ओडिशा राज्य ने 10 जुलाई 2023 को किस दक्षिण-पूर्वी द्रविड़ भाषा को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की स्वीकृति दी?
- A.कुई
- B.माल्टो
- C.तुलु
- D.कोडगु
सही उत्तर
A. कुई
व्याख्या
सही उत्तर है A, कुई। कुई ओडिशा की कोंध (कंधा) जनजाति की भाषा है और द्रविड़ परिवार की दक्षिण-मध्य या दक्षिण-पूर्वी शाखा में तेलुगु तथा गोंडी के साथ रखी जाती है। यह मुख्य रूप से कंधमाल, रायगड़ा, कालाहांडी, कोरापुट और बौध जिलों में बोली जाती है, ओड़िया लिपि में लिखी जाती है, और इसमें मौखिक गीतों तथा लोककथाओं का बड़ा भंडार है। ओडिशा मंत्रिमंडल ने जुलाई 2023 में कुई को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की सिफारिश का प्रस्ताव मंजूर किया; इस अनुसूची में 1950 में चौदह भाषाएँ थीं और अब बाईस हैं, जिनमें ओड़िया भी है। विकल्प B गलत है, क्योंकि माल्टो झारखंड और पश्चिम बंगाल की राजमहल पहाड़ियों की उत्तरी द्रविड़ भाषा है। विकल्प C गलत है, क्योंकि तुलु तटीय कर्नाटक और केरल के कासरगोड की भाषा है और कर्नाटक उसके लिए अलग माँग रखता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि कोडगु कर्नाटक के कोडगु जिले में बोली जाती है। परीक्षा टिप: ब्राहुई, कुरुख और माल्टो उत्तरी द्रविड़ हैं; कुई और गोंडी तेलुगु के साथ आती हैं।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंलोक नाट्य शैली 'रणमाले' पारंपरिक रूप से निम्नलिखित में से किस राज्य से जुड़ी है?
- A.पश्चिम बंगाल
- B.गोवा
- C.झारखंड
- D.छत्तीसगढ़
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. गोवा
व्याख्या
सही उत्तर है B, गोवा। रणमाले गोवा की लोक नाट्य शैली है, जो मुख्यतः सत्तारी और सांगुएम क्षेत्रों में की जाती है।
इसका मंचन रात में खुले में, गाँव के मंदिर के सामने, शिगमो उत्सव और होली के आसपास होता है। सभी भूमिकाएँ, स्त्री पात्र भी, पुरुष ही निभाते हैं। कथाएँ रामायण और महाभारत से ली जाती हैं, जिन्हें सूत्रधार, ढोल और घुमट जोड़े रखते हैं। गोवा की अन्य प्रसिद्ध लोक शैलियाँ जागोर, दशावतार, कालो और खेल हैं।
विकल्प A गलत है क्योंकि पश्चिम बंगाल की लोक नाट्य शैली जात्रा है। विकल्प C गलत है, झारखंड छऊ और पाइका के लिए जाना जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि छत्तीसगढ़ की शैलियाँ नाचा और पंडवानी हैं, जिसे तीजन बाई ने प्रसिद्ध किया।
परीक्षा टिप: रणमाले, दशावतार और जागोर - गोवा; जात्रा - पश्चिम बंगाल; नौटंकी - उत्तर प्रदेश; तमाशा - महाराष्ट्र; भवाई - गुजरात।
गुलबर्गा, कर्नाटक के बहमनी स्मारक ________ स्थापत्य शैली का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- A.दक्कन
- B.मामलूक
- C.सिख
- D.नागर
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. दक्कन
व्याख्या
सही उत्तर है A, दक्कन। गुलबर्गा के बहमनी स्मारक इंडो-इस्लामिक स्थापत्य की दक्कन या प्रांतीय शैली के हैं।
1347 में दिल्ली से अलग होने के बाद बहमनी सल्तनत ने अपनी अलग शैली विकसित की, जिसमें ईरान से आए वास्तुकारों के फारसी और तुर्की विचार स्थानीय कारीगरी और पत्थर के साथ मिले। इसका सर्वोत्तम उदाहरण गुलबर्गा किले के भीतर की जामा मस्जिद है, जिसमें खुला आँगन नहीं है और तिरसठ गुंबद तथा चौड़े मेहराब पूरे नमाज-कक्ष को ढकते हैं, जो भारत में असामान्य है। पास ही हफ्त गुंबज मकबरे हैं। राजधानी बीदर जाने के बाद इसी शैली में महमूद गवान मदरसा बना।
विकल्प B मामलूक या गुलाम वंश शैली दिल्ली सल्तनत के आरंभिक काल की है, जैसे कुतुब मीनार। विकल्प C सिख शैली पंजाब के गुरुद्वारों में बहुत बाद के समय में दिखती है। विकल्प D नागर उत्तर भारत की मंदिर शैली है, जिसमें घुमावदार शिखर होता है।
परीक्षा टिप: दिल्ली की शैली शाही, क्षेत्रीय शैली प्रांतीय; गुलबर्गा और बीदर - दक्कन शैली।
'थोलू बोम्मलट्टा', एक छाया कठपुतली नाट्य परंपरा, किस राज्य की है?
- A.आंध्र प्रदेश
- B.कर्नाटक
- C.केरल
- D.महाराष्ट्र
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. आंध्र प्रदेश
व्याख्या
सही उत्तर है A, आंध्र प्रदेश। थोलू बोम्मलाटा आंध्र प्रदेश की चमड़े की छाया कठपुतली परंपरा है।
इसके नाम का अर्थ है चमड़े की गुड़ियों का नृत्य। कठपुतलियाँ बकरी या हिरण के चमड़े से काटी जाती हैं और दोनों ओर रंगी जाती हैं, जिससे दीपक की रोशनी में कपड़े के परदे पर उनके रंग चमकते हैं। इन्हें परदे के पीछे से चलाया जाता है, जबकि गायक, हारमोनियम और ढोल कथा को आगे बढ़ाते हैं। नाटक रामायण और महाभारत से लिए जाते हैं और कई बार रातभर चलते हैं। भारत में छाया कठपुतली की चार प्रसिद्ध शैलियाँ हैं - आंध्र की थोलू बोम्मलाटा, कर्नाटक की तोगलु गोम्बेयाट्टा, ओडिशा की रावणछाया और केरल की थोलपावकूथु।
विकल्प B गलत है क्योंकि कर्नाटक की शैली तोगलु गोम्बेयाट्टा है। विकल्प C गलत है, केरल में थोलपावकूथु भगवती मंदिरों में होती है। विकल्प D गलत है क्योंकि महाराष्ट्र की परंपरा कलसूत्री बाहुल्य है, जो धागों से चलती है।
परीक्षा टिप: चमड़े की छाया कठपुतली - आंध्र प्रदेश; धागे की कठपुतली - राजस्थान की कठपुतली।
अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) की स्थापना किसने की थी?
- A.श्री चैतन्य
- B.भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद
- C.श्री रामकृष्ण
- D.श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद
व्याख्या
सही उत्तर है B, भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद। उन्होंने 1966 में न्यूयॉर्क में इस्कॉन की स्थापना की थी।
उनका जन्म 1896 में कलकत्ता में अभय चरण दे के रूप में हुआ था। उनहत्तर वर्ष की आयु में वे थोड़े से रुपयों और पुस्तकों के एक बक्से के साथ अमेरिका गए और मैनहटन के एक पार्क में हरे कृष्ण महामंत्र का कीर्तन शुरू किया। इस्कॉन बंगाल की गौड़ीय वैष्णव भक्ति परंपरा का अनुसरण करता है और इसे अक्सर हरे कृष्ण आंदोलन कहा जाता है। प्रभुपाद ने 'भगवद्गीता यथारूप' और भागवत पुराण के बड़े हिस्से का अनुवाद किया। आज यह संस्था दुनिया भर में मंदिर और भोजन वितरण कार्यक्रम चलाती है।
विकल्प A श्री चैतन्य सोलहवीं सदी के बंगाल के संत थे, जिनकी शिक्षाओं को इस्कॉन मानता है, पर उन्होंने ऐसी कोई संस्था नहीं बनाई। विकल्प C श्री रामकृष्ण से प्रेरित होकर स्वामी विवेकानंद ने 1897 में रामकृष्ण मिशन बनाया। विकल्प D प्रभुपाद के गुरु थे।
परीक्षा टिप: इस्कॉन - 1966, न्यूयॉर्क, भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद, चैतन्य की गौड़ीय वैष्णव परंपरा।
मूगा रेशम भारत के निम्नलिखित में से किस राज्य से संबंधित है?
- A.अरुणाचल प्रदेश
- B.बिहार
- C.महाराष्ट्र
- D.असम
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. असम
व्याख्या
सही उत्तर है D, असम। मूगा रेशम केवल असम में बनता है और यह राज्य का सबसे प्रसिद्ध वस्त्र है।
यह अर्ध-पालतू रेशम कीट एंथेरिया असमेंसिस से मिलता है, जो ब्रह्मपुत्र घाटी में सोम और सोआलू के पत्ते खाता है। इसके धागे में प्राकृतिक सुनहरी चमक होती है, जो हर धुलाई के बाद और बढ़ती है, और मूगा की मेखला चादर पीढ़ियों तक चलती है। मूगा रेशम को 2007 में भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग मिला, जो असम के किसी उत्पाद को मिला पहला टैग था। भारत में चार तरह का रेशम बनता है - मलबरी, तसर, एरी और मूगा।
विकल्प A गलत है क्योंकि अरुणाचल प्रदेश अपातानी और आदि बुनाई के लिए जाना जाता है। विकल्प B गलत है, बिहार का भागलपुर तसर रेशम के लिए प्रसिद्ध है। विकल्प C गलत है क्योंकि महाराष्ट्र की पहचान पैठणी साड़ी है, जो मलबरी रेशम से बनती है।
परीक्षा टिप: मूगा और एरी - असम; तसर - झारखंड और बिहार; मलबरी - कर्नाटक।