मुख्य सामग्री पर जाएं
GK24
विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को किस आकार तक और किस वर्ष तक पहुंचाने का लक्ष्य है?

  1. A.2030 तक 20 अरब अमेरिकी डॉलर
  2. B.2033 तक 44 अरब अमेरिकी डॉलर
  3. C.2035 तक 60 अरब अमेरिकी डॉलर
  4. D.2040 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर

सही उत्तर

B. 2033 तक 44 अरब अमेरिकी डॉलर

व्याख्या

सही उत्तर 2033 तक 44 अरब अमेरिकी डॉलर है। यह लक्ष्य अंतरिक्ष विभाग ने तय किया है और पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान, वायु-श्वासी प्रणोदन, विद्युत प्रणोदन तथा अंतरिक्ष में डॉकिंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों से इस वृद्धि को सहारा मिलने की उम्मीद है। निवेशकों का भरोसा भी दिख रहा है, क्योंकि 31 मार्च 2026 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टार्ट-अप में कुल निवेश लगभग 618.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर पहुंच गया और धन शुरुआती चरण से बड़े विकास चरण की ओर बढ़ रहा है। पहला विकल्प गलत है, क्योंकि न तो राशि और न ही वर्ष घोषित लक्ष्य से मेल खाता है। तीसरा विकल्प भी इसी कारण गलत है। चौथा विकल्प भी गलत है; इसके साथ न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड ने इसरो की 83 प्रौद्योगिकियों के लिए 118 हस्तांतरण समझौते किए हैं।

पूरा लेख पढ़ें: भारत की नये युग की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियां और स्पेसडेक्स डॉकिंग

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

किस मिशन के जरिये भारत कक्षा में दो अंतरिक्ष यानों की डॉकिंग दिखाने वाला चौथा देश बना?

  1. A.गगनयान
  2. B.स्पेसडेक्स
  3. C.चंद्रयान-3
  4. D.आदित्य-एल1
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. स्पेसडेक्स

इसके दो उपग्रह पहली बार 16 जनवरी 2025 को जुड़े, फिर 20 अप्रैल 2025 को 15 मीटर की अंतर-उपग्रह दूरी से पूरी तरह स्वायत्त डॉकिंग दोहराई गई और अगले दिन जुड़े हुए यानों के बीच बिजली का स्थानांतरण भी किया गया।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यान के लिए कितना परिव्यय मंजूर किया?

  1. A.4,120 करोड़ रुपये
  2. B.8,240 करोड़ रुपये
  3. C.12,400 करोड़ रुपये
  4. D.19,744 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 8,240 करोड़ रुपये

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर 2024 में इस यान के विकास को मंजूरी दी थी और यह राशि विकास लागत, तीन विकासात्मक उड़ानों, जरूरी सुविधाओं, कार्यक्रम प्रबंधन तथा प्रक्षेपण अभियान को शामिल करती है।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार हाल में बना कौन सा कानून परमाणु चिकित्सा अनुसंधान में निजी क्षेत्र की भागीदारी खोलता है?

  1. A.परमाणु ऊर्जा अधिनियम
  2. B.शांति अधिनियम
  3. C.बायोई3 अधिनियम
  4. D.राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन अधिनियम
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. शांति अधिनियम

परमाणु चिकित्सा में हुई प्रगति का जिक्र करते हुए मंत्री ने हाल में बने इस कानून के उन प्रावधानों का उल्लेख किया जो इस क्षेत्र के अनुसंधान में निजी भागीदारी की अनुमति देते हैं, और कहा कि ऐसे कदमों से आगे के अनुसंधान तथा उद्योग की भागीदारी के नए अवसर…

Q4.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता घटाने के लिए डॉ. जितेंद्र सिंह ने किस क्षमता को देश में विकसित करने पर जोर दिया?

  1. A.जीन संश्लेषण
  2. B.उपग्रह प्रक्षेपण सेवाएं
  3. C.सेमीकंडक्टर विनिर्माण
  4. D.टीकों का शीत भंडारण
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. जीन संश्लेषण

मंत्री ने कहा कि विशेष अनुसंधान आवश्यकताओं के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहने से भारतीय वैज्ञानिकों के सामने समय, उपलब्धता और काम की निरंतरता की दिक्कतें आती हैं, और यह क्षमता देश के भीतर विकसित होने पर शोधकर्ता अधिक कुशलता से काम कर सकेंगे तथा जैव प्रौद्योगिकी का समूचा…

Q5.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत की जीन अनुसंधान क्षमता पर किस आयोजन में विचार रखे?

  1. A.भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव
  2. B.इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ईएसटीआईसी) 2026
  3. C.भारतीय विज्ञान कांग्रेस
  4. D.ग्लोबल बायो-इंडिया शिखर सम्मेलन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ईएसटीआईसी) 2026

मंत्री वहां सिस्टम और सिंथेटिक बायोलॉजी पर आयोजित सत्र को संबोधित कर रहे थे। यह सम्मेलन वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के अगुवों, स्टार्टअप और युवा शोधकर्ताओं को एक साथ लाता है ताकि वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार को राष्ट्रीय विकास से जोड़ा जा सके।