ऐल्कीनों का हाइड्रोजनीकरण किसकी उपस्थिति में किया जा सकता है?
- A.कॉपर
- B.जिंक
- C.ऐलुमिनियम
- D.निकेल
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. निकेल
व्याख्या
सही उत्तर है D, निकेल। ऐल्कीन में कार्बन-कार्बन द्विबंध होता है और उस बंध पर हाइड्रोजन जुड़ने से वह संगत ऐल्केन बन जाता है। इस अभिक्रिया के लिए सूक्ष्म विभाजित धातु उत्प्रेरक चाहिए और औद्योगिक रूप से सस्ता विकल्प निकेल है, जिसे प्रायः 150 से 200 डिग्री सेल्सियस पर काम में लिया जाता है; पैलेडियम और प्लैटिनम यही काम कम ताप पर कर देते हैं। उत्प्रेरक हाइड्रोजन अणुओं को अपनी सतह पर रोककर उन्हें परमाणुओं में तोड़ता है और द्विबंध से जुड़ने देता है, इसलिए वह केवल गति बढ़ाता है, स्वयं खर्च नहीं होता। इसका सबसे जाना-पहचाना उपयोग खाद्य उद्योग में है: असंतृप्त वनस्पति तेलों का निकेल पर हाइड्रोजनीकरण करके ठोस वनस्पति घी बनाया जाता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि कॉपर का उपयोग ऐल्कोहॉल के विहाइड्रोजनीकरण में होता है, जो उलटा परिवर्तन है। विकल्प B गलत है, क्योंकि जिंक चूर्ण दूसरी अपचयन अभिक्रियाओं में काम आता है, द्विबंध पर हाइड्रोजन जोड़ने में नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि ऐलुमिनियम हाइड्रोजनीकरण का उत्प्रेरक नहीं है। परीक्षा टिप: ऐल्कीन और हाइड्रोजन निकेल पर मिलकर ऐल्केन, तेल और हाइड्रोजन निकेल पर मिलकर वनस्पति घी।