ध्वनि तरंगों का वह गुण जो ध्वनि का तारत्व (पिच) तय करता है, उसकी
- A.आवृत्ति है
- B.आयाम है
- C.तरंगदैर्ध्य है
- D.तीव्रता है
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है A, आवृत्ति। तारत्व वह गुण है जिससे ध्वनि कान को ऊँची या नीची लगती है, और यह कंपन की आवृत्ति पर निर्भर करता है: आवृत्ति जितनी अधिक, तारत्व उतना ऊँचा।
आवृत्ति किसी स्रोत द्वारा प्रति सेकंड किए गए कंपनों की संख्या है, जिसे हर्ट्ज़ (Hz) में मापते हैं। सीटी या बच्चे की आवाज़ तेज़ी से कंपन करती है और तीखी लगती है, जबकि ढोल या शेर की दहाड़ धीमे कंपन से भारी लगती है। स्त्रियों की आवाज़ प्रायः पुरुषों से ऊँचे तारत्व की होती है, क्योंकि उनके स्वर-तंतु छोटे होकर तेज़ी से कंपन करते हैं। मनुष्य का कान लगभग 20 Hz से 20,000 Hz तक सुनता है; इससे नीचे अवश्रव्य और ऊपर पराश्रव्य ध्वनि होती है।
B गलत है: आयाम ध्वनि की प्रबलता तय करता है, तारत्व नहीं।
C गलत है: एक ही स्वर की तरंगदैर्ध्य माध्यम के साथ बदलती है; तारत्व आवृत्ति से तय होता है।
D गलत है: तीव्रता प्रति इकाई क्षेत्रफल ऊर्जा है और प्रबलता से जुड़ी है।
परीक्षा टिप: तारत्व = आवृत्ति, प्रबलता = आयाम, गुणता (टिम्बर) = तरंग का आकार।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंपाचन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- A.भोजन में उपस्थित वसा का पाचन ट्रिप्सिन और काइमोट्रिप्सिन द्वारा होता है।
- B.भोजन के मंड (स्टार्च) का पाचन लाइपेज़ द्वारा होता है।
- C.भोजन की वसा का पाचन लाइपेज़ द्वारा होता है।
- D.न्यूक्लिक अम्ल का पाचन ऐमिलेज़ द्वारा होता है।
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है C, भोजन की वसा का पाचन लाइपेज़ द्वारा होता है। लाइपेज़ वसा को वसा अम्लों और ग्लिसरॉल में तोड़ते हैं।
वसा का पाचन मुख्य रूप से छोटी आँत में होता है। यकृत से बनने वाला और पित्ताशय में जमा पित्त पहले वसा की बड़ी बूँदों को बहुत छोटी बूँदों में तोड़ता है, जिसे पायसीकरण कहते हैं; पित्त में स्वयं कोई एंज़ाइम नहीं होता। फिर अग्न्याशयी लाइपेज़ इन बूँदों पर काम करके वसा को वसा अम्लों और ग्लिसरॉल में बदलता है, जो रसांकुरों की लसीका वाहिनियों में अवशोषित होते हैं। आहारनाल का हर एंज़ाइम एक तरह के भोजन पर काम करता है: ऐमिलेज़ मंड पर, प्रोटीएज़ प्रोटीन पर, लाइपेज़ वसा पर और न्यूक्लिएज़ न्यूक्लिक अम्ल पर।
विकल्प A गलत है, क्योंकि ट्रिप्सिन और काइमोट्रिप्सिन अग्न्याशय के प्रोटीएज़ हैं, जो प्रोटीन पचाते हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि मंड का पाचन मुख में लार ऐमिलेज़ और आँत में अग्न्याशयी ऐमिलेज़ से होता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि DNA और RNA जैसे न्यूक्लिक अम्ल न्यूक्लिएज़ से टूटते हैं।
परीक्षा टिप: ऐमिलेज़–मंड, प्रोटीएज़ (पेप्सिन, ट्रिप्सिन)–प्रोटीन, लाइपेज़–वसा, न्यूक्लिएज़–न्यूक्लिक अम्ल; पित्त केवल पायसीकरण करता है।
एककोशिकीय जीवों में जीवन प्रक्रियाओं के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.उन्हें भोजन ग्रहण करने के लिए अलग अंग की आवश्यकता होती है।
- B.श्वसन के लिए अलग अंग की आवश्यकता नहीं होती।
- C.ये जीव उत्सर्जी अपशिष्ट पदार्थ उत्पन्न करते हैं।
- D.वे बाहरी वातावरण के संपर्क में रहते हैं।
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है A। एककोशिकीय जीव में कोई अंग होता ही नहीं; उसकी एकमात्र कोशिका अपनी सतह से या अस्थायी संरचनाएँ बनाकर भोजन लेती है।
अमीबा, पैरामीशियम या जीवाणु जैसे जीवों में पूरा शरीर एक कोशिका है, इसलिए हर जीवन प्रक्रिया उसी के भीतर होती है। अमीबा उँगली जैसे कूटपादों से भोजन को घेरकर खाद्य रिक्तिका में पचाता है; पैरामीशियम पक्ष्माभों से भोजन को एक खाँचे में धकेलता है। ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड कोशिका झिल्ली से सीधे विसरित हो जाती हैं, क्योंकि पूरी सतह परिवेश को छूती है। अमोनिया जैसा अपशिष्ट भी विसरण से बाहर जाता है और मीठे पानी के जीव संकुचनशील रिक्तिका से अतिरिक्त पानी निकालते हैं। अंगों की ज़रूरत केवल बड़े बहुकोशिकीय शरीर में होती है।
विकल्प B सही कथन है, क्योंकि गैसों का आदान-प्रदान कोशिका सतह से विसरण द्वारा होता है। विकल्प C सही है, क्योंकि हर जीवित कोशिका के उपापचय से अपशिष्ट बनता है। विकल्प D सही है, क्योंकि एक कोशिका हर ओर से सीधे अपने परिवेश के संपर्क में रहती है।
परीक्षा टिप: एककोशिकीय = कोई अंग नहीं; गैस और अपशिष्ट झिल्ली से विसरण द्वारा।
निम्नलिखित में से कौन-सी मनुष्यों के सुनने की श्रव्य सीमा है?
- A.20 kHz - 200 kHz
- B.20 Hz - 20 kHz
- C.20 Hz - 35 kHz
- D.20 Hz - 40 kHz
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है B, 20 Hz - 20 kHz। स्वस्थ युवा मनुष्य का कान लगभग 20 हर्ट्ज़ से लगभग 20,000 हर्ट्ज़ तक की आवृत्ति वाली ध्वनियाँ सुन सकता है।
आवृत्ति प्रति सेकंड होने वाले कंपनों की संख्या है, जिसे हर्ट्ज़ में मापा जाता है और कान इसे तारत्व के रूप में महसूस करता है। 20 Hz से कम की ध्वनि अवश्रव्य कहलाती है; हाथी और व्हेल दूर तक संवाद के लिए इसका उपयोग करते हैं और भूकंप भी इसे पैदा करते हैं। 20 kHz से अधिक की ध्वनि पराश्रव्य कहलाती है; चमगादड़ और डॉल्फ़िन इससे प्रतिध्वनि द्वारा स्थान पहचानते हैं, डॉक्टर इससे सोनोग्राफी करते हैं और जहाज़ SONAR में इसका उपयोग करते हैं। उम्र के साथ सुनने की ऊपरी सीमा घटती जाती है।
विकल्प A गलत है, क्योंकि 20 से 200 kHz पूरी तरह पराश्रव्य सीमा है, जिसे मनुष्य नहीं सुन सकता। विकल्प C गलत है, क्योंकि 35 kHz पराश्रव्य में है और कुत्तों की सुनने की सीमा के करीब है। विकल्प D गलत है, क्योंकि 40 kHz भी मनुष्य की सुनने की सीमा से बाहर है।
परीक्षा टिप: 20 Hz से कम अवश्रव्य, 20 Hz–20 kHz श्रव्य, 20 kHz से अधिक पराश्रव्य।
पेशी के संकुचन और शिथिलन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- A.इसमें Zn++ आयन की गति शामिल होती है।
- B.इसमें रक्त का Ca++ आयन शामिल होता है।
- C.इसमें सार्कोप्लाज़्मिक जालिका (SR) से Ca++ का निकलना और Ca++ को वापस SR में पंप करना शामिल होता है।
- D.इसमें Na और K का आदान-प्रदान शामिल होता है।
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है C। पेशी तब सिकुड़ती है जब सार्कोप्लाज़्मिक जालिका से कैल्शियम आयन निकलते हैं और तब शिथिल होती है जब वे वापस उसमें पंप किए जाते हैं।
जब तंत्रिका संकेत पेशी तंतु तक पहुँचता है, तो वह तंतु के भीतर फैलकर सार्कोप्लाज़्मिक जालिका, यानी तंतु के आंतरिक कैल्शियम भंडार, से Ca++ आयन मुक्त कराता है। कैल्शियम ट्रोपोनिन से जुड़ता है, जो ट्रोपोमायोसिन को हटाकर ऐक्टिन पर जुड़ने के स्थान खोल देता है। फिर मायोसिन के सिर जुड़कर ATP की मदद से ऐक्टिन तंतुओं को भीतर खींचते हैं और सार्कोमियर छोटा हो जाता है; यही सर्पी तंतु सिद्धांत है। शिथिलन के लिए ATP से चलने वाले कैल्शियम पंप Ca++ को वापस जालिका में ले जाते हैं, जुड़ने के स्थान फिर ढक जाते हैं और तंतु अलग हो जाते हैं।
विकल्प A गलत है, क्योंकि ज़िंक आयनों की संकुचन में कोई भूमिका नहीं है। विकल्प B गलत है, क्योंकि हर संकुचन को शुरू करने वाला कैल्शियम तंतु के भीतर के भंडार से आता है, सीधे रक्त से नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि सोडियम-पोटैशियम का आदान-प्रदान झिल्ली पर विद्युत संकेत ले जाता है, पर अपने आप तंतुओं को नहीं सरकाता।
परीक्षा टिप: संकुचन = SR से निकला Ca++ ट्रोपोनिन से जुड़ता है; शिथिलन = Ca++ वापस पंप; दोनों में ATP।
निम्नलिखित में से कौन-सा एक विषमचक्रीय (हेटेरोसाइक्लिक) ऐरोमैटिक यौगिक नहीं है?
- A.ट्रोपोलोन
- B.फ्यूरान
- C.थायोफीन
- D.पिरिडीन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है A, ट्रोपोलोन। ट्रोपोलोन ऐरोमैटिक है, पर उसका सात सदस्यीय वलय केवल कार्बन परमाणुओं से बना है, इसलिए वह विषमचक्रीय नहीं है।
विषमचक्रीय यौगिक के वलय में कार्बन के अलावा कम से कम एक अन्य परमाणु, जैसे ऑक्सीजन, सल्फर या नाइट्रोजन, होता है। ट्रोपोलोन, C7H6O2, सात कार्बन का वलय है, जिस पर वलय के बाहर एक कीटोन समूह और एक हाइड्रॉक्सिल समूह लगे हैं। इसे अबेंज़ीनॉयड ऐरोमैटिक यौगिकों में गिना जाता है, क्योंकि इसके वलय में छह विस्थानीकृत पाई इलेक्ट्रॉन होते हैं, उतने ही जितने बेंज़ीन को ऐरोमैटिक बनाते हैं, पर वलय का हर परमाणु कार्बन है।
विकल्प B गलत है, क्योंकि फ्यूरान एक ऑक्सीजन परमाणु वाला पाँच सदस्यीय ऐरोमैटिक वलय है। विकल्प C गलत है, क्योंकि थायोफीन एक सल्फर परमाणु वाला पाँच सदस्यीय ऐरोमैटिक वलय है। विकल्प D गलत है, क्योंकि पिरिडीन बेंज़ीन जैसा छह सदस्यीय वलय है जिसमें एक CH की जगह नाइट्रोजन परमाणु है; यह एक आम विलायक और क्षारक है।
परीक्षा टिप: वलय में O, S या N = विषमचक्रीय: फ्यूरान (O), थायोफीन (S), पिरिडीन (N); ट्रोपोलोन पूरा कार्बन।