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GK24
भारतीय इतिहासमध्यमपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2020, Paper I

दक्षिण भारत के भक्ति आंदोलन के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

  1. A.नालायिर दिव्यप्रबंधम को तमिल वेद भी कहा जाता था
  2. B.अंडाल एक आलवार थीं
  3. C.कराइक्काल अम्मैयार विष्णु की भक्त थीं
  4. D.संत अप्पर और सुंदरर की धातु की प्रतिमाएं बनाकर एक शिव मंदिर में प्रतिष्ठित की गईं

सही उत्तर

C. कराइक्काल अम्मैयार विष्णु की भक्त थीं

व्याख्या

सही उत्तर है C, कराइक्काल अम्मैयार विष्णु की भक्त थीं। कराइक्काल अम्मैयार एक नयनार थीं, यानी शिव की भक्त तमिल संतों में से एक, इसलिए यह कथन सही नहीं है।

तमिलनाडु का आरंभिक भक्ति आंदोलन लगभग छठी शताब्दी से कवि-संतों के दो समूहों ने चलाया: विष्णु के भक्त आलवार और शिव के भक्त नयनार। सबसे आरंभिक नयनारों में से एक कराइक्काल अम्मैयार सांसारिक जीवन त्यागने के लिए जानी जाती हैं और कथाओं में शिव को समर्पित तपस्विनी के रूप में याद की जाती हैं। बारह आलवारों के भजनों को दसवीं शताब्दी में नाथमुनि ने नालायिर दिव्यप्रबंधम, यानी 'चार हज़ार पवित्र रचनाएं', के रूप में संकलित किया।

विकल्प A चुनना गलत है, क्योंकि नालायिर दिव्यप्रबंधम को सचमुच चारों वेदों जितना पवित्र मानकर तमिल वेद कहा गया। विकल्प B चुनना गलत है, क्योंकि तिरुप्पावै की रचयिता अंडाल आलवारों में अकेली महिला थीं। विकल्प D चुनना गलत है, क्योंकि चोल शासकों ने शिव-भक्त संतों अप्पर, संबंदर और सुंदरर की धातु प्रतिमाएं बनवाकर एक शिव मंदिर में स्थापित कीं।

परीक्षा टिप: आलवार विष्णु के भक्त (अंडाल); नयनार शिव के भक्त (अप्पर, संबंदर, सुंदरर, कराइक्काल अम्मैयार)।

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Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2024, Paper Iमध्यम

एक विशाल चबूतरे, महानवमी डिब्बा, के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. यह विजयनगर शहर के सबसे ऊंचे स्थानों में से एक पर स्थित है।

2. विरुपाक्ष मंदिर इसी पर स्थित है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. A.केवल 1
  2. B.केवल 2
  3. C.1 और 2 दोनों
  4. D.न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. केवल 1

महानवमी डिब्बा विजयनगर (हम्पी) के सबसे ऊंचे स्थानों में से एक पर बना है, पर विरुपाक्ष मंदिर उस पर नहीं है; यह मंदिर तुंगभद्रा के पास शहर के धार्मिक केंद्र में है।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2024, GS Paper Iमध्यम

भारत शासन अधिनियम, 1935 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

1. इसमें ब्रिटिश भारतीय प्रांतों और देशी रियासतों के संघ पर आधारित एक अखिल भारतीय संघ की स्थापना का प्रावधान था।

2. रक्षा और विदेशी मामले संघीय विधानमंडल के नियंत्रण में रखे गए थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. A.केवल 1
  2. B.केवल 2
  3. C.1 और 2 दोनों
  4. D.न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. केवल 1

1935 के अधिनियम में प्रांतों और रियासतों के अखिल भारतीय संघ का प्रस्ताव था, पर रक्षा और विदेशी मामले विधानमंडल के बजाय गवर्नर-जनरल के पास रखे गए।

Q3.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2021, GS Paper Iकठिन

भारतीय इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

1. अर्काट की निज़ामत हैदराबाद राज्य से निकली थी।

2. मैसूर राज्य विजयनगर साम्राज्य से निकला था।

3. रुहेलखंड राज्य अहमद शाह दुर्रानी द्वारा अधिकृत क्षेत्रों से बना था।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

  1. A.1 और 2
  2. B.केवल 2
  3. C.2 और 3
  4. D.केवल 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 1 और 2

अर्काट निज़ाम के दक्कन क्षेत्र से और मैसूर विजयनगर साम्राज्य से निकला, लेकिन रुहेलखंड दुर्रानी के नहीं, मुगलों के क्षेत्र से बना था।

Q4.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2024, GS Paper Iमध्यम

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

1. उपनिषदों में कोई दृष्टांत-कथा नहीं है।

2. उपनिषदों की रचना पुराणों से पहले हुई थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. A.केवल 1
  2. B.केवल 2
  3. C.1 और 2 दोनों
  4. D.न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. केवल 2

उपनिषद कथाओं और दृष्टांतों से भरे हैं और उत्तर वैदिक काल के हैं, जो पुराणों के बनने से काफ़ी पहले का समय है।

Q5.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2021, GS Paper Iआसान

औपनिवेशिक भारत के संदर्भ में शाह नवाज़ खान, प्रेम कुमार सहगल और गुरबख्श सिंह ढिल्लों किस रूप में याद किए जाते हैं?

  1. A.स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन के नेता
  2. B.1946 की अंतरिम सरकार के सदस्य
  3. C.संविधान सभा की प्रारूप समिति के सदस्य
  4. D.भारतीय राष्ट्रीय सेना के अधिकारी
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. भारतीय राष्ट्रीय सेना के अधिकारी

आज़ाद हिंद फ़ौज (INA) के इन तीन अधिकारियों पर 1945 में दिल्ली के लाल किले में अंग्रेज़ों ने एक साथ मुकदमा चलाया था।