निम्नलिखित में से कौन-सा एक प्राधिकरण 'लोक अदालतों' का आयोजन नहीं कर सकता?
- A.पंचायत समितियाँ
- B.तालुक विधिक सेवा समिति
- C.ज़िला प्राधिकरण
- D.उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है A, पंचायत समितियाँ। विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अंतर्गत केवल विधिक सेवा निकाय ही लोक अदालत लगा सकते हैं, और पंचायत समितियाँ इनमें नहीं हैं।
अधिनियम की धारा 19 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण, सर्वोच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति और तालुक विधिक सेवा समिति को लोक अदालत आयोजित करने का अधिकार देती है। लोक अदालत समझौते से विवाद निपटाती है, चाहे मामला अदालत में लंबित हो या अभी अदालत तक न पहुँचा हो। इसका निर्णय दीवानी अदालत की डिक्री माना जाता है, यह अंतिम और बाध्यकारी होता है, इसके विरुद्ध अपील नहीं होती और कोई न्यायालय शुल्क नहीं लगता। इस अधिनियम ने लोक अदालतों को वैधानिक दर्जा दिया और यह अनुच्छेद 39A से निकला है, जो राज्य से निःशुल्क विधिक सहायता देने को कहता है।
B गलत है क्योंकि तालुक विधिक सेवा समिति लोक अदालत लगा सकती है। C गलत है क्योंकि ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण इन्हें लगा सकता है। D गलत है क्योंकि उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति भी इन्हें लगा सकती है।
Exam tip: लोक अदालत = विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987, धारा 19; निर्णय अंतिम, अपील नहीं; आधार अनुच्छेद 39A।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन-सा सही नहीं है?
- A.कुछ अपवादों को छोड़कर, आपराधिक विधि पर विधान समवर्ती सूची का विषय है।
- B.दिवाला और शोधन-अक्षमता समवर्ती सूची के विषय हैं।
- C.अंतरराज्यीय व्यापार और वाणिज्य राज्य सूची का विषय है।
- D.बैंकिंग केवल संघ सूची के अंतर्गत है।
उत्तर देखें
राज्यों के बीच व्यापार और वाणिज्य संघ सूची की प्रविष्टि 42 है, इसलिए इसे राज्य सूची में बताना गलत है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923 को समाप्त करने की सिफ़ारिश द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने की थी
2. सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 में अधिनियमित किया गया था
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें
द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने शासकीय गुप्त बात अधिनियम को निरस्त करने की सिफ़ारिश की थी, और सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 में पारित हुआ।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सी शक्ति भारत के राष्ट्रपति को प्रदान नहीं की गई है?
- A.प्रधानमंत्री की नियुक्ति
- B.संसद के किसी सदस्य की निरर्हता से संबंधित किसी प्रश्न का अपने विवेक से निर्णय करना
- C.सेना न्यायालय (कोर्ट-मार्शल) द्वारा दंडित व्यक्ति को क्षमा प्रदान करना
- D.उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश को हटाना
उत्तर देखें
अनुच्छेद 103 के तहत सांसद की निरर्हता का प्रश्न राष्ट्रपति तय करते हैं, पर उन्हें चुनाव आयोग की राय लेकर उसी के अनुसार कार्य करना होता है, इसलिए इसमें विवेक नहीं है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालयों की शक्तियों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.यह बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, अधिकार-पृच्छा, उत्प्रेषण और प्रतिषेध की रिट जारी कर सकता है।
- B.भाग III द्वारा प्रदत्त किसी भी अधिकार को लागू कराने के लिए और किसी अन्य प्रयोजन के लिए रिट जारी की जा सकती हैं।
- C.यह शक्ति अनुच्छेद 32(2) के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय को प्रदत्त शक्ति का अल्पीकरण कर सकती है।
- D.इसके क्षेत्राधिकार के अंतर्गत किसी भी प्राधिकारी को रिट जारी की जा सकती है।
उत्तर देखें
अनुच्छेद 226(4) स्पष्ट कहता है कि उच्च न्यायालय की रिट शक्ति अनुच्छेद 32(2) द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को दी गई शक्ति का अल्पीकरण नहीं करेगी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित उद्धरण पर विचार कीजिए :
"26 जनवरी, 1950 को हम विरोधाभासों से भरे जीवन में प्रवेश करने जा रहे हैं। राजनीति में हमारे पास समानता होगी और सामाजिक तथा आर्थिक जीवन में असमानता होगी।"
यह उद्धरण निम्नलिखित में से किस नेता का माना जाता है?
- A.महात्मा गांधी
- B.सरोजिनी नायडू
- C.बी. आर. अम्बेडकर
- D.सोमनाथ लाहिड़ी
उत्तर देखें
उन्होंने ये शब्द 25 नवंबर 1949 को संविधान सभा में अपने अंतिम भाषण में कहे थे।
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