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GK24
पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यमपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2023, GS Paper I

निम्नलिखित जीवों पर विचार कीजिए : 1. लायन-टेल्ड मकाक (सिंहपुच्छी मकाक) 2. मालाबार सिवेट 3. सांभर हिरण उपर्युक्त में से कितने सामान्यतः निशाचर हैं या सूर्यास्त के बाद सबसे अधिक सक्रिय होते हैं?

  1. A.केवल एक
  2. B.केवल दो
  3. C.सभी तीन
  4. D.कोई नहीं

सही उत्तर

B. केवल दो

व्याख्या

सही उत्तर है B, केवल दो। मालाबार सिवेट और सांभर हिरण सूर्यास्त के बाद सक्रिय होते हैं, जबकि सिंहपुच्छी मकाक दिन में सक्रिय रहने वाला जीव है।

सिंहपुच्छी मकाक केवल पश्चिमी घाट के वर्षावनों में मिलता है और दिवाचर है: अधिकांश बंदरों की तरह यह दिन में भोजन करता और पेड़ों पर घूमता है तथा रात ऊँचे पेड़ों पर सोकर बिताता है। मालाबार सिवेट (मालाबार बड़ा चित्तीदार सिवेट) पश्चिमी घाट का अति संकटग्रस्त छोटा मांसाहारी जीव है और सिवेटों की तरह पूरी तरह निशाचर है। भारत का सबसे बड़ा हिरण सांभर मुख्यतः रात में या सांझ-भोर में सक्रिय होता है और दिन घनी झाड़ियों में आराम करते हुए बिताता है।

A गलत है: एक नहीं, दो जीव सूर्यास्त के बाद सक्रिय होते हैं।

C गलत है: सिंहपुच्छी मकाक दिन में सक्रिय रहता है।

D गलत है: सिवेट और सांभर दोनों रात में सक्रिय होते हैं।

परीक्षा टिप: बंदर और मकाक दिवाचर हैं; सिवेट, सांभर जैसे अधिकांश हिरण और उल्लू रात में सक्रिय होते हैं।

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Q1.पर्यावरण और पारिस्थितिकीपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2021, Paper Iआसान

निम्नलिखित में से कौन-सा एक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत नहीं है?

  1. A.सौर
  2. B.पवन
  3. C.नाभिकीय
  4. D.जलविद्युत
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. नाभिकीय

व्याख्या

सही उत्तर है C, नाभिकीय। नाभिकीय ऊर्जा यूरेनियम और थोरियम से बनती है, जो खनन से मिलने वाले सीमित खनिज हैं; इसलिए कम कार्बन होने के बावजूद यह अनवीकरणीय स्रोत है।

नवीकरणीय स्रोत वह है जिसकी प्रकृति मानव समय-सीमा में भरपाई कर देती है, जैसे सूर्य का प्रकाश, पवन, बहता जल, जैव-भार, ज्वार और पृथ्वी की आंतरिक ऊष्मा। नाभिकीय रिएक्टर यूरेनियम-235 का विखंडन करते हैं या ब्रीडर व्यवस्था में थोरियम से बने ईंधन का उपयोग करते हैं। एक बार उपयोग के बाद यह ईंधन लौटता नहीं, बल्कि लंबे समय तक रहने वाला रेडियोधर्मी कचरा छोड़ता है। होमी भाभा द्वारा बनाया गया भारत का तीन-चरणीय नाभिकीय कार्यक्रम कम यूरेनियम और अधिक थोरियम भंडार का अधिकतम उपयोग करने के लिए है, पर इससे ईंधन नवीकरणीय नहीं हो जाता।

विकल्प A गलत है, क्योंकि सौर ऊर्जा सूर्य से आती है, जो अरबों वर्षों तक चमकता रहेगा। विकल्प B गलत है, क्योंकि पवन सूर्य द्वारा पृथ्वी के असमान गर्म होने से बनती है। विकल्प D गलत है, क्योंकि जलविद्युत जल-चक्र से लगातार बहते पानी का उपयोग करती है।

परीक्षा टिप: स्वच्छ हमेशा नवीकरणीय नहीं होता; नाभिकीय कम-कार्बन पर अनवीकरणीय है।

Q2.पर्यावरण और पारिस्थितिकीपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2021, GS Paper Iमध्यम

'R2 कोड ऑफ प्रैक्टिसेज़' किसे अपनाने को बढ़ावा देने के लिए उपलब्ध एक साधन है?

  1. A.इलेक्ट्रॉनिक्स पुनर्चक्रण उद्योग में पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी प्रथाएँ
  2. B.रामसर अभिसमय के तहत 'अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों' का पारिस्थितिक प्रबंधन
  3. C.निम्नीकृत भूमि पर कृषि फसलों की खेती में संधारणीय प्रथाएँ
  4. D.प्राकृतिक संसाधनों के दोहन में 'पर्यावरणीय प्रभाव आकलन'
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. इलेक्ट्रॉनिक्स पुनर्चक्रण उद्योग में पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी प्रथाएँ

व्याख्या

सही उत्तर है A, इलेक्ट्रॉनिक्स पुनर्चक्रण उद्योग में पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी प्रथाएँ। R2, यानी रिस्पॉन्सिबल रीसाइक्लिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स के पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी पुनर्चक्रण का मानक है।

R2 मानक अमेरिका की पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) के सहयोग से बना और अब गैर-लाभकारी संस्था SERI (सस्टेनेबल इलेक्ट्रॉनिक्स रीसाइक्लिंग इंटरनेशनल) इसका प्रबंधन करती है। R2 प्रमाणित पुनर्चक्रण और मरम्मत करने वाली फर्मों को पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामान को सुरक्षित ढंग से संभालना, कामगारों के स्वास्थ्य की रक्षा करना, पुराने उपकरणों का डेटा सुरक्षित रखना, और सीसा, पारा तथा कैडमियम जैसे खतरनाक भागों पर नज़र रखनी होती है, ताकि उन्हें गैर-ज़िम्मेदारी से फेंका या निर्यात न किया जाए। यह इसलिए अहम है कि ई-कचरा विश्व में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला कचरा है। भारत में ई-कचरा ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियमों से नियंत्रित होता है।

B गलत है: रामसर आर्द्रभूमियों का प्रबंधन रामसर अभिसमय के अपने दिशानिर्देशों और मॉन्ट्रो रिकॉर्ड से होता है, R2 से नहीं।

C गलत है: R2 का निम्नीकृत भूमि पर खेती से कोई संबंध नहीं है।

D गलत है: पर्यावरणीय प्रभाव आकलन राष्ट्रीय EIA नियमों के अनुसार होता है, R2 कोड से नहीं।

परीक्षा टिप: R2 = इलेक्ट्रॉनिक्स का रिस्पॉन्सिबल रीसाइक्लिंग (SERI); e-Stewards भी ऐसा ही ई-कचरा मानक है।

Q3.पर्यावरण और पारिस्थितिकीपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2024, GS Paper Iमध्यम

अनेक उपभोक्ता उत्पादों के निर्माण में प्रयुक्त होने वाले परफ्लुओरोऐल्किल और पॉलीफ्लुओरोऐल्किल पदार्थों (PFAS) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

1. PFAS पेयजल, भोजन और खाद्य पैकेजिंग सामग्री में व्यापक रूप से पाए गए हैं।

2. PFAS पर्यावरण में आसानी से अपघटित नहीं होते।

3. PFAS के लगातार संपर्क से जंतुओं के शरीर में उनका जैव-संचयन हो सकता है।

ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?

  1. A.केवल 1 और 2
  2. B.केवल 2 और 3
  3. C.केवल 1 और 3
  4. D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 1, 2 और 3

व्याख्या

सही उत्तर है D, 1, 2 और 3। 'फॉरएवर केमिकल्स' कहे जाने वाले PFAS के बारे में तीनों कथन सही हैं।

PFAS मानव-निर्मित रसायनों का बड़ा समूह है, जो बहुत मज़बूत कार्बन-फ्लुओरीन बंधों पर बना है। ये पानी, चिकनाई और ऊष्मा का प्रतिरोध करते हैं, इसलिए नॉन-स्टिक बर्तनों, जलरोधी कपड़ों, चिकनाई-रोधी खाद्य पैकेजिंग और आग बुझाने वाले फोम में इस्तेमाल होते हैं। कार्बन-फ्लुओरीन बंध को तोड़ना बहुत कठिन है, इसलिए PFAS प्रकृति में लगभग नष्ट नहीं होते और मिट्टी, भूजल, पेयजल तथा भोजन तक फैल चुके हैं। ये समय के साथ जंतुओं और मनुष्यों के रक्त तथा अंगों में जमा होते जाते हैं, और लंबे संपर्क को यकृत क्षति, कमज़ोर प्रतिरक्षा और कुछ कैंसरों से जोड़ा गया है।

A गलत है: इसमें कथन 3 छूट गया है, जो सही है।

B गलत है: इसमें कथन 1 छूट गया है, जो सही है।

C गलत है: इसमें कथन 2 छूट गया है, जो इन्हें फॉरएवर केमिकल्स कहे जाने का कारण ही है।

परीक्षा टिप: PFAS = 'फॉरएवर केमिकल्स', कार्बन-फ्लुओरीन बंध, नॉन-स्टिक और जलरोधी उत्पाद, टिकाऊ और जैव-संचयी।

Q4.पर्यावरण और पारिस्थितिकीपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2017, GS Paper Iमध्यम

प्रदूषण की समस्याओं के समाधान के संदर्भ में जैवोपचार (बायोरेमेडिएशन) तकनीक का/के क्या लाभ है/हैं?

1. यह प्रकृति में होने वाली जैव-निम्नीकरण की उसी प्रक्रिया को बढ़ाकर प्रदूषण साफ करने की तकनीक है।

2. कैडमियम और सीसा जैसी भारी धातुओं वाले किसी भी संदूषक का सूक्ष्मजीवों के उपयोग से जैवोपचार द्वारा आसानी से और पूरी तरह उपचार किया जा सकता है।

3. आनुवंशिक इंजीनियरिंग का उपयोग विशेष रूप से जैवोपचार के लिए बनाए गए सूक्ष्मजीव तैयार करने में किया जा सकता है।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :

  1. A.केवल 1
  2. B.केवल 2 और 3
  3. C.केवल 1 और 3
  4. D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. केवल 1 और 3

व्याख्या

सही उत्तर है C, केवल 1 और 3। कथन 1 और 3 सही हैं; भारी धातुओं को सूक्ष्मजीव आसानी से और पूरी तरह नहीं हटा सकते।

जैवोपचार में प्रदूषकों को तोड़ने के लिए जीवों, मुख्यतः जीवाणुओं और कवकों, का उपयोग होता है। यह पोषक तत्व, ऑक्सीजन या उपयुक्त सूक्ष्मजीव डालकर प्रकृति की जैव-निम्नीकरण प्रक्रिया को तेज़ करता है और तेल रिसाव तथा सीवेज साफ करने में काम आता है। वैज्ञानिक इस काम के लिए सूक्ष्मजीव तैयार भी कर सकते हैं: आनंद मोहन चक्रवर्ती का तेल पचाने वाला आनुवंशिक रूप से संशोधित स्यूडोमोनास 'सुपरबग' इसका प्रसिद्ध उदाहरण है। कैडमियम और सीसा जैसी भारी धातुएँ तत्व हैं, इसलिए सूक्ष्मजीव उन्हें नष्ट नहीं कर सकते; अधिक से अधिक वे उनका रूप बदलते या उन्हें एकत्र करने में मदद करते हैं, और यह प्रक्रिया धीमी तथा अधूरी रहती है।

A गलत है: कथन 3 भी एक वास्तविक लाभ है।

B गलत है: कथन 2 भारी धातुओं के मामले में जैवोपचार की क्षमता को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है।

D गलत है: कथन 2 गलत है।

परीक्षा टिप: जैवोपचार तेल जैसे कार्बनिक प्रदूषकों पर अच्छा काम करता है, भारी धातुओं पर नहीं; तेल खाने वाला सुपरबग = स्यूडोमोनास।

Q5.पर्यावरण और पारिस्थितिकीकठिन

पश्चिमी घाट का सबसे चौड़ा विच्छेद पालघाट दर्रा किन दो पहाड़ी समूहों को अलग करता है?

  1. A.नीलगिरि और अनाईमलाई पहाड़ियां
  2. B.कार्डमम पहाड़ियां और अगस्त्यमलाई पहाड़ियां
  3. C.सह्याद्रि और नीलगिरि
  4. D.बाबाबूदन पहाड़ियां और ब्रह्मगिरि पहाड़ियां
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. नीलगिरि और अनाईमलाई पहाड़ियां

व्याख्या

सही उत्तर A, नीलगिरि और अनाईमलाई पहाड़ियां है। केरल के पालक्काड जिले में लगभग तीस किलोमीटर चौड़ा पालघाट दर्रा पूरी श्रेणी का सबसे बड़ा विच्छेद है और वही सड़क तथा रेल मार्ग ढोता है जो तमिलनाडु के कोयंबटूर को केरल के पालक्काड और त्रिशूर से जोड़ते हैं। चूंकि वहां घाट नीचे बैठ जाते हैं, यह दर्रा दक्षिण-पश्चिम मानसून को भीतर की ओर जाने देता है और कोयंबटूर पठार की वर्षा को प्रभावित करता है। विकल्प B गलत है क्योंकि कार्डमम पहाड़ियों और अगस्त्यमलाई समूह के बीच सुदूर दक्षिण में संकरा शेनकोट्टई दर्रा पड़ता है, पालघाट नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि सह्याद्रि उत्तरी पश्चिमी घाट का ही दूसरा नाम है और उसे नीलगिरि से कोई बड़ा दर्रा अलग नहीं करता। विकल्प D गलत है क्योंकि ये दोनों श्रेणियां कर्नाटक में, दर्रे से बहुत उत्तर में हैं।