परीक्षण में प्रतिभागियों को मानकीकृत जलीय अश्वगंधा मूल अर्क की कितनी दैनिक खुराक दी गई?
- A.250 मिलीग्राम
- B.500 मिलीग्राम
- C.750 मिलीग्राम
- D.1,000 मिलीग्राम
सही उत्तर
B. 500 मिलीग्राम
व्याख्या
सही उत्तर 500 मिलीग्राम प्रतिदिन है, और इस मात्रा को कच्ची जड़ के चार ग्राम चूर्ण के बराबर बताया गया है। प्रतिभागियों को यादृच्छिक रूप से या तो यह मानकीकृत जलीय अर्क दिया गया या वैसा ही दिखने वाला प्लेसीबो, और यह आवंटन डबल-ब्लाइंड था, यानी न प्रतिभागी और न ही आकलन करने वाले यह जानते थे कि कौन किस समूह में है। ढाई सौ, साढ़े सात सौ और एक हजार मिलीग्राम वाले विकल्प गलत हैं, क्योंकि केवल एक ही खुराक का परीक्षण किया गया; यह अध्ययन सुरक्षा और सहनशीलता पर केंद्रित था, खुराक की तुलना पर नहीं। पूरी अवधि में लिवर एंजाइम, बिलीरुबिन, क्रिएटिनिन और ब्लड यूरिया की निगरानी की गई। अध्ययन में यह भी देखा गया कि क्या यह अर्क टीकाकरण के बाद बनी प्रतिरक्षा में हस्तक्षेप करता है, और दोनों समूहों में वायरस निष्क्रिय करने वाली गतिविधि 85 प्रतिशत से ऊपर मिली तथा उनके बीच कोई सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया गया।
पूरा लेख पढ़ें: अश्वगंधा मूल अर्क 24 सप्ताह तक सुरक्षित, 1,200 वयस्कों पर अध्ययन
अभ्यास प्रश्न
मानकीकृत अश्वगंधा मूल अर्क पर हुए बहु-केंद्रित क्लिनिकल परीक्षण में कितने प्रतिभागी शामिल किए गए?
- A.600
- B.900
- C.1,200
- D.1,500
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 1,200
व्याख्या
सही उत्तर 1,200 है। इस रैंडमाइज्ड, डबल-ब्लाइंड और प्लेसीबो नियंत्रित परीक्षण में 18 से 70 वर्ष आयु वर्ग के इतने स्वस्थ वयस्क शामिल किए गए, जिन सभी को कोविडशील्ड टीके की पहली, दूसरी अथवा बूस्टर खुराक पहले ही मिल चुकी थी, और यह अध्ययन देश के सात केंद्रों पर चलाया गया। छह सौ, नौ सौ और पंद्रह सौ वाले विकल्प गलत हैं, क्योंकि इनमें से कोई भी संख्या इस अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों से मेल नहीं खाती। एक अन्य आंकड़े को इससे अलग रखना चाहिए: शामिल लोगों में से 1,032 प्रतिभागियों, यानी 86 प्रतिशत ने पूरा अध्ययन पूरा किया और 28वें सप्ताह तक उनका फॉलो-अप हुआ। यह परीक्षण भारत की क्लिनिकल ट्रायल्स रजिस्ट्री में पंजीकृत था और इसे बहु-केंद्रित, रैंडमाइज्ड, डबल-ब्लाइंड तथा प्लेसीबो नियंत्रित रूप में तैयार किया गया था, जिसे स्वस्थ आबादी में सुरक्षा और सहनशीलता के प्रश्नों पर सबसे भरोसेमंद प्रमाण माना जाता है। अध्ययन में क्लिनिकल, प्रयोगशाला और इम्यूनोलॉजिकल आकलन शामिल थे।
अश्वगंधा की सुरक्षा पर हुआ यह अध्ययन किस पत्रिका में प्रकाशित हुआ?
- A.द लांसेट
- B.फ्रंटियर्स इन मेडिसिन
- C.नेचर मेडिसिन
- D.इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. फ्रंटियर्स इन मेडिसिन
व्याख्या
सही उत्तर फ्रंटियर्स इन मेडिसिन है, जिसमें यह शोधपत्र 20 अगस्त 2026 को प्रकाशित हुआ। इसका शीर्षक कोविडशील्ड टीकाकरण के बाद अश्वगंधा के दीर्घकालिक निवारक उपयोग और सहनशीलता से जुड़ा है। द लांसेट विकल्प गलत है, क्योंकि यह अध्ययन उसमें प्रकाशित नहीं हुआ, हालांकि वह सबसे प्रसिद्ध चिकित्सा पत्रिकाओं में गिनी जाती है और इसीलिए भ्रम पैदा करती है। नेचर मेडिसिन विकल्प भी इसी कारण गलत है। इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च विकल्प भी सही नहीं है, क्योंकि अध्ययन भारतीय संस्थानों ने भारतीय केंद्रों पर किया, पर प्रकाशन अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में हुआ। इसमें नौ संस्थानों के 45 शोधकर्ता शामिल थे। आयुष मंत्रालय ने इस शोधपत्र को मानकीकृत आयुर्वेदिक तैयारियों के लिए कठोर क्लिनिकल प्रमाण तैयार करने के व्यापक प्रयास के हिस्से के रूप में प्रस्तुत किया। यही बात आयुष सचिव, आयुष के राष्ट्रीय प्रोफेसर तथा अनुसंधान परिषद के महानिदेशक ने अपने-अपने बयानों में दोहराई, जिन्होंने कहा कि ऐसे अध्ययन आयुर्वेद के वैज्ञानिक आधार को मजबूत करते हैं।
मंत्री के अनुसार भारत में इस समय कितने अंतरिक्ष स्टार्टअप काम कर रहे हैं?
- A.100 से अधिक
- B.250 से अधिक
- C.400 से अधिक
- D.800 से अधिक
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 400 से अधिक
व्याख्या
सही उत्तर 400 से अधिक है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि अंतरिक्ष क्षेत्र के सुधारों और निजी तंत्र के विस्तार के बाद देश में इतने स्टार्टअप रॉकेट निर्माण, उपग्रह निर्माण तथा अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के क्षेत्र में सक्रिय हो चुके हैं। उन्होंने इसी आधार पर कहा कि दोनों देशों के सहयोग का अगला चरण सरकारी संस्थाओं, उद्योगों और स्टार्टअप को एक साथ लाकर बड़ा तंत्र और व्यापक संसाधन आधार तैयार कर सकता है। शेष तीनों विकल्प गलत हैं, क्योंकि मंत्री ने केवल यही एक आंकड़ा दिया और उसे निजी अंतरिक्ष तंत्र की तेज वृद्धि के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया। यह आंकड़ा सुधारों के बाद की स्थिति दर्शाता है। अंतरिक्ष क्षेत्र में हुए सुधारों के बाद निजी कंपनियों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है और यही आंकड़ा उस बदलाव को दर्शाता है। मंत्री ने यह भी कहा कि दोनों देशों के शोध संस्थान, उद्योग और युवा कंपनियां आपस में जुड़ें तो नवाचार का दायरा और चौड़ा होगा तथा संसाधनों का साझा आधार तैयार होगा।
निम्नलिखित में से कौन सा उपग्रह इसरो और फ्रांसीसी एजेंसी सीएनईएस ने मिलकर बनाया था?
- A.मेघा-ट्रॉपिक्स
- B.ओशनसैट-3
- C.रीसैट-2बी
- D.एमिसैट
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. मेघा-ट्रॉपिक्स
व्याख्या
सही उत्तर मेघा-ट्रॉपिक्स है। इसे सरल उपग्रह के साथ इसरो और सीएनईएस द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित बताया गया है, और दोनों को उस साझेदारी का पड़ाव कहा गया जो साउंडिंग रॉकेट परीक्षणों से शुरू हुई थी। ओशनसैट-3 विकल्प गलत है, क्योंकि यह भारत की महासागर निगरानी शृंखला का उपग्रह है और इसे संयुक्त परियोजना के रूप में नहीं गिनाया गया। रीसैट-2बी भी गलत है, क्योंकि यह भारत की रडार इमेजिंग शृंखला से संबंधित है और मंत्री द्वारा गिनाए गए संयुक्त उपग्रहों में इसका नाम नहीं है। एमिसैट विकल्प भी सही नहीं है, क्योंकि संयुक्त उपग्रहों की सूची में केवल मेघा-ट्रॉपिक्स, सरल और आगामी त्रिष्णा शामिल हैं। दोनों देशों के बीच प्रक्षेपण यान के इंजन विकास में भी सहयोग रहा है।
हाल ही में चर्चा में रहा त्रिष्णा उपग्रह भारत का किस देश के साथ तीसरा संयुक्त उपग्रह है?
- A.जापान
- B.फ्रांस
- C.जर्मनी
- D.इजरायल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. फ्रांस
व्याख्या
सही उत्तर फ्रांस है। त्रिष्णा को भारत और फ्रांस का तीसरा संयुक्त उपग्रह बताया गया है और इसका काम अच्छी तरह आगे बढ़ रहा है। इससे पहले इसरो तथा फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी सीएनईएस ने मिलकर मेघा-ट्रॉपिक्स और सरल उपग्रह बनाए थे। जापान विकल्प गलत है, क्योंकि यहां जिस साझेदारी की चर्चा है वह भारत और फ्रांस के बीच है; फ्रांसीसी मंत्री ने स्वयं त्रिष्णा को दोनों देशों की साझा उपलब्धि का उदाहरण बताया। जर्मनी भी गलत है, क्योंकि नई दिल्ली में डॉ. जितेंद्र सिंह से मिलने वाला प्रतिनिधिमंडल फ्रांस का था, जिसका नेतृत्व प्रो. फिलिप बैप्टिस्ट कर रहे थे। इजरायल विकल्प भी सही नहीं है, क्योंकि इस बातचीत में अंतरिक्ष, सेफिप्रा और नीली अर्थव्यवस्था जैसे सभी विषय भारत-फ्रांस सहयोग से जुड़े थे और किसी इजरायली एजेंसी का इसमें कोई उल्लेख नहीं है।