भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते, जिसके लिए न्यूजीलैंड की संसद ने सितंबर 2026 में विधेयक पारित किया, पर हस्ताक्षर कब हुए थे?
- A.27 अप्रैल 2026, नई दिल्ली
- B.16 सितंबर 2026, वेलिंगटन
- C.12 जनवरी 2026, ऑकलैंड
- D.5 जुलाई 2026, नई दिल्ली
सही उत्तर
A. 27 अप्रैल 2026, नई दिल्ली
व्याख्या
सही उत्तर 27 अप्रैल 2026, नई दिल्ली है। समझौते पर इसी तिथि को भारतीय राजधानी में हस्ताक्षर हुए थे और इसे प्रभावी बनाने वाला विधेयक न्यूजीलैंड की संसद ने कई महीने बाद पारित किया। विकल्प B गलत है क्योंकि वह न्यूजीलैंड में विधेयक पारित होने की तिथि है, हस्ताक्षर की नहीं; परीक्षा में इन दोनों तिथियों को साथ रखकर पूछा जाता है ताकि यह जांचा जा सके कि अभ्यर्थी हस्ताक्षर और अनुसमर्थन का अंतर जानता है या नहीं। विकल्प C पूरी तरह काल्पनिक है। विकल्प D गलत है क्योंकि जुलाई 2026 में भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड यात्रा हुई थी, जो चार दशकों में पहली थी और जिसने रिश्तों को गति दी, पर वह हस्ताक्षर का अवसर नहीं था। हस्ताक्षर, विधेयक और समझौते के लागू होने, इन तीनों चरणों को अलग-अलग याद रखना ही इस प्रश्न का असली उद्देश्य है, क्योंकि तीनों की तिथियां अलग हैं।
पूरा लेख पढ़ें: न्यूजीलैंड ने भारत-न्यूजीलैंड एफटीए को लागू करने वाला कानून पारित किया
अभ्यास प्रश्न
भारत-न्यूजीलैंड एफटीए के तहत न्यूजीलैंड जाने वाले कितने भारतीय निर्यात को शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी?
- A.75 प्रतिशत
- B.90 प्रतिशत
- C.99 प्रतिशत
- D.100 प्रतिशत
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सही उत्तर: D. 100 प्रतिशत
व्याख्या
सही उत्तर 100 प्रतिशत है। समझौता लागू होने की तिथि से न्यूजीलैंड जाने वाली भारत की पूरी निर्यात टोकरी शुल्क-मुक्त हो जाएगी। जिन क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है उनमें वस्त्र एवं परिधान, चमड़ा एवं जूते, इंजीनियरिंग उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद शामिल हैं। विकल्प A, B और C गलत हैं क्योंकि इस तरह की आंशिक कवरेज कई अन्य व्यापार समझौतों में होती है, इस समझौते में नहीं; ये विकल्प इसलिए रखे गए हैं क्योंकि अभ्यर्थी अक्सर मान लेते हैं कि कोई समझौता पूरी कवरेज नहीं देता। बदले में न्यूजीलैंड को लकड़ी, ऊन, भेड़ के मांस और कच्चे चमड़े पर भारतीय बाजार में तरजीही पहुंच मिलेगी। यह समझौता सेवाओं, निवेश तथा पेशेवरों, छात्रों और युवाओं के आवागमन में भी नए अवसर खोलता है, इसलिए इसे केवल वस्तु व्यापार का समझौता मानना गलत होगा।
भारत-न्यूजीलैंड एफटीए भारत में कितने निवेश को सुगम बनाने का प्रावधान करता है?
- A.5 अरब अमेरिकी डॉलर
- B.20 अरब अमेरिकी डॉलर
- C.50 अरब अमेरिकी डॉलर
- D.100 अरब अमेरिकी डॉलर
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सही उत्तर: B. 20 अरब अमेरिकी डॉलर
व्याख्या
सही उत्तर 20 अरब अमेरिकी डॉलर है। शुल्क रियायतों के अलावा समझौते में भारत में इतने निवेश को सुगम बनाने की प्रतिबद्धता है और यह कृषि उत्पादकता, फार्मास्यूटिकल्स एवं चिकित्सा उपकरण, पारंपरिक चिकित्सा एवं आयुष, प्रौद्योगिकी तथा व्यापार सुगमता में द्विपक्षीय सहयोग मजबूत करता है। विकल्प A, C और D गलत हैं क्योंकि घोषणा में ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है; इन्हें सही आंकड़े के आसपास रखा गया है ताकि केवल अनुमान के भरोसे चलने वाला अभ्यर्थी चूक जाए। साथ के तथ्य भी याद रखें: समझौते पर 27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर हुए, न्यूजीलैंड में विधेयक 16 सितंबर 2026 को पारित हुआ, और दोनों पक्ष अब घरेलू प्रक्रियाएं पूरी कर रहे हैं। समझौते का लक्ष्य है कि दोनों देश इसे जल्द से जल्द लागू कर सकें, जिससे व्यापार और निवेश दोनों को गति मिले।
भारत सरकार की ओर से प्रथम अतिरिक्त प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किसने किए?
- A.वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल
- B.वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल
- C.विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन
- D.राजदूत अल्बर्टो गुआनी
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सही उत्तर: B. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल
व्याख्या
सही उत्तर वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल है, जिन्होंने भारत सरकार की ओर से हस्ताक्षर किए। विकल्प A गलत है और यही इस प्रश्न का जाल है: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल उसी दिन की खबर में हैं, पर उनकी भूमिका उरुग्वे के साथ मिलकर तरजीही व्यापार समझौते के विस्तार की वार्ता शुरू करने की घोषणा करने की थी, प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर करने की नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन मर्कोसुर की कार्यवाहक अध्यक्षता के नाते इस अवसर पर उपस्थित रहे और उन्होंने हस्ताक्षर स्वयं नहीं किए। विकल्प D दूसरे ढंग से गलत है: भारत में उरुग्वे के राजदूत अल्बर्टो गुआनी ने हस्ताक्षर तो किए, पर मर्कोसुर पक्ष की ओर से, भारत की ओर से नहीं, और उनके साथ पैराग्वे के राजदूत फ्लेमिंग राउल डुआर्टे रामोस भी थे। समारोह में अर्जेंटीना और ब्राजील के दूतावासों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
भारत और मर्कोसुर के बीच हस्ताक्षरित प्रथम अतिरिक्त प्रोटोकॉल मुख्य रूप से किससे संबंधित है?
- A.इलेक्ट्रॉनिक मूल प्रमाणपत्रों की स्वीकार्यता
- B.कृषि उत्पादों पर सभी शुल्क हटाना
- C.द्विपक्षीय व्यापार के लिए साझा मुद्रा
- D.शैक्षणिक डिग्रियों की पारस्परिक मान्यता
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सही उत्तर: A. इलेक्ट्रॉनिक मूल प्रमाणपत्रों की स्वीकार्यता
व्याख्या
सही उत्तर इलेक्ट्रॉनिक मूल प्रमाणपत्रों की स्वीकार्यता है। प्रोटोकॉल में प्रावधान है कि इलेक्ट्रॉनिक रूप में जारी मूल प्रमाणपत्र की कानूनी वैधता और मूल्य कागज पर जारी प्रमाणपत्र के समान होगा, बशर्ते उसे हर पक्ष के अपने घरेलू कानून के अनुसार अधिकृत संस्थाओं और अधिकारियों द्वारा जारी तथा इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षरित किया गया हो। यह काम तरजीही व्यापार समझौते के परिशिष्ट III के अनुच्छेद 16 में संशोधन के जरिए किया गया है, जिसमें मूल नियमावली रखी गई है, और इससे प्रमाणपत्र जारी करने तथा जांचने की लागत और समय घटने की उम्मीद है। विकल्प B गलत है, क्योंकि प्रोटोकॉल शुल्क दरों को छूता ही नहीं; रियायतें भारत की ओर से 450 और मर्कोसुर की ओर से 452 टैरिफ लाइनों पर बनी हुई हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि किसी मुद्रा व्यवस्था की घोषणा नहीं हुई। विकल्प D गलत है, क्योंकि यह व्यापार दस्तावेज शिक्षा से जुड़ा नहीं है।
भारत-मर्कोसुर तरजीही व्यापार समझौता कब लागू हुआ था?
- A.25 जनवरी 2004
- B.1 जून 2009
- C.27 नवंबर 2025
- D.9 अप्रैल 2026
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1 जून 2009
व्याख्या
सही उत्तर 1 जून 2009 है। यहां अभ्यर्थियों को दो तिथियां अलग-अलग याद रखनी होंगी, क्योंकि विज्ञप्ति में दोनों एक ही वाक्य में आती हैं। विकल्प A यानी 25 जनवरी 2004 वह तिथि है जब तरजीही व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे, और हस्ताक्षर से लागू होने के बीच पांच वर्ष से अधिक का अंतर रहा। विकल्प C गलत है, क्योंकि 27 नवंबर 2025 को समझौते की संयुक्त प्रशासनिक समिति की चौथी बैठक हुई थी, जिसमें दोनों पक्षों ने डिजिटल मूल प्रमाणपत्रों की अनुमति देने के विचार का समर्थन किया। विकल्प D गलत है, क्योंकि 9 अप्रैल 2026 को इसी समिति की पांचवीं बैठक हुई, जिसमें अतिरिक्त प्रोटोकॉल का प्रस्ताव आपसी सहमति से स्वीकार हुआ। चारों तिथियों को एक क्रम में पढ़ना आसान रहता है: 2004 में हस्ताक्षर, 2009 में लागू, 2025 में समर्थन, 2026 में प्रस्ताव स्वीकार और सितंबर 2026 में प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर।