पीएम-एमकेएसएसवाई में झींगा पालन के बीमा दावे का निपटान कितने दिनों में करना अनिवार्य है?
- A.15 दिन
- B.30 दिन
- C.45 दिन
- D.60 दिन
सही उत्तर
B. 30 दिन
व्याख्या
सही उत्तर 30 दिन है। दावे की प्रक्रिया तब शुरू होती है जब बीमित किसान घटना की सूचना बीमा कंपनी को देता है और पॉलिसी की शर्तों के अनुसार दस्तावेज जमा करता है; इसके बाद कंपनी हानि निर्धारक नियुक्त करती है, नुकसान का आकलन होता है और उसी रिपोर्ट पर भुगतान किया जाता है, जिसकी स्थिति कंपनी के पोर्टल पर दिखती रहती है। झींगा पालन में यह निपटान 30 दिन के भीतर और अन्य जलकृषि गतिविधियों में 45 दिन के भीतर पूरा होना चाहिए। इसलिए 45 दिन झींगा के लिए गलत उत्तर है, वह शेष गतिविधियों की अवधि है और परीक्षार्थी अकसर दोनों को आपस में बदल देते हैं। 15 दिन गलत है क्योंकि इतनी छोटी अवधि तय नहीं की गई, और 60 दिन गलत है क्योंकि वह दोनों सीमाओं से अधिक है। अभी ओआईसीएल, एआईसीएल, एनआईएएल और यूआईआईसी कवर दे रही हैं।
पूरा लेख पढ़ें: पीएम-एमकेएसएसवाई: मत्स्य बीमा पर 40% प्रोत्साहन
अभ्यास प्रश्न
पीएम-एमकेएसएसवाई के अंतर्गत पात्र किसान को जलकृषि बीमा प्रीमियम का कितना हिस्सा एकमुश्त प्रोत्साहन के रूप में मिलता है?
- A.25%
- B.40%
- C.50%
- D.75%
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 40%
व्याख्या
सही उत्तर 40% है। पीएम-एमकेएसएसवाई के घटक 1-बी में पात्र जलकृषि किसान को एक फसल चक्र के बीमा प्रीमियम का 40% तक एकमुश्त प्रोत्साहन दिया जाता है, जो राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सीधे उसके बैंक खाते में जाता है। तालाब आधारित जलकृषि में यह भुगतान जल क्षेत्र के प्रति हेक्टेयर 25,000 रुपये तक सीमित है और चार हेक्टेयर तक अधिकतम 1,00,000 रुपये मिलते हैं, जबकि केज कल्चर, पुनर्चक्रीय जलकृषि प्रणाली, बायोफ्लॉक और रेसवे जैसी उन्नत प्रणालियों पर भी यही हिस्सा लागू होता है, जिसमें इकाई आकार की सीमा 1,800 घन मीटर है। 25%, 50% और 75% विकल्प गलत हैं, क्योंकि योजना में ऐसा कोई हिस्सा तय नहीं है; एकमात्र अतिरिक्त राहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला लाभार्थियों को देय प्रोत्साहन का 10% अधिक है। 40% के साथ दोनों ऊपरी सीमाएं भी याद रखें।
2024-25 में 19.8 मिलियन टन उत्पादन के साथ विश्व मत्स्य उत्पादन में भारत का स्थान कौन सा है?
- A.पहला
- B.दूसरा
- C.तीसरा
- D.चौथा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. दूसरा
व्याख्या
सही उत्तर दूसरा है। भारत लगभग 8% हिस्सेदारी के साथ विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश है और उसका वार्षिक उत्पादन 2024-25 में रिकॉर्ड 19.8 मिलियन टन तक पहुंचा। जलकृषि, जिसमें मीठे पानी की कार्प मछलियों का तालाब पालन, खारे पानी में झींगा पालन, केज कल्चर तथा शीतजल और समुद्री प्रजातियां शामिल हैं, अब इस उत्पादन का लगभग 74% देती है। पहला विकल्प गलत है, क्योंकि विश्व मत्स्य उत्पादन में चीन बड़े अंतर से आगे है। तीसरा और चौथा विकल्प भी गलत हैं, क्योंकि उत्पादन 2013-14 के 9.6 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 19.8 मिलियन टन हो गया, यानी 106% से अधिक की वृद्धि हुई। इसके साथ यह भी याद रखें कि 2025-26 में समुद्री उत्पाद निर्यात 8.46 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
भारत सरकार ने प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) को कब मंजूरी दी थी?
- A.8 फरवरी 2024
- B.10 सितंबर 2020
- C.1 अप्रैल 2021
- D.15 अगस्त 2023
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 8 फरवरी 2024
व्याख्या
सही उत्तर 8 फरवरी 2024 है। सरकार ने इसी तारीख को पीएम-एमकेएसएसवाई को मंजूरी दी थी, जिसका उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र को औपचारिक रूप देना और किसानों के जोखिम का प्रबंधन करना है, और 28 सितंबर 2026 को बताया गया जलकृषि बीमा इसी योजना का घटक 1-बी है। लाभ राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सीधे लाभ अंतरण से किसान तक पहुंचता है। 10 सितंबर 2020 गलत है; वह प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की शुरुआत से जुड़ा है, जिसके अंतर्गत औसत जलकृषि उत्पादकता को मौजूदा 4.77 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर पांच टन प्रति हेक्टेयर के लक्ष्य तक ले जाया जा रहा है। 1 अप्रैल 2021 गलत है क्योंकि उस दिन इस योजना को कोई मंजूरी नहीं मिली, और 15 अगस्त 2023 भी गलत विकल्प है। दोनों मत्स्य योजनाओं की तिथियां अलग-अलग याद रखें।
पीएम-एजेएवाई में अवसंरचना विकास अनुदान के लिए किसी गांव में अनुसूचित जाति की आबादी कम से कम कितनी होनी चाहिए?
- A.25%
- B.40%
- C.50%
- D.60%
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 40%
व्याख्या
सही उत्तर 40% है। पीएम-एजेएवाई के अवसंरचना विकास घटक में कोई गांव अनुदान का पात्र तब होता है जब वहां अनुसूचित जाति की आबादी 40% या उससे अधिक हो और कुल जनसंख्या 500 या उससे ज्यादा हो, यानी हिस्सेदारी और आकार, दोनों शर्तें पूरी होनी चाहिए। 25% गलत है, क्योंकि योजना में ऐसी कोई सीमा नहीं रखी गई; इतनी नीची सीमा रखने पर राशि इतनी बंट जाएगी कि गांव को आदर्श ग्राम बनाना कठिन हो जाए। 50% भी गलत है, हालांकि यह विकल्प भ्रमित करता है क्योंकि घटक का वर्णन अनुसूचित जाति बहुल गांवों के रूप में किया जाता है; लिखित पात्रता 40% है, साधारण बहुमत नहीं। 60% भी गलत है और यह दिशा-निर्देशों में तय सीमा से ऊंचा है। साथ में यह भी याद रखें कि अनुदान सहायता में 2.50 लाख रुपये तक वार्षिक आय वाले परिवारों को प्राथमिकता मिलती है और कुल राशि में 50% तक चुने हुए आदर्श ग्राम गांवों की कमियां दूर करने पर खर्च होती है।
8 सितंबर 2026 तक पीएम-एजेएवाई के अंतर्गत कितने गांव आदर्श ग्राम घोषित किए गए थे?
- A.47,243
- B.46,944
- C.27,032
- D.18,093
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 18,093
व्याख्या
सही उत्तर 18,093 है। 28 सितंबर 2026 के पीआईबी पृष्ठभूमि विवरण के अनुसार 8 सितंबर 2026 तक इतने गांव आदर्श ग्राम घोषित किए जा चुके थे, जो अनुसूचित जाति बहुल गांवों में बुनियादी सेवाओं के सुधार की प्रगति दिखाता है। बाकी तीनों विकल्प भी इसी योजना के वास्तविक आंकड़े हैं, इसलिए यह प्रश्न सावधानी मांगता है। 47,243 आदर्श ग्राम घटक में शामिल किए गए गांवों की संख्या है, जिनसे 47.79 लाख से अधिक नागरिक लाभान्वित हुए, न कि घोषित गांवों की संख्या। 46,944 इस घटक के अंतर्गत पूरे हुए विकास कार्यों की गिनती है, जो कार्यों की संख्या है, गांवों की नहीं। 27,032 तैयार की गई ग्राम विकास योजनाओं की संख्या है, जो निर्माण कार्य से पहले का नियोजन चरण है। प्रश्न का उत्तर केवल 18,093 है, और किसी गांव को आदर्श ग्राम तब घोषित किया जाता है जब वहां के निवासियों को योजना में गिनाई गई मूलभूत सेवाएं मिलने लगती हैं।