केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने 2 नवंबर 2026 को सुअर वीर्य उत्पादन और कृत्रिम गर्भाधान का प्रोटोकॉल किस राज्य में जारी किया?
- A.असम
- B.नागालैंड
- C.सिक्किम
- D.मिजोरम
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है सिक्किम। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने 2 नवंबर 2026 को अपनी दो दिन की सिक्किम यात्रा के दौरान सूअरों में तरल वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान के लिए वीर्य उत्पादन का न्यूनतम मानक प्रोटोकॉल और मानक संचालन प्रक्रियाएं जारी कीं, और मंत्रालय ने 6 नवंबर को इसकी जानकारी दी। असम, नागालैंड और मिजोरम भी पूर्वोत्तर के राज्य हैं जहां सुअर पालन आम है, इसलिए ये विकल्प भ्रम पैदा कर सकते हैं, पर पुस्तिका इनमें से किसी राज्य में जारी नहीं हुई। यह दस्तावेज पूरे देश पर लागू होता है और सभी राज्यों में सुअर वीर्य प्रयोगशालाओं तथा कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं के लिए एक जैसी प्रक्रियाएं तय करता है, जबकि खास ध्यान पूर्वोत्तर पर है। इसलिए विकल्प C सही है।
पूरा लेख पढ़ें: सुअर प्रजनन: तरल वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान का मानक प्रोटोकॉल जारी
अभ्यास प्रश्न
20वीं पशुधन गणना (2019) के अनुसार भारत में सुअरों की संख्या कितनी है?
- A.5.12 मिलियन
- B.9.06 मिलियन
- C.12.40 मिलियन
- D.18.30 मिलियन
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यह आंकड़ा तब सामने आया जब केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने 2 नवंबर 2026 को सिक्किम में सुअर वीर्य उत्पादन और कृत्रिम गर्भाधान का न्यूनतम मानक प्रोटोकॉल जारी किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →देश की लगभग 45 प्रतिशत सुअर आबादी किस क्षेत्र में है, जिस पर नए कृत्रिम गर्भाधान प्रोटोकॉल का मुख्य ध्यान है?
- A.पूर्वी तटीय क्षेत्र
- B.पूर्वोत्तर क्षेत्र
- C.पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र
- D.दक्कन का पठार
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भारत के हर कृषि-जलवायु क्षेत्र में सुअर पाले जाते हैं, लेकिन पूर्वोत्तर को सुअर पालन का मुख्य केंद्र माना गया है और यहां देश के लगभग 45 प्रतिशत सुअर हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एससीडीपीएम 6 के अंतर्गत इस्पात मंत्रालय ने लंबित मामलों की किन श्रेणियों को लिया?
- A.केवल आंतरिक विभागीय लेखा परीक्षा कंडिकाएं
- B.केवल अधिकरणों में लंबित अदालती मामले
- C.सांसदों, प्रधानमंत्री कार्यालय, विशिष्ट व्यक्तियों, मंत्रिमंडल तथा राज्य सरकारों के संदर्भ और सीपीग्राम्स मामले
- D.केवल लंबित निविदा और खरीद फाइलें
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अभियान का उद्देश्य स्वच्छता को संस्थागत बनाना तथा इन विविध श्रेणियों के लंबित मामलों का समाधान करना था, इसलिए इसकी रिपोर्ट में कागजी कार्य और लोक शिकायतें दोनों आती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एससीडीपीएम 6 में कबाड़, ई-कचरे और अनुपयोगी फाइलों के निपटान से इस्पात मंत्रालय ने लगभग कितनी दफ्तरी जगह खाली की?
- A.लगभग 17,501 वर्ग फुट
- B.लगभग 21,164 वर्ग फुट
- C.लगभग 7,501 वर्ग फुट
- D.लगभग 1,750 वर्ग फुट
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मंत्रालय ने बताया कि अभियान के दौरान कबाड़, इलेक्ट्रॉनिक कचरे तथा अनावश्यक फाइलों को हटाकर लगभग इतनी दफ्तरी जगह खाली की गई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एससीडीपीएम 6 के दौरान इस्पात मंत्रालय ने कितनी भौतिक फाइलों की समीक्षा की और यह लक्ष्य का कितना हिस्सा रहा?
- A.17,107 फाइलें, लक्ष्य का 95 प्रतिशत
- B.21,164 फाइलें, लक्ष्य का 101 प्रतिशत
- C.17,501 फाइलें, लक्ष्य का 100 प्रतिशत
- D.12,164 फाइलें, लक्ष्य का 110 प्रतिशत
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मंत्रालय ने अभियान के दौरान इतनी भौतिक फाइलों की समीक्षा की और उपलब्धि नियत संख्या से कुछ आगे रही, इसलिए इसे निर्धारित लक्ष्य का 101 प्रतिशत दर्ज किया गया।
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