कोलॉइडी विलयन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
- A.कण विलयन में सर्वत्र समान रूप से वितरित रहते हैं
- B.कोलॉइडी विलयन प्रकृति में समांगी होता है
- C.ये टिंडल प्रभाव दर्शाते हैं
- D.बिना हिलाए रखने पर ये नीचे नहीं बैठते
सही उत्तर
B. कोलॉइडी विलयन प्रकृति में समांगी होता है
व्याख्या
सही उत्तर है B, कोलॉइडी विलयन प्रकृति में समांगी होता है। कोलॉइड आँखों को एकसमान दिखता है, परंतु वास्तव में यह विषमांगी मिश्रण है, इसलिए यही कथन सत्य नहीं है। कोलॉइड में कणों का आकार एक से एक हज़ार नैनोमीटर के बीच होता है, जो प्रकाश को प्रकीर्णित करने के लिए पर्याप्त बड़ा है पर दिखने या नीचे बैठने के लिए बहुत छोटा। कोलॉइड के दो भाग परिक्षिप्त प्रावस्था और परिक्षेपण माध्यम कहलाते हैं, जैसे दूध में वसा की बूँदें जल में फैली रहती हैं। जल में नमक जैसा वास्तविक विलयन समांगी होता है और निलंबन स्पष्ट रूप से विषमांगी, जबकि कोलॉइड इन दोनों के बीच आता है और विषमांगी ही गिना जाता है। A सत्य है क्योंकि कण माध्यम में समान रूप से फैले रहते हैं। C सत्य है क्योंकि कोलॉइडी कणों द्वारा प्रकाश की किरण का प्रकीर्णन ही टिंडल प्रभाव है। D सत्य है क्योंकि कण गुरुत्व से नीचे बैठने के लिए बहुत हल्के होते हैं। परीक्षा टिप: वास्तविक विलयन समांगी होता है और कोलॉइड तथा निलंबन विषमांगी।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंऐल्कीन, दो कार्बन परमाणुओं के बीच द्विबंध वाले असंतृप्त हाइड्रोकार्बन हैं, जिनका सामान्य सूत्र है:
- A.CnH2n+2
- B.CnH2n-1
- C.CnH2n+1
- D.CnH2n
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. CnH2n
व्याख्या
सही उत्तर है D, CnH2n। ऐल्कीन में कार्बन-कार्बन के बीच एक द्विबंध होता है और यह बंध उन दो हाइड्रोजन परमाणुओं को खपा देता है जो संतृप्त शृंखला में जुड़े होते, इसलिए सूत्र CnH2n+2 से घटकर CnH2n हो जाता है। n बराबर 2 रखने पर C2H4 यानी एथीन मिलता है, जो सरलतम ऐल्कीन है; n बराबर 3 रखने पर C3H6 यानी प्रोपीन मिलता है। एक कार्बन वाला कोई ऐल्कीन नहीं होता, क्योंकि द्विबंध के लिए दो कार्बन परमाणु आवश्यक हैं। असंतृप्त होने के कारण ऐल्कीन योगात्मक अभिक्रियाओं में सरलता से भाग लेते हैं, इसी से एथीन से पॉलिथीन बनती है और वनस्पति तेलों का कठोरीकरण होता है। A गलत है क्योंकि CnH2n+2 ऐल्केन का सूत्र है। B और C गलत हैं क्योंकि CnH2n-1 तथा CnH2n+1 मूलक या समूह दर्शाते हैं, स्थायी हाइड्रोकार्बन श्रेणी नहीं; CnH2n+1 ऐल्किल समूह है। परीक्षा टिप: प्रत्येक द्विबंध दो हाइड्रोजन परमाणु घटा देता है, इसलिए ऐल्कीन CnH2n है।
ऐल्केन का सामान्य सूत्र है:
- A.CnH2n-2
- B.CnH2n+2
- C.CnH3n-3
- D.CnH2n
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. CnH2n+2
व्याख्या
सही उत्तर है B, CnH2n+2। ऐल्केन संतृप्त हाइड्रोकार्बन हैं, जिनमें कार्बन परमाणु केवल एकल बंधों से जुड़े रहते हैं, और ऐसी शृंखला में हाइड्रोजन परमाणुओं की अधिकतम संभव संख्या होती है, जो CnH2n+2 से मिलती है। n बराबर 1 रखने पर CH4 यानी मेथेन, n बराबर 2 रखने पर C2H6 यानी एथेन और n बराबर 3 रखने पर C3H8 यानी प्रोपेन प्राप्त होता है। चूँकि प्रत्येक कार्बन पहले से ही अधिकतम हाइड्रोजन धारण कर रखता है, इसलिए ऐल्केन योगात्मक अभिक्रियाओं के प्रति अक्रिय रहते हैं और इन्हें पैराफिन भी कहा जाता है। A गलत है क्योंकि CnH2n-2 ऐल्काइन का सूत्र है, जिनमें त्रिबंध होता है, जैसे एथाइन C2H2। C गलत है क्योंकि CnH3n-3 हाइड्रोकार्बन की किसी समजातीय श्रेणी का सूत्र नहीं है। D गलत है क्योंकि CnH2n ऐल्कीन का सूत्र है, जिनमें एक द्विबंध होता है, जैसे एथीन C2H4। परीक्षा टिप: तीनों साथ याद रखें - ऐल्केन CnH2n+2, ऐल्कीन CnH2n, ऐल्काइन CnH2n-2।
निम्नलिखित में से कौन-सा गुण कार्बन द्वारा प्रदर्शित नहीं किया जाता है?
- A.सहसंयोजकता
- B.धात्विक गुण
- C.शृंखलन
- D.बहुरूपता
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. धात्विक गुण
व्याख्या
सही उत्तर है B, धात्विक गुण। कार्बन एक अधातु है, इसलिए यह धात्विक गुण नहीं दर्शाता; यह न इलेक्ट्रॉन खोकर धनायन बनाता है और न ही धातुओं जैसी चमक तथा आघातवर्ध्यता दिखाता है। कार्बन के बाहरतम कोश में चार इलेक्ट्रॉन होते हैं और यह स्थानांतरण के बजाय साझेदारी से अपना अष्टक पूरा करता है, जिससे सहसंयोजक बंधन इसका स्वाभाविक व्यवहार बन जाता है। इसलिए A ऐसा गुण है जो यह दर्शाता है, क्योंकि कार्बन चतुःसंयोजक है और मेथेन की तरह चार सहसंयोजक बंध बनाता है। C भी दर्शाया जाता है: शृंखलन किसी तत्व की अपने ही परमाणुओं को लंबी शृंखलाओं और वलयों में जोड़ने की क्षमता है, और कार्बन यह किसी भी अन्य तत्व से बेहतर करता है, इसीलिए लाखों कार्बनिक यौगिक बने हैं। D भी दर्शाया जाता है, क्योंकि कार्बन हीरा, ग्रेफाइट तथा फुलरीन जैसे कई बहुरूपों में पाया जाता है, जिनकी संरचना और गुण भिन्न होते हैं। परीक्षा टिप: कार्बन चतुःसंयोजक और शृंखलन में अग्रणी है, परंतु कभी धात्विक नहीं।
निम्नलिखित में से कौन-सा आयनिक यौगिकों का विशिष्ट गुण है?
- A.आयनों के बीच प्रबल स्थिरवैद्युत बल
- B.निम्न गलनांक
- C.जल में अघुलनशील
- D.पिघली अवस्था में खराब विद्युत चालकता
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. आयनों के बीच प्रबल स्थिरवैद्युत बल
व्याख्या
सही उत्तर है A, आयनों के बीच प्रबल स्थिरवैद्युत बल। आयनिक यौगिक धनावेशित तथा ऋणावेशित आयनों का जालक होता है, जो प्रबल स्थिरवैद्युत आकर्षण से बँधा रहता है, और यही बल उसके शेष सभी गुणों की व्याख्या करता है। आकर्षण प्रबल होने के कारण जालक तोड़ने के लिए बहुत ऊष्मा चाहिए, इसीलिए सोडियम क्लोराइड लगभग 801 डिग्री सेल्सियस पर ही पिघलता है। यही दृढ़ जालक इन ठोसों को कठोर और भंगुर बनाता है। B गलत है क्योंकि आयनिक यौगिकों के गलनांक और क्वथनांक उच्च होते हैं, निम्न नहीं। C गलत है क्योंकि ये जल में सरलता से घुल जाते हैं, जो ध्रुवीय विलायक होकर आयनों को घेरकर अलग कर देता है, हालाँकि ये केरोसिन या पेट्रोल में नहीं घुलते। D गलत है क्योंकि पिघली अवस्था में आयन स्वतंत्र होकर गति कर सकते हैं और यौगिक अच्छा चालन करता है; केवल ठोस अवस्था में चालन नहीं होता, क्योंकि तब आयन अपने स्थान पर स्थिर रहते हैं। परीक्षा टिप: एक प्रबल बल ही उच्च गलनांक, जल में घुलनशीलता और पिघली अवस्था में चालन की व्याख्या करता है।
सहसंयोजक बंध किसके द्वारा बनते हैं?
- A.इलेक्ट्रॉनों के साझा होने से
- B.प्रोटॉनों के ह्रास से
- C.इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से
- D.न्यूट्रॉनों के ग्रहण से
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. इलेक्ट्रॉनों के साझा होने से
व्याख्या
सही उत्तर है A, इलेक्ट्रॉनों के साझा होने से। सहसंयोजक बंध तब बनता है जब दो परमाणु इलेक्ट्रॉनों के एक या अधिक युग्म साझा करते हैं, जिससे प्रत्येक का बाहरतम कोश पूरा हो जाता है। ऐसे बंध अधातु परमाणुओं के बीच बनते हैं, जिनकी इलेक्ट्रॉन बंधुता लगभग समान होती है, इसलिए कोई भी दूसरे से इलेक्ट्रॉन खींच नहीं पाता। हाइड्रोजन अणु में दोनों परमाणु एक युग्म साझा करते हैं और एकल बंध बनता है; ऑक्सीजन दो युग्म साझा करके द्विबंध तथा नाइट्रोजन तीन युग्म साझा करके त्रिबंध बनाती है। सहसंयोजक यौगिकों के गलनांक और क्वथनांक सामान्यतः कम होते हैं और वे विद्युत का चालन नहीं करते, क्योंकि उनमें मुक्त आयनों के स्थान पर अणु होते हैं। B गलत है क्योंकि प्रोटॉन नाभिक में रहते हैं और सामान्य रासायनिक बंधन में कभी नहीं खोते। C गलत है क्योंकि इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से आयनिक बंध बनता है। D गलत है क्योंकि न्यूट्रॉन बंधन में भाग ही नहीं लेते। परीक्षा टिप: साझेदारी से सहसंयोजक बंध, स्थानांतरण से आयनिक बंध।