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GK24
भारतीय इतिहासआसानपूछा गया: NDA · NDA-I 2025, GAT

निम्नलिखित में से किसने 1882 में एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसे भारत में स्थानीय स्वशासन का मैग्ना कार्टा भी कहा जाता है?

  1. A.लॉर्ड मैकाले
  2. B.लॉर्ड कैनिंग
  3. C.लॉर्ड रिपन
  4. D.लॉर्ड विलियम बेंटिंक

सही उत्तर

C. लॉर्ड रिपन

व्याख्या

सही उत्तर है C, लॉर्ड रिपन। वायसराय के रूप में उन्होंने 18 मई 1882 को स्थानीय स्वशासन पर प्रस्ताव जारी किया, जिसे इसका मैग्ना कार्टा कहा जाता है।

रिपन 1880 से 1884 तक वायसराय रहे। वे चाहते थे कि स्थानीय बोर्डों और नगरपालिकाओं में निर्वाचित गैर-सरकारी सदस्यों का बहुमत हो और जहां संभव हो अध्यक्ष भी निर्वाचित हो। वे इन्हें केवल बेहतर प्रशासन नहीं, बल्कि जनता की राजनीतिक शिक्षा का साधन मानते थे। इसी कारण उन्हें भारत में स्थानीय स्वशासन का जनक कहा जाता है। उनके समय में वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट रद्द हुआ (1882) और इल्बर्ट बिल विवाद हुआ।

A, लॉर्ड मैकाले कभी वायसराय नहीं रहे; वे 1835 के अंग्रेजी शिक्षा संबंधी मिनट के लिए जाने जाते हैं।

B, लॉर्ड कैनिंग 1857 के विद्रोह के समय गवर्नर-जनरल थे और 1858 में पहले वायसराय बने।

D, लॉर्ड विलियम बेंटिंक 1829 में सती प्रथा समाप्त करने के लिए प्रसिद्ध हैं, जो 1882 से बहुत पहले की बात है।

Exam tip: रिपन 1882 = स्थानीय स्वशासन; मेयो 1870 = वित्तीय विकेंद्रीकरण।

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Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2021, GS Paper Iमध्यम

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. संत फ़्रांसिस ज़ेवियर जेसुइट संघ के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। 2. संत फ़्रांसिस ज़ेवियर की मृत्यु गोवा में हुई और वहाँ उन्हें समर्पित एक चर्च है। 3. गोवा में प्रति वर्ष संत फ़्रांसिस ज़ेवियर का पर्व मनाया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

  1. A.केवल 1 और 2
  2. B.केवल 2 और 3
  3. C.केवल 1 और 3
  4. D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. केवल 1 और 3

फ़्रांसिस ज़ेवियर जेसुइट संघ के सह-संस्थापक थे और गोवा में हर वर्ष उनका पर्व मनाया जाता है, पर उनकी मृत्यु गोवा में नहीं हुई।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2021, GS Paper Iकठिन

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. इल्तुतमिश के शासनकाल में चंगेज़ ख़ान भगोड़े ख़्वारिज़्म राजकुमार का पीछा करते हुए सिंधु तक पहुँचा था। 2. मुहम्मद बिन तुग़लक़ के शासनकाल में तैमूर ने मुल्तान पर अधिकार किया और सिंधु पार की। 3. विजयनगर साम्राज्य के देवराय द्वितीय के शासनकाल में वास्को द गामा केरल के तट पर पहुँचा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. A.केवल 1
  2. B.1 और 2
  3. C.केवल 3
  4. D.2 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. केवल 1

चंगेज़ ख़ान इल्तुतमिश के समय सिंधु तक आया, पर तैमूर और वास्को द गामा बताए गए शासकों के बहुत बाद आए।

Q3.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2021, GS Paper Iकठिन

निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए : (ऐतिहासिक स्थल) (किसके लिए प्रसिद्ध) 1. बुर्ज़होम : शैलकृत देवस्थान 2. चंद्रकेतुगढ़ : मृण्मूर्ति (टेराकोटा) कला 3. गणेश्वर : ताम्र कलाकृतियाँ उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?

  1. A.केवल 1
  2. B.1 और 2
  3. C.केवल 3
  4. D.2 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 2 और 3

चंद्रकेतुगढ़ टेराकोटा के लिए और गणेश्वर ताँबे की वस्तुओं के लिए प्रसिद्ध है, पर बुर्ज़होम में कोई शैलकृत देवस्थान नहीं है।

Q4.भारतीय इतिहासपूछा गया: NDA · NDA-II 2021, GATकठिन

तत्त्वबोधिनी पत्रिका के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  1. A.इसने बांग्ला भाषा में भारत के अतीत के व्यवस्थित अध्ययन को बढ़ावा दिया।
  2. B.इसने संस्कृत स्रोतों के माध्यम से भारत के अतीत के व्यवस्थित अध्ययन को बढ़ावा दिया।
  3. C.इसने फ़ारसी स्रोतों के माध्यम से भारत के अतीत के व्यवस्थित अध्ययन को बढ़ावा दिया।
  4. D.इसने पश्चिमी स्रोतों के माध्यम से भारत के अतीत के व्यवस्थित अध्ययन को बढ़ावा दिया।
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. इसने बांग्ला भाषा में भारत के अतीत के व्यवस्थित अध्ययन को बढ़ावा दिया।

तत्त्वबोधिनी पत्रिका ने बांग्ला भाषा में भारत के अतीत के व्यवस्थित अध्ययन को बढ़ावा दिया। यह पत्रिका 1843 में रवींद्रनाथ टैगोर के पिता देवेंद्रनाथ टैगोर ने तत्त्वबोधिनी सभा के मुखपत्र के रूप में शुरू की थी, जिसकी स्थापना उन्होंने 1839 में की थी।

Q5.भारतीय इतिहासपूछा गया: NDA · NDA-II 2023, GATमध्यम

भक्ति आंदोलन के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

  1. A.भक्ति आंदोलन ने विविधता को बढ़ावा देने वाली परंपराओं से परहेज़ किया
  2. B.उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन राम और कृष्ण की उपासना के इर्द-गिर्द केंद्रित था
  3. C.भक्ति आंदोलन सगुण और निर्गुण, दोनों प्रकार की ईश्वर भक्ति पर आधारित था
  4. D.जहां तुलसीदास सगुण भक्ति परंपरा के प्रतिनिधि थे, वहीं संत कबीर ने निर्गुण भक्ति का मार्ग अपनाया
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. भक्ति आंदोलन ने विविधता को बढ़ावा देने वाली परंपराओं से परहेज़ किया

भक्ति आंदोलन ने विविधता से परहेज़ नहीं किया, बल्कि अनेक क्षेत्रीय भाषाओं, संप्रदायों और सामाजिक समूहों को अपनाया, इसलिए यही कथन गलत है।