मौर्य राजधानी पाटलिपुत्र को किन पुरातात्विक अवशेषों से जोड़ा गया है?
- A.बुलंदीबाग और राजगृह
- B.कुम्हरार और मोचारिम
- C.कुम्हरार और बुलंदीबाग
- D.कुम्हरार और जलालगढ़
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C, कुम्हरार और बुलंदीबाग। आधुनिक पटना के इन दो इलाकों की खुदाई में मौर्यकालीन पाटलिपुत्र के मुख्य अवशेष मिले हैं।
बुलंदीबाग में बीसवीं शताब्दी के आरंभ की खुदाई में भारी लकड़ी की प्राचीर की लंबी कतारें मिलीं, जो यूनानी राजदूत मेगस्थनीज़ के उस वर्णन से मेल खाती हैं जिसमें नगर लकड़ी की दीवार, बुर्जों और द्वारों से घिरा बताया गया है। कुम्हरार में चमकदार बलुआ पत्थर के खंभों वाले विशाल सभागार के अवशेष मिले, जिसे अस्सी स्तंभों वाला सभागार कहा जाता है और मौर्य काल का माना जाता है। पाटलिपुत्र गंगा किनारे अजातशत्रु के बनवाए दुर्ग से विकसित हुआ और उदायिन के समय मगध की राजधानी बना।
A गलत है: राजगृह (राजगीर) मगध की पहले की राजधानी थी, पाटलिपुत्र का भाग नहीं।
B गलत है: मोचारिम पाटलिपुत्र के खुदाई वाले स्थलों में नहीं है।
D गलत है: मौर्य नगर की खुदाई जलालगढ़ में नहीं हुई; इस जोड़ी में केवल कुम्हरार सही है।
Exam tip: कुम्हरार = अस्सी स्तंभों वाला सभागार; बुलंदीबाग = लकड़ी की प्राचीर; मेगस्थनीज़ ने इंडिका में पाटलिपुत्र का वर्णन किया।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंकिसी पुरातात्विक स्थल को 'शिल्प उत्पादन केंद्र' के रूप में पहचानने के लिए पुरातत्वविदों के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा/से महत्वपूर्ण संकेतक है/हैं? 1. पत्थर के पिंड, पूरी सीपियाँ आदि जैसे कच्चे माल के साक्ष्य 2. स्थल का भौगोलिक विस्तार 3. अधूरी वस्तुओं, अस्वीकृत वस्तुओं और अपशिष्ट पदार्थ के साक्ष्य 4. विभिन्न प्रकार के मृद्भांडों के साक्ष्य नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- A.केवल 1
- B.केवल 1 और 3
- C.केवल 2 और 4
- D.केवल 3
उत्तर देखें
शिल्प केंद्रों की पहचान कच्चे माल और वस्तुएँ बनाते समय बचे अवशेषों से होती है। हड़प्पाई स्थलों का अध्ययन करने वाले पुरातत्वविद पत्थर के पिंड, पूरी सीपियाँ और ताँबे का अयस्क जैसे कच्चे माल, औज़ार, और अधूरी, अस्वीकृत वस्तुएँ तथा कचरा खोजते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.शरफ़ क़ाई अलाउद्दीन खिलजी का एक मंत्री था
- B.ग़यासुद्दीन तुग़लक के अधीन मुक्तियों को चेतावनी दी गई थी कि वे अपने किसी भी अधिकारी को वेतन से ऊपर ली गई छोटी रकम के लिए परेशान न करें
- C.अरबी ग्रंथ मसालिक-उल-अबसार में मुहम्मद बिन तुग़लक के अधीन इक्ता व्यवस्था के कामकाज का वर्णन है
- D.मार्को पोलो ने दक्षिण भारत में तूतीकोरिन के मोती उद्योग (पर्ल फ़िशरी) का उल्लेख नहीं किया है
उत्तर देखें
मार्को पोलो ने तूतीकोरिन तट के मोती निकालने के काम का वर्णन किया था, इसलिए यह कहना कि उसने इसका उल्लेख नहीं किया, गलत है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन 'लोकहितवादी' के नाम से जाने जाते थे?
- A.केशवचंद्र सेन
- B.गोपाल हरि देशमुख
- C.एम. जी. रानडे
- D.गोपाल गणेश आगरकर
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वे 'लोकहितवादी' उपनाम से लिखते थे, जिसका अर्थ है जनता के हित की बात करने वाला। गोपाल हरि देशमुख (1823–1892) महाराष्ट्र के समाज सुधारक और लेखक थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के इतिहास के संदर्भ में 'कटपयादि पद्धति', 'परहित पद्धति' और 'दृग्गणित पद्धति' किससे संबंधित हैं?
- A.खगोलशास्त्र
- B.शल्य चिकित्सा
- C.रसायनशास्त्र
- D.संगीत और नृत्य
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तीनों पद्धतियाँ केरल के खगोल और गणित स्कूल से आती हैं। कटपयादि अक्षरों से संख्याएँ लिखने की विधि है, जिसमें हर व्यंजन किसी अंक के लिए होता है; इससे लंबी खगोलीय सारणियाँ श्लोकों के रूप में याद रखी जा सकती थीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 1. सातवाहनों ने पश्चिमी भारत के कुछ भागों और दक्कन पर शासन किया 2. सातवाहनों ने सुदर्शन झील की मरम्मत और पुनर्निर्माण कराया नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1, न ही 2
उत्तर देखें
सातवाहनों ने दक्कन और पश्चिमी भारत के कुछ भागों पर राज किया, पर सुदर्शन झील की मरम्मत दूसरों ने कराई।
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