इंस्टेंट कॉफी बनाने और टीकों को सुरक्षित रखने में प्रयुक्त लायोफिलाइजेशन किस प्रक्रिया का तकनीकी नाम है?
- A.पास्चुरीकरण
- B.हिम-शुष्कन (फ्रीज ड्राइंग)
- C.डिब्बाबंदी
- D.विकिरणन
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर B, हिम-शुष्कन (फ्रीज ड्राइंग) है। लायोफिलाइजेशन में पदार्थ को पहले जमाया जाता है और फिर प्रबल निर्वात में रखा जाता है, जिससे बर्फ द्रव अवस्था में आए बिना सीधे वाष्प में बदल जाती है। यह अवस्था परिवर्तन ऊर्ध्वपातन है, और चूंकि उत्पाद कभी गीला नहीं होता और कभी गरम नहीं होता, उसकी सुगंध, रंग, आकार और जैविक सक्रियता लगभग अपरिवर्तित बची रहती है; सूखा ठोस पानी में तुरंत घुल जाता है। इसी कारण इंस्टेंट कॉफी, तैयार भोजन के लिए सूखे फल, जीवाणु संवर्धन और अनेक टीके हिम-शुष्कन से बनाए जाते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि पास्चुरीकरण दूध जैसे द्रवों का हल्का ताप उपचार है और उन्हें सुखाता ही नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि डिब्बाबंदी में भोजन वायुरुद्ध पात्र में बंद करके गरम किया जाता है, अतः जल डिब्बे में ही रहता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि विकिरणन में भोजन को गामा किरणों में रखकर कीट और सूक्ष्मजीव मारे जाते हैं तथा अंकुरण रोका जाता है, जल की मात्रा अछूती रहती है।
पूरा लेख पढ़ें: खाद्य परिरक्षण, मिलावट और खाद्य सुरक्षा नोट्स
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंशीत कक्ष (कोल्ड चैंबर) में रखे फल अधिक समय तक टिकते हैं, क्योंकि
- A.सूर्य के प्रकाश से संपर्क रुक जाता है
- B.वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की सांद्रता बढ़ जाती है
- C.श्वसन की दर घट जाती है
- D.आर्द्रता बढ़ जाती है
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तोड़ा गया फल भी जीवित ऊतक होता है जो श्वसन करता रहता है, अपनी ही शर्करा और अम्ल खर्च करता है तथा ताप, कार्बन डाइऑक्साइड और एथिलीन छोड़ता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सरसों के तेल में आर्जीमोन तेल की मिलावट से कौन-सा रोग होता है?
- A.लैथाइरिज्म
- B.एपिडेमिक ड्रॉप्सी
- C.फ्लोरोसिस
- D.मिनामाता रोग
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आर्जीमोन मैक्सिकाना, जिसे भारत में सत्यानाशी कहा जाता है, के बीज सरसों के बीजों से बहुत मिलते-जुलते हैं, इसलिए इसका तेल सरसों के तेल में मिलावट का शास्त्रीय उदाहरण है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मनुष्यों में लैथाइरिज्म निम्नलिखित में से किसके लंबे समय तक सेवन से होता है?
- A.खेसारी दाल
- B.आर्जीमोन बीज
- C.मेटानिल पीला
- D.चिकोरी
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खेसारी दाल, जिसका वानस्पतिक नाम लैथाइरस सैटाइवस है और जिसे ग्रास पी भी कहते हैं, एक कठोर दलहन है जो सूखा सह लेती है, इसलिए इसे कभी-कभी अरहर दाल या बेसन में मिला दिया जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पास्चुरीकरण की उच्च ताप अल्प काल (HTST) विधि में दूध को लगभग कितने ताप पर गरम किया जाता है?
- A.63 डिग्री सेल्सियस पर 30 मिनट
- B.72 डिग्री सेल्सियस पर 15 सेकंड
- C.100 डिग्री सेल्सियस पर 10 मिनट
- D.150 डिग्री सेल्सियस पर 2 सेकंड
उत्तर देखें
पास्चुरीकरण निर्जीवीकरण नहीं है: यह हल्का तापन है जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस, साल्मोनेला और ब्रूसेला जैसे रोगकारक जीवों तथा अधिकांश खराबी करने वाले जीवाणुओं को मार देता है, और दूध का स्वाद तथा पोषक मान लगभग अपरिवर्तित छोड़ देता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारतीय खाद्य मानकों के अनुसार निम्नलिखित में से कौन वर्ग I (क्लास I) परिरक्षक है?
- A.सोडियम बेंजोएट
- B.सल्फर डाइऑक्साइड
- C.साधारण नमक
- D.पोटैशियम सॉर्बेट
उत्तर देखें
भारतीय खाद्य मानक परिरक्षकों को दो वर्गों में बांटते हैं। वर्ग I परिरक्षक वे प्राकृतिक पदार्थ हैं जिन्हें रसोई में सदा से प्रयोग किया जाता रहा है, और उनकी मात्रा पर कोई सीमा नहीं रखी जाती: साधारण नमक, शर्करा, डेक्स्ट्रोज, मसाले, सिरका या एसिटिक अम्ल, शहद और खाद्य वनस्पति तेल।
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