प्रकाश संश्लेषण के दौरान कौन-से उत्पाद बनते हैं?
- A.ग्लूकोज, जल और ऑक्सीजन
- B.ग्लूकोज और ऑक्सीजन
- C.स्टार्च और ऑक्सीजन
- D.स्टार्च, जल और ऑक्सीजन
सही उत्तर
A. ग्लूकोज, जल और ऑक्सीजन
व्याख्या
सही उत्तर है A, ग्लूकोज, जल और ऑक्सीजन। हरे पौधे पर्णहरित द्वारा पकड़ी गई सूर्य की ऊर्जा से कार्बन डाइऑक्साइड और जल को जोड़ते हैं। संतुलित समीकरण के अनुसार छह अणु कार्बन डाइऑक्साइड और बारह अणु जल मिलकर एक अणु ग्लूकोज, छह अणु ऑक्सीजन और छह अणु जल बनाते हैं। इसलिए जल समीकरण के दोनों ओर आता है, बारह अणु कच्चे माल के रूप में लिए जाते हैं और छह अणु उत्पाद के रूप में फिर मुक्त होते हैं। जो ऑक्सीजन निकलती है वह जल के विघटन से आती है, कार्बन डाइऑक्साइड से नहीं, और यह भारी ऑक्सीजन के प्रयोग से सिद्ध किया जा चुका है। B गलत है क्योंकि इसमें अभिक्रिया में बना जल छोड़ दिया गया है। C गलत है क्योंकि स्टार्च सीधे नहीं बनता, पहले स्थायी उत्पाद ग्लूकोज बनता है और बाद में पौधा ग्लूकोज की इकाइयाँ जोड़कर स्टार्च के रूप में संचय करता है। D भी इसी कारण गलत है क्योंकि इसमें ग्लूकोज की जगह स्टार्च लिखा है। परीक्षा टिप: पहले ग्लूकोज, स्टार्च केवल संचय, और ऑक्सीजन जल से।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंमान लीजिए किसी नेत्रिका की फोकस दूरी 2.5 सेमी है। 100 आवर्धन वाली दूरदर्शी के लिए अभिदृश्यक लेंस की फोकस दूरी कितनी होनी चाहिए?
- A.250 सेमी
- B.40 सेमी
- C.2.5 × 10⁻² सेमी
- D.100 सेमी
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 250 सेमी
व्याख्या
सही उत्तर है A, 250 सेमी। सामान्य समायोजन में रखी खगोलीय दूरदर्शी का आवर्धन अभिदृश्यक लेंस की फोकस दूरी को नेत्रिका की फोकस दूरी से भाग देने पर मिलता है। यहाँ आवर्धन 100 है और नेत्रिका की फोकस दूरी 2.5 सेमी है, इसलिए अभिदृश्यक की फोकस दूरी 100 गुणा 2.5 यानी 250 सेमी होनी चाहिए। इसी कारण खगोलीय दूरदर्शी लंबी नली वाली होती हैं, क्योंकि बड़ी फोकस दूरी वाला अभिदृश्यक और छोटी फोकस दूरी वाली नेत्रिका मिलकर ऊँचा आवर्धन देते हैं, और सामान्य समायोजन में नली की लंबाई लगभग दोनों फोकस दूरियों के योग के बराबर होती है। B गलत है क्योंकि 40 सेमी का अभिदृश्यक केवल 16 का आवर्धन देगा। C गलत है क्योंकि नेत्रिका से भी छोटी फोकस दूरी प्रतिबिंब को बड़ा करने के बजाय छोटा कर देगी। D गलत है क्योंकि 100 सेमी से आवर्धन केवल 40 मिलेगा। परीक्षा टिप: दूरदर्शी में आवर्धन अभिदृश्यक बँटा नेत्रिका होता है, इसलिए अभिदृश्यक ही लंबा लेंस होता है।
किसी द्रव का तापमान बढ़ाने पर:
- A.पृष्ठ तनाव बढ़ता है और श्यानता घटती है
- B.पृष्ठ तनाव और श्यानता दोनों घटते हैं
- C.पृष्ठ तनाव और श्यानता दोनों बढ़ते हैं
- D.पृष्ठ तनाव घटता है और श्यानता बढ़ती है
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पृष्ठ तनाव और श्यानता दोनों घटते हैं
व्याख्या
सही उत्तर है B, पृष्ठ तनाव और श्यानता दोनों घटते हैं। द्रव को गर्म करने पर उसके अणु तेज़ चलने लगते हैं और आपस में कुछ दूर हट जाते हैं, जिससे उनके बीच का आकर्षण कमज़ोर पड़ जाता है। ये दोनों ही गुण इसी आकर्षण पर टिके होते हैं। पृष्ठ तनाव इसलिए बनता है कि सतह के अणुओं को नीचे और अगल-बगल के अणु भीतर की ओर खींचते हैं, और तापमान बढ़ने पर यह भीतरी खिंचाव घटता जाता है तथा क्रांतिक ताप पर शून्य हो जाता है। द्रव की श्यानता परतों के खिसकते समय अणुओं की आपसी पकड़ से आती है, इसलिए वही कमज़ोरी द्रव को पतला और आसानी से बहने वाला बना देती है। यही कारण है कि गर्म तेल ठंडे तेल से कहीं तेज़ बहता है। A गलत है क्योंकि गर्म करने पर पृष्ठ तनाव बढ़ता नहीं, घटता है। C गलत है क्योंकि दोनों में से कोई भी नहीं बढ़ता। D गलत है क्योंकि द्रव की श्यानता घटती है। परीक्षा टिप: द्रव गर्म होकर पतले होते हैं, पर गैस गर्म होने पर अधिक श्यान हो जाती है।
निम्नलिखित में से कौन-सा पदार्थ प्रकाश उत्सर्जक डायोड (एलईडी) की संरचना बनाने के लिए उपयुक्त नहीं है?
- A.गैलियम फॉस्फाइड
- B.इंडियम गैलियम नाइट्राइड
- C.जर्मेनियम
- D.गैलियम आर्सेनाइड
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. जर्मेनियम
व्याख्या
सही उत्तर है C, जर्मेनियम। जर्मेनियम से प्रकाश उत्सर्जक डायोड नहीं बनाए जाते, क्योंकि यह अप्रत्यक्ष ऊर्जा अंतराल वाला अर्धचालक है, इसलिए अंतराल पार करके लौटता इलेक्ट्रॉन अपनी ऊर्जा का बड़ा हिस्सा प्रकाश के रूप में नहीं, बल्कि क्रिस्टल में ऊष्मा के रूप में छोड़ता है। इसका ऊर्जा अंतराल भी बहुत छोटा, लगभग 0.66 इलेक्ट्रॉन वोल्ट है, जो दृश्य प्रकाश पैदा करने के लिए बहुत कम है। इसी कारण एलईडी प्रत्यक्ष ऊर्जा अंतराल वाले यौगिकों से बनाए जाते हैं, जिनका अंतराल मनचाहे रंग के अनुसार बदला जा सकता है। A गलत है क्योंकि गैलियम फॉस्फाइड हरे और पीले डायोड में काम आता है। B गलत है क्योंकि इंडियम गैलियम नाइट्राइड से नीले और सफेद डायोड बनते हैं, जिन्होंने आधुनिक प्रकाश व्यवस्था संभव बनाई और जिसके लिए 2014 का भौतिकी नोबेल पुरस्कार दिया गया। D गलत है क्योंकि गैलियम आर्सेनाइड लाल और अवरक्त डायोड का मानक पदार्थ है, जिसमें टीवी के रिमोट वाले डायोड भी शामिल हैं। परीक्षा टिप: एलईडी के लिए प्रत्यक्ष अंतराल वाले पदार्थ – गैलियम आर्सेनाइड, गैलियम फॉस्फाइड, इंडियम गैलियम नाइट्राइड; सिलिकॉन और जर्मेनियम अप्रत्यक्ष हैं।
पृष्ठ तनाव के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.पृष्ठ तनाव को सामान्यतः डाइन प्रति सेंटीमीटर में मापा जाता है।
- B.पानी की बूँद का आकार पृष्ठ तनाव के कारण गोलाकार होता है।
- C.कमरे के ताप पर पानी का पृष्ठ तनाव एथिल ऐल्कोहॉल से कम होता है।
- D.द्रव के अणुओं के बीच की संसक्ति बल ही पृष्ठ तनाव नामक परिघटना के लिए उत्तरदायी हैं।
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. कमरे के ताप पर पानी का पृष्ठ तनाव एथिल ऐल्कोहॉल से कम होता है।
व्याख्या
सही उत्तर है C, कमरे के ताप पर पानी का पृष्ठ तनाव एथिल ऐल्कोहॉल से कम होता है। यही कथन गलत है, क्योंकि पानी का पृष्ठ तनाव एथिल ऐल्कोहॉल से बहुत अधिक होता है। लगभग बीस डिग्री सेल्सियस पर पानी का मान करीब बहत्तर डाइन प्रति सेंटीमीटर होता है, जबकि एथिल ऐल्कोहॉल का केवल बाईस के आसपास, क्योंकि पानी के अणुओं के बीच हाइड्रोजन आबंध ऐल्कोहॉल के कमजोर बलों की तुलना में बहुत जोर से खींचते हैं। इसी कारण ऐल्कोहॉल सतह पर पतली परत बनकर फैल जाता है, जबकि पानी बूँदों में सिमट जाता है। A कथन सही है, क्योंकि पृष्ठ तनाव पुरानी इकाई पद्धति में डाइन प्रति सेंटीमीटर और एसआई पद्धति में न्यूटन प्रति मीटर में व्यक्त किया जाता है। B सही है, क्योंकि सतह पर भीतर की ओर लगने वाला खिंचाव स्वतंत्र बूँद को उसके आयतन के लिए सबसे कम क्षेत्रफल वाला आकार, यानी गोला, दे देता है। D सही है, क्योंकि पृष्ठ तनाव द्रव के अणुओं के बीच के संसक्ति बलों से ही उत्पन्न होता है। परीक्षा टिप: पानी लगभग 72 डाइन प्रति सेंटीमीटर, ऐल्कोहॉल लगभग 22; ताप बढ़ने पर पृष्ठ तनाव घटता है।
निम्नलिखित में से कौन परिसंचरण तंत्र का भाग नहीं है?
- A.केशिकाएँ
- B.रसांकुर (विलाई)
- C.शिराएँ
- D.धमनियाँ
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. रसांकुर (विलाई)
व्याख्या
सही उत्तर है B, रसांकुर। रसांकुर या विलाई छोटी आँत की भीतरी दीवार पर बनी अंगुली जैसी छोटी-छोटी वलनें हैं, इसलिए वे पाचन तंत्र का भाग हैं। इनका काम उस सतह को बढ़ाना है जिससे पचा हुआ भोजन अवशोषित होता है। हर रसांकुर के भीतर एक केशिका और एक लसीका वाहिनी होती है, पर रसांकुर स्वयं परिसंचरण तंत्र का अंग नहीं है। मानव परिसंचरण तंत्र हृदय, रक्त और रक्त वाहिकाओं से बना होता है। A गलत है क्योंकि केशिकाएँ सबसे पतली वाहिकाएँ हैं, जहाँ रक्त और ऊतकों के बीच गैसों तथा पोषक तत्वों का आदान-प्रदान होता है। C गलत है क्योंकि शिराएँ रक्त को हृदय की ओर लौटाती हैं और उनमें कपाट होते हैं जो रक्त को पीछे बहने से रोकते हैं। D गलत है क्योंकि धमनियाँ रक्त को हृदय से बाहर ले जाती हैं और दबाव सहने के लिए उनकी दीवारें मोटी तथा लचीली होती हैं। परीक्षा टिप: रसांकुर छोटी आँत में भोजन अवशोषित करते हैं; हृदय, रक्त और रक्त वाहिकाएँ परिसंचरण तंत्र बनाती हैं।