नाभिकीय ऊर्जा उत्पन्न होती है
- A.नाभिकीय विखंडन द्वारा और इसका व्यंजक आइंस्टीन ने प्रस्तावित किया था।
- B.नाभिकीय विखंडन द्वारा और इसका व्यंजक रदरफोर्ड ने प्रस्तावित किया था।
- C.नाभिकीय संलयन द्वारा और इसका व्यंजक बोर ने प्रस्तावित किया था।
- D.नाभिकीय संलयन द्वारा और इसका व्यंजक हाइजेनबर्ग ने प्रस्तावित किया था।
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है A, नाभिकीय विखंडन द्वारा और इसका व्यंजक आइंस्टीन ने प्रस्तावित किया था। परमाणु बिजलीघर भारी नाभिकों को तोड़कर ऊर्जा बनाते हैं, और निकलने वाली ऊर्जा आइंस्टीन के संबंध E = mc² से मिलती है।
नाभिकीय विखंडन में यूरेनियम-235 जैसा भारी नाभिक धीमे न्यूट्रॉन से टकराकर दो हल्के नाभिकों में टूट जाता है और दो-तीन नए न्यूट्रॉन छोड़ता है, जो आगे और नाभिकों को तोड़कर शृंखला अभिक्रिया चलाते हैं। बने हुए नाभिकों का द्रव्यमान मूल नाभिक और न्यूट्रॉन से थोड़ा कम होता है; यह द्रव्यमान क्षति E = mc² के अनुसार ऊर्जा बन जाती है, जिसे अल्बर्ट आइंस्टीन ने 1905 में विशेष सापेक्षता के अंतर्गत दिया था। c² बहुत बड़ा होने से थोड़े से द्रव्यमान से भारी ऊर्जा निकलती है। भारत समेत सभी व्यावसायिक रिएक्टर नियंत्रित विखंडन पर चलते हैं।
B गलत है, क्योंकि रदरफोर्ड ने नाभिक की खोज की थी, द्रव्यमान-ऊर्जा संबंध नहीं दिया। C गलत है, क्योंकि संलयन से अभी बिजली नहीं बनती और बोर ने परमाणु मॉडल दिया। D गलत है, क्योंकि हाइजेनबर्ग अनिश्चितता सिद्धांत के लिए जाने जाते हैं।
Exam tip: रिएक्टर में विखंडन, सूर्य में संलयन; दोनों में ऊर्जा E = mc² से (आइंस्टीन, 1905)।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंयह तथ्य कि ग्रह सूर्य के चारों ओर वृत्तों में नहीं, बल्कि दीर्घवृत्तों में घूमते हैं, सबसे पहले किसने प्रदर्शित किया?
- A.गैलीलियो
- B.मार्टिन लूथर
- C.योहानेस केप्लर
- D.कॉपरनिकस
उत्तर देखें
1609 में केप्लर ने दिखाया कि ग्रह सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं में घूमते हैं और सूर्य उस दीर्घवृत्त की एक नाभि पर होता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- A.यूरिया यकृत में बनता है।
- B.यूरिया रक्त में बनता है।
- C.यूरिया स्टार्च के पाचन से बनता है।
- D.यूरिया फेफड़े और वृक्क में बनता है।
उत्तर देखें
यकृत की कोशिकाएँ अमीनो अम्लों के टूटने से निकले विषैले अमोनिया को ऑर्निथीन चक्र, जिसे यूरिया चक्र भी कहते हैं, के द्वारा यूरिया में बदलती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में प्रकाश के गमन का सही क्रम निम्नलिखित में से कौन-सा है?
- A.संघनित्र-अभिदृश्यक लेंस-नेत्रिका-देह नलिका
- B.अभिदृश्यक लेंस-संघनित्र-देह नलिका-नेत्रिका
- C.संघनित्र-अभिदृश्यक लेंस-देह नलिका-नेत्रिका
- D.नेत्रिका-अभिदृश्यक लेंस-देह नलिका-दर्पण
उत्तर देखें
प्रकाश संघनित्र से होकर नमूने तक जाता है, अभिदृश्यक लेंस उसे ग्रहण करता है, फिर वह देह नलिका से ऊपर जाकर नेत्रिका के रास्ते आँख तक पहुँचता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हीमोग्लोबिन के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- A.आरबीसी में उपस्थित हीमोग्लोबिन केवल ऑक्सीजन ले जा सकता है, कार्बन डाइऑक्साइड नहीं।
- B.आरबीसी का हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड दोनों ले जा सकता है।
- C.आरबीसी का हीमोग्लोबिन केवल कार्बन डाइऑक्साइड ले जा सकता है।
- D.हीमोग्लोबिन का उपयोग केवल रक्त के थक्का बनने में होता है, गैसों को ले जाने में नहीं।
उत्तर देखें
यह अपने लौह-युक्त हीम समूहों पर ऑक्सीजन बाँधता है और अपनी प्रोटीन शृंखलाओं पर कुछ कार्बन डाइऑक्साइड ले जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हिस्टोन प्रोटीनों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- A.हिस्टोन ऐसे प्रोटीन हैं जो माइटोकॉन्ड्रिया की झिल्ली में पाए जाते हैं।
- B.हिस्टोन ऐसे प्रोटीन हैं जो केंद्रक में डीएनए के साथ जुड़े हुए पाए जाते हैं।
- C.हिस्टोन साइटोसोल में लिपिडों से जुड़े प्रोटीन हैं।
- D.हिस्टोन साइटोसोल में कार्बोहाइड्रेटों से जुड़े प्रोटीन हैं।
उत्तर देखें
यूकैरियोटिक कोशिकाओं के केंद्रक में डीएनए इन्हीं प्रोटीनों के चारों ओर लिपटकर क्रोमैटिन बनाता है। हिस्टोन छोटे क्षारीय प्रोटीन हैं जिनमें धनावेशित अमीनो अम्ल लाइसिन और आर्जिनिन अधिक होते हैं, जो डीएनए के ऋणावेशित फॉस्फेट समूहों को आकर्षित करते हैं।
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