटाना
- C.पृथ्वी पर सौर पवनों के प्रतिकूल प्रभाव घटाना
- D.भूमंडलीय तापन घटाना
उत्तर देखें
दोनों उपाय भू-अभियांत्रिकी (जियोइंजीनियरिंग) के प्रस्ताव हैं, जिनका उद्देश्य पृथ्वी में आने या उससे जाने वाली ऊष्मा बदलकर ग्रह को ठंडा करना है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से किनकी प्रजातियाँ अन्य जीवों के साथ सहजीवी संबंध स्थापित कर सकती हैं?
1. नाइडेरियन
2. कवक
3. प्रोटोज़ोआ
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- A.केवल 1 और 2
- B.केवल 2 और 3
- C.केवल 1 और 3
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
नाइडेरियन, कवक और प्रोटोज़ोआ, तीनों में ऐसी प्रजातियाँ हैं जो अन्य जीवों के साथ घनिष्ठ, परस्पर लाभकारी साझेदारी में रहती हैं।
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