भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में, निम्नलिखित घटनाओं पर विचार कीजिए : 1. रॉयल इंडियन नेवी में विद्रोह 2. भारत छोड़ो आंदोलन का आरंभ 3. द्वितीय गोलमेज़ सम्मेलन उपर्युक्त घटनाओं का सही कालानुक्रम क्या है?
- A.1-2-3
- B.2-1-3
- C.3-2-1
- D.3-1-2
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C, 3-2-1। द्वितीय गोलमेज़ सम्मेलन 1931 में, भारत छोड़ो आंदोलन 1942 में और रॉयल इंडियन नेवी का विद्रोह 1946 में हुआ। गांधी-इरविन समझौते के बाद द्वितीय गोलमेज़ सम्मेलन सितंबर से दिसंबर 1931 तक लंदन में हुआ; गांधीजी कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में गए और सम्मेलन बिना सहमति के खत्म हुआ। भारत छोड़ो आंदोलन 8 अगस्त 1942 को बंबई में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अधिवेशन में 'करो या मरो' के नारे के साथ शुरू हुआ। नौसैनिकों का विद्रोह फरवरी 1946 में बंबई के एचएमआईएस तलवार से शुरू होकर दूसरे बंदरगाहों तक फैला, जिससे अंग्रेज़ों को समझ आ गया कि अब सेना पर भरोसा नहीं किया जा सकता। विकल्प A गलत है, क्योंकि वह सही क्रम को पूरी तरह उलट देता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि वह भारत छोड़ो को पहले और 1931 के सम्मेलन को अंत में रखता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि वह 1946 के विद्रोह को 1942 के आंदोलन से पहले रखता है। परीक्षा टिप: गोलमेज़ सम्मेलन 1930, 1931, 1932; भारत छोड़ो 1942; नौसेना विद्रोह 1946।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंभारतीय व्यापारियों की दक्षिण पूर्व एशिया की प्राचीन समुद्री यात्राओं की स्मृति में मनाई जाने वाली बालीयात्रा किस राज्य में होती है?
- A.ओडिशा
- B.पश्चिम बंगाल
- C.गुजरात
- D.तमिलनाडु
उत्तर देखें
बालीयात्रा, अर्थात बाली की यात्रा, कटक में महानदी के तट पर कार्तिक पूर्णिमा को मनाई जाती है, जब लोग कागज तथा केले की छाल की छोटी नावें तैराकर उन कलिंग व्यापारियों को स्मरण करते हैं जो बाली, जावा, सुमात्रा और बोर्नियो जाते थे; उसी दिन को बोइता बंदाण भी कहा…
पूरी व्याख्या पढ़ें →संगम युग में पांड्यों का मोती बंदरगाह कोरकई किस नदी पर स्थित था?
- A.कावेरी
- B.वैगै
- C.ताम्रपर्णी
- D.पालार
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कोरकई आज के थूथुकुडी जिले में ताम्रपर्णी के मुहाने के पास था और मन्नार की खाड़ी की पांड्य मोती मत्स्यकी का केंद्र था, जिसकी प्रशंसा पेरिप्लस तथा संगम कवियों ने की; समुद्र पीछे हट जाने से यह स्थल अब भीतर रह गया है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सुमात्रा के श्रीविजय साम्राज्य पर 1025 ईस्वी में नौसैनिक अभियान किस चोल शासक ने भेजा?
- A.राजराज प्रथम
- B.राजेंद्र प्रथम
- C.कुलोत्तुंग प्रथम
- D.विजयालय
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सही उत्तर है B, राजेंद्र प्रथम, जो राजराज प्रथम के पुत्र थे और जिन्होंने 1025 ईस्वी में मलक्का तथा सुंडा जलडमरूमध्य पर नियंत्रण रखने वाली व्यापारिक शक्ति श्रीविजय के विरुद्ध बंगाल की खाड़ी पार चोल बेड़ा भेजा तथा अपने अभिलेखों में इस अभियान और अर्जित उपाधियों का उल्लेख किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →तमिल स्रोतों में किस भारतीय निर्यात वस्तु को यवनप्रिय कहा गया है?
- A.मोती
- B.मलमल
- C.काली मिर्च
- D.चंदन
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संगम काव्य तथा बाद के संस्कृत ग्रंथ काली मिर्च को यवनप्रिय कहते हैं, अर्थात यवनों को प्रिय, और यवन शब्द उन यूनानियों तथा रोमनों के लिए प्रयुक्त होता था जो इसके लिए मलाबार बंदरगाहों पर उमड़ते थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →दक्षिण पश्चिम मानसूनी हवाओं से सीधे अरब सागर पार कर भारत आने का श्रेय किस यूनानी नाविक को दिया जाता है?
- A.मेगस्थनीज
- B.हिप्पालस
- C.टॉलेमी
- D.नियार्कस
उत्तर देखें
ईसा की पहली शताब्दी के मध्य के आसपास इस नाविक ने दक्षिण पश्चिम मानसून की चाल समझ ली, जिसके बाद जहाज तट से सटकर चलने के बदले लाल सागर के मुहाने से सीधे मलाबार तट पहुँचने लगे; यात्रा घटकर लगभग चालीस दिन की रह गई और भारत रोम व्यापार में…
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