भारत में राष्ट्रीय आंदोलन के आरंभिक चरण के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. फ़िरोज़शाह मेहता, बदरुद्दीन तैयबजी और अन्य ने बॉम्बे प्रेसीडेंसी एसोसिएशन बनाया। 2. सुरेंद्रनाथ बनर्जी और उनके समूह ने कलकत्ता में इंडियन नेशनल कॉन्फ्रेंस की योजना बनाई। 3. एलन ऑक्टेवियन ह्यूम ने ऊपर के संगठनों के प्रतिद्वंद्वी के रूप में एक अखिल भारतीय संस्था बनाने का निर्णय लिया, ताकि गरीब और हाशिये पर पड़े भारतीयों की शिकायतों को आवाज़ मिल सके। ऊपर दिए गए कथनों में से कितने सही हैं?
- A.1
- B.2
- C.सभी
- D.कोई नहीं
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, 2। कथन 1 और 2 सही हैं, पर कथन 3 सही नहीं है। कथन 1 सही है: बॉम्बे प्रेसीडेंसी एसोसिएशन की स्थापना जनवरी 1885 में फ़िरोज़शाह मेहता, बदरुद्दीन तैयबजी और के. टी. तेलंग ने की थी, और इसी के सदस्यों ने उसी दिसंबर बंबई में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पहले अधिवेशन की मेज़बानी की। कथन 2 सही है: सुरेंद्रनाथ बनर्जी और आनंदमोहन बोस ने कलकत्ता की इंडियन एसोसिएशन के माध्यम से 1883 में कलकत्ता में इंडियन नेशनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की और उसका दूसरा अधिवेशन दिसंबर 1885 में हुआ, ठीक तब जब बंबई में कांग्रेस बैठी; बाद में यह कॉन्फ्रेंस कांग्रेस में मिल गई। कथन 3 गलत है, क्योंकि ह्यूम ने कांग्रेस को इन संस्थाओं के प्रतिद्वंद्वी के रूप में नहीं बनाया। उन्होंने इन्हीं संगठनों के नेताओं के साथ काम किया और कांग्रेस शिक्षित भारतीयों का एक राष्ट्रीय मंच बनाने के उनके प्रयासों से ही निकली; यह गरीबों और हाशिये के लोगों की शिकायतें उठाने के लिए नहीं बनी थी। इसलिए विकल्प A (केवल एक), विकल्प C (तीनों) और विकल्प D (कोई नहीं) गलत हैं। परीक्षा टिप: इंडियन नेशनल कॉन्फ्रेंस 1883 (सुरेंद्रनाथ बनर्जी); बॉम्बे प्रेसीडेंसी एसोसिएशन और कांग्रेस, दोनों 1885।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंगांधीजी के सत्याग्रह दर्शन पर आधारित निम्नलिखित में से किस संघर्ष में औद्योगिक श्रमिक वर्ग शामिल था?
- A.चंपारण
- B.खेड़ा
- C.अहमदाबाद
- D.बारदोली
उत्तर देखें
1918 की अहमदाबाद मिल हड़ताल औद्योगिक मजदूरों के लिए गांधीजी का सत्याग्रह था। सूती मिल मालिकों और मजदूरों के बीच प्लेग बोनस को लेकर विवाद हुआ, जिसे मालिक वापस लेना चाहते थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा हड़प्पा स्थल शंख/सीपी की वस्तुएँ बनाने का विशिष्ट केंद्र था?
- A.लोथल
- B.बालाकोट
- C.आमरी
- D.कोट दीजी
उत्तर देखें
गुजरात के नागेश्वर के साथ बालाकोट को शंख की वस्तुएँ बनाने का विशिष्ट केंद्र बताया जाता है। दोनों बस्तियाँ समुद्र तट के पास थीं, जहाँ शंख आसानी से मिल जाते थे, और वहाँ खुदाई में शंख का भारी कचरा, अधूरे टुकड़े और तैयार वस्तुएँ मिली हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्राचीन भारत के भारत-रोमन व्यापार के संदर्भ में, 'ऑरेई' शब्द किसे दर्शाता है?
- A.इत्र
- B.मदिरा
- C.काली मिर्च
- D.सिक्के
उत्तर देखें
ऑरेई (एकवचन ऑरियस) रोमन साम्राज्य के सोने के सिक्के थे, जो भारतीय वस्तुओं के बदले बड़ी संख्या में भारत आए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →किस यूरोपीय यात्री ने यह टिप्पणी की थी, "एक हिंदू स्त्री अकेले कहीं भी जा सकती है, सबसे भीड़ भरी जगहों पर भी, और उसे आवारा लोगों की अशिष्ट नजरों और फब्तियों का कभी डर नहीं होता"?
- A.फ्रांस्वा बर्नियर
- B.ज्यां-बैप्टिस्ट टैवर्नियर
- C.टॉमस रो
- D.एब्बे जे. ए. दुबॉय
उत्तर देखें
यह टिप्पणी फ्रांसीसी कैथोलिक मिशनरी एब्बे ज्यां-आंत्वान दुबॉय की है, जो 1792 से 1823 तक दक्षिण भारत में, अधिकतर मैसूर में, रहे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अकबर के दरबार के निम्नलिखित विद्वानों में से किसने भास्कराचार्य की लीलावती का फारसी में अनुवाद किया?
- A.अबुल फजल
- B.फैजी
- C.फतहुल्ला शीराजी
- D.अताउल्ला रशीदी
उत्तर देखें
अकबर के राजकवि और अबुल फजल के बड़े भाई फैजी ने 1587 में लीलावती का फारसी में अनुवाद किया। लीलावती गणितज्ञ भास्कराचार्य (भास्कर द्वितीय) द्वारा बारहवीं शताब्दी में लिखे सिद्धांत शिरोमणि का अंकगणित वाला भाग है, जिसमें संख्याएं, भिन्न, श्रेणियां और मापन आते हैं।
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