राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी किस नगर में स्थित है?
- A.उदयपुर
- B.जयपुर
- C.बीकानेर
- D.जोधपुर
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C, बीकानेर। राजस्थानी भाषा, उसके साहित्य तथा संस्कृति की यह अकादमी बीकानेर से कार्य करती है, राजस्थानी में ग्रंथ प्रकाशित करती है और भाषा के रचनाकारों को सम्मानित करती है। विकल्प A गलत है, क्योंकि उदयपुर राजस्थान साहित्य अकादमी का केंद्र है, जो मुख्यतः हिंदी में कार्य करती है। विकल्प B गलत है, क्योंकि जयपुर में राजधानी होने के साथ संस्कृत, ब्रजभाषा, सिंधी तथा उर्दू की राज्य अकादमियां हैं। विकल्प D गलत है, क्योंकि जोधपुर मारवाड़ी क्षेत्र का हृदय और राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान का स्थान होते हुए भी इस अकादमी का केंद्र नहीं है। इसके साथ यह भी पूछा जाता है कि राजस्थानी संविधान की आठवीं अनुसूची की भाषाओं में नहीं है और उसे सम्मिलित करने की मांग पुरानी है। दोनों ने जोधपुर जिले के बोरुंदा में वर्षों काम किया और वहां स्थापित रूपायन संस्थान आज भी राजस्थानी लोक साहित्य के अध्ययन का केंद्र है।
पूरा लेख पढ़ें: राजस्थानी भाषा, बोलियां और साहित्य: परीक्षा नोट्स
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंभारतीय भाषा सर्वेक्षण में इस क्षेत्र की भाषा के लिए राजस्थानी नाम को प्रचलन किसने दिया?
- A.जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन
- B.जेम्स टॉड
- C.गौरीशंकर हीराचंद ओझा
- D.सुनीति कुमार चटर्जी
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उन्होंने अपने भारतीय भाषा सर्वेक्षण में 1912 में इस क्षेत्र की बोलियों के समूह के लिए राजस्थानी नाम प्रयोग किया और उसकी बोलियों का वर्गीकरण किया, जिससे मरुभाषा तथा मरु गुर्जर जैसे पुराने नाम पीछे छूट गए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राजस्थानी की वागड़ी बोली मुख्यतः किन जिलों में बोली जाती है?
- A.सीकर और झुंझुनूं
- B.डूंगरपुर और बांसवाड़ा
- C.अलवर और भरतपुर
- D.कोटा और बूंदी
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राजस्थान के सुदूर दक्षिण में इन दोनों जिलों से बने क्षेत्र को वागड़ कहा जाता है और वहां की भील जनसंख्या वागड़ी बोलती है, जिसमें सीमावर्ती स्थिति के कारण राजस्थानी तथा गुजराती, दोनों के लक्षण मिलते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हाड़ौती, जिसे हरौती भी कहा जाता है, किन जिलों की बोली है?
- A.जैसलमेर और बाड़मेर
- B.कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़
- C.उदयपुर, भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़
- D.श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़
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दक्षिण पूर्व के ये चार जिले हाड़ा चौहानों का क्षेत्र थे, जिससे इस अंचल को हाड़ौती और बोली को हाड़ौती अथवा हरौती नाम मिला।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राजस्थानी की सर्वाधिक बोली जाने वाली बोली कौन सी है?
- A.मेवाड़ी
- B.ढूंढाड़ी
- C.मारवाड़ी
- D.मेवाती
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यह जोधपुर, पाली, नागौर, बाड़मेर तथा जालोर की, अर्थात राज्य के सबसे बड़े क्षेत्र की बोली है और चारण कवियों का डिंगल काव्य इसी में रचा गया; मारवाड़ के व्यापारी समुदाय इसे देश भर में साथ ले गए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राजस्थानी काव्य की डिंगल शैली किस कवि वर्ग से जुड़ी है?
- A.पूर्वी राजस्थान के भाट कवि
- B.पश्चिमी राजस्थान के चारण कवि
- C.जालोर के जैन विद्वान
- D.मेवाड़ के दरबारी चित्रकार
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डिंगल मारवाड़ी पर आधारित साहित्यिक शैली है और चारणों ने इसका प्रयोग युद्ध, आन तथा आत्मबलिदान के वीर काव्य के लिए किया, जो ऊंचे गूंजते छंद में गाया जाता है; पृथ्वीराज राठौड़ की वेलि क्रिसन रुकमणी री इसका प्रसिद्ध उदाहरण है।
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