भौतिकी के मूलभूत नियमों के अनुसार आवश्यक है
- A.ऊर्जा का संरक्षण और आवेश का असंरक्षण।
- B.आवेश का संरक्षण और रैखिक संवेग का असंरक्षण।
- C.आवेश का संरक्षण और ऊर्जा का असंरक्षण।
- D.ऊर्जा, संवेग और आवेश का संरक्षण।
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है D, ऊर्जा, संवेग और आवेश का संरक्षण। हर पृथक निकाय में ये तीनों राशियां स्थिर रहती हैं, और आज तक कोई ऐसी प्रक्रिया नहीं मिली जो इन नियमों को तोड़ती हो।
ऊर्जा संरक्षण का नियम कहता है कि ऊर्जा एक रूप से दूसरे रूप में बदल सकती है, जैसे रासायनिक से ऊष्मा या गतिज से स्थितिज, पर उसकी कुल मात्रा वही रहती है। रैखिक संवेग का संरक्षण न्यूटन के तीसरे नियम से निकलता है: बाहरी बल न हो तो टक्कर या विस्फोट से पहले और बाद का कुल संवेग बराबर रहता है, इसीलिए गोली चलाने पर बंदूक पीछे हटती है। आवेश संरक्षण का अर्थ है कि विद्युत आवेश केवल स्थानांतरित होता है, न बनता है न नष्ट होता है; कांच की छड़ को रेशम से रगड़ने पर दोनों पर बराबर और विपरीत आवेश आते हैं।
A गलत है, क्योंकि आवेश सदा संरक्षित रहता है। B गलत है, क्योंकि बाहरी बल न होने पर रैखिक संवेग संरक्षित रहता है। C गलत है, क्योंकि ऊर्जा सदा संरक्षित रहती है, केवल रूप बदलती है।
Exam tip: पृथक निकाय में ऊर्जा, रैखिक संवेग, कोणीय संवेग और आवेश, सभी संरक्षित रहते हैं।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंविद्युत चुंबकीय तरंगों, ध्वनि तरंगों और जल तरंगों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 1. इनमें परावर्तन होता है 2. ये ऊर्जा का वहन करती हैं 3. ये दाब डालती हैं 4. ये निर्वात में चल सकती हैं नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- A.1, 2 और 3
- B.2 और 4
- C.केवल 1 और 3
- D.केवल 1
उत्तर देखें
तीनों प्रकार की तरंगें परावर्तित होती हैं, ऊर्जा ले जाती हैं और दाब डालती हैं, पर केवल विद्युत चुंबकीय तरंगें निर्वात में चल सकती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा ऊर्जा का मात्रक नहीं है?
- A.जूल
- B.वाट-घंटा
- C.न्यूटन-मीटर
- D.kg-मीटर/सेकंड²
उत्तर देखें
किलोग्राम-मीटर प्रति सेकंड² द्रव्यमान और त्वरण का गुणनफल है, यानी बल; यह न्यूटन है, ऊर्जा का मात्रक नहीं। ऊर्जा और कार्य की विमाएँ बल गुणा दूरी की होती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →इस्पात और लोहे को जंग से बचाने के लिए निम्नलिखित में से किस धातु की पतली परत चढ़ाई जाती है?
- A.मैग्नीशियम
- B.ज़िंक (जस्ता)
- C.ऐलुमिनियम
- D.लेड (सीसा)
उत्तर देखें
लोहे या इस्पात पर ज़िंक की पतली परत चढ़ाने को यशदलेपन (गैल्वनीकरण) कहते हैं और जंग से बचाने का यह सबसे आम तरीका है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एक विद्युत परिपथ में 10 Ω प्रतिरोध का एक तार प्रयुक्त है। यदि इस तार को खींचकर इसकी लंबाई मूल लंबाई की दोगुनी कर दी जाए, तो परिपथ में धारा हो जाएगी :
- A.अपने मूल मान की आधी।
- B.अपने मूल मान की दोगुनी।
- C.अपने मूल मान की एक-चौथाई।
- D.अपने मूल मान की चार गुनी।
उत्तर देखें
तार को खींचकर दोगुना लंबा करने से उसका प्रतिरोध चार गुना हो जाता है, इसलिए उसी वोल्टता पर धारा एक-चौथाई रह जाती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से किस वैज्ञानिक ने बताया कि परमाणु में इलेक्ट्रॉन विकिरण ऊर्जा उत्सर्जित किए बिना कुछ निश्चित स्थायी कक्षाओं में परिक्रमा कर सकता है?
- A.अर्नेस्ट रदरफ़ोर्ड
- B.जे. जे. थॉमसन
- C.नील्स बोर
- D.अल्बर्ट आइंस्टीन
उत्तर देखें
1913 के अपने परमाणु मॉडल में बोर ने बताया कि इलेक्ट्रॉन कुछ निश्चित कक्षाओं, जिन्हें स्थायी अवस्थाएँ कहा जाता है, में घूमते हैं और उनमें ऊर्जा विकिरित नहीं करते।
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