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GK24
भारतीय इतिहासकठिनपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2017, Paper I

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

  1. A.शरफ़ क़ाई अलाउद्दीन खिलजी का एक मंत्री था
  2. B.ग़यासुद्दीन तुग़लक के अधीन मुक्तियों को चेतावनी दी गई थी कि वे अपने किसी भी अधिकारी को वेतन से ऊपर ली गई छोटी रकम के लिए परेशान न करें
  3. C.अरबी ग्रंथ मसालिक-उल-अबसार में मुहम्मद बिन तुग़लक के अधीन इक्ता व्यवस्था के कामकाज का वर्णन है
  4. D.मार्को पोलो ने दक्षिण भारत में तूतीकोरिन के मोती उद्योग (पर्ल फ़िशरी) का उल्लेख नहीं किया है

सही उत्तर

D. मार्को पोलो ने दक्षिण भारत में तूतीकोरिन के मोती उद्योग (पर्ल फ़िशरी) का उल्लेख नहीं किया है

व्याख्या

सही उत्तर है D। मार्को पोलो ने तूतीकोरिन तट के मोती निकालने के काम का वर्णन किया था, इसलिए यह कहना कि उसने इसका उल्लेख नहीं किया, गलत है।

यह वेनिस का यात्री 13वीं सदी के अंत में कोरोमंडल तट पर आया, जिसे उसने 'माबर' कहा। उसने विस्तार से लिखा कि गोताखोर भारत और श्रीलंका के बीच की खाड़ी (मन्नार की खाड़ी) में उतरकर मोती वाली सीपियाँ कैसे निकालते थे और पांड्य शासक इसमें अपना हिस्सा कैसे लेता था। तूतीकोरिन इसी तट पर है और सदियों तक मोती उद्योग का केंद्र रहा।

A विकल्प नहीं है: शरफ़ क़ाई (शरफ़ क़ायिनी) अलाउद्दीन का नायब वज़ीर था और भू-राजस्व सुधार उसी ने लागू किए, इसलिए कथन सही है।

B विकल्प नहीं है: बरनी लिखता है कि ग़यासुद्दीन तुग़लक ने मुक्तियों से कहा था कि वेतन से ऊपर ली गई छोटी रकम पर अपने कर्मचारियों को तंग न करें।

C विकल्प नहीं है: अरब विद्वान शिहाबुद्दीन अल-उमरी के ग्रंथ मसालिक-उल-अबसार में मुहम्मद बिन तुग़लक के समय की इक्ता व्यवस्था का वर्णन है।

Exam tip: मार्को पोलो = माबर (कोरोमंडल) और मोती उद्योग; मसालिक-उल-अबसार = अल-उमरी, मुहम्मद बिन तुग़लक का भारत।

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Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2023, Paper Iमध्यम

किसी पुरातात्विक स्थल को 'शिल्प उत्पादन केंद्र' के रूप में पहचानने के लिए पुरातत्वविदों के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा/से महत्वपूर्ण संकेतक है/हैं? 1. पत्थर के पिंड, पूरी सीपियाँ आदि जैसे कच्चे माल के साक्ष्य 2. स्थल का भौगोलिक विस्तार 3. अधूरी वस्तुओं, अस्वीकृत वस्तुओं और अपशिष्ट पदार्थ के साक्ष्य 4. विभिन्न प्रकार के मृद्भांडों के साक्ष्य नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :

  1. A.केवल 1
  2. B.केवल 1 और 3
  3. C.केवल 2 और 4
  4. D.केवल 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. केवल 1 और 3

शिल्प केंद्रों की पहचान कच्चे माल और वस्तुएँ बनाते समय बचे अवशेषों से होती है। हड़प्पाई स्थलों का अध्ययन करने वाले पुरातत्वविद पत्थर के पिंड, पूरी सीपियाँ और ताँबे का अयस्क जैसे कच्चे माल, औज़ार, और अधूरी, अस्वीकृत वस्तुएँ तथा कचरा खोजते हैं।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2023, Paper Iमध्यम

निम्नलिखित में से कौन 'लोकहितवादी' के नाम से जाने जाते थे?

  1. A.केशवचंद्र सेन
  2. B.गोपाल हरि देशमुख
  3. C.एम. जी. रानडे
  4. D.गोपाल गणेश आगरकर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. गोपाल हरि देशमुख

वे 'लोकहितवादी' उपनाम से लिखते थे, जिसका अर्थ है जनता के हित की बात करने वाला। गोपाल हरि देशमुख (1823–1892) महाराष्ट्र के समाज सुधारक और लेखक थे।

Q3.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2025, Paper Iकठिन

भारत के इतिहास के संदर्भ में 'कटपयादि पद्धति', 'परहित पद्धति' और 'दृग्गणित पद्धति' किससे संबंधित हैं?

  1. A.खगोलशास्त्र
  2. B.शल्य चिकित्सा
  3. C.रसायनशास्त्र
  4. D.संगीत और नृत्य
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. खगोलशास्त्र

तीनों पद्धतियाँ केरल के खगोल और गणित स्कूल से आती हैं। कटपयादि अक्षरों से संख्याएँ लिखने की विधि है, जिसमें हर व्यंजन किसी अंक के लिए होता है; इससे लंबी खगोलीय सारणियाँ श्लोकों के रूप में याद रखी जा सकती थीं।

Q4.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2020, Paper Iमध्यम

निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 1. सातवाहनों ने पश्चिमी भारत के कुछ भागों और दक्कन पर शासन किया 2. सातवाहनों ने सुदर्शन झील की मरम्मत और पुनर्निर्माण कराया नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :

  1. A.केवल 1
  2. B.केवल 2
  3. C.1 और 2 दोनों
  4. D.न तो 1, न ही 2
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. केवल 1

सातवाहनों ने दक्कन और पश्चिमी भारत के कुछ भागों पर राज किया, पर सुदर्शन झील की मरम्मत दूसरों ने कराई।

Q5.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2023, Paper Iमध्यम

निम्नलिखित में से कौन-सा आयोग भारत में लोक सेवाओं से संबंधित नहीं था?

  1. A.एचिसन आयोग
  2. B.इस्लिंगटन आयोग
  3. C.ली आयोग
  4. D.राधाकृष्णन आयोग
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. राधाकृष्णन आयोग

यह आयोग विश्वविद्यालय शिक्षा से जुड़ा था, लोक सेवाओं से नहीं। विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग 1948 में डॉ. एस. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में बना, जो बाद में भारत के दूसरे राष्ट्रपति बने।