राजस्थान के कालबेलिया लोकगीत और नृत्य यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में किस वर्ष शामिल किए गए?
- A.2003
- B.2008
- C.2010
- D.2016
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर C, 2010 है। राजस्थान के कालबेलिया लोकगीत और नृत्य 2010 में यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किए गए। कालबेलिया परंपरागत रूप से सांप पकड़ने वाला समुदाय था, और उनकी स्त्रियां काले लहराते घाघरे में पूंगी तथा बीन की धुन पर नाचती हैं, जबकि पुरुष खंजरी और ढोलक बजाते हैं; इस नृत्य को विदेश तक ले जाने वाली कलाकार गुलाबो सपेरा हैं। A, 2003 स्वयं अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण संबंधी यूनेस्को अभिसमय का वर्ष है, इसीलिए यह विकल्प यहां रखा गया है। B, 2008 में भारत की पहली प्रविष्टियां, जैसे रामलीला, कुटियाट्टम तथा वैदिक पाठ, सूची में आईं, पर कालबेलिया नहीं। D, 2016 वह वर्ष है जब गुलाबो सपेरा को पद्मश्री मिला, जो इसी परंपरा से जुड़ा भिन्न तथ्य है।
पूरा लेख पढ़ें: राजस्थान का लोक संगीत और वाद्ययंत्र: तथ्य और प्रश्न
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंगज से बजने वाला तंतु वाद्य कमायचा परंपरागत रूप से राजस्थान के किस समुदाय द्वारा बजाया जाता है?
- A.लंगा
- B.मांगणियार
- C.कालबेलिया
- D.कामड़
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कमायचा जैसलमेर और बाड़मेर के मांगणियार गायकों का विशिष्ट वाद्य है: आम की लकड़ी का बड़ा कटोरा बकरे की खाल से मढ़ा जाता है, उस पर आंत तथा स्टील के तार चढ़ते हैं और उसे घोड़े के बालों के गज से बजाया जाता है, जिससे वह गहरी गूंज मिलती है…
पूरी व्याख्या पढ़ें →रावणहत्था उन भोपों का वाद्य है जो किस लोकदेवता का महाकाव्य सुनाते हैं?
- A.पाबूजी
- B.देवनारायण
- C.गोगाजी
- D.रामदेवजी
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पाबूजी का भोपा फड़ नामक चित्रित पट खोलकर रात भर पाबूजी का महाकाव्य गाता है और स्वयं रावणहत्था बजाता है, जो आधे नारियल या तूंबे पर बांस की गर्दन, मढ़ी हुई खाल और घुंघरुओं की कतार वाला गज से बजने वाला वाद्य है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →केसरिया बालम आवो हमारे देश राजस्थानी गायकी की किस शैली का गीत है?
- A.पणिहारी
- B.मांड
- C.कुरजां
- D.जच्चा
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मांड राजस्थानी गायकी की सर्वाधिक परिष्कृत शैली है, जो शास्त्रीय संगीत के इतने निकट है कि उसे स्वतंत्र राग की तरह माना जाता है, और बीकानेर की अल्लाह जिलाई बाई द्वारा प्रसिद्ध किया गया केसरिया बालम आवो हमारे देश उसकी सबसे जानी हुई रचना तथा व्यावहारिक रूप से राज्य का…
पूरी व्याख्या पढ़ें →राजस्थान का लोकवाद्य अलगोजा क्या है?
- A.साथ बजाई जाने वाली दो बांसुरियों का युग्म
- B.गज से बजने वाला तंतु वाद्य
- C.तार खींचकर बजाया जाने वाला ढोल
- D.लकड़ी के दो टुकड़ों की जोड़ी
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अलगोजा युग्म बांसुरी है: वादक दो नलियां एक साथ मुंह में रखता है, एक पर आधार स्वर की गूंज देता है और दूसरी पर धुन बजाता है, और चरवाहा या लंगा वादक चक्रीय श्वास से इसे देर तक चला सकता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →तार खींचकर बजाया जाने वाला वाद्य भपंग मुख्यतः राजस्थान के किस क्षेत्र का है?
- A.अलवर और मेवात क्षेत्र
- B.जैसलमेर और बाड़मेर
- C.बीकानेर और चूरू
- D.उदयपुर और डूंगरपुर
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भपंग खोखले तूंबे का छोटा ढोल है, जिस पर खाल मढ़ी होती है और उसके आर-पार आंत की डोरी निकलती है; वादक डोरी को नोचता और कसकर या ढीला करके स्वर को फिसलाता है, जिससे मेवाती लोकगीतों का वह बोलता हुआ स्वर बनता है।
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