भारत में दल-बदल विरोधी कानून के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. कानून यह निर्दिष्ट करता है कि कोई मनोनीत विधायक सदन में नियुक्त होने के छह महीने के भीतर किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं हो सकता। 2. कानून ऐसी कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं करता जिसके भीतर पीठासीन अधिकारी को दल-बदल के मामले का निर्णय करना हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1, न ही 2
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, केवल 2। दसवीं अनुसूची मनोनीत सदस्य को छह महीने के भीतर दल में शामिल होने देती है, और पीठासीन अधिकारी के निर्णय के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं करती।
दल-बदल विरोधी कानून दसवीं अनुसूची है, जिसे 52वें संशोधन अधिनियम, 1985 ने जोड़ा। इसके तहत मनोनीत सदस्य तब अयोग्य होता है जब वह सीट ग्रहण करने के छह महीने बीतने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल हो; इन छह महीनों के भीतर शामिल होना अनुमत है। अयोग्यता के प्रश्न अध्यक्ष या सभापति तय करते हैं, पर अनुसूची कोई समय-सीमा तय नहीं करती, जिससे लंबी देरी होती रही है। केशम मेघचंद्र सिंह मामले (2020) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसी याचिकाएँ सामान्यतः तीन महीने में निपटाई जानी चाहिए, फिर भी कानून समय पर मौन है।
A गलत है: कथन 1 नियम को उलट देता है; रोक छह महीने के बाद लागू होती है, उनके भीतर नहीं।
C गलत है: केवल कथन 2 सही है।
D गलत है: कथन 2 सही कहता है कि कानून में कोई समय-सीमा नहीं है।
परीक्षा टिप: दसवीं अनुसूची (52वाँ संशोधन, 1985): मनोनीत सदस्य 6 महीने के भीतर दल में शामिल हो सकता है; अध्यक्ष के लिए कोई समय-सीमा नहीं।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.भारत का सर्वोच्च न्यायालय एक अभिलेख न्यायालय है।
- B.भारत में उच्च न्यायालय अभिलेख न्यायालय हैं।
- C.भारत में अधीनस्थ न्यायालय अभिलेख न्यायालय हैं।
- D.भारत में सभी न्यायालय अभिलेख न्यायालय नहीं हैं।
उत्तर देखें
संविधान के अनुसार केवल सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय अभिलेख न्यायालय हैं; अधीनस्थ न्यायालय नहीं। अनुच्छेद 129 सर्वोच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय घोषित करता है और अनुच्छेद 215 हर उच्च न्यायालय को।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से किस विद्वान ने भारत के संविधान को एक 'निर्बाध जाल' (सीमलेस वेब) के रूप में परिकल्पित किया है?
- A.एम. वी. पायली
- B.डी. डी. बसु
- C.ग्रैनविल ऑस्टिन
- D.सुभाष कश्यप
उत्तर देखें
इस अमेरिकी इतिहासकार ने भारतीय संविधान को तीन घनिष्ठ रूप से जुड़े सूत्रों का "सीमलेस वेब" (निर्बाध जाल) कहा था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत की संसद के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सी संसदीय समिति इस बात की जाँच कर सदन को प्रतिवेदन देती है कि संविधान द्वारा प्रदत्त या संसद द्वारा प्रत्यायोजित विनियम, नियम, उपनियम, उपविधियाँ आदि बनाने की शक्तियों का कार्यपालिका द्वारा ऐसे प्रत्यायोजन की सीमा के भीतर उचित रूप से प्रयोग किया जा रहा है या नहीं?
- A.सरकारी आश्वासनों संबंधी समिति
- B.अधीनस्थ विधान संबंधी समिति
- C.नियम समिति
- D.कार्य मंत्रणा समिति
उत्तर देखें
यह समिति जाँचती है कि प्रत्यायोजित शक्तियों के अंतर्गत कार्यपालिका द्वारा बनाए गए नियम, विनियम और उपविधियाँ संसद द्वारा तय सीमाओं के भीतर हैं या नहीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →लोकसभा के उपाध्यक्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
1. लोकसभा की प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन नियमों के अनुसार उपाध्यक्ष का निर्वाचन उस तिथि को होगा, जो अध्यक्ष नियत करे।
2. यह अनिवार्य प्रावधान है कि लोकसभा उपाध्यक्ष के रूप में निर्वाचित उम्मीदवार या तो प्रमुख विपक्षी दल से हो या सत्तारूढ़ दल से।
3. सदन की बैठक की अध्यक्षता करते समय उपाध्यक्ष को अध्यक्ष के समान शक्ति होती है और उसके निर्णयों के विरुद्ध कोई अपील नहीं होती।
4. उपाध्यक्ष की नियुक्ति के संबंध में सुस्थापित संसदीय प्रथा यह है कि प्रस्ताव अध्यक्ष द्वारा रखा जाता है और प्रधानमंत्री द्वारा उसका विधिवत समर्थन किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- A.केवल 1 और 3
- B.1, 2 और 3
- C.केवल 3 और 4
- D.केवल 2 और 4
उत्तर देखें
उपाध्यक्ष के निर्वाचन की तिथि अध्यक्ष तय करता है, और पीठासीन उपाध्यक्ष को अध्यक्ष की पूरी शक्तियाँ होती हैं; कथन 2 और 4 ऐसे नियम बताते हैं जो हैं ही नहीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में न्यायालयों द्वारा जारी की जाने वाली रिटों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
1. परमादेश (मैंडमस) किसी निजी संगठन के विरुद्ध तब तक जारी नहीं होगा, जब तक उसे कोई लोक कर्तव्य न सौंपा गया हो।
2. परमादेश किसी कंपनी के विरुद्ध जारी नहीं होगा, भले ही वह सरकारी कंपनी हो।
3. कोई भी लोकहित-चिंतक व्यक्ति अधिकार-पृच्छा (क्वो वारंटो) रिट पाने के लिए न्यायालय में याचिका दायर कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- A.केवल 1 और 2
- B.केवल 2 और 3
- C.केवल 1 और 3
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
परमादेश हर उस संस्था पर लागू होता है जिस पर कोई लोक कर्तव्य है, सरकारी कंपनियों पर भी, और अधिकार-पृच्छा की माँग कोई भी इच्छुक व्यक्ति कर सकता है, केवल पीड़ित नहीं।
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