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GK24
विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

सीईपीआई (CEPI) का पूरा नाम क्या है?

  1. A.काउंसिल फॉर एपिडेमिक प्रिवेंशन इन इंडिया
  2. B.कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रीपेयर्डनेस इनोवेशन
  3. C.सेंटर फॉर इमर्जिंग पैथोजन इन्वेस्टिगेशन
  4. D.कमीशन फॉर एपिडेमिक पॉलिसी एंड इम्युनाइजेशन

सही उत्तर

B. कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रीपेयर्डनेस इनोवेशन

व्याख्या

सही उत्तर है कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रीपेयर्डनेस इनोवेशन। इसके बोर्ड और इन्वेस्टर्स काउंसिल की बैठक नई दिल्ली में हुई तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग और सीईपीआई ने मिलकर इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में उच्च स्तरीय रिसेप्शन आयोजित किया। इस बैठक के साथ संगठन की गवर्नेंस एक दशक बाद भारत लौटी। भारत इस गठबंधन का संस्थापक सदस्य और लंबे समय से रणनीतिक भागीदार रहा है। जैव प्रौद्योगिकी विभाग तथा बीआईआरएसी सीईपीआई के साथ एक त्रिपक्षीय रणनीति पर काम करते हैं, जो पहली बार अक्तूबर 2019 में लागू हुई और सितंबर 2025 में पांच और वर्षों के लिए बढ़ाई गई। विकल्प A, C और D गढ़े हुए नाम हैं और विज्ञप्ति में कहीं नहीं आते। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थाओं के संक्षिप्त नाम अक्सर पूछे जाते हैं, इसलिए हर अक्षर का सही शब्द याद रखें।

पूरा लेख पढ़ें: भारत मात्रा के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक

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Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

विज्ञप्ति के अनुसार 2025 में भारत की जैव-अर्थव्यवस्था का आकार कितना था?

  1. A.165.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर
  2. B.185.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर
  3. C.195.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर
  4. D.215.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 195.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर

व्याख्या

सही उत्तर है 195.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर। भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2025 में इस आकार तक पहुंची और इसमें अठारह प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज हुई। देश का बायोटेक स्टार्टअप इकोसिस्टम बढ़कर 11 हजार 855 स्टार्टअप तक पहुंचा, जिनमें से 1 हजार 780 अकेले उसी वर्ष जुड़े, और बायोफार्मा क्षेत्र की हिस्सेदारी जैव-अर्थव्यवस्था में लगभग तीस प्रतिशत है। मंत्री ने इन्हीं आंकड़ों के आधार पर कहा कि भारत की क्षमताओं को अब केवल वैक्सीन निर्माण के नजरिए से नहीं देखा जा सकता, क्योंकि देश उन्नत वैक्सीन तकनीक और जटिल जैविक उत्पादों की ओर बढ़ चुका है। विकल्प A, B और D में दिए आंकड़े विज्ञप्ति में नहीं हैं। परीक्षा में ऐसा आंकड़ा उसके वर्ष और वृद्धि दर के साथ पूछा जाता है, इसलिए तीनों बातें साथ याद रखें।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

आईएनडी-सीईपीआई मिशन के तहत सामने आई भारत की पहली एमआरएनए कोविड-19 वैक्सीन कौन सी है?

  1. A.जीईएमसीओवीएसी-19
  2. B.भारतवैक-19
  3. C.नैनोकोव-21
  4. D.सारबेवैक्स-19
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. जीईएमसीओवीएसी-19

व्याख्या

सही उत्तर है जीईएमसीओवीएसी-19। भारत केंद्रित सीईपीआई मिशन, आईएनडी-सीईपीआई, को बीआरआईसी-टीएचएसटीआई और बीआईआरएसी लागू करते हैं और यह वैक्सीन इसके महत्वपूर्ण नतीजों में शामिल है। इसे आपात इस्तेमाल की मंजूरी मिली थी। इस मिशन के अन्य परिणामों में एक इनएक्टिवेटेड चिकनगुनिया वैक्सीन कैंडिडेट शामिल है, जिसके फेज II और फेज III परीक्षण चल रहे हैं, तथा मंकीपॉक्स और पैन-सारबेकोवायरस के लिए मल्टीवैलेंट सेल्फ-असेम्बल्ड नैनोकेज तकनीक पर आधारित कैंडिडेट, जो उन्नत प्री-क्लिनिकल चरण में हैं। साझेदारी ने साझा ढांचा भी बनाया, क्योंकि बीआरआईसी-टीएचएसटीआई बायोएसे लैबोरेटरी सीईपीआई की 17 केंद्रीकृत नेटवर्क प्रयोगशालाओं में से एक है और इसने आठ वैक्सीन कैंडिडेट को सहयोग दिया है और वैक्सीन विकास के लिए एक लाख से अधिक नमूनों की जांच की है। विकल्प B, C और D गढ़े हुए नाम हैं और विज्ञप्ति में इनका कोई उल्लेख नहीं है। परीक्षा में वैक्सीन का नाम, उसका प्लेटफॉर्म और उसे तैयार करने वाला मिशन, तीनों साथ याद रखने चाहिए।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

जीएसएलवी-एफ17 के सफल प्रक्षेपण पर इसरो को किसने बधाई दी?

  1. A.राष्ट्रपति
  2. B.उपराष्ट्रपति
  3. C.प्रधानमंत्री
  4. D.शिक्षा मंत्री
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. प्रधानमंत्री

व्याख्या

सही उत्तर प्रधानमंत्री है। यह विज्ञप्ति प्रधानमंत्री कार्यालय ने जारी की थी और इसमें बताया गया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस प्रक्षेपण को इसरो की एक और शानदार उपलब्धि तथा देश के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने अपनी बात एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से रखी। उनके अनुसार यह सफल प्रक्षेपण भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की उत्कृष्टता, नवाचार और बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इसरो और भारतीय उद्योग के बीच गहरी होती साझेदारी अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ताकत और विस्तार दे रही है तथा पूरे अंतरिक्ष इकोसिस्टम में देश की क्षमताएं बढ़ा रही है। विकल्प क में दिए राष्ट्रपति और विकल्प ख में दिए उपराष्ट्रपति वे दो पद हैं जिन्हें छात्र अक्सर प्रधानमंत्री की जगह चुन लेते हैं, पर ये कथन उनके नहीं हैं। विकल्प घ में दिए शिक्षा मंत्री का इस प्रक्षेपण से कोई संबंध नहीं है।

Q4.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

ईओएस-05 उपग्रह को किस प्रक्षेपण यान से अंतरिक्ष में भेजा गया?

  1. A.पीएसएलवी-सी58
  2. B.जीएसएलवी-एफ17
  3. C.एलवीएम3-एम4
  4. D.एसएसएलवी-डी3
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. जीएसएलवी-एफ17

व्याख्या

सही उत्तर जीएसएलवी-एफ17 है। विज्ञप्ति के अनुसार इसरो ने ईओएस-05 उपग्रह ले जा रहे जीएसएलवी-एफ17 का सफल प्रक्षेपण किया और प्रधानमंत्री ने इस उपलब्धि पर अंतरिक्ष एजेंसी की सराहना की। जीएसएलवी का पूरा नाम जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल है और एफ17 इसी रॉकेट परिवार की इस विशेष उड़ान को दर्शाता है। विकल्प क में दिया पीएसएलवी यानी पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल एक अलग रॉकेट परिवार है और इस विज्ञप्ति में उसका कोई उल्लेख नहीं है। विकल्प ग में दिया एलवीएम3 भारी उपग्रहों के लिए प्रयुक्त यान है, जिसका इस प्रक्षेपण से कोई संबंध नहीं है। विकल्प घ में दिया एसएसएलवी छोटे उपग्रहों के लिए बना यान है और वह भी यहां नहीं आता। छात्र अक्सर रॉकेट और उपग्रह के नाम आपस में मिला देते हैं, इसलिए जीएसएलवी-एफ17 और ईओएस-05 को हमेशा एक जोड़ी के रूप में याद रखना चाहिए। प्रधानमंत्री ने इस उड़ान को देश के लिए गर्व का क्षण बताया था।

Q5.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

ईओएस-05 किस कक्षा से काम करने वाला भारत का पहला इमेजिंग उपग्रह है?

  1. A.निम्न भू कक्षा
  2. B.सूर्य तुल्यकालिक कक्षा
  3. C.जियोसिंक्रोनस कक्षा
  4. D.ध्रुवीय कक्षा
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. जियोसिंक्रोनस कक्षा

व्याख्या

सही उत्तर जियोसिंक्रोनस कक्षा है। इस विज्ञप्ति में ईओएस-05 की सबसे बड़ी विशेषता यही बताई गई है कि यह जियोसिंक्रोनस कक्षा से काम करने वाला भारत का पहला इमेजिंग उपग्रह है। यही एक तथ्य इस प्रक्षेपण को परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाता है और प्रधानमंत्री ने भी अपने संदेश में यही शब्द इस्तेमाल किए। इस कक्षा में रखा गया उपग्रह पृथ्वी के घूर्णन के साथ चलता है, इसलिए वह लगभग एक ही क्षेत्र के ऊपर बना रहता है। विकल्प क में दी निम्न भू कक्षा में बहुत से उपग्रह काम करते हैं, लेकिन विज्ञप्ति में ईओएस-05 को वहां नहीं बताया गया है। विकल्प ख में दी सूर्य तुल्यकालिक कक्षा और विकल्प घ में दी ध्रुवीय कक्षा पहले के दूर संवेदन उपग्रहों से जुड़ी हैं, इसीलिए ये आकर्षक भ्रामक विकल्प बनते हैं। इनमें से कोई भी इस विज्ञप्ति में नहीं है। उपलब्धि के शब्द ठीक से याद रखें।