नाभिकीय रिएक्टर में भारी जल का मुख्य उपयोग किस रूप में होता है?
- A.मंदक के रूप में
- B.ईंधन के रूप में
- C.नियंत्रक छड़ के रूप में
- D.परिरक्षण के रूप में
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर A, मंदक के रूप में है। भारी जल, जिसमें साधारण जल का हाइड्रोजन ड्यूटीरियम से बदला होता है, विखंडन में निकले तेज न्यूट्रॉनों को उस निम्न गति तक धीमा करता है जिस पर वे आगे यूरेनियम नाभिक तोड़ने में अधिक सक्षम होते हैं, और ऐसा करते हुए वह बहुत कम न्यूट्रॉन सोखता है, इसीलिए भारतीय दाबित भारी जल रिएक्टर प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग कर सकते हैं। ऐसे रिएक्टरों में भारी जल शीतलक का कार्य भी करता है। विकल्प B गलत है क्योंकि ईंधन यूरेनियम अथवा प्लूटोनियम होता है। विकल्प C गलत है क्योंकि नियंत्रक छड़ें कैडमियम या बोरॉन जैसे न्यूट्रॉन अवशोषकों की बनती हैं, जिनका उद्देश्य उलटा है। विकल्प D गलत है क्योंकि परिरक्षण क्रोड के चारों ओर मोटे कंक्रीट और सीसे से होता है।
पूरा लेख पढ़ें: रेडियोधर्मिता और नाभिकीय ऊर्जा: क्षय, विखंडन, रिएक्टर
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंकिस रेडियोधर्मी समस्थानिक की अर्धायु 5770 वर्ष है, जिसका प्रयोग सामान्यतः कागज और चर्मपत्र जैसे जैविक पदार्थों की आयु आँकने में किया जाता है?
- A.कार्बन-9
- B.कार्बन-12
- C.कार्बन-14
- D.कार्बन-17
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, कार्बन-14 है। कार्बन-14 कार्बन का वह रेडियोधर्मी समस्थानिक है जो रेडियोकार्बन डेटिंग में प्रयुक्त होता है, और उसकी अर्धायु लगभग 5,700 वर्ष है, जो प्रश्न में दी गई संख्या के अनुरूप है। जीवित पौधा या प्राणी साधारण कार्बन के साथ कार्बन-14 भी लेता है; मृत्यु के बाद यह ग्रहण रुक जाता है और कार्बन-14 बीटा उत्सर्जन से क्षय होता है, इसलिए काष्ठ, अस्थि, वस्त्र अथवा चर्मपत्र में शेष अनुपात से नमूने की आयु निकलती है। विकल्प A गलत है क्योंकि कार्बन-9 अत्यंत अल्पजीवी समस्थानिक है, जो आयु निर्धारण में किसी काम का नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि कार्बन-12 कार्बन का साधारण स्थायी समस्थानिक है और परमाणु द्रव्यमान का मानक है, इसलिए वह क्षय ही नहीं होता। विकल्प D गलत है क्योंकि कार्बन-17 अत्यंत अस्थिर है और सेकंड के अंश तक ही टिकता है।
हाइड्रोजन बम में अत्यंत विनाशकारी विस्फोट किस कारण होता है?
- A.नाभिकीय विखंडन और नाभिकीय संलयन
- B.नाभिकीय विखंडन
- C.क्रायोजेनिक हाइड्रोजन का उपयोग
- D.अति संपीडित हाइड्रोजन का उपयोग
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व्याख्या
सही उत्तर A, नाभिकीय विखंडन और नाभिकीय संलयन है। हाइड्रोजन बम, जिसे तापनाभिकीय बम भी कहा जाता है, दो चरणों में काम करता है। यूरेनियम अथवा प्लूटोनियम का विखंडन विस्फोट लाखों डिग्री का वह ताप पैदा करता है जो हल्के नाभिकों को जोड़ने के लिए आवश्यक है, और फिर उन नाभिकों का संलयन विखंडन चरण से कहीं अधिक ऊर्जा देता है। इस प्रकार विस्फोट में दोनों प्रक्रियाओं का योग होता है। विकल्प B गलत है क्योंकि केवल विखंडन पहले प्रकार के परमाणु बम का वर्णन करता है, जो कम शक्तिशाली होता है। विकल्प C गलत है क्योंकि क्रायोजेनिक हाइड्रोजन, अर्थात अत्यंत निम्न ताप पर द्रवित हाइड्रोजन, रॉकेट ईंधन है और बम की ऊर्जा से उसका कोई संबंध नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि हाइड्रोजन को केवल संपीडित करने से नाभिकीय ऊर्जा नहीं निकलती, नाभिकों का संलयन कराना पड़ता है।
रेडियोधर्मिता की खोज किस वैज्ञानिक ने की थी?
- A.हेनरी बेकरल
- B.मेरी क्यूरी
- C.अर्नेस्ट रदरफोर्ड
- D.विल्हेम रॉन्टजन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, हेनरी बेकरल है। 1896 में बेकरल ने पाया कि अंधेरे में रखा यूरेनियम लवण लपेटी हुई फोटोग्राफिक प्लेट को धुँधला कर देता है, जिससे सिद्ध हुआ कि वह लवण प्रकाश के संपर्क में आए बिना अपना भेदक विकिरण उत्सर्जित करता है। विकल्प B गलत है, यद्यपि मेरी क्यूरी ने अपने पति पियरे के साथ 1898 में पोलोनियम तथा रेडियम खोजे, रेडियोधर्मिता शब्द दिया और बेकरल के साथ नोबेल पुरस्कार साझा किया; परंतु इस प्रभाव की खोज बेकरल की है। विकल्प C गलत है क्योंकि रदरफोर्ड बाद में आए और उन्होंने उत्सर्जन को अल्फा, बीटा तथा गामा में बाँटा, परमाणु का नाभिकीय मॉडल दिया तथा पहला कृत्रिम रूपांतरण किया। विकल्प D गलत है क्योंकि रॉन्टजन ने 1895 में एक्स किरणें खोजीं, जो नाभिक के बाहर बनती हैं और रेडियोधर्मिता नहीं हैं।
अल्फा कण किस परमाणु के नाभिक के समान होता है?
- A.हाइड्रोजन
- B.हीलियम
- C.लिथियम
- D.ड्यूटीरियम
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, हीलियम है। अल्फा कण में दो प्रोटॉन और दो न्यूट्रॉन बँधे रहते हैं, और यही हीलियम-4 परमाणु का नाभिक है, इसलिए उसका आवेश धन दो तथा द्रव्यमान संख्या चार होती है। भारी तथा द्विआवेशित होने के कारण वह वायु को प्रबलता से आयनित करता है पर ऊर्जा शीघ्र खो देता है, और कागज की एक शीट या कुछ सेंटीमीटर वायु उसे रोक देती है। विकल्प A गलत है क्योंकि हाइड्रोजन का नाभिक एक प्रोटॉन है, जो कुछ नाभिकीय अभिक्रियाओं में निकलता है पर अल्फा कण नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि लिथियम के नाभिक में तीन प्रोटॉन होते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि ड्यूटीरियम का नाभिक, ड्यूटरॉन, एक प्रोटॉन और एक न्यूट्रॉन का होता है और भारी जल में प्रयुक्त होता है, अल्फा क्षय में नहीं।
जब कोई नाभिक अल्फा कण उत्सर्जित करता है तो उसकी द्रव्यमान संख्या और परमाणु संख्या में क्या परिवर्तन होता है?
- A.द्रव्यमान संख्या 2 और परमाणु संख्या 1 घटती है
- B.द्रव्यमान संख्या 4 और परमाणु संख्या 2 घटती है
- C.द्रव्यमान संख्या अपरिवर्तित रहती है और परमाणु संख्या 1 बढ़ती है
- D.दोनों अपरिवर्तित रहती हैं
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, द्रव्यमान संख्या 4 और परमाणु संख्या 2 घटती है। अल्फा कण दो प्रोटॉन और दो न्यूट्रॉन ले जाता है, इसलिए जनक नाभिक की द्रव्यमान संख्या चार तथा परमाणु संख्या दो घट जाती है और वह आवर्त सारणी में दो स्थान पीछे का तत्व बन जाता है; उदाहरण के लिए यूरेनियम-238 थोरियम-234 बन जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि कोई भी क्षय दो इकाई द्रव्यमान के साथ एक इकाई आवेश नहीं घटाता। विकल्प C गलत है क्योंकि यह बीटा ऋण क्षय का वर्णन है, जिसमें न्यूट्रॉन प्रोटॉन बन जाता है और इलेक्ट्रॉन निकलता है, इसलिए आवेश एक बढ़ता है और द्रव्यमान संख्या वही रहती है। विकल्प D गलत है क्योंकि यह गामा उत्सर्जन है, जिसमें नाभिक केवल अतिरिक्त ऊर्जा छोड़ता है और कोई संख्या नहीं बदलती।