केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यान के लिए कितना परिव्यय मंजूर किया?
- A.4,120 करोड़ रुपये
- B.8,240 करोड़ रुपये
- C.12,400 करोड़ रुपये
- D.19,744 करोड़ रुपये
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर 8,240 करोड़ रुपये है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर 2024 में इस यान के विकास को मंजूरी दी थी और यह राशि विकास लागत, तीन विकासात्मक उड़ानों, जरूरी सुविधाओं, कार्यक्रम प्रबंधन तथा प्रक्षेपण अभियान को शामिल करती है। यान को निचली पृथ्वी कक्षा में अधिकतम तीस टन ले जाने के लिए बनाया जा रहा है, जो एलवीएम3 की दस टन क्षमता से तीन गुना है, और चौदह टन वाला आंशिक रूप से पुन: प्रयोज्य संस्करण भी विकसित हो रहा है। पहला विकल्प गलत है, क्योंकि वह मंजूर राशि का आधा है और इस यान के लिए ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई। तीसरा विकल्प भी इसी कारण गलत है। चौथा विकल्प गलत है, क्योंकि वह राशि ऊर्जा क्षेत्र के एक मिशन से जुड़ी है, प्रक्षेपण यान कार्यक्रम से नहीं।
पूरा लेख पढ़ें: भारत की नये युग की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियां और स्पेसडेक्स डॉकिंग
अभ्यास प्रश्न
किस मिशन के जरिये भारत कक्षा में दो अंतरिक्ष यानों की डॉकिंग दिखाने वाला चौथा देश बना?
- A.गगनयान
- B.स्पेसडेक्स
- C.चंद्रयान-3
- D.आदित्य-एल1
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इसके दो उपग्रह पहली बार 16 जनवरी 2025 को जुड़े, फिर 20 अप्रैल 2025 को 15 मीटर की अंतर-उपग्रह दूरी से पूरी तरह स्वायत्त डॉकिंग दोहराई गई और अगले दिन जुड़े हुए यानों के बीच बिजली का स्थानांतरण भी किया गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को किस आकार तक और किस वर्ष तक पहुंचाने का लक्ष्य है?
- A.2030 तक 20 अरब अमेरिकी डॉलर
- B.2033 तक 44 अरब अमेरिकी डॉलर
- C.2035 तक 60 अरब अमेरिकी डॉलर
- D.2040 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर
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यह लक्ष्य अंतरिक्ष विभाग ने तय किया है और पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान, वायु-श्वासी प्रणोदन, विद्युत प्रणोदन तथा अंतरिक्ष में डॉकिंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों से इस वृद्धि को सहारा मिलने की उम्मीद है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार हाल में बना कौन सा कानून परमाणु चिकित्सा अनुसंधान में निजी क्षेत्र की भागीदारी खोलता है?
- A.परमाणु ऊर्जा अधिनियम
- B.शांति अधिनियम
- C.बायोई3 अधिनियम
- D.राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन अधिनियम
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परमाणु चिकित्सा में हुई प्रगति का जिक्र करते हुए मंत्री ने हाल में बने इस कानून के उन प्रावधानों का उल्लेख किया जो इस क्षेत्र के अनुसंधान में निजी भागीदारी की अनुमति देते हैं, और कहा कि ऐसे कदमों से आगे के अनुसंधान तथा उद्योग की भागीदारी के नए अवसर…
पूरी व्याख्या पढ़ें →विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता घटाने के लिए डॉ. जितेंद्र सिंह ने किस क्षमता को देश में विकसित करने पर जोर दिया?
- A.जीन संश्लेषण
- B.उपग्रह प्रक्षेपण सेवाएं
- C.सेमीकंडक्टर विनिर्माण
- D.टीकों का शीत भंडारण
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मंत्री ने कहा कि विशेष अनुसंधान आवश्यकताओं के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहने से भारतीय वैज्ञानिकों के सामने समय, उपलब्धता और काम की निरंतरता की दिक्कतें आती हैं, और यह क्षमता देश के भीतर विकसित होने पर शोधकर्ता अधिक कुशलता से काम कर सकेंगे तथा जैव प्रौद्योगिकी का समूचा…
पूरी व्याख्या पढ़ें →डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत की जीन अनुसंधान क्षमता पर किस आयोजन में विचार रखे?
- A.भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव
- B.इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ईएसटीआईसी) 2026
- C.भारतीय विज्ञान कांग्रेस
- D.ग्लोबल बायो-इंडिया शिखर सम्मेलन
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मंत्री वहां सिस्टम और सिंथेटिक बायोलॉजी पर आयोजित सत्र को संबोधित कर रहे थे। यह सम्मेलन वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के अगुवों, स्टार्टअप और युवा शोधकर्ताओं को एक साथ लाता है ताकि वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार को राष्ट्रीय विकास से जोड़ा जा सके।
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