पूर्वावस्था प्रथम में समजात गुणसूत्रों के जोड़ा बनाने को क्या कहते हैं?
- A.सूत्रयुग्मन
- B.पारगति
- C.वियोजन
- D.साइटोकाइनेसिस
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर A, सूत्रयुग्मन है। पूर्वावस्था प्रथम की युग्मपट्ट उप-अवस्था में समजात गुणसूत्रों के प्रत्येक जोड़े के दोनों सदस्य अपनी पूरी लंबाई में बिंदु-दर-बिंदु मिलते हुए अगल-बगल आ जाते हैं, और उनके बीच बनकर उन्हें जोड़े रखने वाली रचना सिनेप्टोनीमल सम्मिश्र कहलाती है। युग्मित इकाई को द्विसंयोजी कहते हैं, और चूँकि प्रत्येक गुणसूत्र पहले से दो क्रोमैटिड का बना होता है, द्विसंयोजी में चार क्रोमैटिड होती हैं, इसलिए इसे चतुष्क भी कहते हैं। B, पारगति पारगतिक्रम में काइऐज्मेटा का गुणसूत्रों के सिरों की ओर बाद में खिसकना है। C, वियोजन पश्चावस्था प्रथम में समजातों का अलग होना है, और इसकी विफलता अर्थात अनियोजन से गुणसूत्री विकार होते हैं। D, साइटोकाइनेसिस कोशिकाद्रव्य का विभाजन है और गुणसूत्रों के जोड़ा बनाने से इसका कोई संबंध नहीं है। ध्यान रखिए कि सूत्रयुग्मन केवल अर्धसूत्री विभाजन में होता है, समसूत्री विभाजन में समजात गुणसूत्र कभी जोड़ा नहीं बनाते।
पूरा लेख पढ़ें: कोशिका विभाजन: समसूत्री और अर्धसूत्री विभाजन के नोट्स
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंकोशिका चक्र की किस प्रावस्था में डीएनए का द्विगुणन होता है?
- A.जी1 प्रावस्था
- B.एस प्रावस्था
- C.जी2 प्रावस्था
- D.एम प्रावस्था
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इस प्रावस्था में कोशिका के डीएनए की प्रतिलिपि बनती है, जिससे केंद्रक में डीएनए की मात्रा दुगुनी हो जाती है, जबकि गुणसूत्रों की संख्या अपरिवर्तित रहती है क्योंकि अब प्रत्येक गुणसूत्र सेंट्रोमियर पर जुड़ी दो समान सहोदर क्रोमैटिड से बना होता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →समसूत्री विभाजन को समकारी विभाजन क्यों कहा जाता है?
- A.इससे चार संतति कोशिकाएँ बनती हैं
- B.संतति कोशिकाओं में गुणसूत्र संख्या जनक कोशिका के बराबर रहती है
- C.यह गुणसूत्र संख्या आधी कर देता है
- D.यह केवल जनन कोशिकाओं में होता है
उत्तर देखें
समसूत्री विभाजन में पश्चावस्था के दौरान प्रत्येक सेंट्रोमियर विभाजित होता है और हर गुणसूत्र की एक क्रोमैटिड प्रत्येक ध्रुव पर जाती है, इसलिए दोनों संतति कोशिकाओं को जनक कोशिका के ठीक बराबर गुणसूत्र और ठीक वही आनुवंशिक सूचना मिलती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →समसूत्री विभाजन की किस अवस्था में गुणसूत्र कोशिका की मध्यरेखा पर पंक्तिबद्ध होते हैं?
- A.पूर्वावस्था
- B.मध्यावस्था
- C.पश्चावस्था
- D.अंत्यावस्था
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इस अवस्था में संघनित गुणसूत्र, जिनमें से प्रत्येक दो सहोदर क्रोमैटिड से बना होता है, तर्कु तंतुओं द्वारा तब तक खिसकाए जाते हैं जब तक उनके सेंट्रोमियर कोशिका के बीच एक ही तल में न आ जाएँ, जिसे मध्यावस्था पट्टिका या विषुवतीय पट्टिका कहते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सेंट्रोमियर का विभाजन और सहोदर क्रोमैटिड का विपरीत ध्रुवों की ओर जाना किस अवस्था में होता है?
- A.पूर्वावस्था
- B.मध्यावस्था
- C.पश्चावस्था
- D.अंत्यावस्था
उत्तर देखें
जब गुणसूत्र मध्यावस्था पट्टिका पर पंक्तिबद्ध हो जाते हैं और प्रत्येक काइनेटोकोर किसी तर्कु तंतु से जुड़ जाता है, तब दोनों सहोदर क्रोमैटिड को जोड़े रखने वाला सेंट्रोमियर विभाजित हो जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पादप कोशिका में साइटोकाइनेसिस जंतु कोशिका से किस प्रकार भिन्न है?
- A.पादप कोशिका में विदलन खाँच बनती है
- B.पादप कोशिका में कोशिका पट्टिका बनती है
- C.पादप कोशिका अपना कोशिकाद्रव्य विभाजित नहीं करती
- D.पादप कोशिका का केंद्रक दो बार विभाजित होता है
उत्तर देखें
जंतु कोशिका अपने कोशिकाद्रव्य को विदलन खाँच से बाँटती है, जिसमें प्लाज्मा झिल्ली बीच में चारों ओर से भीतर खिंचती है और कोशिका दब कर दो भागों में बँट जाती है।
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