मध्यकालीन भारत के सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. तमिल क्षेत्र के सिद्ध (सित्तर) एकेश्वरवादी थे और मूर्तिपूजा की निंदा करते थे। 2. कन्नड़ क्षेत्र के लिंगायतों ने पुनर्जन्म के सिद्धांत पर प्रश्न उठाया और जाति-पदानुक्रम को अस्वीकार किया। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1 और न ही 2
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C, 1 और 2 दोनों। दोनों कथन सही हैं: सिद्धों ने मूर्तिपूजा को नकारा और लिंगायतों ने जाति तथा पुनर्जन्म को अस्वीकार किया।
सिद्ध या सित्तर तमिल रहस्यवादी कवि थे, जो एक निराकार ईश्वर में विश्वास करते थे, मूर्तिपूजा, मंदिर के कर्मकांड और जाति का उपहास करते थे और सरल तमिल पद्य में लिखते थे; शिववाक्कियर इनमें प्रसिद्ध नाम है। लिंगायत या वीरशैव आंदोलन बारहवीं सदी के कर्नाटक में बसवण्णा ने शुरू किया, जो कलचुरि राजा बिज्जल के मंत्री थे। लिंगायत शरीर पर धारण किए छोटे लिंग के रूप में शिव की पूजा करते हैं; उन्होंने पुनर्जन्म के सिद्धांत पर प्रश्न उठाए, जाति और ब्राह्मणवादी कर्मकांड को अस्वीकार किया और विधवा पुनर्विवाह तथा वयस्क होने के बाद विवाह जैसी प्रथाओं को बढ़ावा दिया।
A गलत है: इसमें कथन 2 छूट गया है, जो सही है।
B गलत है: इसमें कथन 1 छूट गया है, जो सही है।
D गलत है: दोनों कथन सही हैं।
परीक्षा टिप: लिंगायत = बसवण्णा, 12वीं सदी, कर्नाटक, वचन; सिद्ध = मूर्ति और जाति के विरोधी तमिल रहस्यवादी।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंअसहयोग आंदोलन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
I. कांग्रेस ने सभी वैध और शांतिपूर्ण साधनों से 'स्वराज' की प्राप्ति को अपना लक्ष्य घोषित किया।
II. इसे चरणों में लागू किया जाना था, जिसमें सविनय अवज्ञा और करों का भुगतान न करना अगले चरण में तभी होना था जब एक वर्ष के भीतर 'स्वराज' न मिले और सरकार दमन का सहारा ले।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?
- A.केवल I
- B.केवल II
- C.I और II दोनों
- D.न तो I और न ही II
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है C, I और II दोनों। असहयोग आंदोलन (1920-22) के बारे में दोनों कथन सही हैं।
सितंबर 1920 के कलकत्ता विशेष अधिवेशन में कांग्रेस ने गांधी का असहयोग कार्यक्रम स्वीकार किया, और दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन ने इसकी पुष्टि करते हुए कांग्रेस का ध्येय बदला: संवैधानिक साधनों से साम्राज्य के भीतर स्वशासन के पुराने लक्ष्य के स्थान पर अब सभी शांतिपूर्ण और वैध साधनों से स्वराज की प्राप्ति लक्ष्य बना। आंदोलन चरणों में सोचा गया था: पहले उपाधियों, परिषदों, अदालतों, स्कूलों और विदेशी कपड़े का बहिष्कार, और बाद में, अगर एक वर्ष में स्वराज न मिले और सरकार दमन करे, तो करों का भुगतान न करने सहित सविनय अवज्ञा। फरवरी 1922 की चौरी चौरा घटना के बाद गांधी ने इसे वापस ले लिया।
A गलत है: कथन II भी सही है।
B गलत है: कथन I भी सही है।
D गलत है: दोनों कथन सही हैं।
परीक्षा टिप: कलकत्ता (सितंबर 1920) में असहयोग स्वीकार; नागपुर (दिसंबर 1920) में शांतिपूर्ण और वैध साधनों से स्वराज लक्ष्य बना।
1929 के व्यापार विवाद अधिनियम (ट्रेड डिस्प्यूट्स एक्ट) में किसका प्रावधान था?
- A.उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी।
- B.औद्योगिक विवादों को दबाने के लिए प्रबंधन को मनमानी शक्तियाँ।
- C.व्यापार विवाद की स्थिति में ब्रिटिश न्यायालय का हस्तक्षेप।
- D.अधिकरणों की एक व्यवस्था और हड़तालों पर प्रतिबंध।
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है D, अधिकरणों की एक व्यवस्था और हड़तालों पर प्रतिबंध।। व्यापार विवाद अधिनियम, 1929 ने जाँच न्यायालयों और समझौता बोर्डों की व्यवस्था बनाई और कुछ हड़तालों पर रोक लगाई।
औपनिवेशिक सरकार ने यह अधिनियम 1928 की उस हड़ताल लहर के जवाब में पारित किया, जिसका नेतृत्व बंबई की गिरनी कामगार यूनियन जैसी कम्युनिस्ट नेतृत्व वाली यूनियनों ने किया था। इसने औद्योगिक विवाद सुलझाने के लिए जाँच न्यायालय और समझौता बोर्ड बनाए, सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं में पूर्व सूचना के बिना हड़ताल को अवैध ठहराया, और सरकार पर दबाव डालने के उद्देश्य वाली हड़तालों तथा तालाबंदियों पर भी रोक लगाई। सार्वजनिक सुरक्षा अध्यादेश और मेरठ षड्यंत्र केस (1929) के साथ यह बढ़ते मज़दूर आंदोलन पर ब्रिटिश प्रहार का हिस्सा था।
A गलत है: अधिनियम ने श्रमिकों को उद्योगों के प्रबंधन में कोई हिस्सा नहीं दिया।
B गलत है: इसने मालिकों को मनमानी शक्तियाँ नहीं दीं; विवाद सरकारी अधिकरणों के पास जाते थे।
C गलत है: विवाद किसी ब्रिटिश न्यायालय को नहीं भेजे जाते थे।
परीक्षा टिप: 1929 = व्यापार विवाद अधिनियम, सार्वजनिक सुरक्षा अध्यादेश और मेरठ षड्यंत्र केस, सभी मज़दूर और कम्युनिस्ट आंदोलन के विरुद्ध।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
1. संत निंबार्क, अकबर के समकालीन थे।
2. संत कबीर शेख अहमद सरहिंदी से बहुत प्रभावित थे।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है D, न तो 1 और न ही 2। कोई भी कथन सही नहीं है; दोनों में बहुत अलग सदियों के संतों को जोड़ा गया है।
निंबार्क लगभग बारहवीं या तेरहवीं सदी के वैष्णव दार्शनिक थे, जिन्होंने द्वैताद्वैत का सिद्धांत और राधा-कृष्ण की भक्ति सिखाई। अकबर ने 1556 से 1605 तक शासन किया, यानी कई सदियों बाद। कबीर पंद्रहवीं सदी में वाराणसी में रहे और हिंदू तथा मुस्लिम दोनों कर्मकांडों को नकारते हुए निराकार ईश्वर की भक्ति सिखाई। शेख अहमद सरहिंदी सोलहवीं सदी के अंत और सत्रहवीं सदी के आरंभ के नक्शबंदी सूफ़ी थे, जिन्होंने अकबर की उदार धार्मिक नीति का विरोध किया; इसलिए वे कबीर को प्रभावित नहीं कर सकते थे, जिनकी मृत्यु उनसे बहुत पहले हो चुकी थी।
A गलत है: निंबार्क अकबर से कई सदी पहले हुए।
B गलत है: सरहिंदी कबीर के लगभग एक सदी बाद हुए।
C गलत है: दोनों कथन गलत हैं।
परीक्षा टिप: निंबार्क = द्वैताद्वैत; रामानुज = विशिष्टाद्वैत; मध्व = द्वैत; सरहिंदी = नक्शबंदी, अकबर और जहाँगीर का समय।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन उन्नीसवीं सदी के पूर्वार्ध में भारत पर औद्योगिक क्रांति के प्रभाव की सही व्याख्या करता है?
- A.भारतीय हस्तशिल्प नष्ट हो गए।
- B.भारतीय वस्त्र उद्योग में बड़ी संख्या में मशीनें लाई गईं।
- C.देश के अनेक भागों में रेल लाइनें बिछाई गईं।
- D.ब्रिटिश निर्मित वस्तुओं के आयात पर भारी शुल्क लगाया गया।
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है A, भारतीय हस्तशिल्प नष्ट हो गए।। ब्रिटेन की औद्योगिक क्रांति ने उन्नीसवीं सदी के पूर्वार्ध में भारतीय हस्तशिल्प को नष्ट कर दिया।
मशीन से बना ब्रिटिश कपड़ा हाथ से बुने भारतीय कपड़े से सस्ता था। 1813 के चार्टर अधिनियम से ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापार एकाधिकार समाप्त होने के बाद ब्रिटिश माल लगभग बिना शुल्क के भारतीय बाज़ारों में भर गया, जबकि ब्रिटेन में भारतीय माल पर ऊँचे शुल्क लगे। बुनकरों और कारीगरों के बाज़ार छिन गए, ढाका और मुर्शिदाबाद जैसे प्रसिद्ध वस्त्र नगर उजड़ गए और बहुत से कारीगर खेती की ओर धकेल दिए गए। इतिहासकार इसे विऔद्योगीकरण कहते हैं। भारत कच्ची कपास का आपूर्तिकर्ता और ब्रिटिश माल का खरीदार बन गया।
B गलत है: मशीनों वाली भारतीय कपड़ा मिलें बाद में आईं; पहली सफल सूती मिल 1854 में बंबई में खुली।
C गलत है: पहली रेल लाइन, बंबई से ठाणे, 1853 में ही खुली और रेल जाल सदी के उत्तरार्ध में फैला।
D गलत है: ब्रिटिश माल भारत में लगभग शुल्क-मुक्त आता था, इसी कारण हस्तशिल्प को नुकसान हुआ।
परीक्षा टिप: चार्टर अधिनियम 1813 + ब्रिटिश माल का मुक्त प्रवेश = भारतीय हस्तशिल्प का पतन (विऔद्योगीकरण)।
अशोक के अभिलेखों से पता चलता है कि 'प्रादेशिक', 'राजुक' और 'युक्त' किस स्तर के प्रशासन के महत्वपूर्ण अधिकारी थे?
- A.ग्राम-स्तरीय प्रशासन
- B.जिला-स्तरीय प्रशासन
- C.प्रांतीय प्रशासन
- D.केंद्रीय प्रशासन का स्तर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है B, जिला-स्तरीय प्रशासन। प्रादेशिक, राजुक और युक्त मौर्य साम्राज्य में जिला-स्तरीय प्रशासन के अधिकारी थे।
अशोक का तीसरा बृहद् शिलालेख युक्तों, राजुकों और प्रादेशिकों को आदेश देता है कि वे अपने नियमित काम के साथ धम्म का प्रचार करने के लिए हर पाँच वर्ष में दौरे पर जाएँ। प्रादेशिक जिले का प्रमुख था, जो राजस्व और व्यवस्था देखता था। राजुक भूमि की माप करता था और उसके पास न्यायिक अधिकार भी थे, जिन्हें अशोक ने बढ़ाया (चौथा स्तंभ लेख)। युक्त अधीनस्थ अधिकारी था, जो हिसाब-किताब और अभिलेख रखता तथा इनकी सहायता करता था। ये मिलकर प्रांतों और गाँवों के बीच की कड़ी थे।
A गलत है: गाँवों का प्रबंध ग्रामिक (ग्राम प्रधान) करता था, ये अधिकारी नहीं।
C गलत है: प्रांतों के प्रमुख कुमार या आर्यपुत्र कहलाने वाले राजकुमार होते थे।
D गलत है: केंद्रीय स्तर पर मंत्रिपरिषद और समाहर्ता तथा सन्निधाता जैसे विभाग प्रमुख होते थे।
परीक्षा टिप: प्रादेशिक, राजुक, युक्त = जिला अधिकारी, तीसरे बृहद् शिलालेख में उल्लेख; ग्रामिक = ग्राम प्रधान।