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GK24
भारतीय राजव्यवस्थाआसान

मूल ढांचा सिद्धांत उच्चतम न्यायालय ने किस वाद में प्रतिपादित किया?

  1. A.शंकरी प्रसाद बनाम भारत संघ, 1951
  2. B.सज्जन सिंह बनाम राजस्थान राज्य, 1965
  3. C.केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य, 1973
  4. D.मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ, 1980

सही उत्तर

C. केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य, 1973

व्याख्या

सही उत्तर है C, केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य, 1973। तेरह न्यायाधीशों की पीठ ने सात के विरुद्ध छह के बहुमत से कहा कि संसद अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान के किसी भी भाग में संशोधन कर सकती है, परंतु उसके मूल ढांचे या आधारभूत लक्षणों को नष्ट नहीं कर सकती। विकल्प A गलत है, क्योंकि शंकरी प्रसाद, 1951 ने प्रथम संशोधन को वैध ठहराया और कहा कि संशोधन अनुच्छेद 13 के अर्थ में विधि नहीं है। विकल्प B गलत है, क्योंकि सज्जन सिंह, 1965 ने शंकरी प्रसाद का अनुसरण किया। विकल्प D गलत है, क्योंकि मिनर्वा मिल्स, 1980 ने पहले से विद्यमान सिद्धांत को लागू करते हुए बयालीसवें संशोधन के उन खंडों को शून्य किया जो संशोधनों को न्यायिक पुनर्विलोकन से बाहर करते थे। बीच में गोलकनाथ, 1967 स्मरण रखिए।

पूरा लेख पढ़ें: संवैधानिक सिद्धांत: प्रमुख वाद, अनुच्छेद और परीक्षा तथ्य

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Q1.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

उच्चतम न्यायालय ने आच्छादन के सिद्धांत का प्रयोग निम्नलिखित में से किस वाद में किया?

  1. A.ए. के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य
  2. B.भीखाजी नारायण धाकरस बनाम मध्य प्रदेश राज्य
  3. C.के. सी. गजपति नारायण देव बनाम ओडिशा राज्य
  4. D.बशेशर नाथ बनाम आयकर आयुक्त
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. भीखाजी नारायण धाकरस बनाम मध्य प्रदेश राज्य

इस वाद में मध्य प्रांत और बरार का 1947 का मोटर वाहन कानून अनुच्छेद 19(1)(ग) के व्यापार की स्वतंत्रता से टकराने के कारण लागू करने योग्य नहीं रह गया था।

Q2.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

न्यायालय सार और तत्व के सिद्धांत का प्रयोग मुख्यतः निम्नलिखित में से किससे जुड़े प्रश्नों के निर्णय के लिए करते हैं?

  1. A.संविधान के संशोधन
  2. B.संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों के बंटवारे
  3. C.रिट द्वारा मूल अधिकारों के प्रवर्तन
  4. D.उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों के बंटवारे

अनुच्छेद 246 के साथ सातवीं अनुसूची संसद और राज्य विधानमंडलों को कानून बनाने के अलग क्षेत्र देती है, परंतु व्यवहार में विषय एक-दूसरे पर आ जाते हैं, इसलिए न्यायालय कानून का वास्तविक स्वरूप और चरित्र, अर्थात उसका सार और तत्व खोजता है और दूसरी सूची पर पड़े आनुषंगिक अतिक्रमण की…

Q3.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

यह सूत्र कि जो सीधे नहीं किया जा सकता वह घुमा-फिराकर भी नहीं किया जा सकता, किस सिद्धांत को व्यक्त करता है?

  1. A.राज्यक्षेत्रीय संबंध का सिद्धांत
  2. B.आच्छादित विधान का सिद्धांत
  3. C.आच्छादन का सिद्धांत
  4. D.अधित्याग का सिद्धांत
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. आच्छादित विधान का सिद्धांत

इसका आशय है कि विधानमंडल उस काम को अप्रत्यक्ष मार्ग से नहीं कर सकता जिसे संविधान ने सीधे करने से रोका है; यदि उसे किसी विषय पर अधिकार नहीं है तो चतुर शब्दावली उसे वह अधिकार नहीं दे सकती।

Q4.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

उच्चतम न्यायालय ने किस वाद में कहा कि मूल अधिकार का अधित्याग उसका धारक नहीं कर सकता?

  1. A.बशेशर नाथ बनाम आयकर आयुक्त, 1959
  2. B.दीप चंद बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, 1959
  3. C.बॉम्बे राज्य बनाम एफ. एन. बलसारा, 1951
  4. D.कलकत्ता गैस कंपनी बनाम पश्चिम बंगाल राज्य, 1962
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. बशेशर नाथ बनाम आयकर आयुक्त, 1959

याची ने अपनी कर देयता का निपटारा उस प्रावधान के अंतर्गत किया था जो बाद में अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता पाया गया, और यह तर्क दिया गया कि निपटारे पर सहमत होकर उसने समता के अधिकार का अधित्याग कर दिया।

Q5.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

राज्यक्षेत्रीय संबंध का सिद्धांत संविधान के किस उपबंध से निकला है?

  1. A.अनुच्छेद 13(1)
  2. B.अनुच्छेद 245(2)
  3. C.अनुच्छेद 254(2)
  4. D.अनुच्छेद 368
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अनुच्छेद 245(2)

यह खंड कहता है कि संसद द्वारा बनाया गया कोई कानून इस आधार पर अविधिमान्य नहीं माना जाएगा कि उसका राज्यक्षेत्र के बाहर प्रभाव होगा, और न्यायालयों ने इसी पर यह नियम खड़ा किया कि राज्य का कानून भी राज्य के बाहर की वस्तु या व्यक्ति पर लागू हो सकता…