मानव शरीर में संतुलन बनाए रखने में कौन-सा अंग सहायता करता है?
- A.हृदय
- B.यकृत
- C.कान
- D.जीभ
सही उत्तर
C. कान
व्याख्या
सही उत्तर है C, कान। शरीर का संतुलन अंतःकर्ण यानी भीतरी कान से नियंत्रित होता है, जिसमें सुनने के अंग के साथ-साथ वेस्टिब्यूलर तंत्र भी रहता है। यह तंत्र एक-दूसरे से समकोण पर रखी तीन अर्धवृत्ताकार नलिकाओं तथा दो छोटी थैलियों, यूट्रिकल और सैक्यूल, से बना होता है। नलिकाएँ द्रव से भरी रहती हैं; सिर घूमने पर यह द्रव पीछे रह जाता है और भीतर लगे सूक्ष्म रोम कोशिकाओं को मोड़ देता है, जो मस्तिष्क को गति की दिशा और गति की तेजी का संकेत भेजती हैं। यूट्रिकल और सैक्यूल गुरुत्व के खिंचाव तथा सीधी रेखा में होने वाली गति की सूचना देते हैं। इसी कारण भीतरी कान के संक्रमण में या तेजी से गोल-गोल घूमने पर व्यक्ति को चक्कर आने लगते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि हृदय केवल शरीर में रक्त पंप करता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि यकृत पित्त बनाता है, विषों को नष्ट करता है और ग्लाइकोजन संचित रखता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि जीभ में स्वाद कलिकाएँ होती हैं और वह बोलने तथा निगलने में सहायक है। परीक्षा टिप: भीतरी कान का कॉक्लिया सुनने के लिए और तीन अर्धवृत्ताकार नलिकाएँ संतुलन के लिए होती हैं।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन फूल का भाग नहीं है?
- A.पर्णवृंत
- B.स्त्रीकेसर
- C.पुंकेसर
- D.बाह्यदल
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. पर्णवृंत
व्याख्या
सही उत्तर है A, पर्णवृंत। पर्णवृंत यानी पेटिओल वह डंठल है जो पत्ती के फलक को तने से जोड़ता है; यह पत्ती का भाग है, फूल का नहीं, और जिस पत्ती में यह न हो उसे अवृंत कहा जाता है। एक प्रारूपिक फूल पुष्पासन पर टिके चार चक्रों से बनता है। सबसे बाहर बाह्यदलपुंज होता है, जो बाह्यदलों से बना है और कली की रक्षा करता है। उसके भीतर दलपुंज होता है, जिसकी पंखुड़ियाँ परागणकों को आकर्षित करती हैं। इसके बाद पुमंग यानी नर चक्र आता है, जिसकी इकाई पुंकेसर है और हर पुंकेसर में तंतु पर परागकोश लगा रहता है। केंद्र में जायांग यानी मादा चक्र होता है, जिसकी इकाई स्त्रीकेसर है और वह वर्तिकाग्र, वर्तिका तथा अंडाशय से बनी होती है। विकल्प B गलत है, क्योंकि स्त्रीकेसर फूल का मादा भाग है। विकल्प C गलत है, क्योंकि पुंकेसर उसका नर भाग है। विकल्प D गलत है, क्योंकि बाह्यदल मिलकर फूल का सबसे बाहरी चक्र बाह्यदलपुंज बनाते हैं। परीक्षा टिप: फूल के चार चक्र हैं बाह्यदलपुंज, दलपुंज, पुमंग और जायांग; पर्णवृंत पत्ती का भाग है।
KMnO4 में Mn की ऑक्सीकरण संख्या क्या है?
- A.+2
- B.-2
- C.+7
- D.-7
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. +7
व्याख्या
सही उत्तर है C, +7। पोटैशियम परमैंगनेट एक उदासीन यौगिक है, इसलिए उसके सभी परमाणुओं की ऑक्सीकरण संख्याओं का जोड़ शून्य होना चाहिए। पोटैशियम एक क्षार धातु है और उसकी ऑक्सीकरण संख्या सदा +1 रहती है, तथा चारों ऑक्सीजन परमाणुओं में प्रत्येक की -2 होती है, जिससे ऑक्सीजन का कुल योग -8 हो जाता है। संतुलन को 1 धन x घटा 8 बराबर शून्य लिखने पर x का मान +7 निकलता है, अर्थात मैंगनीज +7 अवस्था में है। यह मैंगनीज की उच्चतम संभव ऑक्सीकरण अवस्था है, क्योंकि उसके 3d और 4s कक्षों में कुल सात इलेक्ट्रॉन उपलब्ध रहते हैं, और इसी कारण KMnO4 इतना प्रबल ऑक्सीकारक है कि उसका उपयोग जल के कीटाणुशोधन तथा प्रयोगशाला के अनुमापन में होता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि +2 अवस्था मैंगनीज की MnCl2 या MnSO4 में होती है। विकल्प B गलत है, क्योंकि मैंगनीज धातु है और इस लवण में ऋणात्मक अवस्था नहीं लेती। विकल्प D गलत है, क्योंकि यहाँ किसी संक्रमण धातु के लिए -7 अवस्था संभव ही नहीं है। परीक्षा टिप: KMnO4 में मैंगनीज +7 और K2Cr2O7 में क्रोमियम +6 होता है।
कूलॉम घर्षण किनके बीच का घर्षण होता है?
- A.दो शुष्क सतहों
- B.दो स्नेहित सतहों
- C.सापेक्ष गति वाले पिंडों
- D.ठोस और द्रव
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. दो शुष्क सतहों
व्याख्या
सही उत्तर है A, दो शुष्क सतहों। कूलॉम घर्षण, जिसे शुष्क घर्षण भी कहा जाता है, वह प्रतिरोध है जो दो ठोस सतहों के बीच तब लगता है जब उनके बीच कोई स्नेहक न हो। चार्ल्स-ऑगस्टिन द कूलॉम ने इसके नियम दिए थे: घर्षण बल अभिलंब प्रतिक्रिया के समानुपाती होता है, वह स्पर्श के आभासी क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करता, और सरकने की चाल से लगभग स्वतंत्र रहता है। शुष्क घर्षण में दोनों प्रकार आते हैं, वह स्थैतिक घर्षण जिसे गति शुरू करने से पहले पार करना पड़ता है, और वह गतिज घर्षण जो सरकना शुरू होने के बाद लगता है; इनमें सीमांत स्थैतिक मान बड़ा होता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि स्नेहित सतहों के बीच लगने वाले घर्षण को तरल या फिल्म घर्षण कहते हैं और वह श्यानता के नियमों से चलता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि सापेक्ष गति से केवल गतिज घर्षण का बोध होता है, जो कूलॉम घर्षण का एक अंश है। विकल्प D गलत है, क्योंकि ठोस और द्रव के बीच का प्रतिरोध श्यान कर्षण कहलाता है। परीक्षा टिप: कूलॉम घर्षण का अर्थ है शुष्क घर्षण, जो अभिलंब प्रतिक्रिया के समानुपाती और स्पर्श क्षेत्रफल से स्वतंत्र होता है।
विद्युत लेपन शुरू करने से पहले कौन-सी क्रिया अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए?
- A.बफिंग
- B.सोल्डरिंग
- C.सफाई
- D.पॉलिशिंग
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. सफाई
व्याख्या
सही उत्तर है C, सफाई। विद्युत लेपन में जिस वस्तु पर परत चढ़ानी होती है उसे कैथोड बनाया जाता है, लेपन की धातु एनोड का काम करती है, और दोनों को उसी धातु के लवण वाले विद्युत-अपघट्य में डुबोया जाता है। धारा बहने पर धातु के आयन कैथोड की ओर जाकर उस पर जम जाते हैं। यह परत तभी मजबूती से चिपकती है जब सतह रासायनिक रूप से साफ हो, इसलिए पहले चिकनाई, तेल, जंग और ऑक्साइड को डीग्रीसिंग तथा अम्ल में पिकलिंग द्वारा हटाया जाता है; यदि कोई पतली परत रह जाए तो लेपन उखड़ जाता है, फूल जाता है या जगह-जगह से अधूरा रह जाता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि बफिंग से पहले से साफ सतह पर केवल चमक आती है। विकल्प B गलत है, क्योंकि सोल्डरिंग भराव मिश्रधातु से दो धातुओं को जोड़ने की क्रिया है, लेपन की तैयारी से उसका कोई संबंध नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि पॉलिशिंग सतह को यांत्रिक रूप से चिकना करती है, पर चिपकने में बाधा डालने वाली तेल और ऑक्साइड की परत नहीं हटाती। परीक्षा टिप: क्रम याद रखें, पहले सफाई फिर लेपन, और वस्तु सदैव कैथोड होती है।
किसी ध्वनि तरंग की आवृत्ति 200 Hz और तरंगदैर्घ्य 2 मीटर है। ध्वनि तरंग की चाल क्या होगी?
- A.400 मीटर/सेकंड
- B.200 मीटर/सेकंड
- C.80 मीटर/सेकंड
- D.100 मीटर/सेकंड
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 400 मीटर/सेकंड
व्याख्या
सही उत्तर है A, 400 मीटर/सेकंड। किसी भी तरंग की चाल उसकी आवृत्ति और तरंगदैर्घ्य के गुणनफल के बराबर होती है, इसलिए यहाँ 200 Hz गुणा 2 मीटर से 400 मीटर प्रति सेकंड मिलता है। आवृत्ति का अर्थ है प्रति सेकंड किसी बिंदु से गुजरने वाली पूरी तरंगों की संख्या, जिसे हर्ट्ज़ में मापा जाता है, और तरंगदैर्घ्य एक पूरी तरंग की लंबाई है; दोनों का गुणा करने पर प्रति सेकंड तय की गई दूरी, यानी चाल मिलती है। किसी माध्यम में ध्वनि की चाल माध्यम से ही तय होती है, इसलिए आवृत्ति बढ़ने पर तरंगदैर्घ्य उसी अनुपात में घट जाता है। वायु में 20 डिग्री सेल्सियस पर ध्वनि की चाल लगभग 343 मीटर प्रति सेकंड, जल में लगभग 1,500 और इस्पात में लगभग 5,000 मीटर प्रति सेकंड होती है, क्योंकि अधिक घने और अधिक प्रत्यास्थ माध्यम के कण कंपन को तेजी से आगे बढ़ाते हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि 200 तो आवृत्ति ही है, गुणा किया ही नहीं गया। विकल्प C गलत है, क्योंकि इन अंकों से 80 किसी तरह नहीं निकलता। विकल्प D गलत है, क्योंकि इसमें आवृत्ति को गुणा करने के बजाय 2 से भाग दिया गया है। परीक्षा टिप: चाल = आवृत्ति गुणा तरंगदैर्घ्य, और वायु में ध्वनि की चाल लगभग 343 मीटर प्रति सेकंड।