भारत के इतिहास के संदर्भ में 'कटपयादि पद्धति', 'परहित पद्धति' और 'दृग्गणित पद्धति' किससे संबंधित हैं?
- A.खगोलशास्त्र
- B.शल्य चिकित्सा
- C.रसायनशास्त्र
- D.संगीत और नृत्य
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है A, खगोलशास्त्र। तीनों पद्धतियाँ केरल के खगोल और गणित स्कूल से आती हैं।
कटपयादि अक्षरों से संख्याएँ लिखने की विधि है, जिसमें हर व्यंजन किसी अंक के लिए होता है; इससे लंबी खगोलीय सारणियाँ श्लोकों के रूप में याद रखी जा सकती थीं। परहित गणना पद्धति लगभग 7वीं सदी में केरल के हरिदत्त ने आर्यभट से मिले आँकड़ों को सुधारने के लिए शुरू की। दृग्गणित, यानी 'प्रेक्षण से मेल खाने वाली गणना', 15वीं सदी में वटश्शेरी परमेश्वर ने ग्रहणों और ग्रहों के दशकों तक अवलोकन के बाद बनाई, क्योंकि परहित के पुराने मान आकाश में दिखने वाली स्थिति से हट गए थे।
B गलत है: भारतीय शल्य चिकित्सा सुश्रुत और सुश्रुत संहिता से जुड़ी है, इन पद्धतियों से नहीं।
C गलत है: प्राचीन भारतीय रसायन (रसशास्त्र) नागार्जुन जैसे नामों से जुड़ा है।
D गलत है: कटपयादि का प्रयोग बाद में मेलकर्ता रागों की संख्या बताने में हुआ, पर ये तीनों पद्धतियाँ मिलकर खगोलशास्त्र की हैं।
Exam tip: केरल स्कूल = हरिदत्त (परहित), परमेश्वर (दृग्गणित), माधव और नीलकंठ; कटपयादि = अक्षरों से संख्याएँ।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंकिसी पुरातात्विक स्थल को 'शिल्प उत्पादन केंद्र' के रूप में पहचानने के लिए पुरातत्वविदों के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा/से महत्वपूर्ण संकेतक है/हैं? 1. पत्थर के पिंड, पूरी सीपियाँ आदि जैसे कच्चे माल के साक्ष्य 2. स्थल का भौगोलिक विस्तार 3. अधूरी वस्तुओं, अस्वीकृत वस्तुओं और अपशिष्ट पदार्थ के साक्ष्य 4. विभिन्न प्रकार के मृद्भांडों के साक्ष्य नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- A.केवल 1
- B.केवल 1 और 3
- C.केवल 2 और 4
- D.केवल 3
उत्तर देखें
शिल्प केंद्रों की पहचान कच्चे माल और वस्तुएँ बनाते समय बचे अवशेषों से होती है। हड़प्पाई स्थलों का अध्ययन करने वाले पुरातत्वविद पत्थर के पिंड, पूरी सीपियाँ और ताँबे का अयस्क जैसे कच्चे माल, औज़ार, और अधूरी, अस्वीकृत वस्तुएँ तथा कचरा खोजते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.शरफ़ क़ाई अलाउद्दीन खिलजी का एक मंत्री था
- B.ग़यासुद्दीन तुग़लक के अधीन मुक्तियों को चेतावनी दी गई थी कि वे अपने किसी भी अधिकारी को वेतन से ऊपर ली गई छोटी रकम के लिए परेशान न करें
- C.अरबी ग्रंथ मसालिक-उल-अबसार में मुहम्मद बिन तुग़लक के अधीन इक्ता व्यवस्था के कामकाज का वर्णन है
- D.मार्को पोलो ने दक्षिण भारत में तूतीकोरिन के मोती उद्योग (पर्ल फ़िशरी) का उल्लेख नहीं किया है
उत्तर देखें
मार्को पोलो ने तूतीकोरिन तट के मोती निकालने के काम का वर्णन किया था, इसलिए यह कहना कि उसने इसका उल्लेख नहीं किया, गलत है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन 'लोकहितवादी' के नाम से जाने जाते थे?
- A.केशवचंद्र सेन
- B.गोपाल हरि देशमुख
- C.एम. जी. रानडे
- D.गोपाल गणेश आगरकर
उत्तर देखें
वे 'लोकहितवादी' उपनाम से लिखते थे, जिसका अर्थ है जनता के हित की बात करने वाला। गोपाल हरि देशमुख (1823–1892) महाराष्ट्र के समाज सुधारक और लेखक थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 1. सातवाहनों ने पश्चिमी भारत के कुछ भागों और दक्कन पर शासन किया 2. सातवाहनों ने सुदर्शन झील की मरम्मत और पुनर्निर्माण कराया नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1, न ही 2
उत्तर देखें
सातवाहनों ने दक्कन और पश्चिमी भारत के कुछ भागों पर राज किया, पर सुदर्शन झील की मरम्मत दूसरों ने कराई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा आयोग भारत में लोक सेवाओं से संबंधित नहीं था?
- A.एचिसन आयोग
- B.इस्लिंगटन आयोग
- C.ली आयोग
- D.राधाकृष्णन आयोग
उत्तर देखें
यह आयोग विश्वविद्यालय शिक्षा से जुड़ा था, लोक सेवाओं से नहीं। विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग 1948 में डॉ. एस. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में बना, जो बाद में भारत के दूसरे राष्ट्रपति बने।
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