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GK क्विजसामान्य विज्ञान

सामान्य विज्ञान मिश्रित क्विज: सेट 46

  • 20 प्रश्न
  • 20 मिनट
  • कठिनाई: मध्यम
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इस क्विज के बारे में

सामान्य विज्ञान मिश्रित क्विज़ (सेट 46) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 16 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: कार्बन और उसके यौगिक, गैस नियम और गैसों का अणुगति सिद्धांत, मानव पाचन और श्वसन तंत्र और अन्य। इनमें से 16 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · 7 Aug 2022मध्यम

ऐल्कीनों का हाइड्रोजनीकरण किसकी उपस्थिति में किया जा सकता है?

  1. A.कॉपर
  2. B.जिंक
  3. C.ऐलुमिनियम
  4. D.निकेल
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. निकेल

व्याख्या

सही उत्तर है D, निकेल। ऐल्कीन में कार्बन-कार्बन द्विबंध होता है और उस बंध पर हाइड्रोजन जुड़ने से वह संगत ऐल्केन बन जाता है। इस अभिक्रिया के लिए सूक्ष्म विभाजित धातु उत्प्रेरक चाहिए और औद्योगिक रूप से सस्ता विकल्प निकेल है, जिसे प्रायः 150 से 200 डिग्री सेल्सियस पर काम में लिया जाता है; पैलेडियम और प्लैटिनम यही काम कम ताप पर कर देते हैं। उत्प्रेरक हाइड्रोजन अणुओं को अपनी सतह पर रोककर उन्हें परमाणुओं में तोड़ता है और द्विबंध से जुड़ने देता है, इसलिए वह केवल गति बढ़ाता है, स्वयं खर्च नहीं होता। इसका सबसे जाना-पहचाना उपयोग खाद्य उद्योग में है: असंतृप्त वनस्पति तेलों का निकेल पर हाइड्रोजनीकरण करके ठोस वनस्पति घी बनाया जाता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि कॉपर का उपयोग ऐल्कोहॉल के विहाइड्रोजनीकरण में होता है, जो उलटा परिवर्तन है। विकल्प B गलत है, क्योंकि जिंक चूर्ण दूसरी अपचयन अभिक्रियाओं में काम आता है, द्विबंध पर हाइड्रोजन जोड़ने में नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि ऐलुमिनियम हाइड्रोजनीकरण का उत्प्रेरक नहीं है। परीक्षा टिप: ऐल्कीन और हाइड्रोजन निकेल पर मिलकर ऐल्केन, तेल और हाइड्रोजन निकेल पर मिलकर वनस्पति घी।

Q2.सामान्य विज्ञानपूछा गया: NDA · 16 April 2023आसान

समान ताप और दाब पर मापे जाने पर सभी गैसों के समान आयतन में कणों की संख्या समान होती है। यह नियम किसने दिया?

  1. A.चार्ल्स
  2. B.बॉयल
  3. C.एवोगाद्रो
  4. D.लुसाक
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. एवोगाद्रो

व्याख्या

सही उत्तर है C, एवोगाद्रो। प्रश्न में दिया गया कथन एवोगाद्रो का नियम है, जिसे इतालवी वैज्ञानिक अमेडियो एवोगाद्रो ने 1811 में दिया था। इसके अनुसार समान ताप और दाब पर सभी गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है, इसलिए गैस का आयतन उसमें उपस्थित मोलों की संख्या के समानुपाती होता है। इसी कारण मानक ताप और दाब पर किसी भी गैस का एक मोल 22.4 लीटर आयतन घेरता है, और एक मोल में कणों की संख्या, लगभग 6.022 गुणा 10 की घात 23, को उनके नाम पर एवोगाद्रो संख्या कहा जाता है। A गलत है क्योंकि चार्ल्स का नियम स्थिर दाब पर गैस के आयतन को उसके ताप से जोड़ता है। B गलत है क्योंकि बॉयल का नियम कहता है कि स्थिर ताप पर आयतन दाब के व्युत्क्रमानुपाती होता है। D गलत है क्योंकि गे-लुसाक ने संयोजी आयतनों का नियम तथा दाब और ताप का नियम दिया था। परीक्षा टिप: एवोगाद्रो आयतन को अणुओं की संख्या से, बॉयल दाब से और चार्ल्स ताप से जोड़ता है।

Q3.सामान्य विज्ञानआसान

लार में उपस्थित कौन सा एंजाइम मुख में मंड का पाचन आरंभ करता है?

  1. A.पेप्सिन
  2. B.ट्रिप्सिन
  3. C.लार एमाइलेज
  4. D.लाइपेज
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. लार एमाइलेज

व्याख्या

सही उत्तर C, लार एमाइलेज है, जिसे टायलिन भी कहा जाता है। यह लार ग्रंथियों के तीन जोड़ों से स्रावित होता है और मंड को माल्टोज नामक छोटी शर्करा में तोड़ता है, इसी कारण मंड ही भोजन का एकमात्र वर्ग है जिसका पाचन वास्तव में मुखगुहा में आरंभ हो जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि पेप्सिन आमाशय की जठर ग्रंथियों से स्रावित होता है और केवल प्रोटीन पर, वह भी प्रबल अम्लीय माध्यम में ही क्रिया करता है। विकल्प B गलत है क्योंकि ट्रिप्सिन अग्न्याशय से आता है, ग्रहणी में क्रिया करता है और वह भी प्रोटीन का पाचन करता है, मंड का नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि लाइपेज, जो भी अग्न्याशय से आता है, पित्त द्वारा पहले से इमल्सीकृत वसा पर क्रिया करके उसे वसा अम्ल और ग्लिसरॉल में तोड़ता है। ध्यान दें कि रोटी को देर तक चबाने पर मीठी लगने लगती है, यही रोजमर्रा का प्रमाण है कि लार एमाइलेज मंड को शर्करा में बदल रहा है।

Q4.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ग्रुप D · 17 Aug 2022, Shift 2आसान

निम्नलिखित में से कौन-सा भाग पौधों में गैसों के विनिमय में सहायक होता है?

  1. A.कोशिका झिल्ली
  2. B.केंद्रक
  3. C.रंध्र
  4. D.रक्षक कोशिकाएँ
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. रंध्र

व्याख्या

सही उत्तर है C, रंध्र। रंध्र पत्ती की सतह पर बने सूक्ष्म छिद्र हैं, जिनसे पौधा कार्बन डाइऑक्साइड लेता है और ऑक्सीजन तथा जलवाष्प बाहर निकालता है, इसलिए गैसों का विनिमय इन्हीं से होता है। प्रत्येक रंध्र के दोनों ओर सेम के बीज जैसी दो रक्षक कोशिकाएँ होती हैं, जो फूलकर छिद्र खोलती हैं और सिकुड़कर उसे बंद कर देती हैं; इसी तरह पौधा जल की हानि पर नियंत्रण रखता है। अधिकांश रंध्र पत्ती की निचली सतह पर होते हैं, जिससे सीधी धूप में जल कम उड़ता है। वाष्पोत्सर्जन भी मुख्य रूप से इन्हीं छिद्रों से होता है। A गलत है क्योंकि कोशिका झिल्ली एक कोशिका में पदार्थों के आने-जाने को नियंत्रित करती है, पूरे पौधे का गैस विनिमय नहीं। B गलत है क्योंकि केंद्रक आनुवंशिक पदार्थ रखता है और कोशिका की क्रियाओं का निर्देशन करता है। D गलत है क्योंकि रक्षक कोशिकाएँ केवल छिद्र को खोलती और बंद करती हैं, विनिमय रंध्र के छिद्र से ही होता है। परीक्षा टिप: गैस विनिमय और वाष्पोत्सर्जन रंध्र से होता है, खोलना और बंद करना रक्षक कोशिकाएँ करती हैं।

Q5.सामान्य विज्ञानआसान

किस रक्त समूह को सर्वदाता कहा जाता है?

  1. A.A
  2. B.B
  3. C.AB
  4. D.O
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. O

व्याख्या

सही उत्तर D, समूह O है। ABO पद्धति में प्रतिजन लाल रक्त कणिका की सतह पर बैठते हैं और प्रतिरक्षी प्लाज्मा में तैरते हैं। समूह O की कणिकाओं पर न A प्रतिजन होता है और न B प्रतिजन, इसलिए ग्राही के प्रतिरक्षियों के लिए उन पर आक्रमण करने योग्य कुछ नहीं रहता, और इस समूह का रक्त किसी भी ABO समूह के व्यक्ति को दिया जा सकता है। इसी कारण समूह O को सर्वदाता कहा जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि समूह A की कणिकाओं पर A प्रतिजन होता है, जिसे समूह B और O के प्लाज्मा में मौजूद प्रति-A प्रतिरक्षी नष्ट कर देगा। विकल्प B इसी कारण से गलत है, केवल प्रतिजन B के साथ। विकल्प C गलत है क्योंकि समूह AB उलटा मामला है: उसके प्लाज्मा में न प्रति-A और न प्रति-B प्रतिरक्षी होता है, इसलिए वह सभी से रक्त ले सकता है और उसे सर्वग्राही कहते हैं, सर्वदाता नहीं। जोड़ी साफ रखें: O सभी को देता है, AB सभी से लेता है।

Q6.सामान्य विज्ञानपूछा गया: NDA · 10 April 2022आसान

निम्नलिखित में से हाइड्रोजन गैस का रंग कौन-सा है?

  1. A.हल्का पीला
  2. B.नारंगी
  3. C.काला
  4. D.रंगहीन
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. रंगहीन

व्याख्या

सही उत्तर है D, रंगहीन। हाइड्रोजन एक रंगहीन, गंधहीन और स्वादहीन गैस है, इसलिए दिए गए किसी भी रंग से उसका मेल नहीं बैठता। यह सबसे हल्का तत्व है, जिसमें एक प्रोटॉन और एक इलेक्ट्रॉन होता है, और यह ब्रह्मांड में सबसे अधिक मात्रा में पाया जाने वाला तत्व है, जबकि पृथ्वी पर यह अधिकतर जल तथा कार्बनिक यौगिकों में संयुक्त रूप में मिलता है। हाइड्रोजन द्विपरमाणुक अणु H2 के रूप में रहती है, वायु में हल्की नीली ज्वाला के साथ जलती है और केवल जल बनाती है, इसी कारण इसे स्वच्छ ईंधन के रूप में देखा जाता है। इसका उपयोग हेबर विधि से अमोनिया बनाने तथा वनस्पति तेलों को वनस्पति घी में बदलने में होता है। A गलत है क्योंकि हाइड्रोजन का कोई सामान्य रूप पीला नहीं होता। B गलत है क्योंकि नारंगी रंग सोडियम वाष्प लैंप में दिखता है, हाइड्रोजन में नहीं। C गलत है क्योंकि यहाँ दी गई कोई गैस काली नहीं है; कार्बन का काजल रूप काला होता है, पर वह ठोस है। परीक्षा टिप: हाइड्रोजन, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन तीनों रंगहीन तथा गंधहीन गैसें हैं।

Q7.सामान्य विज्ञानपूछा गया: राजस्थान · RSMSSB Lab Assistant 2016 Official Paperकठिन

निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक शॉट्की और फ्रेंकेल, दोनों दोष दर्शाता है?

  1. A.AgF
  2. B.AgBr
  3. C.AgCl
  4. D.NaCl
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. AgBr

व्याख्या

सही उत्तर है B, AgBr। सिल्वर ब्रोमाइड उस आयनिक क्रिस्टल का मानक उदाहरण है जिसमें दोनों प्रकार के बिंदु दोष एक साथ पाए जाते हैं। शॉट्की दोष में एक धनायन रिक्तिका और एक ऋणायन रिक्तिका की जोड़ी गायब होती है, इसलिए क्रिस्टल विद्युत उदासीन रहता है पर द्रव्यमान घटने से उसका घनत्व गिर जाता है; यह दोष वहाँ मिलता है जहाँ दोनों आयनों का आकार लगभग समान और समन्वय संख्या अधिक हो। फ्रेंकेल दोष में छोटा आयन, आमतौर पर धनायन, अपने जालक स्थान से निकलकर अंतरकाशी स्थान में बैठ जाता है, इसलिए द्रव्यमान और घनत्व अपरिवर्तित रहते हैं; यह वहाँ मिलता है जहाँ दोनों आयनों के आकार में बड़ा अंतर हो। सिल्वर ब्रोमाइड में छोटा सिल्वर आयन अंतरकाशी स्थान में जा सकता है और रिक्तिका युग्म भी बनते हैं, इसलिए दोनों दोष दिखते हैं। A गलत है क्योंकि AgF में आयनों का आकार लगभग समान होने से केवल शॉट्की दोष होता है। C गलत है क्योंकि AgCl फ्रेंकेल दोष दर्शाता है। D गलत है क्योंकि NaCl शॉट्की दोष का उत्कृष्ट उदाहरण है। परीक्षा टिप: शॉट्की दोष घनत्व घटाता है, फ्रेंकेल नहीं, और AgBr दोनों दर्शाता है।

Q8.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ALP · 22 Jan 2019, Shift 2मध्यम

तृतीय श्रेणी के उत्तोलक में आयास और भार किस प्रकार गति करते हैं?

  1. A.विपरीत दिशा में
  2. B.एक ही दिशा में
  3. C.लंबवत दिशा में
  4. D.भार के अनुसार
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. एक ही दिशा में

व्याख्या

सही उत्तर है B, एक ही दिशा में। तृतीय श्रेणी के उत्तोलक में आलंब एक सिरे पर होता है, आयास बीच में लगाया जाता है और भार दूसरे सिरे पर होता है। चूँकि आयास और भार दोनों आलंब के एक ही ओर पड़ते हैं, छड़ एक ही ओर घूमती है और दोनों एक ही दिशा में गति करते हैं। इसमें आयास भुजा भार भुजा से छोटी होती है, इसलिए यांत्रिक लाभ एक से कम रहता है और भार से अधिक बल लगाना पड़ता है; ऐसे उत्तोलक से गति और गति का बड़ा विस्तार मिलता है। मनुष्य की अग्रबाहु, चीनी उठाने वाला चिमटा, मछली पकड़ने की छड़ और स्टेपलर इसी प्रकार काम करते हैं। A गलत है क्योंकि आयास और भार विपरीत दिशा में प्रथम श्रेणी के उत्तोलक में चलते हैं, जिसमें आलंब दोनों के बीच होता है, जैसे सी-सॉ या कैंची। C गलत है क्योंकि उत्तोलक एक स्थिर बिंदु पर घूमता है और उसके दोनों सिरे कभी एक-दूसरे के समकोण पर नहीं चलते। D गलत है क्योंकि भार का मान लगने वाले बल को बदलता है, गति की दिशा को नहीं। परीक्षा टिप: प्रथम श्रेणी में आलंब बीच में, द्वितीय में भार बीच में और तृतीय में आयास बीच में।

Q9.सामान्य विज्ञानपूछा गया: SSC CGL · 01 Dec 2022, Shift 4मध्यम

निम्नलिखित में से किन जंतुओं के पाचन तंत्र में एक ही छिद्र होता है जो मुँह और गुदा दोनों का काम करता है?

  1. A.अरैक्निड
  2. B.इकाइनोडर्म
  3. C.प्लैटीहेल्मिंथीज
  4. D.आर्थ्रोपोड
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. प्लैटीहेल्मिंथीज

व्याख्या

सही उत्तर है C, प्लैटीहेल्मिंथीज। चपटे कृमियों के संघ प्लैटीहेल्मिंथीज में पाचन तंत्र अपूर्ण होता है और उसमें केवल एक ही छिद्र रहता है, इसलिए वही मुँह भोजन भीतर लेता है और अपशिष्ट बाहर निकालता है। उनकी आहारनाल एक बंद थैली जैसी होती है जिसमें गुदा नहीं होती। प्लेनेरिया, यकृत पर्णाभ कृमि और फीताकृमि इसी संघ में आते हैं, और फीताकृमि में तो आहारनाल ही नहीं होती, वह अपने शरीर की सतह से भोजन सोखता है। चपटे कृमि त्रिकोरकी, अप्रगुही और द्विपार्श्व सममित होते हैं, और इनमें से अनेक परजीवी हैं। अलग मुँह और गुदा वाला पूर्ण पाचन तंत्र गोल कृमियों से आगे दिखाई देता है। A गलत है क्योंकि मकड़ी और बिच्छू जैसे अरैक्निड आर्थ्रोपोड हैं और उनमें पूर्ण आहारनाल होती है। B गलत है क्योंकि तारामीन और समुद्री अर्चिन जैसे इकाइनोडर्म में मुँह और गुदा दोनों होते हैं। D गलत है क्योंकि जंतु जगत का सबसे बड़ा संघ आर्थ्रोपोडा पूर्ण आहारनाल रखता है। परीक्षा टिप: सीलेंटरेटा और प्लैटीहेल्मिंथीज में एक छिद्र, ऐस्केहेल्मिंथीज से आगे दो छिद्र।

Q10.सामान्य विज्ञानपूछा गया: CTET · 29th Jan 2023आसान

एक सरल लोलक 64 सेकंड में 40 दोलन पूरे करता है। लोलक का आवर्तकाल क्या है?

  1. A.0.6 सेकंड
  2. B.6 सेकंड
  3. C.1.6 सेकंड
  4. D.16 सेकंड
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 1.6 सेकंड

व्याख्या

सही उत्तर है C, 1.6 सेकंड। आवर्तकाल वह समय है जो एक पूरा दोलन करने में लगता है, इसलिए यह कुल समय में दोलनों की संख्या का भाग देकर निकलता है, अर्थात 64 में 40 का भाग देने पर 1.6 सेकंड। आवृत्ति इसकी उलटी राशि है, यानी एक सेकंड में होने वाले दोलनों की संख्या, जो यहाँ 40 बटा 64 अर्थात 0.625 हर्ट्ज़ है। आवर्तकाल और आवृत्ति सदा एक-दूसरे के व्युत्क्रम होते हैं। सरल लोलक का आवर्तकाल केवल धागे की लंबाई और गुरुत्वीय त्वरण पर निर्भर करता है, सूत्र T बराबर 2 पाई गुणा L बटा g का वर्गमूल। यह गोलक के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता और छोटे दोलनों के लिए दोलन के विस्तार पर भी नहीं। लगभग एक मीटर लंबे लोलक का आवर्तकाल करीब दो सेकंड होता है। A गलत है क्योंकि 0.6 सेकंड होने पर 64 सेकंड में सौ से अधिक दोलन हो जाते। B और D गलत हैं क्योंकि एक मिनट से कुछ अधिक समय में 40 दोलनों के लिए 6 और 16 सेकंड बहुत अधिक हैं। परीक्षा टिप: आवर्तकाल बराबर कुल समय बटा दोलनों की संख्या।

Q11.सामान्य विज्ञानपूछा गया: SSC MTS · 7 Oct 2021, Shift 1आसान

लिटमस विलयन एक बैंगनी रंजक है, जो लाइकेन से प्राप्त होता है; यह पौधा ________ संघ (डिवीजन) का सदस्य है।

  1. A.जिम्नोस्पर्म
  2. B.टेरिडोफाइटा
  3. C.थैलोफाइटा
  4. D.ब्रायोफाइटा
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. थैलोफाइटा

व्याख्या

सही उत्तर है C, थैलोफाइटा। लिटमस एक बैंगनी रंजक है जो लाइकेन से निकाला जाता है, और विद्यालयी विज्ञान में प्रयुक्त वर्गीकरण में लाइकेन को थैलोफाइटा में रखा जाता है। थैलोफाइटा उन साधारण पौधों का समूह है जिनका शरीर अविभेदित थैलस होता है, यानी उनमें असली जड़, तना और पत्ती नहीं होती। शैवाल और कवक भी इसी समूह में आते हैं, और लाइकेन असल में एक शैवाल और एक कवक के सहजीवन से बनता है। लिटमस एक प्राकृतिक सूचक है: उदासीन विलयन में यह बैंगनी रहता है, अम्ल में लाल और क्षार में नीला हो जाता है; इसका उपयोग विलयन और लिटमस पत्र दोनों रूपों में होता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि जिम्नोस्पर्म विकसित पौधे हैं जिनके बीज नग्न होते हैं, जैसे चीड़ और साइकस। विकल्प B गलत है, क्योंकि टेरिडोफाइटा यानी फर्न संवहन ऊतक वाले पहले पौधे हैं। विकल्प D गलत है, क्योंकि मॉस और मार्केंशिया जैसे ब्रायोफाइट को पादप जगत का जलस्थलचर कहा जाता है। परीक्षा टिप: लिटमस अम्ल में लाल, क्षार में नीला और उदासीन में बैंगनी।

Q12.सामान्य विज्ञानपूछा गया: बिहार · 14 Oct 2022मध्यम

थर्मोप्लास्ट (तापसुघट्य प्लास्टिक)

  1. A.में बहुलकीकरण सभी दिशाओं में बढ़ने के कारण प्राथमिक बंधों का त्रिआयामी जाल होता है
  2. B.लंबी शृंखला वाले अणु होते हैं जो द्वितीयक बंधों से जुड़े रहते हैं
  3. C.में तापमान बढ़ने पर प्लास्टिक रूप से विकृत होने की क्षमता घटती जाती है
  4. D.में द्वितीयक बंध होते हैं और ताप ऊर्जा बढ़ने पर भी ये द्वितीयक बंध कभी नहीं टूटते
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. लंबी शृंखला वाले अणु होते हैं जो द्वितीयक बंधों से जुड़े रहते हैं

व्याख्या

सही उत्तर है B, लंबी शृंखला वाले अणु होते हैं जो द्वितीयक बंधों से जुड़े रहते हैं। थर्मोप्लास्टिक में बहुलक लंबी रेखीय या हल्की शाखित शृंखलाओं के रूप में रहता है, और एक शृंखला दूसरी से केवल वान्डरवाल्स जैसे कमजोर द्वितीयक बलों द्वारा जुड़ी होती है। ताप से इन कमजोर बंधों को ढीला करने भर की ऊर्जा मिल जाती है, इसलिए पदार्थ मुलायम हो जाता है, नया आकार ले लेता है और ठंडा होने पर फिर कठोर हो जाता है; यह चक्र बार-बार दोहराया जा सकता है, इसीलिए थर्मोप्लास्टिक कचरे का पुनर्चक्रण संभव है। पॉलिथीन, पॉलीप्रोपिलीन, पीवीसी, पॉलीस्टाइरीन और नायलॉन इसी वर्ग में आते हैं। A गलत है क्योंकि प्राथमिक बंधों का त्रिआयामी जाल बेकेलाइट जैसे थर्मोसेटिंग प्लास्टिक का लक्षण है, जो एक बार जमने पर फिर नहीं ढाला जा सकता। C गलत है क्योंकि तापमान बढ़ने पर विकृत होने की क्षमता घटती नहीं, बढ़ती है। D गलत है क्योंकि ताप ऊर्जा बढ़ने पर द्वितीयक बंध टूटते हैं, और इसी कारण प्लास्टिक मुलायम होता है। परीक्षा टिप: थर्मोप्लास्टिक में कमजोर द्वितीयक बंध और पुनः ढलाई, थर्मोसेटिंग में तिर्यकबंधित प्राथमिक बंध।

Q13.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · 20 Dec 2020आसान

निम्नलिखित में से किस गैस में विद्युत प्रवाहित करने पर लाल प्रकाश उत्पन्न होता है?

  1. A.हीलियम
  2. B.आर्गन
  3. C.नाइट्रोजन
  4. D.नियॉन
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. नियॉन

व्याख्या

सही उत्तर है D, नियॉन। जब कम दबाव पर नियॉन भरी बंद नली में विद्युत प्रवाहित की जाती है, तो गैस के परमाणु उत्तेजित होकर चमकीला नारंगी-लाल प्रकाश देते हैं, इसीलिए विज्ञापन के साइनबोर्ड आज भी नियॉन साइन कहे जाते हैं। नियॉन एक अक्रिय गैस है, जिसकी खोज 1898 में रैम्से और ट्रैवर्स ने की थी; यह सामान्य यौगिक नहीं बनाती और वोल्टेज परीक्षकों, उच्च वोल्टता सूचकों तथा तड़ित निरोधकों में भी काम आती है। विसर्जन नली में हर गैस अपने ही रंग में चमकती है और यह रंग उसके परमाणु ऊर्जा स्तरों की पहचान होता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि हीलियम हल्का गुलाबी-श्वेत प्रकाश देती है और वह गुब्बारों तथा वायुपोतों में भरने के लिए जानी जाती है। विकल्प B गलत है, क्योंकि आर्गन हल्के बैंगनी-नीले रंग में चमकती है और विद्युत बल्बों को भरने तथा वेल्डिंग में सुरक्षा कवच बनाने में काम आती है। विकल्प C गलत है, क्योंकि नाइट्रोजन नीलापन लिए चमकती है और इसका उपयोग अक्रिय पैकिंग गैस तथा द्रव शीतलक के रूप में होता है। परीक्षा टिप: विसर्जन नली में लाल प्रकाश नियॉन का, और साधारण बल्बों में भरी जाने वाली गैस आर्गन।

Q14.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ग्रुप D · 23 Sep 2018, Shift 1आसान

निम्नलिखित में से कौन-सा पुष्प एकलिंगी है?

  1. A.पपीता
  2. B.सूरजमुखी
  3. C.गुड़हल
  4. D.सरसों
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. पपीता

व्याख्या

सही उत्तर है A, पपीता। एकलिंगी पुष्प में केवल एक ही प्रकार के जननांग होते हैं, या तो पुंकेसर या स्त्रीकेसर, जबकि द्विलिंगी पुष्प में दोनों होते हैं। पपीता द्विप्रजायी पौधा है: नर और मादा पुष्प अलग-अलग पौधों पर लगते हैं, इसलिए फल बनने के लिए पराग को नर पेड़ से मादा पेड़ तक पहुंचना पड़ता है। यही कारण है कि पपीते के बाग में कुछ नर पेड़ जानबूझकर रखे जाते हैं। मक्का, खीरा, तरबूज और नारियल भी एकलिंगी पुष्पों के उदाहरण हैं, जिनमें दोनों प्रकार के पुष्प एक ही पौधे पर होते हैं और ऐसे पौधे को उभयलिंगाश्रयी कहते हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि सूरजमुखी के पुष्पक्रम के चक्रिका पुष्पक द्विलिंगी होते हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि गुड़हल का पुष्प सामान्य द्विलिंगी पुष्प है, जिसमें पुंकेसर और स्त्रीकेसर दोनों रहते हैं। विकल्प D गलत है, क्योंकि सरसों के पुष्प भी द्विलिंगी होते हैं। परीक्षा टिप: एकलिंगी में पपीता, मक्का, खीरा और तरबूज आते हैं; गुड़हल, सरसों, गुलाब तथा मटर द्विलिंगी हैं।

Q15.सामान्य विज्ञानपूछा गया: CDS · 8 Nov 2020मध्यम

पराबैंगनी प्रकाश के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

  1. A.यह एक विद्युत चुंबकीय तरंग है।
  2. B.यह निर्वात से होकर चल सकती है।
  3. C.यह एक अनुदैर्ध्य तरंग है।
  4. D.इसकी तरंगदैर्ध्य दृश्य प्रकाश से छोटी होती है।
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. यह एक अनुदैर्ध्य तरंग है।

व्याख्या

सही उत्तर है C। पराबैंगनी प्रकाश अनुप्रस्थ तरंग है, अनुदैर्ध्य नहीं, इसलिए यही कथन गलत है। विद्युत चुंबकीय तरंग में विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र एक-दूसरे के तथा तरंग की चाल की दिशा के समकोण पर कंपन करते हैं, और यही अनुप्रस्थ तरंग की परिभाषा है। अनुदैर्ध्य तरंगों को दबने और फैलने के लिए कोई माध्यम चाहिए, जिसका सबसे जाना-पहचाना उदाहरण ध्वनि है। विकल्प A सही है, क्योंकि पराबैंगनी प्रकाश विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम में दृश्य प्रकाश और एक्स-किरणों के बीच आता है। विकल्प B सही है, क्योंकि विद्युत चुंबकीय तरंगों को माध्यम की जरूरत नहीं होती और वे खाली अंतरिक्ष पार कर लेती हैं, इसीलिए सूर्य की पराबैंगनी किरणें पृथ्वी तक पहुँचती हैं। विकल्प D सही है, क्योंकि पराबैंगनी तरंगदैर्ध्य लगभग 400 नैनोमीटर से घटकर 10 नैनोमीटर तक जाती है, जो बैंगनी प्रकाश से छोटी है; इसी अधिक ऊर्जा से त्वचा जलती है और इसे ओजोन परत सोख लेती है। परीक्षा टिप: सभी विद्युत चुंबकीय तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं; ध्वनि जैसी यांत्रिक तरंगें ही अनुदैर्ध्य हो सकती हैं।

Q16.सामान्य विज्ञानपूछा गया: बिहार · 29th Jan 2017मध्यम

सड़क पर चलती कार के पहिये के बारे में कौन-सा विकल्प सही है?

  1. A.लोटनिक घर्षण > स्थैतिक घर्षण > गतिज घर्षण
  2. B.स्थैतिक घर्षण > गतिज घर्षण > लोटनिक घर्षण
  3. C.स्थैतिक घर्षण > लोटनिक घर्षण > गतिज घर्षण
  4. D.लोटनिक घर्षण > गतिज घर्षण > स्थैतिक घर्षण
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. स्थैतिक घर्षण > गतिज घर्षण > लोटनिक घर्षण

व्याख्या

सही उत्तर है B, स्थैतिक घर्षण > गतिज घर्षण > लोटनिक घर्षण। एक ही सतहों के जोड़े के लिए घर्षण का क्रम हमेशा स्थैतिक, फिर गतिज और फिर लोटनिक रहता है। स्थैतिक घर्षण सबसे अधिक होता है क्योंकि विराम की अवस्था में सतहों की खुरदरी उभार एक-दूसरे में फँसे रहते हैं और गति शुरू करने के लिए इस जकड़न को तोड़ना पड़ता है। सरकना शुरू होने पर संपर्क बार-बार टूटता और बनता रहता है, इसलिए गतिज घर्षण कम होता है। लोटनिक घर्षण तीनों में सबसे कम है, क्योंकि लुढ़कता पहिया सड़क पर सरकता नहीं, केवल संपर्क बिंदु पर उसे थोड़ा दबाता और विकृत करता है। इसी कारण भारी बोझ खिसकाने के लिए पहिये, रोलर और बॉल बेयरिंग काम में लिए जाते हैं। A और D गलत हैं क्योंकि ये लोटनिक घर्षण को सबसे ऊपर रखते हैं, जबकि वह तीनों में सबसे कम है। C गलत है क्योंकि यह लोटनिक घर्षण को गतिज घर्षण से बड़ा बताता है, जो सही क्रम के उलट है। परीक्षा टिप: स्थैतिक > गतिज > लोटनिक; इनमें सबसे कम वाले ने ही हमें पहिया दिया।

Q17.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB NTPC · 19 Jun, 2025, Shift 3मध्यम

मानक ताप और दाब (STP) पर 5.6 लीटर O2 गैस में उपस्थित अणुओं की संख्या है:

  1. A.6.022 × 10²³
  2. B.1.5055 × 10²³
  3. C.2.24 × 10²³
  4. D.3.011 × 10²³
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 1.5055 × 10²³

व्याख्या

सही उत्तर है B, 1.5055 × 10²³। मानक ताप और दाब पर किसी भी गैस का एक मोल 22.4 लीटर आयतन घेरता है, इसलिए 5.6 लीटर का अर्थ है 5.6 बटा 22.4, यानी एक चौथाई मोल। एक मोल में 6.022 × 10²³ कण होते हैं, जिसे आवोगाद्रो संख्या कहते हैं, इसलिए ऑक्सीजन के एक चौथाई मोल में 6.022 × 10²³ बटा चार, अर्थात 1.5055 × 10²³ अणु होंगे। ध्यान रखें कि प्रश्न अणुओं की संख्या पूछता है; ऑक्सीजन द्विपरमाणुक है, इसलिए परमाणुओं की संख्या इससे दोगुनी होगी। विकल्प A गलत है क्योंकि 6.022 × 10²³ पूरे एक मोल यानी 22.4 लीटर के लिए है। विकल्प C गलत है क्योंकि 2.24 × 10²³ मोलर आयतन 22.4 को कणों की संख्या के साथ मिला देने से आता है। विकल्प D गलत है क्योंकि 3.011 × 10²³ आधे मोल यानी 11.2 लीटर के लिए होगा। परीक्षा टिप: STP पर 22.4 लीटर बराबर एक मोल बराबर 6.022 × 10²³ अणु, इसलिए पहले आयतन को 22.4 से भाग दें।

Q18.सामान्य विज्ञानपूछा गया: CDS · 16 April 2023मध्यम

नेफ्थलीन पीली और धुएँदार ज्वाला के साथ जलता है। इसका कारण है

  1. A.कार्बन और हाइड्रोजन का अनुपात कम होना
  2. B.अपूर्ण दहन होना
  3. C.वायु की अधिक आपूर्ति होना
  4. D.नाइट्रोजन और सल्फर की अशुद्धियों की उपस्थिति
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अपूर्ण दहन होना

व्याख्या

सही उत्तर है B, अपूर्ण दहन होना। नेफ्थलीन एक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन C10H8 है, जिसमें कार्बन का अनुपात बहुत अधिक है, इसलिए ज्वाला के चारों ओर की वायु उस सारे कार्बन को कार्बन डाइऑक्साइड में बदलने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं दे पाती। बिना जला कार्बन दमकते कणों के रूप में ज्वाला से निकलता है, और इसी से प्रकाश पीला तथा धुआँ काला दिखता है। यह नियम असंतृप्त और एरोमैटिक यौगिकों पर सामान्य रूप से लागू होता है, जबकि संतृप्त हाइड्रोकार्बन स्वच्छ नीली ज्वाला के साथ जलते हैं। इसी रसायन से समझ आता है कि केरोसिन का दीपक क्यों धुआँ देता है और गैस बर्नर के वायु छिद्र खोलने पर ज्वाला नीली क्यों हो जाती है। विकल्प A गलत है, क्योंकि नेफ्थलीन में कार्बन और हाइड्रोजन का अनुपात कम नहीं बल्कि अधिक है, और वही इसका कारण है। विकल्प C गलत है, क्योंकि अधिक वायु मिलने पर दहन पूर्ण होता और ज्वाला स्वच्छ रहती। विकल्प D गलत है, क्योंकि धुएँदार जलना कार्बन से होता है, नाइट्रोजन या सल्फर की अशुद्धियों से नहीं। परीक्षा टिप: संतृप्त यौगिक नीली ज्वाला, असंतृप्त और एरोमैटिक यौगिक पीली धुएँदार ज्वाला देते हैं।

Q19.सामान्य विज्ञानमध्यम

पित्त में कोई एंजाइम न होने पर भी वह वसा के पाचन में सहायक होता है। उसका मुख्य कार्य क्या है?

  1. A.वह वसा को वसा अम्ल और ग्लिसरॉल में तोड़ता है
  2. B.वह वसा का इमल्सीकरण करता है और माध्यम को क्षारीय बनाता है
  3. C.वह रसांकुरों से वसा का अवशोषण करता है
  4. D.वह वसा को मंड में बदल देता है
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. वह वसा का इमल्सीकरण करता है और माध्यम को क्षारीय बनाता है

व्याख्या

सही उत्तर B है। पित्त यकृत में बनता है, पित्ताशय में संचित तथा सांद्र होता है और ग्रहणी में डाला जाता है, और इसमें पित्त लवण तथा पित्त वर्णक होते हैं, कोई पाचक एंजाइम नहीं। इसके पित्त लवण वसा के बड़े गोलकों को अत्यंत सूक्ष्म बूंदों में तोड़ते हैं, जिसे इमल्सीकरण कहते हैं, और इससे वह पृष्ठीय क्षेत्रफल कई गुना बढ़ जाता है जिस पर अग्न्याशयी लाइपेज क्रिया कर सकता है; साथ ही यह आमाशय से आए अम्ल को उदासीन करता है जिससे क्षारीय अग्न्याशयी और आंत्र एंजाइम काम कर सकें। विकल्प A गलत है क्योंकि वह रासायनिक विघटन लाइपेज का कार्य है, पित्त का नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि रसांकुरों से अवशोषण पाचन के बाद की अलग अवस्था है और पित्त उसे नहीं करता। विकल्प D गलत है क्योंकि शरीर का कोई स्राव वसा को मंड में नहीं बदलता, दोनों भिन्न वर्ग के पोषक तत्व हैं।

Q20.सामान्य विज्ञानमध्यम

मानव हृदय का गति प्रेरक ______ है।

  1. A.अलिंद-निलय गांठ
  2. B.शिरा-अलिंद गांठ
  3. C.हिस का बंडल
  4. D.पुरकिंजे तंतु
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. शिरा-अलिंद गांठ

व्याख्या

सही उत्तर B, शिरा-अलिंद गांठ है। हृदय की धड़कन मस्तिष्क से आई किसी तंत्रिका से आरंभ नहीं होती; हृदय अपनी लय स्वयं उत्पन्न करता है, और विशिष्ट ऊतक का जो टुकड़ा यह काम सबसे तेज करता है, वही शेष के लिए गति तय कर देता है। वह टुकड़ा शिरा-अलिंद गांठ है, जो ऊर्ध्व महाशिरा के मुख के पास दाएं अलिंद की भित्ति में स्थित है, और इसीलिए उसे हृदय का गति प्रेरक कहा जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि अलिंद-निलय गांठ केवल शिरा-अलिंद गांठ से आवेग पाती है और उसे थोड़ा विलंबित करती है, जिससे अलिंद खाली हो सकें; वह धीमे बदली गति प्रेरक का काम कर सकती है, पर सामान्य गति प्रेरक नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि हिस का बंडल वह संवाहक मार्ग है जो आवेग को अलिंद-निलय गांठ से निलयों के बीच के पट में ले जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि पुरकिंजे तंतु अंतिम शाखाएं हैं, जो आवेग को निलय की पेशी में फैलाती हैं। याद रखने का क्रम है शिरा-अलिंद गांठ, अलिंद-निलय गांठ, हिस का बंडल, पुरकिंजे तंतु।

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