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GK24
रक्षामध्यम

मानेकशॉ सेंटर में संपन्न हुए कोर कार्यक्रम 2026 का संचालन किस संस्था ने किया?

  1. A.रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान
  2. B.सेंटर फॉर जॉइंट वारफेयर स्टडीज
  3. C.राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय
  4. D.रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन

सही उत्तर

B. सेंटर फॉर जॉइंट वारफेयर स्टडीज

व्याख्या

सही उत्तर सेंटर फॉर जॉइंट वारफेयर स्टडीज है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार संयुक्त परिचालन समीक्षा और मूल्यांकन कार्यक्रम 2026 का आयोजन एकीकृत रक्षा कार्मिक मुख्यालय द्वारा किया गया और संचालन सेंटर फॉर जॉइंट वारफेयर स्टडीज द्वारा किया गया, जो नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में संपन्न हुआ।

अभ्यर्थियों को आयोजक और संचालक की भूमिकाओं को अलग-अलग याद रखना चाहिए, क्योंकि परीक्षाओं में प्रायः यही अंतर पूछा जाता है। शेष विकल्पों में दिए गए संस्थान रक्षा क्षेत्र में प्रसिद्ध अवश्य हैं, और इसीलिए वे प्रभावी विकल्प बनते हैं, किंतु इस कार्यक्रम से उनका कोई संबंध विज्ञप्ति में नहीं बताया गया है। इसे इस प्रकार याद रखें - एचक्यू आईडीएस ने आयोजित किया, सीजेडब्ल्यूएस ने संचालित किया, मानेकशॉ सेंटर ने मेजबानी की।

पूरा लेख पढ़ें: कोर कार्यक्रम 2026 का समापन, तीनों सेनाओं ने की समीक्षा

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Q1.रक्षामध्यम

कोर कार्यक्रम 2026 में किन तीन मंत्रालयों के अधिकारियों ने भाग लिया?

  1. A.रक्षा, वित्त और गृह मंत्रालय
  2. B.रक्षा, विदेश और गृह मंत्रालय
  3. C.रक्षा, विदेश और वाणिज्य मंत्रालय
  4. D.गृह, विदेश और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. रक्षा, विदेश और गृह मंत्रालय

व्याख्या

सही उत्तर रक्षा, विदेश और गृह मंत्रालय है। विज्ञप्ति के अनुसार इस पांच दिवसीय कार्यक्रम में तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय एवं गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी मौजूदा तथा उभरती चुनौतियों पर चर्चा की। यह कार्यक्रम 14 से 18 सितंबर 2026 तक नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में चला और इसका संचालन सेंटर फॉर जॉइंट वारफेयर स्टडीज ने किया।

यह संयोजन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कार्यक्रम का घोषित उद्देश्य अंतर-विभागीय समन्वय और अंतर-एजेंसी संयुक्तता को सुदृढ़ करना था, और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रश्न पर यही तीन मंत्रालय आपस में मिलते हैं - सैन्य पक्ष रक्षा मंत्रालय देखता है, कूटनीतिक पक्ष विदेश मंत्रालय और आंतरिक सुरक्षा का पक्ष गृह मंत्रालय। शेष विकल्पों में ऐसे मंत्रालय जोड़े गए हैं जिनका उल्लेख विज्ञप्ति में कहीं नहीं है, जैसे वित्त मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय अथवा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, और इन्हें उत्तर मानना गलत होगा। इसके साथ चर्चाओं में रेखांकित किया गया वाक्यांश भी याद रखें - राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संपूर्ण-राष्ट्र दृष्टिकोण, जिसे परीक्षक प्रायः सीधे उद्धृत करते हैं।

Q2.रक्षामध्यम

'रक्षा' दस्तावेज के किस स्तंभ के अंतर्गत भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में शुद्ध सुरक्षा प्रदाता और प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता बताया गया है?

  1. A.रणनीतिक साझेदारी
  2. B.क्षमता विकास
  3. C.स्वदेशी निर्यात
  4. D.समुद्री सुरक्षा
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. समुद्री सुरक्षा

व्याख्या

सही उत्तर समुद्री सुरक्षा है। दस्तावेज के इस स्तंभ में हिंद महासागर क्षेत्र में शुद्ध सुरक्षा प्रदाता और प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में भारत की भूमिका मजबूत करने की बात है, और ये दोनों पद भारतीय समुद्री रणनीति की प्रचलित शब्दावली हैं। बाकी तीन स्तंभ अलग विषय देखते हैं। विकल्प क में दी रणनीतिक साझेदारी द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने से जुड़ी है। विकल्प ख में दिया क्षमता विकास संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण कार्यक्रम और मित्र देशों के साथ सर्वोत्तम तौर-तरीके साझा करने से जुड़ा है। विकल्प ग में दिया स्वदेशी निर्यात भारत में निर्मित रक्षा प्लेटफार्मों को बढ़ावा देकर देश को विश्वसनीय वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र बनाने से जुड़ा है। छात्रों को हर स्तंभ उसके विषय के साथ याद रखना चाहिए, क्योंकि प्रश्न उलटकर भी पूछा जाता है।

Q3.रक्षामध्यम

'रक्षा' दस्तावेज कितनी अवधि के लिए वैश्विक रक्षा साझेदारियों का रोडमैप प्रस्तुत करता है?

  1. A.अगले 3 वर्ष
  2. B.अगले 5 वर्ष
  3. C.अगले 10 वर्ष
  4. D.अगले 25 वर्ष
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. अगले 10 वर्ष

व्याख्या

सही उत्तर अगले 10 वर्ष है। विज्ञप्ति 'रक्षा' को एक व्यापक दस्तावेज बताती है, जिसमें आने वाले दशक के लिए वैश्विक रक्षा साझेदारियों पर देश का रणनीतिक रोडमैप और दृष्टिकोण दिया गया है, और यह दोहराती है कि दस्तावेज अगले दशक के लिए स्पष्ट तथा व्यावहारिक दृष्टिकोण देता है। यहां अवधि का सही अंक जानना जरूरी है, क्योंकि प्रश्न ठीक इसी पर बनते हैं। विकल्प घ में दी पच्चीस वर्ष की अवधि दीर्घकालिक राष्ट्रीय दृष्टिपत्रों से जुड़ी होती है और स्मृति के सहारे उत्तर देने वाले छात्र इसी पर चले जाते हैं। विकल्प क और ख में दी छोटी अवधियों का इस विज्ञप्ति में कोई उल्लेख नहीं है। इस अंक को दस्तावेज के चार स्तंभों के साथ याद रखें, अर्थात रणनीतिक साझेदारी, क्षमता विकास, स्वदेशी निर्यात और समुद्री सुरक्षा, क्योंकि प्रश्न दोनों तथ्यों को जोड़कर भी पूछा जा सकता है।

Q4.रक्षाआसान

3 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में रक्षा कूटनीति पर 'रक्षा' दस्तावेज किसने जारी किया?

  1. A.प्रधानमंत्री
  2. B.चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ
  3. C.रक्षा मंत्री
  4. D.रक्षा सचिव
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. रक्षा मंत्री

व्याख्या

सही उत्तर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हैं। विज्ञप्ति स्पष्ट कहती है कि उन्होंने नई दिल्ली में रक्षा कूटनीति पर 'रक्षा' दस्तावेज का विमोचन किया और यह ढांचा अगले 10 वर्षों में वैश्विक रक्षा साझेदारियों के लिए देश का रणनीतिक रोडमैप तथा दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। विकल्प घ में दिया रक्षा सचिव गलत है, लेकिन भ्रमित करने वाला है, क्योंकि रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह कार्यक्रम में उपस्थित थे। उनके साथ रक्षा उत्पादन सचिव और विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) भी मौजूद थे, किंतु दस्तावेज किसी सचिव ने जारी नहीं किया। विकल्प ख भी इसी तरह का भ्रम है, क्योंकि वरिष्ठ सैन्य अधिकारी वहां उपस्थित थे, जिनमें सेना प्रमुख तथा वायुसेना और नौसेना के उपप्रमुख शामिल थे। विकल्प क का इस विज्ञप्ति में कोई उल्लेख नहीं है। रक्षा कूटनीति के दस्तावेज को मंत्रालय का राजनीतिक प्रमुख ही जारी करता है।

Q5.रक्षाकठिन

जिस 'महासागर' विजन के अनुरूप यह अभ्यास बताया गया, उसका पूरा अर्थ क्या है?

  1. A.सभी क्षेत्रों के लिए समुद्री सद्भाव और सुरक्षित विकास
  2. B.क्षेत्रों की सुरक्षा और वृद्धि के लिए परस्पर एवं समग्र प्रगति
  3. C.मानवीय कार्रवाई, सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास के लिए समुद्री गठबंधन
  4. D.साझा विकास और क्षेत्रीय सुदृढ़ता के लिए बहुपक्षीय कार्रवाई
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. क्षेत्रों की सुरक्षा और वृद्धि के लिए परस्पर एवं समग्र प्रगति

व्याख्या

सही उत्तर क्षेत्रों की सुरक्षा और वृद्धि के लिए परस्पर एवं समग्र प्रगति है। रक्षा मंत्रालय ने कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव के इस अभ्यास को इसी विजन के अनुरूप बताया, जो समुद्री पड़ोसियों के साथ भारत की सुरक्षा और विकास साझेदारी की दिशा तय करता है। बाकी तीनों विकल्प इसलिए भ्रम पैदा करते हैं कि उनमें भी समुद्री सहयोग की परिचित शब्दावली से वही संक्षिप्त नाम खोला गया है, और जिस अभ्यर्थी ने केवल नाम याद किया है पर उसका पूरा अर्थ नहीं, वह फंस सकता है। इस अभ्यास ने उस विजन का व्यावहारिक पक्ष भी मजबूत किया, क्योंकि प्रतिभागियों ने मौजूदा मानक संचालन प्रक्रिया की समीक्षा की और सूचना साझा करने की व्यवस्था को सरल बनाया, ताकि हिंद महासागर क्षेत्र में सामूहिक मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस बेहतर हो। ऐसे पूरे नाम एक बार लिखकर याद करना सबसे भरोसेमंद तरीका है।