डीआरडीओ ने समर संस्करण 2.0 के लिए किस संस्था के साथ अनुबंध किया?
- A.भारतीय मानक ब्यूरो
- B.भारतीय गुणवत्ता परिषद
- C.राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड
- D.सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स
सही उत्तर
B. भारतीय गुणवत्ता परिषद
व्याख्या
सही उत्तर भारतीय गुणवत्ता परिषद है। डीआरडीओ ने इसके साथ सिस्टम फॉर एडवांस मैन्युफैक्चरिंग असेसमेंट एंड रेटिंग के लिए अनुबंध किया, जिसका दूसरा संस्करण घरेलू रक्षा उद्यमों की विनिर्माण परिपक्वता को आंकेगा। विकल्प ए गलत है, क्योंकि मानक ब्यूरो का नाम इस अनुबंध के साथ नहीं जुड़ा है। विकल्प सी भी इसी कारण गलत है, भले ही प्रयोगशालाओं का प्रत्यायन विषय के निकट लगता हो। विकल्प डी इस प्रश्न का जाल है। इसी कार्यक्रम में सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स तथा लघु उद्योग भारती के साथ रणनीतिक समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान अवश्य हुआ, किंतु वे उद्योग तक पहुंच बढ़ाने के समझौते थे, समर का अनुबंध नहीं। तीनों समझौतों को अलग-अलग याद रखें, क्योंकि प्रश्न इनमें से किसी एक पर भी बन सकता है। यह भी ध्यान रखें कि समर का पूरा नाम अंग्रेजी शब्दों का संक्षिप्त रूप है और इसका उद्देश्य रेटिंग के माध्यम से घरेलू रक्षा उद्योग की क्षमता को मापना है।
पूरा लेख पढ़ें: विमर्श 2026: डीआरडीओ ने नौ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण लाइसेंस सौंपे
अभ्यास प्रश्न
सितंबर 2026 में हुई डीआरडीओ-उद्योग सहयोग बैठक विमर्श का विषय क्या था?
- A.वार्ता से विकास
- B.विकास से विश्वास
- C.शोध से समृद्धि
- D.नव भारत नव निर्माण
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सही उत्तर: A. वार्ता से विकास
व्याख्या
सही उत्तर वार्ता से विकास है। रक्षा सचिव और डीआरडीओ अध्यक्ष ने बैठक की रूपरेखा बताते हुए यही विषय बताया। यह वाक्यांश बैठक के उद्देश्य को स्पष्ट करता है, क्योंकि इसका लक्ष्य प्रयोगशालाओं और निजी विनिर्माताओं के बीच बातचीत को ठोस विकास कार्य में बदलना था। विकल्प बी गलत है, क्योंकि इस नाम का कोई विषय विज्ञप्ति में नहीं है। विकल्प सी भी इसी कारण गलत है, यद्यपि किसी अनुसंधान कार्यक्रम के लिए यह उपयुक्त प्रतीत होता है। विकल्प डी एक सामान्य नारा है और यहां विषय नहीं है। अभ्यर्थी इस विषय को कार्यक्रम के अन्य पहचान बिंदुओं के साथ जोड़कर याद रखें, जैसे नाम विमर्श, तिथि 15 सितंबर 2026, स्थान नई दिल्ली और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति।
विमर्श में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के कितने लाइसेंसिंग समझौते और कितने विनिर्माण भागीदारों को सौंपे गए?
- A.पांच समझौते, नौ भागीदारों को
- B.नौ समझौते, 13 भागीदारों को
- C.तेरह समझौते, नौ भागीदारों को
- D.ग्यारह समझौते, 15 भागीदारों को
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सही उत्तर: B. नौ समझौते, 13 भागीदारों को
व्याख्या
सही उत्तर नौ समझौते, 13 भागीदारों को है। विज्ञप्ति में दर्ज है कि रक्षा मंत्री की उपस्थिति में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के नौ लाइसेंसिंग समझौते, जिन्हें संक्षेप में एलएटीओटीएस कहा जाता है, इतने ही विनिर्माण भागीदारों को सौंपे गए, ताकि वे संबंधित प्रणालियों का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर सकें। विकल्प सी दोनों संख्याओं को उलट देता है और यही इस प्रश्न का सबसे बड़ा जाल है, इसलिए क्रम ध्यान से याद रखें। समझौतों की संख्या दोनों में छोटी है। विकल्प ए समझौतों की संख्या कम बताता है। विकल्प डी दोनों आंकड़े गढ़ता है। यह भी ध्यान रखें कि एक समझौते में एक से अधिक भागीदार हो सकते हैं, इसीलिए भागीदारों की संख्या समझौतों की संख्या से अधिक है। परीक्षा में ऐसे प्रश्न में दोनों आंकड़े एक साथ पूछे जाते हैं, इसलिए इन्हें जोड़ी के रूप में याद करना सबसे उपयोगी रहता है। इसके साथ यह भी याद रखें कि यह हस्तांतरण रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में नई दिल्ली में हुई विमर्श बैठक के दौरान किया गया था।
डीईएफएसएसी प्रणाली किसका स्थान लेगी?
- A.कागज आधारित पहचान पत्र, पास और परमिट
- B.पुराने एनालॉग फील्ड रेडियो सेट
- C.राशन और कैंटीन के हस्तलिखित रजिस्टर
- D.पुराने नाइट विजन उपकरण
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सही उत्तर: A. कागज आधारित पहचान पत्र, पास और परमिट
व्याख्या
सही उत्तर है कागज आधारित पहचान पत्र, पास और परमिट। डीईएफएसएसी का पूरा नाम डिफेंस फोर्सेज सिक्योर एक्सेस कार्ड है और विज्ञप्ति के अनुसार यह मौजूदा कागजी व्यवस्था की जगह रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान पर चलने वाले इंटरऑपरेबल स्मार्ट कार्ड लाएगा। इंटरऑपरेबल शब्द महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे एक ही कार्ड तीनों सेनाओं के ठिकानों पर पढ़ा जा सकेगा, किसी एक ठिकाने पर नहीं। विकल्प बी में फील्ड रेडियो सेट हैं, जो संचार से जुड़ी अलग योजनाओं का विषय हैं। विकल्प सी में राशन और कैंटीन के रजिस्टर हैं, जो कल्याण और आपूर्ति का काम है और इस विज्ञप्ति में नहीं आता। विकल्प डी में नाइट विजन उपकरण हैं, जो निगरानी के दूसरे प्रकार के साधन हैं। वायु सेना के लिए डीईएफएसएसी के साथ जीबीएमपीजे भी मंजूर हुआ, जो विरोधी के रडार को जाम करता है।
इस बैठक में मंजूर अरुध्रा रडार किस सेना के लिए और किस काम के लिए है?
- A.थल सेना, तोपखाना नियंत्रण के लिए
- B.नौसेना, नौसैनिक वायु स्टेशनों के एयर रूट सर्विलांस रडार की जगह लेने के लिए
- C.वायु सेना, अग्रिम ठिकानों पर परिवहन विमानों के मार्गदर्शन के लिए
- D.तटरक्षक बल, अनन्य आर्थिक क्षेत्र की निगरानी के लिए
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सही उत्तर: B. नौसेना, नौसैनिक वायु स्टेशनों के एयर रूट सर्विलांस रडार की जगह लेने के लिए
व्याख्या
सही उत्तर है नौसेना, नौसैनिक वायु स्टेशनों के एयर रूट सर्विलांस रडार की जगह लेने के लिए। विज्ञप्ति में अरुध्रा रडार नौसेना की सूची में है, साथ में मरीन गैस टर्बाइन के डिजाइन, विकास और बाद की खरीद का प्रस्ताव भी है। वहां साफ लिखा है कि यह रडार नौसैनिक वायु स्टेशनों पर लगे मौजूदा एयर रूट सर्विलांस रडार का स्थान लेगा। विकल्प ए इसे थल सेना के तोपखाना नियंत्रण से जोड़ता है, जो काम हथियार पहचानने वाले अलग रडार करते हैं और जिनका यहां उल्लेख नहीं है। विकल्प सी इसे वायु सेना से जोड़ता है, जबकि वायु सेना के लिए इस बैठक में लड़ाकू, परिवहन और हेलीकॉप्टर क्षमता के अलावा जीबीएमपीजे तथा डीईएफएसएसी मंजूर हुए थे। विकल्प डी में तटरक्षक बल है, जिसका जिक्र ही नहीं है। नौसेना के दोनों नाम जोड़ी बनाकर याद रखें।
रक्षा अधिग्रहण परिषद की अध्यक्षता कौन करता है?
- A.प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस)
- B.रक्षा सचिव
- C.रक्षा मंत्री
- D.राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार
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सही उत्तर: C. रक्षा मंत्री
व्याख्या
सही उत्तर है रक्षा मंत्री। विज्ञप्ति में स्पष्ट लिखा है कि बैठक रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई, इसलिए इस परिषद के प्रमुख रक्षा मंत्री ही होते हैं। विकल्प ए में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष का नाम है, जो सबसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारी हैं और तीनों सेनाओं से जुड़े विषयों पर सलाह देते हैं, किंतु इस निकाय की अध्यक्षता उनके पास नहीं है। विकल्प बी में रक्षा सचिव हैं, जो मंत्रालय के सबसे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी हैं और खरीद प्रक्रिया में उनकी भूमिका प्रशासनिक होती है, अध्यक्ष की नहीं। विकल्प डी में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं, जो सुरक्षा नीति पर काम करते हैं, पूंजीगत खरीद की मंजूरी पर नहीं। जैसे सुरक्षा पर मंत्रिमंडलीय समिति को प्रधानमंत्री से जोड़कर याद किया जाता है, वैसे ही इस परिषद को रक्षा मंत्री से जोड़कर याद रखें।