संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय (UNCCD) का/के क्या महत्त्व है/हैं? 1. इसका उद्देश्य नवाचारी राष्ट्रीय कार्यक्रमों और सहायक अंतरराष्ट्रीय भागीदारियों के माध्यम से प्रभावी कार्रवाई को बढ़ावा देना है। 2. इसका विशेष ध्यान दक्षिण एशिया और उत्तरी अफ्रीका क्षेत्रों पर है, और इसका सचिवालय वित्तीय संसाधनों का बड़ा भाग इन क्षेत्रों को आवंटित कराने में सहायता करता है। 3. यह नीचे से ऊपर (बॉटम-अप) दृष्टिकोण के लिए प्रतिबद्ध है, जो मरुस्थलीकरण से लड़ने में स्थानीय लोगों की भागीदारी को प्रोत्साहित करता है। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- A.केवल 1
- B.केवल 2 और 3
- C.केवल 1 और 3
- D.1, 2 और 3
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C, केवल 1 और 3। UNCCD राष्ट्रीय कार्य-कार्यक्रमों, अंतरराष्ट्रीय भागीदारी और स्थानीय सहभागिता से काम करता है, पर इसका विशेष ध्यान अफ्रीका पर है, दक्षिण एशिया और उत्तरी अफ्रीका पर नहीं।
संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय 1994 में पेरिस में अपनाया गया और 1996 में लागू हुआ। यह पर्यावरण और विकास को सतत भूमि प्रबंधन से जोड़ने वाला एकमात्र कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता है। देश राष्ट्रीय कार्य-कार्यक्रम बनाते हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय सहयोग और भागीदारी का समर्थन मिलता है, इसलिए कथन 1 सही है। अभिसमय नीचे से ऊपर दृष्टिकोण पर ज़ोर देता है, जिसमें स्थानीय समुदाय कार्यक्रम बनाने और चलाने में भाग लेते हैं, इसलिए कथन 3 सही है। 17 जून विश्व मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम दिवस है, और भारत ने 2019 में नई दिल्ली में COP14 की मेज़बानी की।
कथन 2 गलत है: अभिसमय का पूरा नाम गंभीर सूखे और/या मरुस्थलीकरण झेल रहे देशों, विशेषकर अफ्रीका, का उल्लेख करता है, और इसमें अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका, उत्तरी भूमध्यसागर तथा मध्य और पूर्वी यूरोप के लिए क्षेत्रीय परिशिष्ट हैं।
इसलिए A में कथन 3 छूट जाता है, जबकि B और D में असत्य कथन 2 शामिल है।
परीक्षा टिप: UNCCD = 1994, पेरिस; अफ्रीका पर विशेष ध्यान; बॉटम-अप दृष्टिकोण; भारत ने 2019 में COP14 की मेज़बानी की।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन-सा जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र भारत के तीन राज्यों में फैला है?
- A.देहांग देबांग
- B.नीलगिरि
- C.नोकरेक
- D.शेषाचलम
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है B, नीलगिरि। नीलगिरि जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक में फैला है, उस जगह जहाँ पश्चिमी और पूर्वी घाट मिलते हैं।
1986 में स्थापित नीलगिरि जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र भारत का पहला जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र था, और 2000 में यह यूनेस्को के विश्व जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र नेटवर्क में शामिल होने वाला भारत का पहला क्षेत्र बना। इसमें मुदुमलाई, वायनाड, बांदीपुर, नागरहोल, मुकुर्ती और साइलेंट वैली जैसे संरक्षित क्षेत्र आते हैं। यहाँ नीलगिरि तहर, शेर-पूँछ मकाक और भारत में एशियाई हाथियों व बाघों की सबसे बड़ी आबादियों में से एक रहती है, और टोडा, कोटा व कुरुम्बा जैसी जनजातियाँ बसती हैं।
A गलत है: देहांग देबांग पूरी तरह अरुणाचल प्रदेश में है।
C गलत है: नोकरेक मेघालय की गारो पहाड़ियों में है।
D गलत है: शेषाचलम आंध्र प्रदेश के पूर्वी घाट में है।
परीक्षा टिप: नीलगिरि = पहला जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (1986), तीन राज्य; अगस्त्यमलै केरल और तमिलनाडु में; मन्नार की खाड़ी पहला समुद्री जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र।
ब्लू बेबी सिंड्रोम किसके संदूषण से होता है?
- A.नाइट्राइट (NO2)
- B.सल्फ़ाइट (SO3)
- C.नाइट्रेट (NO3)
- D.सल्फ़ेट (SO4)
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है C, नाइट्रेट (NO3)। ब्लू बेबी सिंड्रोम, यानी मेथीमोग्लोबिनीमिया, उन शिशुओं को होता है जो अधिक नाइट्रेट वाला पानी पीते हैं; यह नाइट्रेट प्रायः उर्वरकों के बहाव या सीवेज से आता है।
शिशु के पाचन तंत्र में नाइट्रेट नाइट्राइट में बदल जाता है, जो हीमोग्लोबिन के लोहे को ऑक्सीकृत करके उसे मेथीमोग्लोबिन बना देता है। मेथीमोग्लोबिन ऑक्सीजन नहीं ढो पाता, इसलिए शिशु की त्वचा और होंठ नीले पड़ने लगते हैं। छह महीने से छोटे शिशुओं को सबसे अधिक खतरा होता है, क्योंकि उनका आमाशय कम अम्लीय होता है और उनका हीमोग्लोबिन आसानी से बदल जाता है। भारतीय मानक ब्यूरो ने पेयजल में नाइट्रेट की सीमा 45 मिलीग्राम प्रति लीटर तय की है। अधिक उर्वरक वाले कृषि क्षेत्रों का भूजल इसका सामान्य स्रोत है।
A गलत है: नाइट्राइट शरीर के भीतर बनने वाला मध्यवर्ती पदार्थ है, पर रोग पैदा करने वाला जल-संदूषक नाइट्रेट है।
B गलत है: सल्फ़ाइट खाद्य परिरक्षक है और इस रोग से जुड़ा नहीं है।
D गलत है: अधिक सल्फ़ेट से पानी कड़वा लगता है और दस्त हो सकते हैं, ब्लू बेबी सिंड्रोम नहीं।
परीक्षा टिप: नाइट्रेट = ब्लू बेबी सिंड्रोम; फ्लोराइड = फ्लोरोसिस; आर्सेनिक = ब्लैकफुट रोग; कैडमियम = इटाई-इटाई; पारा = मिनामाता रोग।
खाद और जैविक खेती के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्मीकम्पोस्ट कार्बनिक पदार्थों और पोषक तत्वों से भरपूर होता है। 2. जैविक खेती में जैव-उर्वरकों और जैव-कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया जाता। 3. फसल चक्र कीटों, पीड़कों और खरपतवारों के नियंत्रण में लाभदायक है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 1 और 3
- C.केवल 2 और 3
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है B, केवल 1 और 3। वर्मीकम्पोस्ट पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद है और फसल चक्र कीटों व खरपतवारों को रोकता है, पर जैविक खेती में जैव-उर्वरक और जैव-कीटनाशक प्रयोग होते हैं।
जैविक खेती में रासायनिक उर्वरक, रासायनिक कीटनाशक और आनुवंशिक रूप से संशोधित बीज नहीं अपनाए जाते। इनकी जगह गोबर की खाद, कम्पोस्ट और वर्मीकम्पोस्ट का प्रयोग होता है। वर्मीकम्पोस्ट केंचुए जैविक कचरे से बनाते हैं और यह ह्यूमस व पोषक तत्वों से भरपूर होता है, इसलिए कथन 1 सही है। जैविक खेती राइजोबियम, एज़ोटोबैक्टर और नील-हरित शैवाल जैसे जैव-उर्वरकों तथा नीम अर्क और ट्राइकोडर्मा जैसे जैव-कीटनाशकों पर टिकी है, इसलिए कथन 2 गलत है। फसल चक्र किसी एक फसल से जुड़े कीटों और खरपतवारों का जीवन-चक्र तोड़ता है और मिट्टी की उर्वरता भी लौटाता है, इसलिए कथन 3 सही है।
A गलत है: कथन 3 भी सही है।
C गलत है: कथन 2 असत्य है और कथन 1 सत्य है।
D गलत है: कथन 2 असत्य है, क्योंकि जैविक साधन ही जैविक खेती का आधार हैं।
परीक्षा टिप: जैविक खेती रसायनों को ना कहती है, जीव-आधारित साधनों को नहीं; जैव-उर्वरक, जैव-कीटनाशक, कम्पोस्ट और फसल चक्र इसी का हिस्सा हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सा एक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत नहीं है?
- A.सौर
- B.पवन
- C.नाभिकीय
- D.जलविद्युत
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है C, नाभिकीय। नाभिकीय ऊर्जा यूरेनियम और थोरियम से बनती है, जो खनन से मिलने वाले सीमित खनिज हैं; इसलिए कम कार्बन होने के बावजूद यह अनवीकरणीय स्रोत है।
नवीकरणीय स्रोत वह है जिसकी प्रकृति मानव समय-सीमा में भरपाई कर देती है, जैसे सूर्य का प्रकाश, पवन, बहता जल, जैव-भार, ज्वार और पृथ्वी की आंतरिक ऊष्मा। नाभिकीय रिएक्टर यूरेनियम-235 का विखंडन करते हैं या ब्रीडर व्यवस्था में थोरियम से बने ईंधन का उपयोग करते हैं। एक बार उपयोग के बाद यह ईंधन लौटता नहीं, बल्कि लंबे समय तक रहने वाला रेडियोधर्मी कचरा छोड़ता है। होमी भाभा द्वारा बनाया गया भारत का तीन-चरणीय नाभिकीय कार्यक्रम कम यूरेनियम और अधिक थोरियम भंडार का अधिकतम उपयोग करने के लिए है, पर इससे ईंधन नवीकरणीय नहीं हो जाता।
विकल्प A गलत है, क्योंकि सौर ऊर्जा सूर्य से आती है, जो अरबों वर्षों तक चमकता रहेगा। विकल्प B गलत है, क्योंकि पवन सूर्य द्वारा पृथ्वी के असमान गर्म होने से बनती है। विकल्प D गलत है, क्योंकि जलविद्युत जल-चक्र से लगातार बहते पानी का उपयोग करती है।
परीक्षा टिप: स्वच्छ हमेशा नवीकरणीय नहीं होता; नाभिकीय कम-कार्बन पर अनवीकरणीय है।
'R2 कोड ऑफ प्रैक्टिसेज़' किसे अपनाने को बढ़ावा देने के लिए उपलब्ध एक साधन है?
- A.इलेक्ट्रॉनिक्स पुनर्चक्रण उद्योग में पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी प्रथाएँ
- B.रामसर अभिसमय के तहत 'अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों' का पारिस्थितिक प्रबंधन
- C.निम्नीकृत भूमि पर कृषि फसलों की खेती में संधारणीय प्रथाएँ
- D.प्राकृतिक संसाधनों के दोहन में 'पर्यावरणीय प्रभाव आकलन'
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है A, इलेक्ट्रॉनिक्स पुनर्चक्रण उद्योग में पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी प्रथाएँ। R2, यानी रिस्पॉन्सिबल रीसाइक्लिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स के पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी पुनर्चक्रण का मानक है।
R2 मानक अमेरिका की पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) के सहयोग से बना और अब गैर-लाभकारी संस्था SERI (सस्टेनेबल इलेक्ट्रॉनिक्स रीसाइक्लिंग इंटरनेशनल) इसका प्रबंधन करती है। R2 प्रमाणित पुनर्चक्रण और मरम्मत करने वाली फर्मों को पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामान को सुरक्षित ढंग से संभालना, कामगारों के स्वास्थ्य की रक्षा करना, पुराने उपकरणों का डेटा सुरक्षित रखना, और सीसा, पारा तथा कैडमियम जैसे खतरनाक भागों पर नज़र रखनी होती है, ताकि उन्हें गैर-ज़िम्मेदारी से फेंका या निर्यात न किया जाए। यह इसलिए अहम है कि ई-कचरा विश्व में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला कचरा है। भारत में ई-कचरा ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियमों से नियंत्रित होता है।
B गलत है: रामसर आर्द्रभूमियों का प्रबंधन रामसर अभिसमय के अपने दिशानिर्देशों और मॉन्ट्रो रिकॉर्ड से होता है, R2 से नहीं।
C गलत है: R2 का निम्नीकृत भूमि पर खेती से कोई संबंध नहीं है।
D गलत है: पर्यावरणीय प्रभाव आकलन राष्ट्रीय EIA नियमों के अनुसार होता है, R2 कोड से नहीं।
परीक्षा टिप: R2 = इलेक्ट्रॉनिक्स का रिस्पॉन्सिबल रीसाइक्लिंग (SERI); e-Stewards भी ऐसा ही ई-कचरा मानक है।