पित्त में कोई एंजाइम न होने पर भी वह वसा के पाचन में सहायक होता है। उसका मुख्य कार्य क्या है?
- A.वह वसा को वसा अम्ल और ग्लिसरॉल में तोड़ता है
- B.वह वसा का इमल्सीकरण करता है और माध्यम को क्षारीय बनाता है
- C.वह रसांकुरों से वसा का अवशोषण करता है
- D.वह वसा को मंड में बदल देता है
सही उत्तर
B. वह वसा का इमल्सीकरण करता है और माध्यम को क्षारीय बनाता है
व्याख्या
सही उत्तर B है। पित्त यकृत में बनता है, पित्ताशय में संचित तथा सांद्र होता है और ग्रहणी में डाला जाता है, और इसमें पित्त लवण तथा पित्त वर्णक होते हैं, कोई पाचक एंजाइम नहीं। इसके पित्त लवण वसा के बड़े गोलकों को अत्यंत सूक्ष्म बूंदों में तोड़ते हैं, जिसे इमल्सीकरण कहते हैं, और इससे वह पृष्ठीय क्षेत्रफल कई गुना बढ़ जाता है जिस पर अग्न्याशयी लाइपेज क्रिया कर सकता है; साथ ही यह आमाशय से आए अम्ल को उदासीन करता है जिससे क्षारीय अग्न्याशयी और आंत्र एंजाइम काम कर सकें। विकल्प A गलत है क्योंकि वह रासायनिक विघटन लाइपेज का कार्य है, पित्त का नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि रसांकुरों से अवशोषण पाचन के बाद की अलग अवस्था है और पित्त उसे नहीं करता। विकल्प D गलत है क्योंकि शरीर का कोई स्राव वसा को मंड में नहीं बदलता, दोनों भिन्न वर्ग के पोषक तत्व हैं।
पूरा लेख पढ़ें: मानव पाचन और श्वसन तंत्र: अंग, ग्रंथियां और एंजाइम
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंशरीर में ऑक्सीजन युक्त वायु को भीतर लेने की प्रक्रिया को ______ कहते हैं।
- A.अंतःश्वसन
- B.निःश्वसन
- C.प्लवन
- D.अन्वेषण
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. अंतःश्वसन
व्याख्या
सही उत्तर A, अंतःश्वसन है। अंतःश्वसन श्वासक्रिया की वह अवस्था है जिसमें डायाफ्राम चपटा होता है और अंतरापर्शुक पेशियां पसलियों को ऊपर तथा बाहर खींचती हैं, जिससे वक्ष गुहा बड़ी हो जाती है, फेफड़ों के भीतर का दाब वायुमंडलीय दाब से घट जाता है और ऑक्सीजन युक्त वायु नासाछिद्रों तथा श्वासनली से भीतर दौड़ आती है। विकल्प B गलत है क्योंकि निःश्वसन इसकी उलटी अवस्था है, जिसमें पेशियां शिथिल होती हैं, वक्ष गुहा सिकुड़ती है और कार्बन डाइऑक्साइड युक्त वायु बाहर धकेली जाती है; सामान्यतः यह निष्क्रिय क्रिया है। विकल्प C गलत है क्योंकि प्लवन तरल में रखी वस्तुओं का भौतिक गुण है, जिसे आर्किमिडीज का नियम बताता है, और इसका श्वसन से कोई संबंध नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि अन्वेषण का अर्थ खोज या जांच करना है और यह जीव विज्ञान का पद ही नहीं है। इस जोड़ी को याद रखें, वायु भीतर लेना अंतःश्वसन और बाहर निकालना निःश्वसन।
निम्नलिखित में से मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि कौन सी है?
- A.अग्न्याशय
- B.थायरॉइड ग्रंथि
- C.यकृत
- D.कर्णपूर्व ग्रंथि
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. यकृत
व्याख्या
सही उत्तर C, यकृत है। यह मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि तथा सबसे भारी आंतरिक अंग है, यह उदर के ऊपरी दाहिने भाग में स्थित है, और पाचन में इसका मुख्य योगदान पित्त है, जो पित्ताशय में संचित होकर वसा का इमल्सीकरण करता है। विकल्प A गलत है क्योंकि अग्न्याशय महत्वपूर्ण होते हुए भी, कि वह एकमात्र बहिःस्रावी और अंतःस्रावी दोनों ग्रंथि है, आकार में बहुत छोटा है और उसका भार सौ ग्राम से भी कम होता है। विकल्प B गलत है क्योंकि थायरॉइड शरीर की सबसे बड़ी अंतःस्रावी ग्रंथि होकर भी यकृत से बहुत छोटी है, और प्रश्न किसी भी प्रकार की सबसे बड़ी ग्रंथि पूछ रहा है। विकल्प D गलत है क्योंकि कर्णपूर्व ग्रंथि केवल लार ग्रंथियों के तीन जोड़ों में सबसे बड़ी है, जो बहुत सीमित उपाधि है। प्रश्नपत्रों का एक सामान्य जाल थायरॉइड देना है, इसलिए पढ़ें कि प्रश्न ग्रंथि कह रहा है या अंतःस्रावी ग्रंथि।
लार में उपस्थित कौन सा एंजाइम मुख में मंड का पाचन आरंभ करता है?
- A.पेप्सिन
- B.ट्रिप्सिन
- C.लार एमाइलेज
- D.लाइपेज
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. लार एमाइलेज
व्याख्या
सही उत्तर C, लार एमाइलेज है, जिसे टायलिन भी कहा जाता है। यह लार ग्रंथियों के तीन जोड़ों से स्रावित होता है और मंड को माल्टोज नामक छोटी शर्करा में तोड़ता है, इसी कारण मंड ही भोजन का एकमात्र वर्ग है जिसका पाचन वास्तव में मुखगुहा में आरंभ हो जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि पेप्सिन आमाशय की जठर ग्रंथियों से स्रावित होता है और केवल प्रोटीन पर, वह भी प्रबल अम्लीय माध्यम में ही क्रिया करता है। विकल्प B गलत है क्योंकि ट्रिप्सिन अग्न्याशय से आता है, ग्रहणी में क्रिया करता है और वह भी प्रोटीन का पाचन करता है, मंड का नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि लाइपेज, जो भी अग्न्याशय से आता है, पित्त द्वारा पहले से इमल्सीकृत वसा पर क्रिया करके उसे वसा अम्ल और ग्लिसरॉल में तोड़ता है। ध्यान दें कि रोटी को देर तक चबाने पर मीठी लगने लगती है, यही रोजमर्रा का प्रमाण है कि लार एमाइलेज मंड को शर्करा में बदल रहा है।
आहारनाल का सबसे लंबा भाग कौन सा है और भोजन का अधिकांश अवशोषण कहां होता है?
- A.आमाशय
- B.ग्रासनली
- C.छोटी आंत
- D.बड़ी आंत
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. छोटी आंत
व्याख्या
सही उत्तर C, छोटी आंत है। लगभग छह से सात मीटर लंबी होने के कारण यह नौ मीटर की आहारनाल का सबसे लंबा भाग है, यहीं अग्न्याशयी और आंत्र रसों से पाचन पूरा होता है, और इसकी भीतरी भित्ति पर लाखों अंगुली जैसे रसांकुर होते हैं जो ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, वसा अम्ल तथा ग्लिसरॉल को रक्त में सोखने के लिए विशाल पृष्ठ देते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि आमाशय लगभग पच्चीस सेंटीमीटर लंबा एक पेशीय थैला ही है और जल, एल्कोहॉल तथा कुछ औषधियों के अतिरिक्त वह कुछ भी अवशोषित नहीं करता। विकल्प B गलत है क्योंकि ग्रासनली लगभग पच्चीस सेंटीमीटर की एक साधारण संवाहक नली है जो क्रमसंकुचन से भोजन को नीचे धकेलती है। विकल्प D गलत है क्योंकि बड़ी आंत अधिक चौड़ी होकर भी बहुत छोटी है और मुख्यतः अपचे अवशेष से जल और लवण सोखती है।
आमाशय में स्रावित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल निम्नलिखित में से कौन सा कार्य करता है?
- A.वह सीधे वसा का पाचन करता है
- B.वह पेप्सिन की क्रिया के लिए अम्लीय माध्यम देता है और जीवाणुओं को मारता है
- C.वह भोजन से विटामिन अवशोषित करता है
- D.वह पित्त की तरह वसा का इमल्सीकरण करता है
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. वह पेप्सिन की क्रिया के लिए अम्लीय माध्यम देता है और जीवाणुओं को मारता है
व्याख्या
सही उत्तर B है। जठर ग्रंथियां हाइड्रोक्लोरिक अम्ल स्रावित करती हैं, जो आमाशय की अंतर्वस्तु को प्रबल अम्लीय बना देता है; पेप्सिन केवल ऐसे ही माध्यम में क्रिया कर सकता है, और यह अम्ल भोजन के साथ निगले गए अधिकांश जीवाणुओं को भी मार देता है। वही ग्रंथियां श्लेष्मा की एक परत भी स्रावित करती हैं जो आमाशय की भित्ति को इस अम्ल से पचने से बचाती है, और उस परत को हानि होने पर पेप्टिक अल्सर बन जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि कोई अम्ल वसा का पाचन नहीं करता; वसा का इमल्सीकरण पित्त करता है और फिर लाइपेज उसे तोड़ता है। विकल्प C गलत है क्योंकि विटामिनों का अवशोषण मुख्यतः छोटी आंत में होता है, आमाशय के अम्ल की क्रिया से नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि इमल्सीकरण यकृत में बने पित्त लवणों का कार्य है, और भोजन के ग्रहणी में पहुंचने पर पित्त वास्तव में इस अम्ल को उदासीन कर देता है।