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GK24
भारतीय इतिहासआसानपूछा गया: मध्य प्रदेश · General Studies 2019

'हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' किस वर्ष पारित हुआ?

  1. A.1856
  2. B.1858
  3. C.1859
  4. D.1862

सही उत्तर

A. 1856

व्याख्या

सही उत्तर है A, 1856। हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम जुलाई 1856 में पारित हुआ और इसने हिंदू विधवा के पुनर्विवाह को वैध बना दिया, जिससे ऐसे विवाह से जन्मी संतान को वैध माना गया। इससे पहले बंगाल के संस्कृत विद्वान ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने लंबा अभियान चलाया था और शास्त्रों के आधार पर ही सिद्ध किया था कि पुनर्विवाह की अनुमति है; उन्होंने इसके समर्थन में हजारों हस्ताक्षर भी जुटाए। अधिनियम में एक शर्त भी माननी पड़ी, जिसके अनुसार पुनर्विवाह करने वाली विधवा को पहले पति से मिली संपत्ति छोड़नी पड़ती थी। B गलत है क्योंकि 1858 में महारानी विक्टोरिया की घोषणा हुई थी, जिससे भारत का शासन ताज के हाथ आया। C गलत है क्योंकि 1859 बंगाल काश्तकारी अधिनियम और नील विद्रोह के लिए याद किया जाता है, इस कानून के लिए नहीं। D गलत है क्योंकि 1862 में कलकत्ता, बंबई और मद्रास में उच्च न्यायालय स्थापित हुए थे। परीक्षा टिप: 1829 – सती प्रथा पर रोक, 1856 – विधवा पुनर्विवाह की अनुमति, 1891 – सहमति आयु अधिनियम।

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Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC MTS · 5 Oct 2021, Shift 1मध्यम

ब्रिटिश भारत में वर्ष 1878 में निम्नलिखित में से कौन-सा अधिनियम बनाया गया था?

  1. A.भारतीय संविदा अधिनियम
  2. B.ईस्ट इंडिया स्टॉक डिविडेंड रिडेम्पशन अधिनियम
  3. C.संपत्ति अंतरण अधिनियम
  4. D.वर्नाक्युलर प्रेस अधिनियम
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. वर्नाक्युलर प्रेस अधिनियम

व्याख्या

सही उत्तर है D, वर्नाक्युलर प्रेस अधिनियम। वर्नाक्युलर प्रेस अधिनियम 1878 में लॉर्ड लिटन ने बनाया था, ताकि भारतीय भाषाओं के अखबारों की आवाज़ दबाई जा सके, जो अकाल और दिल्ली दरबार के खर्च को लेकर ब्रिटिश शासन की कड़ी आलोचना करने लगे थे। इसके तहत मजिस्ट्रेट किसी भी भारतीय भाषा के अखबार के मुद्रक से बंधपत्र और जमानत की रकम माँग सकता था और अगर अखबार में राजद्रोही माना गया कुछ छपे तो छापाखाना जब्त कर सकता था, जबकि अंग्रेज़ी अखबारों पर यह नियम लागू नहीं था। इस खुले भेदभाव के कारण इसे 'मुँह बंद करने वाला कानून' कहा गया और लॉर्ड रिपन ने 1882 में इसे रद्द कर दिया। A गलत है क्योंकि भारतीय संविदा अधिनियम 1872 में बना। B गलत है क्योंकि ईस्ट इंडिया स्टॉक डिविडेंड रिडेम्पशन अधिनियम 1873 का है, जब कंपनी का स्टॉक समाप्त किया गया। C गलत है क्योंकि संपत्ति अंतरण अधिनियम 1882 में आया, उसी वर्ष जब वर्नाक्युलर प्रेस अधिनियम हटाया गया। परीक्षा टिप: लिटन - 1878 वर्नाक्युलर प्रेस अधिनियम, रिपन - 1882 में रद्द।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC MTS · 5 Oct 2021, Shift 2आसान

ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड कर्ज़न ने बंगाल का विभाजन किस वर्ष किया था?

  1. A.1905
  2. B.1901
  3. C.1907
  4. D.1911
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. 1905

व्याख्या

सही उत्तर है A, 1905। लॉर्ड कर्ज़न ने 19 जुलाई 1905 को बंगाल विभाजन की घोषणा की और यह 16 अक्टूबर 1905 से लागू हुआ, जिससे प्रांत मुस्लिम-बहुल पूर्वी हिस्से और शेष बंगाल में बँट गया। सार्वजनिक रूप से कारण यह बताया गया कि बंगाल प्रशासन के लिए बहुत बड़ा हो गया है, पर असली मकसद हिंदू-मुसलमानों को बाँटकर वहाँ बढ़ते राष्ट्रीय आंदोलन को कमज़ोर करना था। इसके विरोध से स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन शुरू हुआ, जिसमें विदेशी कपड़े जलाए गए और भारतीय सामान, स्कूल तथा बैंक बढ़ावा पाए; रवींद्रनाथ टैगोर का गीत 'आमार सोनार बांग्ला' इन्हीं दिनों का है। विरोध इतना व्यापक था कि 1911 में विभाजन रद्द कर दिया गया और उसी साल राजधानी कलकत्ता से दिल्ली ले जाई गई। B गलत है क्योंकि 1901 में महारानी विक्टोरिया का निधन हुआ था। C गलत है क्योंकि 1907 कांग्रेस के सूरत विभाजन का वर्ष है। D गलत है क्योंकि 1911 में विभाजन रद्द हुआ था, हुआ नहीं था। परीक्षा टिप: 1905 में कर्ज़न ने घोषित किया, 1911 में हार्डिंग के समय रद्द हुआ।

Q3.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC MTS · 2 Nov 2021, Shift 1कठिन

चोल अभिलेखों में 'तिरुनमत्तुक्कणि' किसे कहा गया है?

  1. A.ब्राह्मणों को दी गई भूमि
  2. B.गैर-ब्राह्मण किसान भू-स्वामियों की भूमि
  3. C.जैन संस्थाओं को दान की गई भूमि
  4. D.मंदिरों को दी गई भूमि
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. मंदिरों को दी गई भूमि

व्याख्या

सही उत्तर है D, मंदिरों को दी गई भूमि। चोल अभिलेखों में भूमि-दान के हर प्रकार के लिए अलग शब्द मिलता है और 'तिरुनमत्तुक्कणि' वह भूमि है जिसकी उपज मंदिर के लिए रखी जाती थी। चोल नौवीं से तेरहवीं शताब्दी तक कावेरी डेल्टा पर शासन करते थे और अपनी भूमि-व्यवस्था का ब्योरा तमिल में मंदिरों की दीवारों पर खुदवाते थे, इसलिए आज भी हर श्रेणी का नाम पता चलता है। इन्हीं सूचियों में 'ब्रह्मदेय' ब्राह्मणों को दी गई भूमि थी, 'वेल्लानवगई' कर देने वाले गैर-ब्राह्मण किसान भू-स्वामियों की भूमि थी, 'शालाभोग' वह भूमि थी जिसकी आय से विद्यालय चलता था और 'पल्लिच्छंदम' जैन संस्थाओं को दी गई भूमि थी। A गलत है क्योंकि ब्राह्मणों को दी गई भूमि ब्रह्मदेय कहलाती थी। B गलत है क्योंकि गैर-ब्राह्मण किसानों की भूमि वेल्लानवगई थी। C गलत है क्योंकि जैन संस्थाओं को दी गई भूमि पल्लिच्छंदम थी। परीक्षा टिप: ब्रह्मदेय - ब्राह्मण, वेल्लानवगई - किसान, शालाभोग - विद्यालय, पल्लिच्छंदम - जैन, तिरुनमत्तुक्कणि - मंदिर।

Q4.भारतीय इतिहासपूछा गया: मध्य प्रदेश · General Studies 2013मध्यम

ब्रिटिश सरकार ने किस अधिनियम द्वारा चाय और चीन के व्यापार पर ईस्ट इंडिया कंपनी का एकाधिकार समाप्त किया?

  1. A.रेगुलेटिंग एक्ट – 1773
  2. B.पिट्स इंडिया एक्ट – 1784
  3. C.चार्टर एक्ट – 1813
  4. D.चार्टर एक्ट – 1833
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. चार्टर एक्ट – 1833

व्याख्या

सही उत्तर है D, चार्टर एक्ट – 1833। इस अधिनियम ने ईस्ट इंडिया कंपनी के बचे हुए व्यापारिक अधिकार, यानी चीन के साथ व्यापार तथा चाय के व्यापार का एकाधिकार भी समाप्त कर दिया और कंपनी को केवल प्रशासन चलाने वाली संस्था बना दिया, जो ब्रिटिश ताज की ओर से भारत को न्यास (ट्रस्ट) में रखती थी। इसी अधिनियम से बंगाल के गवर्नर-जनरल को भारत का गवर्नर-जनरल बनाया गया, जिस पद पर पहले विलियम बेंटिक आए; पूरे ब्रिटिश भारत के लिए कानून बनाने की शक्ति भी उन्हीं को मिली और उनकी परिषद में एक विधि सदस्य जोड़ा गया, जिस पद पर पहले मैकाले आए और जिन्होंने एक समान विधि संहिता का काम सँभाला। A गलत है क्योंकि 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट नियंत्रण की दिशा में पहला कदम था और उसने कलकत्ता में सर्वोच्च न्यायालय बनाया। B गलत है क्योंकि 1784 के पिट्स इंडिया एक्ट ने बोर्ड ऑफ कंट्रोल तथा द्वैध शासन की व्यवस्था दी। C गलत है क्योंकि 1813 के चार्टर एक्ट ने भारत का व्यापार सब ब्रिटिश व्यापारियों के लिए खोला, पर चीन और चाय का एकाधिकार कंपनी के पास बना रहा। परीक्षा टिप: 1813 – भारत का व्यापार खुला, चाय व चीन छोड़कर; 1833 – यह छूट भी खत्म।

Q5.भारतीय इतिहासपूछा गया: CTET · 30th Dec 2021मध्यम

जाति-भेद के विरुद्ध चले आंदोलनों में से कौन अपने प्रभाव-क्षेत्र के साथ सही ढंग से जोड़ा गया है?

  1. A.सतनामी आंदोलन – पंजाब
  2. B.मतुआ संप्रदाय – तमिलनाडु
  3. C.सत्यशोधक समाज – महाराष्ट्र
  4. D.आर्य समाज – केरल
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. सत्यशोधक समाज – महाराष्ट्र

व्याख्या

सही उत्तर है C, सत्यशोधक समाज – महाराष्ट्र। ज्योतिराव फुले ने 1873 में पुणे में सत्यशोधक समाज की स्थापना की, जिसका उद्देश्य महाराष्ट्र में जातिगत ऊँच-नीच और पुरोहित वर्ग के वर्चस्व से लड़ना था। फुले ने अपनी पत्नी सावित्रीबाई के साथ लड़कियों तथा तथाकथित निचली जातियों के बच्चों के लिए विद्यालय खोले थे और अपनी पुस्तक गुलामगिरी में शूद्रों की दशा की तुलना दासों से की थी। समाज ने ब्राह्मण पुरोहित के बिना विवाह कराए और किसानों, मजदूरों तथा महिलाओं के पक्ष में आवाज उठाई। A गलत है क्योंकि सतनामी आंदोलन गुरु घासीदास ने छत्तीसगढ़ की चर्मकार जातियों के बीच चलाया था, पंजाब में नहीं। B गलत है क्योंकि मतुआ संप्रदाय हरिचंद ठाकुर ने बंगाल के नामशूद्रों के बीच शुरू किया था, तमिलनाडु में नहीं। D गलत है क्योंकि आर्य समाज की स्थापना 1875 में दयानंद सरस्वती ने की और इसका प्रभाव पंजाब तथा उत्तर भारत में सबसे अधिक रहा, केरल में नहीं। परीक्षा टिप: फुले – सत्यशोधक समाज, पुणे 1873, गुलामगिरी; घासीदास – सतनामी, छत्तीसगढ़।