कोशिका विभाजन और पत्तियों के बुढ़ाने को टालने के लिए मुख्यतः कौन-सा पादप हार्मोन उत्तरदायी है?
- A.ऑक्सिन
- B.साइटोकाइनिन
- C.एब्सिसिक अम्ल
- D.एथिलीन
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर B, साइटोकाइनिन है। साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन अर्थात कोशिकाद्रव्य विभाजन को बढ़ाते हैं; इनमें सबसे पहले काइनेटिन की पहचान हेरिंग मछली के शुक्राणु के विघटित डीएनए से हुई और प्राकृतिक रूप जिएटिन मक्के के दानों से मिला। ये पत्तियों का बुढ़ाना टालते हैं, कटे फूलों को ताजा रखते हैं और पार्श्व कलिकाओं को बढ़ाते हैं, तथा ऊतक संवर्धन में साइटोकाइनिन का ऑक्सिन से अधिक अनुपात प्ररोह बनाता है। विकल्प A, ऑक्सिन, मुख्यतः कोशिका दीर्घीकरण से कार्य करता है, विभाजन से नहीं, और शीर्ष प्रभाविता बनाए रखता है। विकल्प C, एब्सिसिक अम्ल, तनाव हार्मोन है: यह रंध्र बंद करता और प्रसुप्ति लाता है, अर्थात वृद्धि रोकता है। विकल्प D, एथिलीन, पत्तियों पर साइटोकाइनिन के विपरीत प्रभाव डालता है, क्योंकि वह बुढ़ाना तेज करता है और पत्तों तथा फलों को पौधे से गिरा देता है।
पूरा लेख पढ़ें: पादप हार्मोन और आर्थिक वनस्पति विज्ञान: नोट्स
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन-सा पादप हार्मोन फलों के पकने के लिए उत्तरदायी है?
- A.ऑक्सिन
- B.जिबरेलिन
- C.एथिलीन
- D.साइटोकाइनिन
उत्तर देखें
एथिलीन एकमात्र गैसीय पादप हार्मोन है और यह केला, आम तथा टमाटर जैसे क्लाइमैक्टेरिक फलों में श्वसन की दर बढ़ा देता है, इसलिए एक पका फल अपने आसपास के फलों को भी शीघ्र पका देता है; ईथेफॉन नामक यौगिक एथिलीन मुक्त करता है और बागों में समान पकने के लिए…
पूरी व्याख्या पढ़ें →किस पादप हार्मोन को तनाव हार्मोन के नाम से जाना जाता है?
- A.एब्सिसिक अम्ल
- B.एथिलीन
- C.इंडोल-3-एसिटिक अम्ल
- D.जिएटिन
उत्तर देखें
यह तब बनता है जब पौधा सूखे, लवणता या अत्यधिक तापमान का सामना करता है; यह रंध्र बंद कर देता है जिससे जल की हानि न हो, इसी कारण इसे वाष्पोत्सर्जन रोधी कहा जाता है, और यह बीजों तथा कलिकाओं में प्रसुप्ति लाता है जिससे वृद्धि अनुकूल परिस्थिति की प्रतीक्षा…
पूरी व्याख्या पढ़ें →पादप हार्मोन जिबरेलिन सर्वप्रथम किस जीव से प्राप्त किया गया था?
- A.राइजोबियम वंश का एक जीवाणु
- B.जिबरेला फ्यूजीकुरोई नामक कवक
- C.क्लोरेला नामक शैवाल
- D.ओट के अंकुर शीर्ष
उत्तर देखें
जापान में इस कवक से ग्रस्त धान के पौधे असामान्य रूप से लंबे और पतले हो जाते थे, जिस दशा को मूर्ख अंकुर या बकाने रोग कहा गया, और इसके लिए उत्तरदायी पदार्थ कवक से पृथक कर जिबरेलिन नाम दिया गया; इस समूह का सबसे ज्ञात सदस्य जिबरेलिक अम्ल है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पौधों में शीर्ष प्रभाविता, जिसमें मुख्य प्ररोह पार्श्व कलिकाओं की वृद्धि दबा देता है, किस हार्मोन से होती है?
- A.साइटोकाइनिन
- B.ऑक्सिन
- C.एब्सिसिक अम्ल
- D.एथिलीन
उत्तर देखें
प्ररोह शीर्ष पर बना ऑक्सिन नीचे की ओर चलता है और अपने नीचे की पार्श्व कलिकाओं को निष्क्रिय रखता है, इसी कारण जो माली बाड़ के पौधे का शीर्ष काट देता है उसे पार्श्व शाखाओं की घनी वृद्धि मिलती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कृषि में 2,4-डी नामक रसायन का व्यापक प्रयोग किस रूप में होता है?
- A.कवकनाशी
- B.खरपतवारनाशी
- C.रासायनिक उर्वरक
- D.चूहा मारने की दवा
उत्तर देखें
2,4-डाइक्लोरोफीनॉक्सी एसिटिक अम्ल एक संश्लेषित ऑक्सिन है, और अधिक मात्रा में छिड़कने पर यह चौड़ी पत्ती वाले द्विबीजपत्री खरपतवारों में ऐसी अनियंत्रित वृद्धि कराता है जिससे वे मर जाते हैं, जबकि गेहूं और धान जैसी संकरी पत्ती वाली फसलों पर असर बहुत कम पड़ता है, इसलिए खड़ी फसल से खरपतवार…
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