निम्नलिखित में से किसके संदर्भ में कुछ वैज्ञानिक पक्षाभ मेघ विरलन (सिरस क्लाउड थिनिंग) तकनीक और समतापमंडल में सल्फेट वायुविलय के अंतःक्षेपण के उपयोग का सुझाव देते हैं?
- A.कुछ क्षेत्रों में कृत्रिम वर्षा कराना
- B.उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की बारंबारता और तीव्रता घटाना
- C.पृथ्वी पर सौर पवनों के प्रतिकूल प्रभाव घटाना
- D.भूमंडलीय तापन घटाना
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है D, भूमंडलीय तापन घटाना। दोनों उपाय भू-अभियांत्रिकी (जियोइंजीनियरिंग) के प्रस्ताव हैं, जिनका उद्देश्य पृथ्वी में आने या उससे जाने वाली ऊष्मा बदलकर ग्रह को ठंडा करना है।
समतापमंडल में सल्फेट वायुविलय डालना सौर विकिरण प्रबंधन का एक रूप है: ये सूक्ष्म कण आने वाली धूप का कुछ भाग वापस अंतरिक्ष में परावर्तित करते हैं। यह विचार बड़े ज्वालामुखी विस्फोटों से लिया गया है; 1991 में माउंट पिनातुबो ने एक-दो वर्ष तक पृथ्वी को लगभग आधा डिग्री सेल्सियस ठंडा किया था। पक्षाभ मेघ विरलन उलटे ढंग से काम करता है। ऊँचे, पतले सिरस मेघ धूप रोकने से अधिक बाहर जाने वाली ऊष्मा को रोकते हैं, इसलिए उन्हें पतला करने से अधिक दीर्घ-तरंग ऊष्मा अंतरिक्ष में निकल सकेगी। दोनों अभी बड़े पैमाने पर परखे नहीं गए और मानसून वर्षा में बदलाव जैसे जोखिम रखते हैं।
A गलत है: कृत्रिम वर्षा सिल्वर आयोडाइड या नमक से मेघ-बीजन द्वारा होती है, इन तरीकों से नहीं।
B गलत है: ये तकनीकें चक्रवातों के लिए नहीं हैं।
C गलत है: सौर पवन को पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र मोड़ता है; वायुविलय इसे कम नहीं कर सकते।
परीक्षा टिप: समतापमंडलीय सल्फेट वायुविलय = धूप परावर्तित; सिरस विरलन = ऊष्मा बाहर; दोनों भूमंडलीय तापन के विरुद्ध भू-अभियांत्रिकी।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
I. भारत में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन 0.5 t CO2/प्रति व्यक्ति से कम है।
II. ईंधन दहन से CO2 उत्सर्जन के मामले में भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में दूसरे स्थान पर है।
III. भारत में बिजली और ऊष्मा उत्पादक CO2 उत्सर्जन के सबसे बड़े स्रोत हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल I और III
- B.केवल II
- C.केवल II और III
- D.I, II और III
उत्तर देखें
ईंधन दहन से CO2 उत्सर्जन में भारत एशिया-प्रशांत में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा उत्सर्जक है और बिजली व ऊष्मा उत्पादन इसका सबसे बड़ा स्रोत है, पर इसका प्रति व्यक्ति उत्सर्जन 0.5 टन से काफ़ी अधिक है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →'घरेलू अंश आवश्यकता' (डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट) शब्द कभी-कभी समाचारों में किसके संदर्भ में दिखाई देता है?
- A.हमारे देश में सौर ऊर्जा उत्पादन का विकास
- B.हमारे देश में विदेशी टी.वी. चैनलों को लाइसेंस देना
- C.हमारे खाद्य उत्पादों का अन्य देशों को निर्यात
- D.विदेशी शैक्षणिक संस्थानों को हमारे देश में अपने परिसर स्थापित करने की अनुमति
उत्तर देखें
घरेलू अंश आवश्यकता (DCR) वह नियम है जिसके अनुसार कुछ सौर परियोजनाओं में भारत में बने सौर सेल और मॉड्यूल ही लगाने होते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से किनकी प्रजातियाँ अन्य जीवों के साथ सहजीवी संबंध स्थापित कर सकती हैं?
1. नाइडेरियन
2. कवक
3. प्रोटोज़ोआ
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- A.केवल 1 और 2
- B.केवल 2 और 3
- C.केवल 1 और 3
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
नाइडेरियन, कवक और प्रोटोज़ोआ, तीनों में ऐसी प्रजातियाँ हैं जो अन्य जीवों के साथ घनिष्ठ, परस्पर लाभकारी साझेदारी में रहती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पीकॉक टारेंटुला (गूटी टारेंटुला) के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
I. यह एक सर्वाहारी क्रस्टेशियन है।
II. भारत में इसका प्राकृतिक आवास केवल कुछ वन क्षेत्रों तक सीमित है।
III. अपने प्राकृतिक आवास में यह एक वृक्षवासी प्रजाति है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल I
- B.I और II
- C.केवल II
- D.II और III
उत्तर देखें
गूटी टारेंटुला पेड़ों पर रहने वाली मकड़ी है जो भारत के कुछ ही वन क्षेत्रों में मिलती है; यह क्रस्टेशियन नहीं है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए :
कभी-कभी समाचारों में दिखने वाले शब्द — उनका उद्गम
1. अनुबंध-I देश — कार्टाजेना प्रोटोकॉल
2. प्रमाणित उत्सर्जन कटौतियाँ — नागोया प्रोटोकॉल
3. स्वच्छ विकास तंत्र — क्योटो प्रोटोकॉल
ऊपर दिए गए युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
- A.केवल 1 और 2
- B.केवल 2 और 3
- C.केवल 3
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
तीनों शब्द जलवायु संधियों, यानी UNFCCC और उसके क्योटो प्रोटोकॉल से आए हैं, इसलिए केवल तीसरा युग्म सही है। क्योटो प्रोटोकॉल (1997) ने औद्योगिक देशों के लिए बाध्यकारी उत्सर्जन कटौती तय की और तीन बाज़ार तंत्र बनाए: स्वच्छ विकास तंत्र (CDM), संयुक्त कार्यान्वयन और उत्सर्जन व्यापार।
पूरी व्याख्या पढ़ें →